मिथिलांचल में भैया दूज की अनोखी परंपरा, जानें यमराज और तीन पवित्र नदियों से जुड़ी पौराणिक मान्यता मिथिला क्षेत्र में भैया दूज पर्व 23 अक्टूबर बृहस्पतिवार को पूरी श्रद्धा से मनाया जाएगा, जहां बहनें उपवास रखकर भाइयों की दीर्घायु का वरदान मांगती हैं। भाई और बहन के स्नेहिल रिश्ते का उत्सव भैया दूज मिथिलांचल की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का एक अभिन्न अंग माना जाता है। पूरे मिथिला क्षेत्र में इस पावन अवसर पर विशेष उल्लास देखने को मिलता है, जहां घर-घर में पारिवारिक आत्मीयता और आस्था की झलक साफ दिखाई देती है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के सुखी जीवन, तरक्की और लंबी उम्र की मंगलकामना करते हुए निर्जला अथवा फलाहार व्रत रखती हैं। वहीं, भाई अपनी बहनों के घर पहुंचकर उनके हाथों से तैयार किया गया पारंपरिक भोजन बड़े चाव और आदर के साथ ग्रहण करते हैं। पौराणिक कथा और यमराज से जुड़ा गहरा संबंध कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर ज्योतिष विभागाध्यक्ष, डॉक्टर कुणाल कुमार झा के अनुसार, भैया दूज के इस पावन उत्सव का सीधा ताल्लुक द्वापर युग की धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा हुआ है। पौराणिक आख्यानों में वर्णन मिलता है कि पवित्र गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों ने अपने भाई यमराज को प्रसन्न किया था। इन तीनों पावन नदियों ने यमराज से अपने भाई की लंबी उम्र का वरदान मांगा था। उसी पौराणिक घटना के बाद से यह परंपरा निरंतर चली आ रही है, जिसमें बहनें यमराज से अपने भाइयों की दीर्घायु और रक्षा की प्रार्थना करती हैं। मिथिलांचल के रीति-रिवाजों में बहन के हाथों बना भोजन करना और उनका आशीष पाना आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है। पारंपरिक अनुष्ठान और पारिवारिक मिलन का उल्लास इस वर्ष यह पावन पर्व 23 अक्टूबर बृहस्पतिवार को विधि-विधान के साथ आयोजित होगा। भैया दूज की सुबह से ही बहनें व्रत का संकल्प लेकर अपने भाइयों के स्वागत की तैयारियों में जुट जाती हैं। जब भाई घर पहुंचते हैं, तो पारंपरिक रीति से उनका तिलक किया जाता है, आरती उतारी जाती है और उनके मंगलमय भविष्य की प्रार्थना की जाती है। भाई भी अपनी बहनों के प्रति कृतज्ञता और स्नेह दर्शाते हुए उन्हें उपहार भेंट करते हैं। यह आयोजन सिर्फ भाई-बहन के प्रेम को ही प्रगाढ़ नहीं करता, बल्कि पूरे परिवार को एक सूत्र में पिरोने का अनुपम जरिया भी बनता है। समूचे मिथिलांचल में इस दिन उत्सव का वातावरण बना रहता है, जो यहां के पारंपरिक संस्कारों को जीवंत बनाए रखता है। इसका आप पर असर भैया दूज का यह पर्व भाई-बहन के सामाजिक जुड़ाव को मजबूत करने के साथ-साथ पारंपरिक रीति-रिवाजों के पालन का अवसर देता है। • भारत में: यह पर्व परिवारों को एक साथ लाने और पारंपरिक पारिवारिक रिश्तों को सहेजने का कार्य करता है। कामकाजी दिनचर्या के बीच लोग अपने सगे-संबंधियों से मिलने और भोजन साझा करने का समय निकालते हैं। • मिथिलांचल में: दरभंगा और आसपास के क्षेत्रों में बहन के घर जाकर भोजन ग्रहण करने और आशीर्वाद लेने की विशेष सांस्कृतिक महत्ता है। 23 अक्टूबर बृहस्पतिवार को स्थानीय स्तर पर अनुष्ठानों, तिलक और उपहारों के आदान-प्रदान से पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल रहता है। • भाइयों के लिए: भाइयों के लिए यह दिन अपनी बहनों के प्रति कृतज्ञता जताने और उन्हें उपहार देकर स्नेह प्रकट करने का अवसर है। उन्हें अपनी बहनों के घर जाकर उनके हाथों से बना भोजन ग्रहण करने की परंपरा निभानी होती है। • बहनों के लिए: बहनों को इस दिन प्रातःकाल उपवास रखकर तिलक और आरती की पारंपरिक तैयारियां करनी होती हैं। वे इस अनुष्ठान के जरिए अपने भाई के मंगलमय जीवन और दीर्घायु की प्रार्थना करती हैं। ऐसा क्यों हुआ भैया दूज के आयोजन और इसकी महत्ता के पीछे द्वापर युग से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं तथा सदियों पुरानी पारिवारिक परंपराएं विद्यमान हैं। • द्वापर युग की पौराणिक मान्यता: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों ने अपने भाई यमराज को प्रसन्न किया था। तीनों पवित्र नदियों ने यमराज से उनकी आयु वृद्धि का वरदान मांगा था, जिसके बाद से यह परंपरा शुरू हुई। • दीर्घायु का वरदान: यमराज से जुड़े इस प्रसंग के कारण ही बहनें हर साल उपवास रखकर अपने भाइयों की अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति और लंबी उम्र की प्रार्थना करती हैं। • मिथिलांचल की सांस्कृतिक धरोहर: इस क्षेत्र में बहन के घर जाकर उसके हाथों का भोजन करने की परिपाटी सदियों से चली आ रही है, जो पारिवारिक मूल्यों और परस्पर सम्मान को सुदृढ़ बनाती है। सवाल-जवाब 1. भैया दूज इस वर्ष किस तिथि और दिन मनाया जाएगा? इस वर्ष भैया दूज का पर्व 23 अक्टूबर बृहस्पतिवार को मनाया जाएगा। 2. भैया दूज का संबंध किस पौराणिक युग से बताया गया है? कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभागाध्यक्ष के अनुसार, इस पर्व का महत्व द्वापर युग से जुड़ा हुआ है। 3. यमराज से आयु वृद्धि का वरदान किन पवित्र नदियों ने मांगा था? पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों ने यमराज को प्रसन्न कर उनकी आयु वृद्धि का वरदान मांगा था। 4. मिथिलांचल में भैया दूज के दिन कौन सी प्रमुख परंपरा निभाई जाती है? मिथिलांचल में इस दिन बहनें उपवास रखती हैं और भाई अपनी बहन के घर जाकर उनके हाथों से बना भोजन ग्रहण करते हैं तथा आशीर्वाद लेते हैं। https://trendkia.com/spirituality/mithilanchal-men-bhaiya-duja-ki-anokhi-parnpara-janen-yamraj-aura-tina-pavitra-nadiyon-se-juri-pauranika-manyata-42512 TrendKia — Har trend, sabse pehle.