# गुजरात के मोरबी में तालाब किनारे ध्यान लगाते थे नीम करौली बाबा, 'हनुमान अंश' से ताज़ा हुई 'तलैया बाबा' की गाथा

> नीम करौली बाबा के शुरुआती आध्यात्मिक जीवन से जुड़ा गुजरात के मोरबी का तालाब एक बार फिर चर्चा में है। निर्देशक विशाल चतुर्वेदी की फिल्म 'हनुमान अंश' ने बाबा के 'तलैया बाबा' कहलाने और जल साधना करने की पौराणिक कथाओं को फिर जीवित कर दिया है।

**Type:** article · **Category:** अध्यात्म · **Published:** 2026-09-10 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/spirituality/morbi-ke-talaba-kinare-dhyana-lagate-the-neem-karoli-baba-hanuman-ansh-se-taza-hui-talaiya-baba-ki-gatha-31085 · **Language:** Hindi
**Tags:** नीम करौली बाबा, हनुमान अंश, तलैया बाबा, मोरबी तालाब, कैंची धाम, विशाल चतुर्वेदी, लक्ष्मण नारायण शर्मा

नीम करौली बाबा का नाम आज भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में विभिन्न विचारधाराओं के लोगों के बीच अत्यधिक श्रद्धा और सम्मान के साथ लिया जाता है। उनके दिव्य जीवन, अलौकिक प्रसंगों और आध्यात्मिक साधनाओं से जुड़ी कई कथाएं अक्सर जनमानस में चर्चा का केंद्र बनी रहती हैं। हाल ही में निर्देशक विशाल चतुर्वेदी द्वारा निर्देशित फिल्म 'हनुमान अंश' के पर्दे पर आने के बाद बाबा के शुरुआती जीवन से जुड़ी पुरानी यादें एक बार फिर ताज़ा हो गई हैं। इस फिल्म ने भक्तों और आध्यात्मिक प्रेमियों का ध्यान गुजरात के मोरबी स्थित उस ऐतिहासिक तालाब की ओर खींच लिया है, जहां उन्होंने वर्षों पूर्व गहन तपस्या की थी।

## गृहस्थ जीवन का त्याग और गुजरात में कठिन तपस्या
आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार, नीम करौली बाबा का शुरुआती नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा था। उन्होंने संन्यास मार्ग चुनने से पूर्व गृहस्थ जीवन का पूरी तरह त्याग कर दिया था और सत्य की खोज में अपनी आध्यात्मिक यात्रा आरंभ की थी। इसी क्रम में वे गुजरात पहुंचे, जहां उन्होंने कुछ समय राजकोट शहर में व्यतीत किया। राजकोट में समय बिताने के पश्चात वे मोरबी क्षेत्र की ओर बढ़ गए। मोरबी पहुंचने के बाद उन्होंने एकांत स्थल की तलाश की और वहां स्थित एक तालाब के तट को अपनी नियमित साधना का केंद्र बनाया।

स्थानिक निवासियों और पुराने जीवन वृत्तांतों के अनुसार, वे इस तालाब के किनारे घंटों तक ध्यानमग्न बैठे रहते थे। जल के समीप शांत वातावरण में की गई उनकी साधना ने स्थानीय लोगों को अत्यंत प्रभावित किया। तालाब के प्रति उनके इस जुड़ाव और निरंतर ध्यान लगाने की प्रक्रिया के कारण ही वहां के निवासी उन्हें आदरपूर्वक 'तलैया बाबा' पुकारने लगे थे। गुजराती और स्थानीय भाषा में 'तलैया' शब्द का शाब्दिक अर्थ छोटा तालाब होता है, जिससे यह नाम उनके व्यक्तित्व के साथ सदा के लिए जुड़ गया।

## जलमग्न होकर ध्यान लगाने का रहस्यमय प्रसंग
नीम करौली बाबा से जुड़ी लोक कथाओं और भक्तों के अनुभवों में इस बात का विशेष उल्लेख मिलता है कि उनकी साधना सामान्य ध्यान तक ही सीमित नहीं थी। कहा जाता है कि वे ध्यान की उच्च अवस्था प्राप्त करने के लिए तालाब के ठंडे पानी में लंबे समय तक डूबे रहते थे। स्थानीय परंपराओं में यह माना जाता है कि वे पानी के भीतर रहकर कई घंटों तक निर्विघ्न जप और तपस्या करते थे। इसी अनोखी और कठिन जल साधना की वजह से 'तलैया बाबा' के रूप में उनकी प्रसिद्धि चारों ओर फैल गई।

हालांकि, आध्यात्मिक विश्लेषकों का मानना है कि पानी में डूबकर साधना करने के ये विवरण मुख्य रूप से अनुश्रुतियों, मौखिक परंपराओं और भक्तों द्वारा बाद में लिखे गए संस्मरणों में मिलते हैं। इसलिए इन प्रसंगों को किसी कठोर ऐतिहासिक या वैज्ञानिक प्रमाण के बजाय जन आस्था, लोक विश्वास और पूज्य परंपरा के रूप में देखा जाना चाहिए। इसके बावजूद, यह तथ्य निर्विवाद है कि गुजरात प्रवास का यह कालखंड बाबा की आध्यात्मिक तपस्या का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आधारभूत चरण था।

## उत्तर प्रदेश का सफर और कैंची धाम की स्थापना
गुजरात के मोरबी में कठिन तपस्या पूर्ण करने के पश्चात बाबा का आध्यात्मिक प्रवास उत्तर प्रदेश की ओर हुआ। वे उत्तर प्रदेश के नीम करौली गांव पहुंचे, जहां से आगे चलकर उन्हें 'नीम करौली बाबा' का अमर नाम प्राप्त हुआ। इसके बाद उत्तराखंड के नैनीताल और आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों में उनका आध्यात्मिक प्रभाव तीव्र गति से विस्तारित हुआ। नैनीताल के समीप स्थित कैंची धाम आश्रम आज दुनिया भर में उनके प्रमुख आध्यात्मिक केंद्रों में सबसे प्रसिद्ध और पवित्र स्थान माना जाता है, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन हेतु आते हैं।

## फिल्म 'हनुमान अंश' ने जगाई नए सिरे से उत्सुकता
हाल के दिनों में नीम करौली बाबा के जीवन पर आधारित फिल्म 'हनुमान अंश' ने सिनेमाघरों में दस्तक दी है। विशाल चतुर्वेदी के निर्देशन में बनी यह फिल्म बाबा के जीवन दर्शन, उनकी लीलाओं और उनसे जुड़ी लोक गाथाओं को बड़े पर्दे पर जीवंत करती है। जैसे-जैसे दर्शकों के बीच इस फिल्म को लेकर रुचि बढ़ी है, वैसे-वैसे लोगों में बाबा के शुरुआती साधना स्थलों और उनके जीवन के अल्पज्ञात पहलुओं को जानने की जिज्ञासा उत्पन्न हुई है। यही कारण है कि मोरबी का वह रहस्यमयी तालाब और 'तलैया बाबा' की साधना की गाथा आज एक बार फिर श्रद्धालुओं के बीच कौतूहल और श्रद्धा का विषय बनी हुई है।

## इसका आप पर असर
मोरबी के इस ऐतिहासिक साधना स्थल की पुनः चर्चा से श्रद्धालुओं और आम जनता के लिए कई व्यावहारिक पहलू सामने आते हैं।

- **श्रद्धालुओं के लिए:** नीम करौली बाबा के जीवन के शुरुआती चरणों के बारे में नई प्रामाणिक जानकारी मिलती है, जिससे कैंची धाम के अलावा गुजरात के मोरबी जैसे ऐतिहासिक साधना स्थलों के दर्शन की इच्छा रखने वालों के लिए नए आध्यात्मिक मार्ग खुलते हैं।
- **पर्यटन एवं स्थानीय संस्कृति:** मोरबी और आसपास के क्षेत्रों में बाबा के साधना स्थल को लेकर जन-जागरूकता बढ़ेगी, जिससे धार्मिक पर्यटन और स्थानीय विरासत के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
- **युवा पीढ़ी के लिए प्रोत्साहन:** कठिन साधना और आत्म-अनुशासन की यह गाथा युवाओं को भौतिक जीवन के तनावों के बीच ध्यान, मानसिक शांति और धैर्य अपनाने की प्रेरणा देती है।
- **सिनेमा और संस्कृति का संगम:** भक्तिपरक सिनेमा जैसे 'हनुमान अंश' के माध्यम से विलुप्तप्राय लोक-कथाओं और क्षेत्रीय इतिहास को मुख्यधारा के दर्शकों तक पहुँचाने का नया माध्यम तैयार होता है।

## ऐसा क्यों हुआ
नीम करौली बाबा के मोरबी स्थित साधना स्थल और 'तलैया बाबा' नाम की चर्चा अचानक सुर्खियों में आने का मुख्य कारण हाल ही में रिलीज़ हुई एक बायोपिक फिल्म है।

- **फिल्म 'हनुमान अंश' का प्रदर्शन:** निर्देशक विशाल चतुर्वेदी की फिल्म 'हनुमान अंश' में नीम करौली बाबा के जीवन की प्रमुख घटनाओं और लोक-कथाओं को विस्तार से दिखाया गया है।
- **अल्पज्ञात साधना प्रसंगों का चित्रण:** फिल्म में बाबा के गुजरात प्रवास, मोरबी के तालाब के पास जल साधना और 'तलैया बाबा' कहलाने के शुरुआती दौर को रेखांकित किया गया है, जिसने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।
- **भक्तों में ऐतिहासिक स्थलों के प्रति जिज्ञासा:** फिल्म देखने के बाद श्रद्धालुओं और शोधकर्ताओं ने बाबा के शुरुआती जीवन और उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड जाने से पहले के संघर्षों के बारे में अधिक जानने में रुचि दिखाई है।

## सवाल-जवाब

### 1. नीम करौली बाबा को 'तलैया बाबा' क्यों कहा जाता था?
गुजरात के मोरबी में प्रवास के दौरान वे एक तालाब (जिसे स्थानीय भाषा में 'तलैया' कहते हैं) के किनारे नियमित साधना करते थे और घंटों जल में रहकर ध्यान लगाते थे, जिसके कारण स्थानीय लोगों ने उन्हें 'तलैया बाबा' नाम दिया।

### 2. नीम करौली बाबा का शुरुआती नाम क्या था?
गृहस्थ जीवन त्यागने और आध्यात्मिक यात्रा शुरू करने से पूर्व नीम करौली बाबा का मूल नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा था।

### 3. फिल्म 'हनुमान अंश' के निर्देशक कौन हैं?
नीम करौली बाबा के जीवन पर आधारित फिल्म 'हनुमान अंश' का निर्देशन विशाल चतुर्वेदी ने किया है।

### 4. नीम करौली बाबा का सबसे प्रसिद्ध आध्यात्मिक केंद्र कौन सा है?
उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम आश्रम नीम करौली बाबा का सबसे प्रसिद्ध और विश्वविख्यात आध्यात्मिक केंद्र है।

## प्रेरणा और सबक
लक्ष्मण नारायण शर्मा से नीम करौली बाबा बनने की इस पावन यात्रा से हर व्यक्ति अपने जीवन के लिए महत्वपूर्ण सीख ले सकता है।

- **कठिन तपस्या और आत्म-अनुशासन:** पानी में डूबे रहकर घंटों साधना करना सिखाता है कि किसी भी उच्च लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अटूट ध्यान और कड़े अनुशासन की आवश्यकता होती है।
- **आडंबरहीन जीवन:** गृहस्थ जीवन त्यागकर एकांत तालाब के किनारे साधारण जीवन व्यतीत करना यह दर्शाता है कि महानता बाहरी चमक-धमक में नहीं बल्कि आंतरिक शांति में निहित है।
- **सतत प्रयास और धैर्य:** गुजरात के मोरबी से लेकर उत्तर प्रदेश और नैनीताल तक की यात्रा यह संदेश देती है कि आध्यात्मिक या व्यावहारिक सफलता रातों-रात नहीं मिलती, इसके लिए निरंतर साधना आवश्यक है।
- **स्थानीय समाज से जुड़ाव:** 'तलैया बाबा' के रूप में साधारण ग्रामीणों के बीच रहकर साधना करने से यह सीख मिलती है कि सादगी और नम्रता ही सर्वोपरि गुण हैं।

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