# पापांकुशा एकादशी 2025 की सही तारीख और शुभ मुहूर्त, जानिए पूजा विधि और पारण का समय

> आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली पापांकुशा एकादशी का व्रत 3 अक्टूबर 2025 को रखा जाएगा। इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी की उपासना करने से समस्त पापों का नाश होता है।

**Type:** article · **Category:** अध्यात्म · **Published:** 2026-10-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/spirituality/papankusha-ekadashi-2025-ki-sahi-tarikha-aura-shubha-muhurta-janie-puja-vidhi-aura-parana-ka-samaya-44227 · **Language:** Hindi
**Tags:** पापांकुशा एकादशी, एकादशी व्रत, आश्विन मास, विष्णु पूजा, पारण मुहूर्त, धार्मिक अनुष्ठान

सनातन धर्म में आश्विन मास को धार्मिक अनुष्ठानों और महत्वपूर्ण व्रत त्योहारों के लिए विशेष फलदायी माना गया है। इस महीने में पितृपक्ष, विश्वकर्मा पूजा और शारदीय नवरात्रि जैसे महापर्व मनाए जाते हैं। इसी पावन महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पापांकुशा एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखकर भगवान लक्ष्मी नारायण की विधिवत आराधना करने से अनजाने में हुए बड़े से बड़े पापों से मुक्ति मिल जाती है। इसके साथ ही जातक के परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का निरंतर विस्तार होता है।

## पापांकुशा एकादशी 2025 की तिथि और पारण का शुभ समय
वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 02 अक्टूबर को शाम 07 बजकर 10 मिनट पर होगा। इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 03 अक्टूबर को शाम 06 बजकर 32 मिनट पर होगा। उदयातिथि की मान्यता के कारण पापांकुशा एकादशी का पावन व्रत 03 अक्टूबर को रखा जाएगा। जो श्रद्धालु पूरे दिन उपवास रखेंगे, वे अगले दिन यानी 04 अक्टूबर को व्रत का पारण करेंगे। 04 अक्टूबर को पारण का अत्यंत शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 16 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 37 मिनट तक रहेगा। श्रद्धालुओं को इसी समयावधि के भीतर सात्विक विधि से व्रत खोलना चाहिए।

## पूजा अर्चना और दान का विशेष महत्व
देवघर स्थित पागल बाबा आश्रम के मुदगल ज्योतिष केंद्र के ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुदगल बताते हैं कि आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी अत्यंत फलदायी मानी गई है। इस दिन साधक को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होना चाहिए और भगवान विष्णु तथा देवी लक्ष्मी की प्रतिमा के समक्ष व्रत का संकल्प लेना चाहिए। पूजा के दौरान विधिवत धूप, दीप, गंध, पुष्प और नैवेद्य अर्पित करने के साथ ही पापांकुशा एकादशी की व्रत कथा का पाठ अथवा श्रवण करना अनिवार्य माना जाता है। इस दिन केवल सात्विक आहार का नियम पालना चाहिए या पूर्ण फलाहार पर रहना चाहिए। एकादशी के दिन किसी जरूरतमंद, निर्धन व्यक्ति या देवालय में जाकर अन्न, धन, वस्त्र और उपयोगी वस्तुओं का दान करना पुण्यकारी होता है। मान्यता है कि द्वादशी तिथि पर पारण से पूर्व दान पुण्य करने से धन लाभ के योग बनते हैं और व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त होता है।

## धार्मिक ग्रंथों में वर्णित महिमा और मोक्ष का मार्ग
पद्म पुराण और श्रीमद्भागवत पुराण जैसे प्रमुख धार्मिक ग्रंथों में पापांकुशा एकादशी की महिमा का विस्तृत उल्लेख मिलता है। इन ग्रंथों के अनुसार इस पावन तिथि पर निष्काम भाव से व्रत का अनुष्ठान करने पर मनुष्य के सभी ज्ञात और अज्ञात पापों का शमन हो जाता है। भगवान विष्णु की विशेष कृपा से व्यक्ति भौतिक जीवन के सभी सुख भोगने के उपरांत मृत्यु के बाद मोक्ष को प्राप्त करता है। यह व्रत विशेष रूप से उन साधकों के लिए अत्यधिक कल्याणकारी सिद्ध होता है जो मानसिक शांति, आध्यात्मिक प्रगति और जीवन के सर्वोच्च लक्ष्य मोक्ष की कामना रखते हैं।

## इसका आप पर असर
इस व्रत का धार्मिक और दैनिक जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है, जिससे श्रद्धालुओं को अपने अनुष्ठानों की सही योजना बनाने में मदद मिलती है।

- **व्रत की तिथि:** श्रद्धालु 03 अक्टूबर 2025 को एकादशी का व्रत रखेंगे। इस दिन केवल फलाहार या सात्विक आहार का सेवन करना चाहिए।
- **पारण का समय:** व्रत का पारण 04 अक्टूबर को सुबह 06:16 बजे से सुबह 08:37 बजे के मध्य पूरा करना होगा। निर्धारित मुहूर्त के भीतर पारण करने से ही व्रत का पूरा फल प्राप्त होता है।
- **दान पुण्य का नियम:** श्रद्धालुओं को मंदिर में या जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करना चाहिए। द्वादशी तिथि पर पारण से पहले दान करने से विशेष पुण्य और समृद्धि प्राप्त होती है।
- **आध्यात्मिक लाभ:** यह अनुष्ठान आत्मशुद्धि, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति में सहायक माना गया है। घर में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का वातावरण निर्मित होता है।

## ऐसा क्यों हुआ
वैदिक पंचांग की तिथियों की गणना और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आश्विन मास में पापांकुशा एकादशी का आयोजन तय नियमों पर आधारित होता है।

- **तिथि की गणना:** ऋषिकेश पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 02 अक्टूबर की शाम 07:10 बजे शुरू होकर 03 अक्टूबर की शाम 06:32 बजे समाप्त हो रही है। उदयातिथि 03 अक्टूबर को मिलने के कारण इसी दिन व्रत का निर्णय लिया गया है।
- **पौराणिक आधार:** पद्म पुराण और भागवत पुराण में इस तिथि पर व्रत रखने से सभी पापों के क्षय और मोक्ष प्राप्ति का विधान बताया गया है। इसी शास्त्रीय परंपरा का पालन करते हुए श्रद्धालु सदियों से यह व्रत रखते आ रहे हैं।
- **द्वादशी पारण का नियम:** शास्त्रों के अनुसार एकादशी व्रत का समापन द्वादशी तिथि के सूर्योदय के बाद निर्धारित मुहूर्त में ही किया जाता है। इसलिए 04 अक्टूबर को सुबह 06:16 से 08:37 बजे तक का समय पारण के लिए तय किया गया है।

## सवाल-जवाब

### 1. पापांकुशा एकादशी 2025 का व्रत किस तारीख को रखा जाएगा?
पापांकुशा एकादशी का व्रत 03 अक्टूबर 2025 को रखा जाएगा।

### 2. एकादशी तिथि कब शुरू और कब समाप्त होगी?
यह तिथि 02 अक्टूबर को शाम 07 बजकर 10 मिनट पर शुरू होगी और 03 अक्टूबर को शाम 06 बजकर 32 मिनट पर समाप्त होगी।

### 3. व्रत पारण का शुभ मुहूर्त क्या है?
व्रत का पारण 04 अक्टूबर को सुबह 06 बजकर 16 मिनट से सुबह 08 बजकर 37 मिनट के बीच किया जाएगा।

### 4. पापांकुशा एकादशी के दिन किन देवी देवताओं की पूजा की जाती है?
इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा अर्चना की जाती है।

### 5. इस दिन दान करने का क्या महत्व है?
गरीबों या मंदिर में अन्न, धन और वस्तुओं का दान करने से धन लाभ के योग बनते हैं और व्रत का संपूर्ण पुण्य प्राप्त होता है।

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