करवा चौथ पर चंद्र देव को जल अर्पित करते वक्त जपें ये खास मंत्र, दांपत्य जीवन में बनी रहेगी मिठास करवा चौथ के पावन पर्व पर रात में चांद को अर्घ्य देने के साथ ही निर्जला उपवास पूरा होता है। इस दौरान शास्त्रों में बताए गए विशिष्ट मंत्रों का स्मरण करने से परिवार में सुख-समृद्धि और पति की दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है। भारतीय संस्कृति में सुहागिन स्त्रियों के लिए करवा चौथ के व्रत का महत्व अत्यंत गहरा और आध्यात्मिक है। अखंड सौभाग्य की कामना के साथ रखा जाने वाला यह उपवास महिलाओं के त्याग, श्रद्धा और अपने जीवनसाथी के प्रति अगाध प्रेम को दर्शाता है। इस विशेष अवसर पर महिलाएं सूर्योदय के साथ ही निर्जला व्रत का संकल्प लेती हैं और पूरे दिन अन्न अथवा जल का एक कण भी ग्रहण नहीं करतीं। इस कठोर साधना का समापन केवल तभी संभव होता है जब गगन में चंद्र दर्शन होते हैं, जिसके बाद पूरे विधि-विधान से चंद्र देवता की वंदना कर उन्हें अर्घ्य अर्पित किया जाता है। छलनी से दर्शन और चंद्र वंदना का धार्मिक महत्व पूरे दिन के उपवास के बाद सबसे भावुक और श्रद्धापूर्ण क्षण रात्रि के समय आता है, जब आकाश में चांद अपनी चांदनी बिखेरता है। पूजन की थाली सजाकर महिलाएं पारंपरिक छलनी की ओट से पहले चांद को निहारती हैं और फिर उसी के जरिए अपने जीवनसाथी का मुखड़ा देखती हैं। मान्यता है कि चंद्र देव को जल चढ़ाने से यह कठिन उपवास संपूर्णता प्राप्त करता है। चंद्रमा की सौम्यता और शीतलता वैवाहिक रिश्ते को शीतलता प्रदान करती है तथा चंद्र देव के आशीर्वाद से पति के जीवन में आरोग्य और लंबी उम्र की प्राप्ति होती है। अर्घ्य के समय जपे जाने वाले प्रमुख मंत्र और उनका भाव जल अर्पण करते समय श्रद्धालु महिलाएं अपने मन में चंद्र देव के नामों का स्मरण करती हैं। यदि कोई संक्षिप्त और प्रभावशाली मंत्र पढ़ना चाहे, तो लोटे से जल गिराते समय “ॐ सोमाय नमः” अथवा “ओम् चन्द्राय नमः” का उच्चारण कर सकता है। इस पावन ध्वनि का मूल भाव यही है कि हे चंद्र देव, आपके पावन स्वरूप को नमन है, आप जीवनसाथी को लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और जीवन में प्रसन्नता का उपहार प्रदान करें। इसके अलावा कई परिवारों और क्षेत्रों में विस्तृत श्लोक का उच्चारण करने की समृद्ध परंपरा भी देखने को मिलती है “नमः शशाङ्काय शान्ताय शीतांशु प्रभवे नमः नमस्तेऽस्तु जगन्नाथ सुरराज नमोऽस्तु ते” इस सुंदर श्लोक का तात्पर्य है कि शांत प्रकृति और शीतलता की आभा बिखेरने वाले हे चंद्र देव, आपको कोटि-कोटि प्रणाम है। आप संपूर्ण जगत के पालनकर्ता और देवों के बीच तेजस्वी हैं, आपकी असीम कृपा से हमारे गृहस्थ जीवन और परिवार में शांति, सुरक्षा और समृद्धि सदैव स्थापित रहे। समर्पण, विश्वास और व्रत खोलने की परंपरा मंत्रोच्चार के साथ जल की धारा अर्पित करते समय महिलाएं अपने गृहस्थ जीवन के कल्याण और मधुरता की प्रार्थना करती हैं। अर्घ्य की यह विधि पूरी होते ही पति अपनी पत्नी को जल पिलाकर और मिष्ठान खिलाकर उनका यह कठिन निर्जला उपवास समाप्त करवाते हैं। यह परंपरा मात्र एक औपचारिक अनुष्ठान भर नहीं है, बल्कि पति-पत्नी के मध्य आपसी सम्मान, अटूट विश्वास और भावनात्मक जुड़ाव का सजीव प्रमाण है। सदियों से चली आ रही यह रीत आज भी आधुनिक समय में भारतीय संस्कृति के सौंदर्य और निष्ठा को मजबूती से जीवित रखे हुए है। इसका आप पर असर यह जानकारी करवा चौथ का निर्जला व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए पूजा विधान को सरल और त्रुटिरहित बनाती है। • पूजा की तैयारी: अर्घ्य के समय सही मंत्रों का ज्ञान होने से अंतिम क्षणों में कोई दुविधा नहीं रहती। महिलाएं पूजा की थाली तैयार करते समय इन मंत्रों का स्मरण कर सकती हैं। • आध्यात्मिक शांति: मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान से जल चढ़ाने से व्रती को मानसिक संतुष्टि और साधना की पूर्णता का अनुभव होता है। इससे अनुष्ठान की गरिमा और एकाग्रता बढ़ती है। • पारिवारिक संवाद: अनुष्ठान के दौरान दंपती मिलकर रस्म पूरी करते हैं, जिससे आपसी रिश्ते में भावनात्मक निकटता और विश्वास मजबूत होता है। • परंपरा का संरक्षण: सही श्लोकों और मंत्रों के अर्थ जानने से नई पीढ़ी की महिलाएं भी सांस्कृतिक विरासत को शुद्ध रूप में आगे बढ़ा पाती हैं। ऐसा क्यों हुआ करवा चौथ के दिन चांद को अर्घ्य देने और विशेष मंत्र जपने का विधान सदियों पुरानी मान्यताओं और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। • चंद्रमा की सौम्य प्रकृति: ज्योतिष और सनातन परंपरा में चंद्रमा को मन, शीतलता और दांपत्य सौहार्द का कारक माना जाता है। इसी कारण कठिन व्रत की समाप्ति पर उनकी पूजा कर जीवन में शांति मांगी जाती है। • व्रत की पूर्णता: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सूर्योदय से प्रारंभ हुआ निर्जला उपवास तब तक अधूरा रहता है जब तक प्रत्यक्ष देवता के रूप में चंद्रमा का पूजन न हो। जल अर्पण इसी संकल्प की पूर्णाहुति माना जाता है। • वैदिक मंत्रों का महत्व: अर्घ्य देते समय मंत्रोच्चारण करने से ध्वनि तरंगों और एकाग्रता के माध्यम से ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। यह परंपरा प्राचीन धर्मग्रंथों के आचार-नियमों से प्रेरित है। सवाल-जवाब 1. करवा चौथ के दिन महिलाएं किस समय अपना व्रत खोलती हैं? महिलाएं रात में आकाश में चांद निकलने के बाद विधिवत पूजा और अर्घ्य अर्पित करके अपना व्रत खोलती हैं। 2. चांद को जल अर्पित करते समय कौन सा संक्षिप्त मंत्र जपा जा सकता है? अर्घ्य देते समय “ॐ सोमाय नमः” अथवा “ओम् चन्द्राय नमः” का उच्चारण किया जा सकता है। 3. चंद्र देव को अर्घ्य देने के लिए कौन सा विस्तृत श्लोक बोला जाता है? “नमः शशाङ्काय शान्ताय शीतांशु प्रभवे नमः नमस्तेऽस्तु जगन्नाथ सुरराज नमोऽस्तु ते” श्लोक का जाप किया जाता है। 4. छलनी से चांद देखने के पीछे क्या मान्यता जुड़ी है? महिलाएं छलनी की ओट से चांद और अपने पति का चेहरा देखकर आशीर्वाद मांगती हैं, जिससे रिश्ते में प्रेम और पति की आयु बढ़ती है। https://trendkia.com/spirituality/karwa-chauth-par-chandra-dev-ko-jal-arpit-karte-vaqt-japen-ye-khas-mantra-43571 TrendKia — Har trend, sabse pehle.