# सावन के दूसरे सोमवार पर सोम प्रदोष का विशेष योग, जानें 10 अगस्त 2026 के शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

> सावन मास के दूसरे सोमवार पर सोम प्रदोष और कामिका एकादशी पारण का दुर्लभ संयोग बना है। जानिए दिनभर के शुभ-अशुभ मुहूर्त, पंचांग गणना और रुद्राभिषेक की संपूर्ण विधि।

**Type:** article · **Category:** अध्यात्म · **Published:** 2026-09-28 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/spirituality/savana-ke-dusare-somavara-para-som-pradosh-ka-vishesha-yoga-janen-10-august-2026-ke-shubha-muhurta-aura-pujana-vidhi-39740 · **Language:** Hindi
**Tags:** सावन सोमवार, सोम प्रदोष व्रत, आज का पंचांग, कामिका एकादशी पारण, शिव पूजा विधि, शुभ मुहूर्त 10 अगस्त

पवित्र श्रावण मास के दूसरे सोमवार को एक अत्यंत दुर्लभ और फलदायी आध्यात्मिक संयोग बन रहा है। इस दिन सावन सोमवार के साथ-साथ सोम प्रदोष व्रत और कामिका एकादशी का पारण भी हो रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, छह साल के लंबे अंतराल के बाद ऐसा अनूठा अवसर सामने आया है, जब यह दोनों महत्वपूर्ण धार्मिक तिथियां एक साथ पड़ रही हैं। पंचांग के अनुसार 10 अगस्त 2026 को सावन कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि सुबह 08:00 बजे तक रहेगी, जिसके उपरांत त्रयोदशी तिथि का आगमन होगा। महादेव की साधना, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक के लिए यह दिन अत्यंत मंगलकारी माना गया है।

## ग्रह और नक्षत्रों की चाल
इस पावन तिथि पर आकाशीय नक्षत्रों और ग्रहों की स्थिति भी अत्यंत विशिष्ट है। चंद्रमा दोपहर 12:26 बजे तक आर्द्रा नक्षत्र में गोचर करेंगे, जिसके बाद पुनर्वसु नक्षत्र का प्रभाव शुरू हो जाएगा। वहीं सूर्य देव कर्क राशि में अश्लेषा नक्षत्र के भीतर उपस्थित रहेंगे। इसके साथ ही चंद्रमा का संचरण मिथुन राशि से प्रारंभ होकर आगे कर्क राशि की तरफ बढ़ेगा। इस दिन वज्र योग रात 10:27 बजे तक रहेगा और इसके तुरंत पश्चात सिद्धि योग प्रभावी होगा। दिन के करणों पर दृष्टि डालें तो सुबह 08:00 बजे तक तैतिल करण रहेगा, जिसके उपरांत शाम 06:27 बजे तक गर करण सक्रिय रहेगा।

## दिन के मुख्य खगोलीय समय
सावन के इस दूसरे सोमवार को दिन की शुरुआत सुबह 06:05 बजे सूर्योदय के साथ होगी, जबकि सूर्यास्त शाम 06:59 बजे दर्ज किया जाएगा। वहीं चंद्रोदय रात 03:00 बजे होगा, जिसे पंचांग सारिणी में 11 अगस्त को तड़के 03:57 बजे भी दर्शाया गया है। चंद्रमा का अस्त अगले दिन शाम को 05:14 बजे होगा। दोपहर 12:27 बजे तक चंद्रमा के आर्द्रा नक्षत्र में रहने के कारण जल तत्व से संबंधित शिव आराधना का प्रभाव दोगुना हो जाता है। इस पूरे कालखंड में भगवान आशुतोष के प्रति समर्पण साधकों को विशेष मानसिक शांति प्रदान करता है।

## शिव पूजा और जलाभिषेक की प्रामाणिक विधि
धार्मिक परंपरा के अनुसार सोमवार को पड़ने वाले प्रदोष को सोम प्रदोष कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक उपवास रखने और शाम के समय प्रदोष काल में शिव उपासना करने से समस्त कष्टों का निवारण होता है। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। इसके उपरांत भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करते हुए शिवलिंग पर सबसे पहले शुद्ध शीतल जल अर्पित करें।

इसके बाद दूध, दही, शहद और गंगाजल के पवित्र मिश्रण से शिवलिंग का अभिषेक किया जा सकता है। अभिषेक संपन्न होने पर शिवलिंग पर सुगंधित चंदन और अक्षत लगाएं। फिर भगवान भोलेनाथ को प्रिय बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और अन्य सफेद पुष्प श्रद्धापूर्वक अर्पित करें। पूजन स्थल पर धूप और दीप प्रज्वलित कर पंचाक्षरी मंत्र ॐ नमः शिवाय का अनवरत जाप करें। इसके साथ ही शिव चालीसा और रुद्राष्टक का पाठ करना अत्यंत कल्याणकारी फल देता है। शाम के समय प्रदोष काल में एक बार पुनः दीप जलाकर आरती करें और परिवार के कल्याण तथा उत्तम स्वास्थ्य की प्रार्थना करें। अविवाहित जन श्रेष्ठ जीवनसाथी पाने के लिए यह व्रत करते हैं, जबकि विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य और पारिवारिक सुख-शांति के उद्देश्य से आराधना करती हैं।

## 10 अगस्त 2026 के प्रमुख शुभ मुहूर्त
शुभ कार्यों और आध्यात्मिक अनुष्ठानों के लिए पंचांग में विशिष्ट मुहूर्तों का निर्धारण किया गया है, जो इस प्रकार हैं

- **ब्रह्म मुहूर्त:** सुबह 04:23 बजे से सुबह 05:06 बजे तक
- **अभिजीत मुहूर्त:** दोपहर 12:01 बजे से दोपहर 12:54 बजे तक
- **विजय मुहूर्त:** दोपहर 02:40 बजे से दोपहर 03:33 बजे तक
- **गोधूलि मुहूर्त:** शाम 07:06 बजे से शाम 07:27 बजे तक
- **निशिता मुहूर्त:** रात 12:06 बजे से रात 12:49 बजे तक (11 अगस्त की मध्यरात्रि)
- **शिववास स्थिति:** सुबह 08:00 बजे तक भगवान शिव नंदी पर विराजमान रहेंगे, इसके बाद 11 अगस्त को सुबह 04:54 बजे तक भोजन में वास रहेगा।

## अशुभ समय और वर्जित काल
किसी भी नए कार्य या अनुष्ठान के प्रारंभ में नकारात्मक समय का त्याग करना श्रेयस्कर माना जाता है

- **राहुकाल:** सुबह 07:28 बजे से सुबह 09:08 बजे तक
- **यमगण्ड:** सुबह 10:47 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक
- **गुलिक काल:** दोपहर 02:07 बजे से दोपहर 03:46 बजे तक
- **दुर्मुहूर्त:** दोपहर 12:54 बजे से दोपहर 01:47 बजे तक
- **विडाल योग:** दोपहर 12:26 बजे से अगले दिन सुबह 05:49 बजे (11 अगस्त) तक
- **वर्ज्य:** रात 11:18 बजे से रात 12:44 बजे तक (11 अगस्त)
- **भद्रा:** तड़के 04:54 बजे से सुबह 05:49 बजे तक (11 अगस्त)

## इसका आप पर असर
सावन के दूसरे सोमवार और सोम प्रदोष के इस दुर्लभ संयोग से व्रत और धार्मिक दिनचर्या की योजना बनाने वाले श्रद्धालुओं को सही समय की स्पष्टता मिलती है।

- **पूजन समय:** रुद्राभिषेक और विशेष जलाभिषेक का संकल्प सुबह 08:00 बजे से पहले या अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 12:01 बजे से 12:54 बजे के बीच पूरा करना सबसे उपयुक्त रहेगा। इस अवधि में शिववास की अनुकूल स्थिति पूजा को निर्विघ्न बनाती है।
- **शाम की साधना:** सोम प्रदोष की मुख्य पूजा शाम को गोधूलि काल में 07:06 बजे से 07:27 बजे के मध्य संपन्न करनी चाहिए। यह समय प्रदोष व्रत के संकल्प और दीपदान के लिए सर्वोपरि माना गया है।
- **राहुकाल से बचाव:** किसी भी नए कार्य की शुरुआत या अनुष्ठान का आरंभ सुबह 07:28 बजे से 09:08 बजे के बीच करने से बचें। इस दौरान राहुकाल प्रभावी रहेगा।
- **पारण का नियम:** कामिका एकादशी का व्रत रखने वाले श्रद्धालु सुबह 08:00 बजे तक द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले अपना पारण पूरा कर सकते हैं। समय का ध्यान रखने से व्रत का पूर्ण फल सुरक्षित रहता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह दुर्लभ धार्मिक संयोग चंद्र मास की तिथियों, सौर नक्षत्र चाल और वार के विशेष खगोलीय संयोग से निर्मित हुआ है। सावन के महीने में सोमवार का दिन और त्रयोदशी तिथि का एक ही समय पर आना एक विशिष्ट चक्र का निर्माण करता है।

- **छह वर्ष का खगोलीय अंतराल:** सौर और चंद्र पंचांग के आपसी समायोजन के चलते कामिका एकादशी पारण, सावन का दूसरा सोमवार और प्रदोष व्रत की तिथि छह साल बाद एक ही दिन एकत्र हुई हैं। तिथियों के क्षय और वृद्धि के कारण यह समकालिकता हर वर्ष संभव नहीं होती।
- **सोमवार और त्रयोदशी का संगम:** जब भी त्रयोदशी तिथि सोमवार के दिन प्रदोष काल में उपस्थित रहती है, वह स्वतः सोम प्रदोष में रूपांतरित हो जाती है। 10 अगस्त को सुबह 08:00 बजे द्वादशी समाप्त होकर त्रयोदशी का आरंभ इसे सोम प्रदोष का स्वरूप प्रदान करता है।
- **नक्षत्रों का परिवर्तन:** सूर्य के कर्क राशि में अश्लेषा नक्षत्र में उपस्थिति और चंद्रमा का मिथुन से कर्क की ओर आर्द्रा के बाद पुनर्वसु में गमन इस पूरे दिन के पंचांगीय स्वरूप को निर्धारित करता है।

## सवाल-जवाब

### 1. 10 अगस्त 2026 को सावन का कौन सा सोमवार है?
यह सावन मास का दूसरा सोमवार है, जिस दिन सोम प्रदोष व्रत और कामिका एकादशी पारण का दुर्लभ संयोग भी बना है।

### 2. 10 अगस्त 2026 को द्वादशी और त्रयोदशी तिथि का समय क्या है?
द्वादशी तिथि सुबह 08:00 बजे तक रहेगी, जिसके बाद त्रयोदशी तिथि शुरू होकर 11 अगस्त को सुबह 04:54 बजे तक चलेगी।

### 3. आज के दिन राहुकाल कब से कब तक रहेगा?
राहुकाल सुबह 07:28 बजे से लेकर सुबह 09:08 बजे तक रहेगा, जिसमें शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।

### 4. अभिजीत मुहूर्त और गोधूलि मुहूर्त का समय क्या है?
अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:01 बजे से 12:54 बजे तक रहेगा, जबकि गोधूलि मुहूर्त शाम 07:06 बजे से 07:27 बजे तक रहेगा।

### 5. इस दिन शिववास की स्थिति क्या है?
भगवान शिव सुबह 08:00 बजे तक नंदी पर विराजमान रहेंगे और उसके बाद 11 अगस्त को तड़के 04:54 बजे तक भोजन में वास करेंगे।

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