# न्यूयॉर्क के जेफरी कैगेल से कृष्णदास बनने का आध्यात्मिक सफर, हनुमान अंश फिल्म में गूंजे दो प्रसिद्ध भजन

> 1970 में भारत आए अमेरिकी युवा जेफरी कैगेल ने नीम करोली बाबा के सान्निध्य में कृष्णदास का नाम पाया। अब फिल्म हनुमान अंश में उनके गाए भजन 130 करोड़ रुपये के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन के साथ दुनिया भर में गूंज रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** अध्यात्म · **Published:** 2026-09-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/spirituality/new-york-ke-jeffrey-kagel-se-krishna-das-banane-ka-adhyatmika-saphara-hanuman-ansh-philma-men-gunje-do-prasiddha-bhajana-30102 · **Language:** Hindi
**Tags:** कृष्णदास, नीम करोली बाबा, हनुमान अंश, कैंची धाम, भक्ति संगीत, विराट कोहली, अनुष्का शर्मा, ग्रैमी अवॉर्ड्स

अमेरिका के न्यूयॉर्क में जन्मे जेफरी कैगेल का एक साधारण पश्चिमी युवा से विश्वविख्यात भक्ति गायक कृष्णदास बनने का सफर बेहद अनोखा और प्रेरणादायक है। वर्ष 1970 में भारत आकर अध्यात्म की शरण लेने वाले जेफरी की जिंदगी को नीम करोली बाबा के सान्निध्य ने पूरी तरह बदल दिया। दशकों तक अपनी हारमोनियम और दिव्य मंत्रोच्चार से वैश्विक स्तर पर कीर्तन को पहचान दिलाने वाले कृष्णदास की आवाज अब 7 अगस्त 2026 को रिलीज हुई बहुचर्चित फिल्म हनुमान अंश में भी सुनाई दे रही है। महज 2 करोड़ रुपये के सीमित बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 130 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार करके नया इतिहास रचा है। फिल्म में शामिल उनके दो भक्ति गीतों ने दर्शकों और श्रोताओं को एक बार फिर नीम करोली बाबा की आध्यात्मिक चेतना से जोड़ दिया है।

 

## न्यूयॉर्क से कैंची धाम: एक आध्यात्मिक खोज की शुरुआत

31 मई 1947 को न्यूयॉर्क शहर में जन्मे जेफरी कैगेल की शुरुआती जिंदगी आम अमेरिकी युवाओं जैसी ही थी। लेकिन उम्र के युवा पड़ाव में उनके भीतर जीवन के गूढ़ अर्थों, आत्म-साक्षात्कार और आंतरिक शांति को जानने की तीव्र उत्कंठा पैदा हुई। किसी पारंपरिक करियर या व्यावसायिक सफलता के बजाय उन्होंने अध्यात्म का मार्ग चुना। इसी तलाश में वर्ष 1970 में उन्होंने भारत की धरती पर कदम रखा। भारत भ्रमण के दौरान वे उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात महान संत नीम करोली बाबा से हुई।

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कैंची धाम आश्रम का वातावरण और नीम करोली बाबा का सान्निध्य जेफरी के लिए जीवन का निर्णायक मोड़ साबित हुआ। उन्होंने आश्रम में करीब 2 साल और 6 महीने का समय बिताया। इस दौरान बाबा की शिक्षाओं, सादगी और प्रेम ने उनके मन पर ऐसा प्रभाव छोड़ा कि उनकी पुरानी पश्चिमी पहचान पीछे छूट गई। नीम करोली बाबा ने उन्हें नया नाम दिया कृष्णदास। इस नामकरण के साथ ही जेफरी कैगेल का अतीत समाप्त हो गया और भक्ति संगीत के एक नए युग का सूत्रपात हुआ।

 

## भक्ति का जरिया बना संगीत और नीम करोली बाबा का आदेश

आश्रम में बिताए समय के बाद जब कृष्णदास के अमेरिका लौटने का समय आया, तो उनके मन में अपने गुरु की सेवा का गहरा भाव था। पोडकास्टर रणवीर अल्लाहबादिया को दिए एक इंटरव्यू में कृष्णदास ने इस ऐतिहासिक प्रसंग का विवरण साझा किया। उन्होंने बताया कि अमेरिका की वापसी की फ्लाइट लेने से ठीक पहले उन्होंने नीम करोली बाबा से सवाल पूछा था कि वे अमेरिका जाकर बाबा की सेवा किस तरह कर सकते हैं।

नीम करोली बाबा ने उन्हें सहज भाव से उत्तर देते हुए कहा कि सच्ची सेवा कभी पूछकर या अनुमति लेकर नहीं की जाती। इसके बाद बाबा ने आशीर्वाद स्वरूप कहा कि कृष्णदास अमेरिका में जाकर उनकी आवाज बनेंगे। गुरु के इन वचनों को कृष्णदास ने अपने जीवन का एकमात्र ध्येय बना लिया। उन्होंने हारमोनियम की पारंपरिक धुनों और संस्कृत मंत्रों के गायन को अपनी साधना का मुख्य आधार बनाया। उनके लिए संगीत केवल मनोरंजन या कला का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि यह लोगों को अपने भीतर की दिव्य शांति से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बन गया।

 

## वैश्विक मंच पर कीर्तन की गूंज और ग्रैमी नामांकन

अमेरिका लौटने के बाद कृष्णदास ने भारतीय कीर्तन परंपरा और भक्ति संगीत को पश्चिमी दुनिया में फैलाने का कार्य निरंतर जारी रखा। वर्ष 1996 से लेकर अब तक उन्होंने कई सुप्रसिद्ध संगीत एल्बम जारी किए हैं। उनके भजनों और कीर्तन की मौलिक शैली ने पश्चिमी देशों के लाखों लोगों को भारतीय अध्यात्म की ओर आकर्षित किया।

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वर्ष 2012 में उनके एल्बम लाइव आनंदा को संगीत जगत के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार ग्रैमी अवॉर्ड्स के लिए नामांकित किया गया। यह किसी भारतीय भक्ति संगीत एल्बम के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी। इसके अतिरिक्त, उनकी आवाज में गाई गई हनुमान चालीसा को विश्वभर में अत्यंत श्रद्धा के साथ सुना जाता है। न्यूयॉर्क के एक चर्च में उनके द्वारा प्रस्तुत हनुमान चालीसा के विशेष पाठ ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खूब सुर्खियां बटोरीं। आज के डिजिटल युग में यूट्यूब और स्पॉटिफाई जैसे प्लेटफॉर्म्स पर उनके भजनों को रोजाना लाखों लोग सुनते हैं। भक्ति संगीत को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने एक फाउंडेशन की भी स्थापना की है।

 

## 'हनुमान अंश' फिल्म में स्वर और 130 करोड़ का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन

नीम करोली बाबा के जीवन और उनकी शिक्षाओं पर आधारित फिल्म हनुमान अंश में कृष्णदास की आवाज का शामिल होना उनके आध्यात्मिक सफर का एक नया अध्याय है। इस फिल्म में उनके दो बेहद लोकप्रिय भजन सीता राम और ओम नमः शिवाय शामिल किए गए हैं। इन दोनों भक्ति रचनाओं को कृष्णदास ने अपनी मौलिक आवाज में गाया है, जिससे सिनेमाघरों का माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो उठता है।

7 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई फिल्म हनुमान अंश ने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। मात्र 2 करोड़ रुपये के कुल निर्माण बजट में बनी इस फिल्म ने अपनी बेहतरीन विषय-वस्तु और आध्यात्मिक जुड़ाव के बल पर 130 करोड़ रुपये से अधिक की कुल कमाई की है। कम बजट में इतनी विशाल कमाई करके इस फिल्म ने कई बड़े बजट की फिल्मों को पीछे छोड़ दिया है और दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई है।

 

## विराट कोहली और अनुष्का शर्मा जैसे मुरीद और भारत दौरा

कृष्णदास के भक्ति संगीत का जादू न केवल आम लोगों पर बल्कि भारतीय खेल और फिल्म जगत की बड़ी हस्तियों पर भी छाया हुआ है। भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली और बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा उनके भजनों के बहुत बड़े प्रशंसक हैं। यह जोड़ी कई मौकों पर आध्यात्मिक संगीत और कीर्तन के प्रति अपना गहरा लगाव व्यक्त कर चुकी है। मीडिया में आई खबरों के अनुसार, विराट और अनुष्का को कई बार कृष्णदास के लाइव कीर्तन कॉन्सर्ट में शामिल होते हुए देखा गया है।

वर्तमान में कृष्णदास एक बार फिर भारत के दौरे पर हैं। वे देश के प्रमुख शहरों ऋषिकेश, दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु में अपने कीर्तन और संगीत कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दे रहे हैं। ऋषिकेश और दिल्ली में उनके भव्य कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो चुके हैं। इस यात्रा के दौरान वे उत्तराखंड स्थित कैंची धाम आश्रम भी पहुंचे, जहां उन्होंने नीम करोली बाबा के दर्शन कर अपनी पुरानी स्मृतियों को ताजा किया। एक साक्षात्कार में कृष्णदास ने कहा कि भारत आना उनके लिए किसी विदेशी देश की यात्रा करने जैसा नहीं, बल्कि अपने असली घर वापस लौटने जैसा अनुभव है।

## इसका आप पर असर
यह समाचार दर्शाता है कि भक्ति संगीत और भारतीय अध्यात्म का प्रभाव वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ रहा है।

  - **भक्ति संगीत के प्रेमियों के लिए:** सिनेमाघरों में 'हनुमान अंश' फिल्म के माध्यम से अब दर्शक उच्च गुणवत्ता वाले मंत्रोच्चार और पारंपरिक कीर्तन का आनंद बड़े पर्दे पर ले सकते हैं। इससे युवाओं और भक्ति संगीत से जुड़े लोगों को आध्यात्मिक शांति का एक नया माध्यम मिला है।

  - **कैंची धाम और उत्तराखंड के यात्रियों के लिए:** नीम करोली बाबा और कैंची धाम आश्रम की वैश्विक लोकप्रियता के कारण वहां जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। इससे स्थानीय पर्यटन और परिवहन सेवाओं में सकारात्मक वृद्धि देखने को मिल रही है।

  - **भारतीय सिनेमा उद्योग के लिए:** मात्र 2 करोड़ रुपये में बनी फिल्म का 130 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार करना यह साबित करता है कि कम बजट की सार्थक विषय-वस्तु वाली फिल्में भी बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता प्राप्त कर सकती हैं।

  - **वैश्विक डिजिटल श्रोताओं के लिए:** यूट्यूब और स्पॉटिफाई जैसे स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर प्रामाणिक वैदिक मंत्रों और हनुमान चालीसा की सुलभता से दुनिया भर में शांति और ध्यान का अभ्यास करने वालों को मदद मिल रही है।

## ऐसा क्यों हुआ
नीम करोली बाबा के दिव्य सान्निध्य और कृष्णदास की चार दशकों से अधिक की निरंतर साधना ने इस आध्यात्मिक यात्रा को संभव बनाया है।

  - **गुरु का पावन आशीर्वाद:** वर्ष 1970 में भारत आगमन के बाद जेफरी कैगेल ने कैंची धाम आश्रम में ढाई साल बिताए। नीम करोली बाबा द्वारा दिए गए नाम और अमेरिका में उनकी आवाज बनने के निर्देश ने उनके जीवन को नया ध्येय दिया।

  - **पाश्चात्य और भारतीय संगीत का संगम:** कृष्णदास ने पारंपरिक संस्कृत मंत्रों को सरल पश्चिमी हारमोनियम धुनों के साथ पिरोया। इस अनूठे प्रयोग से विदेशी श्रोताओं के लिए भारतीय कीर्तन से जुड़ना आसान हो गया।

  - **फिल्म 'हनुमान अंश' की प्रासंगिकता:** नीम करोली बाबा पर आधारित इस फिल्म के निर्माताओं ने प्रामाणिकता बनाए रखने के लिए कृष्णदास की मौलिक आवाज में 'सीता राम' और 'ओम नमः शिवाय' भजनों को शामिल करने का निर्णय लिया।

  - **डिजिटल युग और सेलिब्रिटी जुड़ाव:** विराट कोहली और अनुष्का शर्मा जैसी प्रसिद्ध हस्तियों द्वारा आध्यात्मिक संगीत के प्रति खुलकर रुचि जताने और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के विस्तार से भक्ति संगीत की पहुंच करोड़ों युवाओं तक पहुंची है।

## सवाल-जवाब

### 1. कृष्णदास का असली नाम क्या है और उनका जन्म कहां हुआ था?
कृष्णदास का असली नाम जेफरी कैगेल है और उनका जन्म 31 मई 1947 को अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में हुआ था।

### 2. जेफरी कैगेल को 'कृष्णदास' नाम किसने दिया था?
उत्तराखंड स्थित कैंची धाम आश्रम में लगभग ढाई साल बिताने के दौरान प्रसिद्ध संत नीम करोली बाबा ने उन्हें 'कृष्णदास' नाम दिया था।

### 3. फिल्म 'हनुमान अंश' में कृष्णदास के कौन से दो भजन शामिल हैं?
फिल्म 'हनुमान अंश' में कृष्णदास की मौलिक आवाज में गाए गए दो भजन 'सीता राम' और 'ओम नमः शिवाय' शामिल किए गए हैं।

### 4. फिल्म 'हनुमान अंश' का बजट और बॉक्स ऑफिस कलेक्शन कितना रहा है?
7 अगस्त 2026 को रिलीज हुई फिल्म 'हनुमान अंश' का निर्माण बजट मात्र 2 करोड़ रुपये था, जबकि इसने बॉक्स ऑफिस पर 130 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की है।

### 5. क्या कृष्णदास को कभी ग्रैमी अवॉर्ड्स के लिए नामांकित किया गया है?
हां, वर्ष 2012 में कृष्णदास के प्रसिद्ध भक्ति एल्बम 'लाइव आनंदा' को ग्रैमी अवॉर्ड्स के लिए नामांकित किया गया था।

### 6. कौन सी मशहूर भारतीय हस्तियां कृष्णदास के भजनों की प्रशंसक हैं?
भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली और अभिनेत्री अनुष्का शर्मा कृष्णदास के भजनों और आध्यात्मिक कीर्तन के बड़े प्रशंसक हैं।

## प्रेरणा और सबक
कृष्णदास का जीवन दर्शन और उनका आध्यात्मिक सफर हर व्यक्ति के लिए आत्म-खोज की प्रेरणा देता है।

  - **भौतिकता से परे आंतरिक खोज:** धन और करियर की अंधी दौड़ के बजाय मन की शांति और जीवन के उच्च ध्येय को प्राथमिकता देना ही सच्चे संतोष का मार्ग खोलता है।

  - **सच्ची सेवा का निस्वार्थ भाव:** नीम करोली बाबा की यह सीख कि 'सेवा पूछकर नहीं की जाती' हमें सिखाती है कि समाज और ईश्वर की सेवा के लिए अनुमति का इंतजार करने की जरूरत नहीं होती।

  - **संस्कृतियों का सम्मानजनक मिलन:** बिना किसी पूर्वाग्रह के विदेशी भाषा और संस्कृति को अपनाकर उसे दुनिया भर में फैलाना यह दिखाता है कि अध्यात्म सभी सीमाओं से परे है।

  - **अपनी साधना पर अडिग निष्ठा:** 1970 से लेकर अब तक लगातार चार दशकों से अपनी कला और साधना पर टिके रहकर कृष्णदास ने साबित किया कि निरंतरता ही सफलता की कुंजी है।

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