# पूर्णिया के 700 साल पुराने मां कामाख्या मंदिर में ठाड़ी व्रत मेला, 2 लाख से अधिक भक्तों ने लगाई अरदास

> पूर्णिया के मजरा पंचायत स्थित 700 वर्ष प्राचीन मां कामाख्या मंदिर में तीन दिवसीय ठाड़ी व्रत मेला आयोजित हुआ, जहां 2 लाख से ज्यादा श्रद्धालु मन्नतें लेकर पहुंचे।

**Type:** article · **Category:** अध्यात्म · **Published:** 2026-09-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/spirituality/purnia-ke-700-sala-purane-maa-kamakhya-mndira-men-thadi-vrat-mela-2-lakha-se-adhika-bhakton-ne-lagai-aradasa-35844 · **Language:** Hindi
**Tags:** पूर्णिया, मां कामाख्या मंदिर, ठाड़ी व्रत, बिहार, मजरा पंचायत, धार्मिक मेला

बिहार के पूर्णिया जिले में स्थित ऐतिहासिक मां कामाख्या मंदिर में तीन दिवसीय ठाड़ी व्रत मेले के दौरान आस्था का अनूठा दृश्य देखने को मिला। अपने जीवन के संकटों से मुक्ति और विभिन्न मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं घूंघट डालकर घंटों भक्ति भाव से अरदास में बैठी रहीं। इस पावन अवसर पर मंदिर परिसर में लगभग 2 लाख से अधिक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दर्ज की गई, जो अपनी विशेष मुरादें लेकर देवी के दरबार में पहुंचे थे।

## 700 वर्ष पुराना ऐतिहासिक धार्मिक स्थल
मजरा पंचायत में स्थापित मां कामाख्या का यह मंदिर लगभग 700 साल पुराना माना जाता है। क्षेत्र के सबसे प्रसिद्ध और प्राचीन देवालयों में शुमार होने के कारण इसकी व्यापक मान्यता है। मान्यता के अनुसार, जीवन में जब इंसान चारों तरफ से निराश हो जाता है, तब वह ईश्वर की शरण में पहुंचता है। इसी विश्वास के साथ श्रद्धालु देवी की कृपा प्राप्त करने और अपने पारिवारिक, शारीरिक व मानसिक कष्टों के निवारण हेतु यहां कड़े नियमों का पालन करते हुए पूजा अर्चना करते हैं।

## कठिन साधना और घूंघट में अरदास की अनूठी परंपरा
इस मेले की सबसे खास बात ठाड़ी व्रत के दौरान की जाने वाली विशिष्ट अरदास परंपरा है। मंदिर परिसर में मौजूद नीलम, रूपम और अन्य महिला श्रद्धालुओं ने इस अनुष्ठान के महत्व के बारे में विस्तार से साझा किया। कई महिलाएं संतान प्राप्ति, विशेष रूप से बेटे की चाहत लेकर आई थीं, तो कई अन्य शारीरिक बीमारियों और पारिवारिक उलझनों से छुटकारा पाने के लिए साधना में लीन थीं।

व्रत की मर्यादा के तहत महिलाएं घूंघट ओढ़कर बिना अन्न और जल ग्रहण किए लगातार कई घंटों तक देवी के सामने बैठी रहीं। इस दौरान अनुष्ठान कर रही व्रती महिलाओं ने अरदास में बैठी महिलाओं को फल, फूल, पकवान और मिष्ठान भेंट किए तथा मां कामाख्या से उनकी प्रार्थना स्वीकार करने का आशीर्वाद मांगा। महिलाओं का दृढ़ विश्वास है कि इस कठिन तपस्या से देवी उनकी मुरादें पूरी करेंगी, जिसके बाद वे अगले वर्ष स्वयं पूर्ण विधि विधान से इस व्रत का अनुपालन करेंगी।

## इसका आप पर असर
पूर्णिया के इस प्राचीन मेले में लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति स्थानीय धार्मिक पर्यटन और सामुदायिक परंपराओं को रेखांकित करती है।

- **स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए:** मन्नत पूरी होने की मान्यता के तहत सैकड़ों ग्रामीण महिलाएं व्रत और अरदास की अनूठी परंपरा में शामिल हुईं। इसके माध्यम से लोग पारिवारिक सुख, स्वास्थ्य लाभ और संतान कामना के लिए सामूहिक प्रार्थना करते हैं।
- **क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर:** मेले में 2 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन से स्थानीय छोटे दुकानदारों और फूल-प्रसाद विक्रेताओं को बड़ा व्यवसाय मिला। तीन दिनों तक चलने वाले ऐसे आयोजनों से ग्रामीण व्यापार और सामाजिक मेलजोल को भारी गति मिलती है।
- **आने वाले वर्ष की योजना:** जिन महिलाओं ने इस वर्ष अरदास लगाई है, वे मनोकामना पूर्ति के बाद अगले वर्ष स्वयं व्रत करने का संकल्प ले रही हैं। इससे इस 700 साल पुरानी सांस्कृतिक और पारंपरिक धरोहर का निरंतर प्रवाह बना रहता है।
- **प्रशासन व प्रबंधन के लिए:** इतनी बड़ी संख्या में भीड़ जुटने के कारण ग्रामीण अंचलों में सुरक्षा, स्वच्छता और दर्शन की सुचारू व्यवस्था आवश्यक हो जाती है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्थानीय स्तर पर निरंतर बेहतर प्रबंध की मांग बनी रहती है।

## ऐसा क्यों हुआ
पूर्णिया के मजरा पंचायत में तीन दिवसीय ठाड़ी व्रत मेले का आयोजन सदियों पुरानी धार्मिक मान्यताओं और मन्नत पूरी होने के अटूट विश्वास के कारण हुआ।

- **प्राचीन धार्मिक धरोहर:** यह मां कामाख्या मंदिर लगभग 700 वर्ष पुराना है और पीढ़ियों से स्थानीय लोगों की गहरी आस्था का केंद्र रहा है। संकट के समय ईश्वरीय कृपा पाने की लालसा ही इतनी विशाल भीड़ का मूल आधार बनी।
- **ठाड़ी व्रत की विशेष परंपरा:** यह मेला विशेष रूप से उन श्रद्धालुओं के लिए आयोजित होता है जो कठिन शारीरिक तपस्या और मौन अरदास के जरिए अपनी मन्नतें मांगते हैं। संतान प्राप्ति और बीमारियों से मुक्ति जैसी व्यक्तिगत इच्छाएं महिलाओं को इस व्रत की ओर आकर्षित करती हैं।
- **पारस्परिक सहयोग की प्रथा:** मेले में व्रत रखने वाली महिलाएं और अरदास में बैठने वाली महिलाएं एक-दूसरे को फल-प्रसाद देकर आशीर्वाद मांगती हैं। यह सहयोगात्मक अनुष्ठान हर वर्ष अधिक से अधिक लोगों को इस उत्सव से जोड़ता है।

## सवाल-जवाब

### 1. पूर्णिया का मां कामाख्या मंदिर कितना पुराना है?
पूर्णिया के मजरा पंचायत में स्थित मां कामाख्या मंदिर लगभग 700 साल पुराना ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल है।

### 2. इस मेले में कुल कितने श्रद्धालु पहुंचे थे?
तीन दिवसीय ठाड़ी व्रत मेला के दौरान मंदिर में 2 लाख से अधिक श्रद्धालुओं की भीड़ देखी गई।

### 3. ठाड़ी व्रत मेले में महिलाएं किस तरह अरदास करती हैं?
महिलाएं घूंघट डालकर बिना कुछ खाए-पिए कई घंटों तक मां कामाख्या के समक्ष अरदास लगाकर बैठी रहती हैं।

### 4. श्रद्धालु मुख्य रूप से किन मनोकामनाओं के लिए मंदिर आते हैं?
श्रद्धालु संतान प्राप्ति, शारीरिक व्याधियों से मुक्ति और अन्य पारिवारिक समस्याओं के समाधान के लिए प्रार्थना करते हैं।

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