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  "title": "हरितालिका तीज व्रत में भूलकर भी न करें ये गलतियां, ज्योतिषाचार्य ने बताए पूजा और नियमों के जरूरी विधान",
  "summary": "हरितालिका तीज पर अखंड सौभाग्य के लिए रखे जाने वाले निर्जला व्रत के कड़े नियम होते हैं, जिनकी अनदेखी करने पर पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता।",
  "content": "भाद्रपद मास में पड़ने वाले पावन पर्व हरितालिका तीज को लेकर सुहागिनों और कुंवारी कन्याओं में विशेष उत्साह देखा जाता है। इस वर्ष 26 अगस्त को हरितालिका तीज का महापर्व मनाया जाएगा। इस पावन अवसर पर विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य की कामना करते हुए पूरे विधि विधान से देवाधिदेव महादेव और माता पार्वती की उपासना करती हैं। वहीं दूसरी ओर अविवाहित युवतियां भी मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए इस दिन कठोर निर्जला उपवास का संकल्प लेती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सच्चे मन और श्रद्धा भाव से की गई शिव-पार्वती की आराधना व्रती की हर मनोकामना को पूर्ण करती है। हालांकि इस व्रत के नियम बेहद कठिन माने जाते हैं, और जाने अनजाने में हुई छोटी सी भूल भी संपूर्ण तपस्या के पुण्य को निष्फल कर सकती है।\n\nसंकल्प और निर्जला उपवास के कड़े नियम\nजमुई के जाने माने ज्योतिषाचार्य पंडित शत्रुघ्न झा के अनुसार हरितालिका तीज के पावन दिन व्रत का संकल्प लेने वाली महिलाओं को विशेष आचरण संहिता का पालन करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दिन व्रती को किसी भी परिस्थिति में असत्य भाषण यानी झूठ बोलने से बचना चाहिए और अपने संकल्प को बीच में अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए। यदि किसी महिला को पहले से यह संशय हो कि वह शारीरिक रूप से इस कठिन व्रत को पूरा करने में समर्थ नहीं हो पाएगी, तो उसे इस व्रत की शुरुआत ही नहीं करनी चाहिए। लेकिन एक बार जब निर्जला उपवास का विधिवत संकल्प ले लिया जाए, तो फिर उसे बीच में खंडित नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि ज्योतिषाचार्य ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई महिला गंभीर रूप से अस्वस्थ है या किसी अपरिहार्य विषम परिस्थिति में फंसी है, तो ऐसी दशा में छूट का विधान मान्य होता है।\n\nखानपान और पवित्रता से जुड़ी वर्जनाएं\nधार्मिक परंपरा के तहत इस दिन अन्न और जल दोनों का पूरी तरह त्याग किया जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित शत्रुघ्न झा बताते हैं कि व्रत के दौरान बीच में पानी की एक बूंद ग्रहण करना या किसी प्रकार के अन्न का सेवन करना पूरे अनुष्ठान को अपूर्ण बना देता है, जिससे व्रती को उस तपस्या का कोई आध्यात्मिक फल प्राप्त नहीं होता। इसके साथ ही शारीरिक और मानसिक शुचिता का ध्यान रखना अनिवार्य है। व्रत की पूरी अवधि में महिलाओं को किसी भी तरह की अपवित्र वस्तु का स्पर्श नहीं करना चाहिए। पूजा स्थल से लेकर स्वयं के वस्त्रों तक पूर्ण शुद्धता बनाए रखना आवश्यक माना गया है ताकि साधना में किसी प्रकार का दोष न आए।\n\nक्रोध, कलह और गृह क्लेश से दूरी\nतीज के पावन दिन केवल भूखे प्यासे रहना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि मन के विकारों पर नियंत्रण पाना भी उतना ही आवश्यक है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार हरितालिका तीज के दिन परिवार में किसी भी प्रकार का वाद विवाद या झगड़ा नहीं होना चाहिए। विशेष रूप से पति और पत्नी के बीच होने वाली कहासुनी, तकरार या किसी पर भी किया गया क्रोध इस व्रत के सकारात्मक प्रभाव को पूरी तरह नष्ट कर देता है। शांत चित्त, परस्पर प्रेम और सौहार्दपूर्ण वातावरण में रहकर ही की गई पूजा फलित होती है।\n\nश्रृंगार, स्वच्छता और रात्रि जागरण का महत्व\nइस पावन पर्व पर सुहागिनों के लिए श्रृंगार का विशेष महत्व बताया गया है। ज्योतिषाचार्य पंडित शत्रुघ्न झा के मुताबिक तीज के दिन महिलाओं को अपने बाल कटवाने या नाखून तराशने की सख्त मनाही होती है। इसके अलावा किसी भी सुहाग सामग्री या श्रृंगार प्रसाधन का त्याग करना अशुभ माना जाता है। व्रती महिलाओं को इस दिन पूर्ण सोलह श्रृंगार करके ही महादेव और मां गौरी की पूजा में बैठना चाहिए। एक अन्य महत्वपूर्ण नियम यह है कि व्रत वाले दिन महिलाओं को दिन में अथवा रात में सोने से बचना चाहिए। इस रात शयन करने के बजाय पूरी रात जागरण करने का विधान है, जिसमें भगवान शिव और माता पार्वती के भजनों का कीर्तन करते हुए उनका स्मरण किया जाता है। इन सभी स्थापित नियमों की उपेक्षा करने पर व्रत अधूरा रह जाता है और दांपत्य जीवन व परिवार को उसका वांछित पुण्य नहीं मिल पाता।\n\nइसका आप पर असर\nहरितालिका तीज का व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए नियमों की स्पष्ट जानकारी अनुष्ठान को निर्विघ्न संपन्न कराने में मददगार है।\n\n• तैयारी का नियम: व्रत शुरू करने से पहले अपनी शारीरिक क्षमता का सही आकलन करें। यदि कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या है तो निर्जला उपवास के बजाय नियमों में छूट का विचार करें।\n• खानपान की सावधानी: संकल्प लेने के बाद जल अथवा अन्न ग्रहण करने से बचें। अनजाने में भी कोई खाद्य पदार्थ लेने से व्रत अधूरा माना जाता है।\n• पारिवारिक माहौल: व्रत के दिन घर में किसी भी प्रकार के विवाद और क्रोध से दूर रहें। मन को शांत रखकर ही पूजा का संपूर्ण पुण्य प्राप्त किया जा सकता है।\n• श्रृंगार और स्वच्छता: इस दिन नाखून और बाल काटने जैसी गतिविधियों से पूरी तरह परहेज करें। पूजा के समय पारंपरिक श्रृंगार करके ही अनुष्ठान में बैठें।\n• रात्रि जागरण: रात के समय सोने के बजाय भजन कीर्तन और जागरण की व्यवस्था रखें। परिवार के साथ मिलकर शिव-पार्वती की स्तुति करें।\n\nऐसा क्यों हुआ\nहरितालिका तीज पर कड़े नियमों और वर्जनाओं का पालन सदियों पुरानी धार्मिक मान्यताओं और त्याग की भावना पर आधारित है।\n\n• कठोर तपस्या का प्रतीक: माता पार्वती द्वारा भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए किए गए निस्वार्थ और कठिन तप की स्मृति में यह व्रत रखा जाता है। यही कारण है कि इसमें निर्जला रहकर पूर्ण समर्पण प्रदर्शित किया जाता है।\n• मन और इंद्रियों का संयम: उपवास के दौरान क्रोध, झूठ और गृह क्लेश से बचने का नियम आत्मनियंत्रण स्थापित करने के लिए बनाया गया है। धार्मिक मान्यता है कि मन की शुद्धि के बिना केवल भूखे रहना साधना नहीं कहलाता।\n• पारंपरिक मर्यादाएं: बाल काटना, नाखून तराशना अथवा श्रृंगार विहीन रहना भारतीय संस्कृति में मांगलिक अवसरों पर वर्जित माना गया है। तीज सौभाग्य का उत्सव होने के कारण इसमें पूर्ण सोलह श्रृंगार को अनिवार्य माना गया है।\n• रात्रि जागरण का उद्देश्य: पूरी रात जागकर महादेव और मां गौरी की स्तुति करने का उद्देश्य चेतना को परमात्मा से जोड़े रखना है। इससे साधक की एकाग्रता बनी रहती है और साधना में आलस्य का प्रवेश नहीं होता।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. हरितालिका तीज 2025 में किस तारीख को मनाई जाएगी?\nहरितालिका तीज का पावन पर्व 26 अगस्त को मनाया जाएगा।\n\n2. यह व्रत किनके लिए विशेष फलदायी माना जाता है?\nयह व्रत सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए और अविवाहित लड़कियां मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए रखती हैं।\n\n3. क्या हरितालिका तीज पर पानी पिया जा सकता है?\nनहीं, यह निर्जला उपवास होता है और बीच में पानी या अन्न लेने से व्रत अधूरा माना जाता है।\n\n4. किन परिस्थितियों में व्रत के नियमों में छूट मिल सकती है?\nयदि कोई महिला अत्यधिक बीमार है या विषम परिस्थितियों में है, तो उसे नियमों में छूट की अनुमति होती है।\n\n5. तीज के दिन किन दैनिक कार्यों को करने की सख्त मनाही है?\nइस दिन बाल कटवाना, नाखून काटना, अपवित्र वस्तुएं छूना, झूठ बोलना और सोना वर्जित माना गया है।\n\n6. व्रत के दौरान रात्रि में क्या करने का विधान है?\nइस दिन रात में सोने के बजाय रात्रि जागरण करके भगवान शिव और माता पार्वती का भजन कीर्तन किया जाता है।",
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  "category": "अध्यात्म",
  "publishedAt": "2026-10-17",
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