# सनातन परंपरा से प्रभावित 17 रूसी श्रद्धालुओं ने गयाजी में किया पिंडदान, अब चार धाम दर्शन की तैयारी

> रूस से आए 17 विदेशी श्रद्धालुओं के दल ने बिहार के गयाजी पहुंचकर विष्णुपद और अक्षय वट में अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया।

**Type:** article · **Category:** अध्यात्म · **Published:** 2026-10-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/spirituality/sanatana-parnpara-se-prabhavita-17-russian-shraddhaluon-ne-gayaji-men-kiya-pindadana-aba-char-dham-darshana-ki-taiyari-44942 · **Language:** Hindi
**Tags:** गयाजी, पिंडदान, पितृपक्ष मेला, रूस, विष्णुपद मंदिर, अक्षय वट, चार धाम यात्रा, सनातन धर्म

बिहार की ऐतिहासिक और पावन नगरी गया में आयोजित पितृपक्ष मेले के दौरान सनातन परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिला। इस वर्ष आयोजित मेले में देश के कोने-कोने के साथ-साथ विदेशों से भी भारी संख्या में लोग अपने पूर्वजों के तर्पण के लिए पहुंचे हैं। इसी क्रम में गुरुवार, 18 सितंबर को रूस से आए 17 विदेशी तीर्थयात्रियों के एक विशेष दल ने गयाजी की धरती पर पारंपरिक वैदिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए पिंडदान संपन्न किया।

## विष्णुपद और अक्षय वट में संपन्न हुआ कर्मकांड
रूस से भारत पहुंचे इन 17 तीर्थयात्रियों के समूह में 14 महिलाएं शामिल थीं। पवित्र नगरी में अनुष्ठान के दौरान सभी श्रद्धालु पूरी तरह से भारतीय वेशभूषा में सजे-धजे नजर आए और सभी ने गले में रुद्राक्ष की माला धारण कर रखी थी। आचार्य माधव के मार्गदर्शन और नेतृत्व में इस पूरे धार्मिक अनुष्ठान को विधि-विधान के साथ पूरा कराया गया। श्रद्धालुओं ने गयाजी के अति पवित्र विष्णुपद मंदिर परिसर तथा अक्षय वट वेदी पर बैठकर अपने पितरों की मोक्ष प्राप्ति के लिए पिंडदान के सभी जरूरी नियम पूरे किए। दल के साथ स्थानीय व्यवस्थाओं को संभालने के लिए गाइड भी मौजूद रहे।

## कोविड काल से लगातार जारी है भारत यात्रा का सिलसिला
तीर्थयात्रियों के गाइड जितेंद्र तंवर ने इस दल के बारे में महत्वपूर्ण विवरण साझा करते हुए स्पष्ट किया कि ये सभी विदेशी नागरिक रूस के निवासी हैं। सनातन धर्म के प्रति इनकी गहरी आस्था और अटूट लगाव है, जिसके चलते यह समूह लंबे समय से भारत से निरंतर जुड़ा हुआ है। वर्ष 2020 के आसपास कोविड महामारी के दौर से ही ये लोग लगातार भारत भ्रमण पर आ रहे हैं और हर साल कम से कम दो बार भारत के विभिन्न पावन तीर्थों की यात्रा अनिवार्य रूप से करते हैं। अपनी इसी धार्मिक यात्रा के क्रम में वे इसी वर्ष फरवरी महीने में राजस्थान के प्रसिद्ध पुष्कर तीर्थ भी पहुंचे थे, जहां उन्होंने विधि-विधान से विशेष पूजा-अर्चना की थी। यह दल भारत आने पर सामान्य पर्यटन स्थलों के बजाय केवल धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व वाले तीर्थों का ही रुख करता है और विशेष रूप से सनातन परंपराओं का निष्ठापूर्वक पालन करता है।

## शास्त्रों का अध्ययन और आगामी चार धाम यात्रा
गाइड जितेंद्र तंवर के अनुसार, सनातन धर्म के संदर्भ में इस विदेशी समूह की समझ बेहद व्यापक है। दल के सभी सदस्य भगवान शिव के अनन्य उपासक हैं और उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता तथा विष्णु पुराण जैसे प्रमुख हिंदू धर्मग्रंथों का गहन अध्ययन किया है। गयाजी में अनुष्ठान संपन्न करने से ठीक दो दिन पहले यह पूरा दल यहां पहुंचा था। पितरों के मोक्ष का विधान संपन्न होने के बाद अब यह समूह अपनी अगली आध्यात्मिक यात्रा पर निकलने की तैयारी में है। तय कार्यक्रम के अनुसार, गयाजी से प्रस्थान करने के ठीक 2 दिन बाद यह सभी श्रद्धालु उत्तराखंड स्थित चार धाम, यानी केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की संयुक्त तीर्थ यात्रा प्रारंभ करेंगे।

## उड़ीसा से जुड़ी हैं एक परिवार की जड़ें
इस पूरे दल की एक और खास बात यह सामने आई कि इनमें शामिल एक यात्री का पारिवारिक नाता सीधे भारत से जुड़ा हुआ है। यात्रा दल से जुड़े लोगों ने जानकारी दी कि परिवार के पूर्वज मूल रूप से भारत के उड़ीसा राज्य के रहने वाले थे, जो समय के साथ रूस जाकर बस गए थे। उसी परिवार की एक महिला वंशज अपने पूर्वजों का तर्पण और पिंडदान करने के उद्देश्य से इस बार गयाजी पहुंची हैं। समूह के सभी सदस्य पहली बार गयाजी के दर्शन करने पहुंचे थे। इस अवसर पर तीर्थयात्रियों ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि गयाजी आकर उन्हें अत्यंत सुखद और शांतिपूर्ण अनुभव हुआ है, क्योंकि सनातन परंपरा में यह स्थान पितरों के पिंडदान और मोक्ष के लिए सबसे पावन और सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस वर्ष के पूरे पितृपक्ष मेले के दौरान कुल मिलाकर 25 लाख से अधिक श्रद्धालु गयाजी पहुंच चुके हैं।

## इसका आप पर असर
यह घटना वैश्विक स्तर पर भारतीय धार्मिक पर्यटन और सनातन परंपराओं की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाती है।

- **भारत में:** विदेशों से श्रद्धालुओं के नियमित आगमन से गयाजी, पुष्कर और चार धाम जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों पर धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलता है। इससे स्थानीय पुरोहितों, गाइडों और आतिथ्य सत्कार से जुड़े सेवा प्रदाताओं को निरंतर आजीविका मिलती है।
- **बिहार में:** गयाजी में 25 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के जुटने से शहर के परिवहन, लॉजिस्टिक्स और नागरिक सुविधाओं पर सीधा असर पड़ता है। मेले के दौरान तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ के चलते यात्रियों को अग्रिम रूप से ठहरने और दर्शन की योजना बनानी चाहिए।
- **वैश्विक तीर्थयात्रियों के लिए:** सनातन शास्त्रों और परंपराओं के प्रति विदेशी नागरिकों की रुचि यह दिखाती है कि भारतीय अनुष्ठान सीमाओं से परे अपनाए जा रहे हैं। अपनी सांस्कृतिक जड़ों से दूर रह रहे प्रवासी वंशज भी अपने पितरों के मोक्ष के लिए भारत का रुख कर रहे हैं।
- **आगामी यात्राओं के लिए:** गया से सीधे चार धाम जाने वाले दलों की सक्रियता पर्वतीय तीर्थों में भी मौसम और यात्रा मार्गों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही को बढ़ाती है। यात्रा पर निकलने वाले अन्य यात्रियों को संबंधित तीर्थ क्षेत्रों के आधिकारिक दिशानिर्देशों पर नजर रखनी चाहिए।

## ऐसा क्यों हुआ
यह अनुष्ठान पितृपक्ष मेले के दौरान हिंदू धर्म में पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए निर्धारित पारंपरिक विधानों के तहत संपन्न हुआ।

- **पितृपक्ष की धार्मिक महत्ता:** सनातन परंपरा में आश्विन मास के पितृपक्ष को पूर्वजों के तर्पण और पिंडदान के लिए वर्ष का सबसे पवित्र समय माना जाता है। गयाजी के विष्णुपद और अक्षय वट को शास्त्रों में पितृ मुक्ति का प्रधान केंद्र बताया गया है।
- **सनातन परंपरा के प्रति आस्था:** रूसी श्रद्धालुओं का यह दल भगवान शिव का अनन्य भक्त है और नियमित रूप से भगवत गीता व विष्णु पुराण का अध्ययन करता रहा है। इसी गहरी आध्यात्मिक आस्था के कारण उन्होंने अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए गयाजी आकर अनुष्ठान करने का निर्णय लिया।
- **पारिवारिक जुड़ाव:** दल में शामिल एक महिला श्रद्धालु के पूर्वज मूल रूप से उड़ीसा के निवासी थे जो बाद में रूस में बस गए थे। अपने परिवार की भारतीय जड़ों और पूर्वजों की मुक्ति के उद्देश्य से उन्होंने इस तीर्थयात्रा में भाग लिया।

## सवाल-जवाब

### 1. रूस से आए कितने श्रद्धालुओं ने गयाजी में पिंडदान किया?
रूस से आए 17 तीर्थयात्रियों के दल ने गयाजी में पिंडदान किया, जिसमें 14 महिलाएं शामिल थीं।

### 2. पिंडदान का अनुष्ठान गयाजी में किन स्थानों पर संपन्न कराया गया?
यह अनुष्ठान गयाजी के पवित्र विष्णुपद मंदिर परिसर और अक्षय वट में आचार्य माधव के नेतृत्व में संपन्न हुआ।

### 3. इस वर्ष पितृपक्ष मेले में गयाजी में कुल कितने श्रद्धालु पहुंचे हैं?
इस वर्ष के पितृपक्ष मेले में देश और दुनिया भर से 25 लाख से अधिक श्रद्धालु गयाजी पहुंचे हैं।

### 4. रूसी तीर्थयात्री कब से नियमित रूप से भारत आ रहे हैं?
यह दल वर्ष 2020 के आसपास कोविड काल से लगातार भारत आ रहा है और साल में कम से कम दो बार भारत के धार्मिक स्थलों पर जाता है।

### 5. गयाजी के बाद यह दल किस यात्रा पर निकलने वाला है?
गयाजी में पिंडदान पूरा करने के 2 दिन बाद यह दल केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की चार धाम यात्रा शुरू करेगा।

### 6. क्या इस दल के किसी सदस्य का पारिवारिक नाता भारत से है?
हाँ, दल में शामिल एक यात्री के पूर्वज मूल रूप से उड़ीसा के रहने वाले थे, जो बाद में रूस में जाकर बस गए थे।

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