पौष के महीने में ऐसे करें तुलसी की विशेष पूजा, बैद्यनाथ धाम के तीर्थपुरोहित से जानिए उपाय और नियम मार्गशीर्ष के समापन के बाद 5 दिसंबर से शुरू हो रहे पौष माह में खरमास के दौरान मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है, लेकिन इस समय तुलसी पूजन और दान का विशेष महत्व माना गया है। सनातन पंचांग के चक्र में साल के 12 महीनों में से मार्गशीर्ष माह अब अपने समापन की ओर बढ़ रहा है। इसके पूर्ण होते ही 5 दिसंबर से साल के 10वें महीने यानी पूष (पौष) माह का आरंभ होने जा रहा है। इस महीने के आते ही खरमास भी लग जाता है, जिसकी वजह से शादी, विवाह, मुंडन, जनेऊ जैसे सभी शुभ और मांगलिक अनुष्ठान पूरी तरह रोक दिए जाते हैं। हालांकि इस अवधि में पूजा-पाठ, भक्ति और धार्मिक साधना पर किसी प्रकार का कोई प्रतिबंध नहीं रहता है। हिंदू परंपरा में तुलसी के पौधे को देवी लक्ष्मी का स्वरूप और अत्यंत पवित्र माना जाता है। ऐसे में इस महीने तुलसी की उपासना करने से परिवार में सुख, समृद्धि के साथ उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। एकादशी और संक्रांति पर विशेष उपाय का महत्व देवघर स्थित प्रसिद्ध बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के तीर्थपुरोहित प्रमोद श्रृंगारी के अनुसार, 5 दिसंबर से पौष माह की विधिवत शुरुआत हो रही है। इस कालखंड में तुलसी की नित्य उपासना जीवन में सौभाग्य और खुशहाली को बढ़ाने वाली मानी गई है। कैलेंडर के अनुसार 16 दिसंबर को संक्रांति पड़ रही है, जबकि उससे ठीक एक दिन पूर्व पौष महीने की एकादशी तिथि आ रही है। इस एकादशी के पावन अवसर पर किया जाने वाला एक विशेष धार्मिक अनुष्ठान सभी प्रकार के कष्टों को दूर करने में सक्षम माना गया है। तीर्थपुरोहित प्रमोद श्रृंगारी का कहना है कि यदि कोई जातक पौष माह की इस एकादशी पर तुलसी के पत्तों पर चंदन से भगवान विष्णु के सहस्रनाम लिखे, तो यह अत्यंत फलदायी होता है। इसके तहत प्रत्येक एक पत्ते पर एक-एक नाम चंदन से अंकित करके कुल एक हजार पत्तों को एक ही दिन में तैयार किया जाना चाहिए। इसके बाद इन 1,000 तुलसी दलों को भगवान विष्णु के चरणों में अर्पित कर दिया जाए, तो जीवन के समस्त संकट कट जाते हैं और घर-परिवार में केवल सुख-समृद्धि का वास बना रहता है। दैनिक पूजा के सरल नियम और दान का प्रभाव तीर्थपुरोहित ने प्रतिदिन किए जाने वाले तुलसी पूजन के नियमों को भी स्पष्ट किया है। उनके अनुसार पूष माह के दौरान हर रोज तुलसी के पौधे में शुद्ध जल अर्पित करने के साथ ही घी भी जरूर चढ़ाना चाहिए। इसके अतिरिक्त तुलसी माता को सुंदर चुनरी अर्पित करें और संध्याकाल के समय पौधे के समीप गाय के घी का दीपक नियमित रूप से प्रज्वलित करें। मान्यता है कि इस विधि से आराधना करने पर माता लक्ष्मी अत्यंत प्रसन्न होती हैं और घर में कभी भी धन-धान्य की कमी या आर्थिक तंगी नहीं आती है। इसके साथ ही इस पूरे महीने में सामर्थ्य अनुसार दान-पुण्य करना चाहिए, जिससे कुंडली के तमाम ग्रह और नक्षत्रों के दोष समाप्त हो जाते हैं। इसका आप पर असर पौष माह और खरमास के दौरान दैनिक जीवन और धार्मिक दिनचर्या में कई बदलाव आते हैं जिनका ध्यान रखना आवश्यक है। • मांगलिक कार्यों पर रोक: 5 दिसंबर से शुरू होने वाले खरमास के कारण विवाह, मुंडन और जनेऊ जैसे सभी शुभ संस्कारों पर रोक रहेगी। अगर आप कोई पारिवारिक मांगलिक कार्य आयोजित करने की योजना बना रहे हैं, तो उसे खरमास समाप्ति तक स्थगित रखना होगा। • दैनिक पूजा का नियम: इस पूरे महीने में घर के आंगन में स्थापित तुलसी को जल और घी अर्पित करने के साथ शाम को दीपक जलाना अनिवार्य माना गया है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आर्थिक तंगी दूर करने में मदद मिलती है। • एकादशी का विशेष अनुष्ठान: 16 दिसंबर को पड़ने वाली संक्रांति से ठीक एक दिन पहले एकादशी पर 1000 तुलसी पत्तों का अनुष्ठान किया जा सकता है। जिन लोगों के जीवन में लंबे समय से संकट चल रहे हैं, वे इस दिन एक-एक पत्ते पर चंदन से विष्णु सहस्रनाम लिखकर अर्पण कर सकते हैं। • दान और ग्रह शांति: इस पूरे महीने में जरूरतमंदों को दान-पुण्य करने से कुंडली के ग्रह-नक्षत्र दोष शांत होते हैं। किसी भी दिन अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्न या वस्त्र का दान करके आप मानसिक शांति और पुण्य अर्जित कर सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ हिंदू पंचांग में मार्गशीर्ष माह समाप्त होकर 10वां महीना पूष शुरू हो रहा है, जिसके साथ खरमास की शुरुआत होती है। • सूर्य का राशि परिवर्तन: पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष के बाद सूर्य धनु राशि में प्रवेश करता है जिससे खरमास लग जाता है। इस अवधि में मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं, जिससे भक्तों का पूरा ध्यान केवल पूजा-पाठ और जप-तप पर केंद्रित हो जाता है। • पौष में तुलसी का धार्मिक महत्व: तुलसी को माता लक्ष्मी का साक्षात स्वरूप माना गया है और सर्दियों के इस महीने में उनकी उपासना से सुख और समृद्धि बढ़ती है। इसी वजह से ज्योतिर्लिंग के पुरोहितों द्वारा इस समय तुलसी की नित्य सेवा और दीपदान के निर्देश दिए जाते हैं। • एकादशी तिथि का संयोग: 16 दिसंबर को संक्रांति आने वाली है और उससे ठीक एक दिन पहले पड़ने वाली एकादशी को भगवान विष्णु की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इसी कारण संकट मुक्ति के लिए तुलसी पत्तों पर सहस्रनाम लिखकर अर्पित करने का विशेष विधान बताया गया है। सवाल-जवाब 1. पूष का महीना कब से शुरू हो रहा है? मार्गशीर्ष समाप्त होने के बाद पूष महीने की शुरुआत 5 दिसंबर से हो रही है। 2. खरमास के दौरान कौन से कार्य बंद हो जाते हैं? खरमास शुरू होने पर शादी, विवाह, मुंडन और जनेऊ जैसे मांगलिक कार्य बंद हो जाते हैं, हालांकि पूजा-पाठ जारी रहता है। 3. पूष माह की एकादशी पर क्या विशेष उपाय बताया गया है? एकादशी के दिन तुलसी के एक हजार पत्तों पर चंदन से भगवान विष्णु के सहस्रनाम लिखकर अर्पित करने से सभी संकट समाप्त होते हैं। 4. संक्रांति किस तारीख को है? कैलेंडर के अनुसार संक्रांति 16 दिसंबर को है और उससे एक दिन पहले पूष की एकादशी पड़ रही है। 5. पूष माह में तुलसी की नित्य पूजा कैसे करनी चाहिए? हर रोज तुलसी में जल और घी चढ़ाएं, चुनरी अर्पित करें तथा संध्या के समय घी का दीपक प्रज्वलित करें। 6. इस महीने में दान करने का क्या लाभ बताया गया है? पूष के महीने में दान करने से कुंडली के समस्त ग्रह और नक्षत्रों के दोष समाप्त हो जाते हैं। https://trendkia.com/spirituality/paush-ke-mahine-men-aise-karen-tulsi-ki-vishesha-puja-baidyanath-dham-ke-tirthapurohita-se-janie-upaya-aura-niyama-40656 TrendKia — Har trend, sabse pehle.