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  "title": "रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं, भाई की कलाई पर रक्षासूत्र सजाने से पहले करें यह विशेष पूजन",
  "summary": "सावन पूर्णिमा पर इस बार बिना भद्रा के रक्षाबंधन का पावन पर्व मनाया जाएगा। जानिए राखी बांधने से पहले भगवान गणेश के पूजन और केसर तिलक का धार्मिक महत्व।",
  "content": "सनातन परंपरा में सावन महीने की पूर्णिमा तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है, क्योंकि इसी पावन अवसर पर समूचे भारत में रक्षाबंधन का उत्सव हर्षोल्लास के साथ संपन्न होता है। यह पावन पर्व भाई और बहन के अटूट स्नेह, समर्पण तथा विश्वास का प्रतीक है, जहां बहनें अपने भाई की दीर्घायु और मंगलमय जीवन की कामना करते हुए रक्षासूत्र बांधती हैं, वहीं भाई जीवन भर उनकी सुरक्षा का संकल्प दोहराते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन शास्त्रों में बताए गए कुछ खास नियमों और पूजा विधियों का पालन करने से दोनों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की वृद्धि होती है।\n\nइस वर्ष भद्रा रहित रहेगा पर्व, 09 अगस्त को मनेगा रक्षाबंधन\nदेवघर स्थित प्रसिद्ध बैद्यनाथ मंदिर के तीर्थपुरोहित प्रमोद श्रृंगारी के अनुसार, इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व 09 अगस्त को पूरे देश में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाएगा। इस बार का त्योहार अत्यंत शुभ संयोग लेकर आ रहा है, क्योंकि इस पावन तिथि पर भद्रा का अशुभ साया बिल्कुल नहीं रहेगा। ज्योतिष और धर्मग्रंथों में भद्रा काल के दौरान रक्षासूत्र बांधना पूर्णतः वर्जित और अनिष्टकारी माना गया है। ऐसे में भद्रा का प्रभाव न होने से बहनें बिना किसी संशय के शुभ मुहूर्त में अपने भाइयों को राखी बांध सकेंगी, जिससे पर्व की शुभता और फल में कई गुना वृद्धि होगी।\n\nराखी बांधने की पूर्व संध्या पर करें यह विशेष उपाय\nपारंपरिक पूजा विधान के तहत बहनों को रक्षाबंधन से एक दिन पहले शाम के समय एक जरूरी अनुष्ठान संपन्न करना चाहिए। इसके तहत बाजार से लाई गई राखी को रक्षाबंधन की पूर्व संध्या पर घर के पूजा स्थल में देवी-देवताओं के समक्ष अर्पित कर देना चाहिए। विशेष रूप से प्रथम पूज्य भगवान गणेश के चरणों में रक्षासूत्र को समर्पित करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। इसके पश्चात रक्षाबंधन के पावन दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त हों और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद सर्वप्रथम भगवान गणेश और कुलदेवताओं की विधिवत पूजा-अर्चना करें और उनका आशीर्वाद लें।\n\nकेसर के तिलक से मजबूत होगा गुरु ग्रह\nदेवताओं की पूजा संपन्न करने के उपरांत ही भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधने का विधान पूरा करना चाहिए। राखी बांधने की रस्म के दौरान बहन को अपने भाई के माथे पर केसर का तिलक लगाना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र में केसर का सीधा संबंध देवगुरु बृहस्पति से माना गया है। केसर का तिलक लगाने से कुंडली में गुरु ग्रह को प्रबल बल मिलता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का विस्तार होता है। तीर्थपुरोहित प्रमोद श्रृंगारी के अनुसार, इस सरल विधि से रक्षासूत्र बांधने पर भाई और बहन के रिश्ते में प्रगाढ़ मिठास आती है और दोनों के जीवन में साल भर आर्थिक संपन्नता व खुशहाली बनी रहती है।\n\nइसका आप पर असर\nरक्षाबंधन के दिन भद्रा का साया न होने और सही पूजन विधि अपनाने से त्योहार बिना किसी असमंजस और निर्विघ्न रूप से मनाया जा सकेगा।\n\n• समय की सुविधा: भद्रा का साया न होने के कारण बहनें दिन भर में किसी भी अनुकूल मुहूर्त में अपने भाई को राखी बांध सकेंगी। इससे समय की पाबंदी या देर रात तक इंतजार करने की परेशानी पूरी तरह समाप्त हो जाती है।\n• घर में पूजन तैयारी: राखी बांधने से पहले रक्षासूत्र को भगवान गणेश को अर्पित करने का नियम है। इसके लिए परिवार को त्योहार से एक शाम पहले ही पूजन सामग्री और राखी पूजा स्थल पर स्थापित करनी होगी।\n• केसर का प्रबंध: ज्योतिषीय उपाय के तौर पर भाई को केसर का तिलक लगाने की सलाह दी गई है। बहनों को पूजा की थाली तैयार करते समय रोली या चंदन के साथ शुद्ध केसर का प्रबंध पहले से रखना चाहिए।\n• रिश्तों में सौहार्द: शास्त्रों में वर्णित इन सरल उपायों से पारिवारिक संबंधों में सकारात्मक ऊर्जा और परस्पर प्रेम बढ़ता है। यह विधान भाई और बहन दोनों के जीवन में साल भर आर्थिक और मानसिक स्थिरता लाने में सहायक माना गया है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nहिंदू धर्मशास्त्रों में शुभ कार्यों के लिए भद्रा रहित काल और प्रथम पूज्य गणेश जी की आराधना को अनिवार्य माना गया है, जिसके चलते यह विशेष परंपरा निभाई जाती है।\n\n• भद्रा का त्याग: पौराणिक मान्यताओं में भद्रा काल को अशुभ और विघ्नकारक माना गया है, जिसमें मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। इस वर्ष पूर्णिमा तिथि पर भद्रा का प्रभाव न होने के कारण यह दिन स्वतः रक्षासूत्र बांधने के लिए अत्यंत मंगलकारी बन गया है।\n• गणेश पूजन की महत्ता: सनातन धर्म में किसी भी नए और शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश के पूजन से होती है। राखी को पहले उनके चरणों में समर्पित करने से रिश्ते में आने वाली हर बाधा दूर होती है और शुभ फल प्राप्त होता है।\n• गुरु ग्रह का प्रभाव: केसर को देवगुरु बृहस्पति का कारक माना जाता है, जो बुद्धि, समृद्धि और धर्म के प्रतिनिधि हैं। भाई के माथे पर केसर का तिलक लगाने का उद्देश्य उनकी कुंडली में गुरु के अनुकूल प्रभाव को जाग्रत करना है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. इस वर्ष रक्षाबंधन का त्योहार किस तारीख को मनाया जाएगा?\nइस वर्ष सावन माह की पूर्णिमा तिथि के अवसर पर रक्षाबंधन का पावन पर्व 09 अगस्त को मनाया जाएगा।\n\n2. क्या इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया रहेगा?\nनहीं, इस वर्ष रक्षाबंधन के दिन भद्रा का अशुभ साया नहीं रहेगा, जिससे यह दिन अत्यंत शुभ माना जा रहा है।\n\n3. राखी बांधने से एक दिन पहले बहनों को क्या उपाय करना चाहिए?\nरक्षाबंधन से एक दिन पहले शाम के समय राखी को घर के मंदिर में भगवान गणेश या कुलदेवी-देवता के समक्ष समर्पित कर देना चाहिए।\n\n4. भाई को किस चीज का तिलक लगाना ज्योतिषीय दृष्टि से लाभकारी बताया गया है?\nरक्षासूत्र बांधते समय भाई के माथे पर केसर का तिलक लगाना चाहिए, जिससे गुरु ग्रह मजबूत होता है और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।",
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  "category": "अध्यात्म",
  "publishedAt": "2026-10-21",
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