माघ शुक्ल पक्ष में इस तारीख को रखा जाएगा जया एकादशी व्रत, बन रहे चार दुर्लभ शुभ योग माघ महीने के शुक्ल पक्ष की जया एकादशी 29 जनवरी को उदया तिथि के अनुसार मनाई जाएगी। इस पावन अवसर पर इंद्र, रवि, भद्रावास और शिववास जैसे चार दुर्लभ योग बन रहे हैं। सनातन परंपरा में एकादशी के उपवास को आत्मशुद्धि और प्रभु भक्ति का सबसे श्रेष्ठ माध्यम माना गया है। पूरे वर्ष में पड़ने वाली चौबीस एकादशियों में माघ मास के शुक्ल पक्ष की तिथि विशेष स्थान रखती है, जिसे जया एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह पावन तिथि साधक के जीवन में सकारात्मकता का संचार करती है और पूर्व जन्मों के अनिष्टकारी बंधनों अथवा पिशाच योनि के भय से भी मुक्ति दिलाती है। इस वर्ष इस व्रत की सही तारीख और पूजन मुहूर्त को लेकर पंचांग गणनाएं स्पष्ट विवरण प्रस्तुत करती हैं। उदया तिथि के आधार पर तय हुआ व्रत का दिन पंचांग गणना के जानकारों के मुताबिक ऋषिकेश पंचांग के अनुसार माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 28 जनवरी को शाम 4 बजकर 34 मिनट पर हो रहा है। इसके बाद यह तिथि अगले दिन यानी 29 जनवरी को देर रात 1 बजकर 56 मिनट पर समाप्त होगी। चूंकि सनातन धर्म में सूर्योदय कालीन तिथि यानी उदया तिथि को व्रत-त्योहारों के संकल्प के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है, इसलिए जया एकादशी का उपवास 29 जनवरी, दिन बुधवार को रखा जाएगा। इस दिन श्रद्धालु पूरे नियम और निष्ठा के साथ भगवान विष्णु की पूजा और व्रत कर सकते हैं। चार अत्यंत दुर्लभ योगों का अद्भुत संयोग देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुदगल के अनुसार इस बार की जया एकादशी अत्यधिक फलदायी और विशेष रहने वाली है। इस दिन एक साथ चार पवित्र योगों का निर्माण हो रहा है, जिसमें इंद्र योग, रवि योग, भद्रावास योग और शिववास योग शामिल हैं। इन विशिष्ट योगों के मिलने से पूजा-पाठ और साधना का फल कई गुना बढ़ जाता है। ऋषिकेश पंचांग के आधार पर पूजन के लिए दिनभर में दो सर्वश्रेष्ठ समय निर्धारित किए गए हैं। पहला शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 11 मिनट से लेकर 8 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। इसके अतिरिक्त जो श्रद्धालु दोपहर में उपासना करना चाहते हैं, उनके लिए सुबह 11 बजकर 14 मिनट से दोपहर 1 बजकर 55 मिनट तक का समय विशेष कल्याणकारी बताया गया है। मोक्ष और पाप मुक्ति से जुड़ा है धार्मिक महत्व जया एकादशी के व्रत का महात्म्य अत्यंत व्यापक और कल्याणकारी माना गया है। इस दिन श्रीहरि विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की विधि-विधान से आराधना करने पर सभी मनोकामनाएं सिद्ध होती हैं। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार यह व्रत मनुष्य द्वारा जाने-अनजाने में किए गए गंभीर पापों से भी मुक्ति दिलाने में सक्षम है। धार्मिक आख्यानों में यहां तक उल्लेख मिलता है कि सच्चे भाव से यह उपवास रखने पर ब्रह्महत्या जैसे भीषण पापों का प्रभाव भी क्षीण हो जाता है। साधक को मृत्युपरांत बैकुंठ धाम और स्वर्ग लोक की प्राप्ति होती है, यही वजह है कि भक्तजन इस तिथि को गहरी निष्ठा के साथ मनाते हैं। इसका आप पर असर यह जानकारी उन श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण है जो माघ मास की जया एकादशी का व्रत और पूजन सही समय पर संपन्न करना चाहते हैं। • व्रत का दिन: पंचांग के उदया तिथि नियम के आधार पर उपवास 29 जनवरी दिन बुधवार को रखा जाएगा। श्रद्धालुओं को 28 जनवरी के बजाय 29 तारीख के सूर्योदय से ही व्रत का संकल्प लेना चाहिए। • पूजा का पहला मुहूर्त: सुबह का श्रेष्ठ पूजन समय 7 बजकर 11 मिनट से 8 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। समय पर पूजा सामग्री व्यवस्थित करने वाले साधक इस पहले अंतराल में अनुष्ठान पूरा कर सकते हैं। • पूजा का दूसरा मुहूर्त: दोपहर का शुभ पूजन काल सुबह 11 बजकर 14 मिनट से 1 बजकर 55 मिनट तक बना रहेगा। जो लोग सुबह पूजा नहीं कर पाते, वे इस दूसरे समय में लक्ष्मी नारायण की आराधना कर सकते हैं। • आध्यात्मिक लाभ: इस दिन चार दुर्लभ योगों के संयोग में की गई साधना से जाने-अनजाने पापों से मुक्ति और पारिवारिक समृद्धि मिलती है। व्रतियों को दिनभर सात्विक नियमों और नाम जप का पालन करना चाहिए। ऐसा क्यों हुआ जया एकादशी की तिथि और मुहूर्त को लेकर तिथि के समय विस्तार तथा पंचांग के उदया तिथि के नियमों के कारण स्थिति स्पष्ट की गई है। • तिथि का आरंभ और समापन: एकादशी तिथि 28 जनवरी को शाम 4 बजकर 34 मिनट से शुरू होकर 29 जनवरी को देर रात 1 बजकर 56 मिनट तक रहेगी। इस तरह तिथि का फैलाव दो अलग-अलग कैलेंडर दिनों पर पड़ता है। • उदया तिथि का निर्धारण: वैदिक पंचांग के सिद्धांत के तहत जिस दिन सूर्योदय के समय तिथि उपस्थित रहती है, उसी दिन उपवास मान्य होता है। 29 जनवरी की सुबह सूर्योदय के समय एकादशी विद्यमान रहने से इसी दिन को व्रत के लिए चुना गया। • दुर्लभ खगोलीय योग: ग्रह-नक्षत्रों की चाल के कारण इस विशेष दिन पर इंद्र, रवि, भद्रावास और शिववास योग का निर्माण हो रहा है। इन संयोगों की उपस्थिति ने इस वर्ष की जया एकादशी के आध्यात्मिक महत्व को काफी बढ़ा दिया है। सवाल-जवाब 1. जया एकादशी का व्रत 28 जनवरी को है या 29 जनवरी को? उदया तिथि की मान्यता के अनुसार जया एकादशी का व्रत 29 जनवरी दिन बुधवार को रखा जाएगा। 2. माघ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि कब से कब तक रहेगी? ऋषिकेश पंचांग के अनुसार यह तिथि 28 जनवरी शाम 4 बजकर 34 मिनट से शुरू होकर 29 जनवरी देर रात 1 बजकर 56 मिनट तक रहेगी। 3. इस दिन पूजा के लिए सुबह का शुभ समय क्या है? पूजा के लिए सुबह का सबसे शुभ मुहूर्त 7 बजकर 11 मिनट से 8 बजकर 32 मिनट तक निर्धारित है। 4. क्या दोपहर में भी पूजा का कोई मुहूर्त मौजूद है? हां, दूसरा शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 14 मिनट से दोपहर 1 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। 5. इस वर्ष जया एकादशी पर कौन से दुर्लभ योग बन रहे हैं? इस दिन इंद्र योग, रवि योग, भद्रावास योग और शिववास योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। 6. धार्मिक मान्यताओं में जया एकादशी व्रत का क्या महत्व बताया गया है? मान्यता है कि इस व्रत से पिशाच योनि और गंभीर पापों से मुक्ति मिलती है तथा बैकुंठ धाम का मार्ग खुलता है। https://trendkia.com/spirituality/magha-shukla-paksha-men-isa-tarikha-ko-rakha-jaega-jaya-ekadashi-vrata-bana-rahe-chara-durlabha-shubha-yoga-37321 TrendKia — Har trend, sabse pehle.