# शारदीय नवरात्रि 2025 में 10 दिनों का होगा शक्ति पर्व, तिथियों की गणना और पूजा का पूरा कैलेंडर

> वर्ष 2025 में शारदीय नवरात्रि की अवधि 10 दिनों तक रहेगी क्योंकि पंचांगीय गणना के अनुसार तृतीया तिथि का विस्तार दो दिनों तक हो रहा है। उत्सव का शुभारंभ 22 सितंबर को कलश स्थापना के साथ होगा और 2 अक्टूबर को विजयादशमी पर प्रतिमा विसर्जन के साथ इसका समापन होगा।

**Type:** article · **Category:** अध्यात्म · **Published:** 2026-10-10 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/spirituality/shardiya-navratri-2025-men-10-dinon-ka-hoga-shakti-parva-tithiyon-ki-ganana-aura-puja-ka-pura-kailendara-46123 · **Language:** Hindi
**Tags:** दुर्गा पूजा 2025, शारदीय नवरात्रि, घटस्थापना मुहूर्त, संधि पूजा, विजयादशमी, दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय

वैदिक पंचांग के अनुसार आगामी शारदीय नवरात्रि के उत्सव में तिथियों के विशेष संयोग के कारण यह अनुष्ठान नौ की बजाय पूरे 10 दिनों तक चलेगा। पंचांग गणना के आधार पर तृतीया तिथि दो दिवस तक प्रभावी रहने से उत्सव की कालावधि में एक दिन की वृद्धि दर्ज की गई है। इस धार्मिक अनुष्ठान का आरंभ 22 सितंबर 2025, सोमवार से घटस्थापना के साथ होगा और इसका समापन 1 अक्टूबर 2025, बुधवार तक चलने के पश्चात अगले दिन विजयादशमी पर संपन्न होगा। पूर्वोत्तर और पूर्वी राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल, असम तथा ओडिशा में इस पर्व की भव्यता देखते ही बनती है, जहाँ विशाल पंडालों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से शक्ति स्वरूपा का वंदन किया जाता है।

## कलश स्थापना एवं प्रमुख दिनों की दैनिक अनुष्ठान सारणी
कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर ज्योतिष विभाग के विभागाध्यक्ष डॉक्टर कुणाल कुमार झा के विवरण के अनुसार, 22 सितंबर 2025 को सोमवार के दिन पहले नवरात्र पर घटस्थापना और कलश पूजन का अनुष्ठान किया जाएगा। इसके उपरांत 23 सितंबर को हेमंत पूजा की परंपरा निभाई जाएगी। तिथिवार उत्सव आगे बढ़ते हुए 28 सितंबर को गज पूजा और संध्या काल में बेलन्योती का विधान पूरा किया जाएगा। अगले दिन यानी 29 सितंबर को पत्रिका प्रवेश और महारात्रि निशा पूजा संपन्न की जाएगी। उत्सव के अंतिम चरण में 2 अक्टूबर को अपराजिता पूजा, यात्रा और विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा।

## षष्ठी तिथि पर मूर्ति स्थापना और बिल्व निमंत्रण
सार्वजनिक दुर्गा पूजा का मुख्य उल्लास षष्ठी तिथि यानी 28 सितंबर 2025, रविवार से व्यापक स्तर पर प्रारंभ होता है। इस दिन साधक मां कात्यायनी की आराधना करते हैं और पूजा पंडालों में देवी की प्रतिमा स्थापना का कार्य संपन्न किया जाता है। मूर्ति प्रतिष्ठा के लिए प्रातः 06:08 बजे से 10:30 बजे तक का समय सबसे शुभ मुहूर्त बताया गया है। इसी तिथि पर देवी को आमंत्रित करने के उद्देश्य से बिल्व पत्र निमंत्रण की प्राचीन परंपरा निभाई जाती है तथा पंडालों की सज्जा को अंतिम रूप दिया जाता है। नवपत्रिका प्रवेश के माध्यम से पूजा की वास्तविक शास्त्रीय शुरुआत मानी जाती है।

## अष्टमी-नवमी का संधिकाल और 108 दीपों की संधि पूजा
दुर्गा पूजा के सबसे प्रभावशाली और आध्यात्मिक अनुष्ठानों में संधि पूजा का स्थान सर्वोपरि है, जिसका आयोजन 30 सितंबर 2025, मंगलवार को अष्टमी तिथि पर होगा। यह पूजा अष्टमी के समापन और नवमी के आरंभ के संधिकाल में आयोजित होती है, जिसकी समय सीमा रात्रि 07:36 बजे से 08:24 बजे तक निर्धारित है। इस 48 मिनट की अवधि में मां दुर्गा के उग्र और संहारक चामुंडा स्वरूप की विधिवत वंदना की जाती है। इस विशेष कालखंड में 108 कमल पुष्प और 108 प्रज्वलित दीप अर्पित कर देवी का आह्वान किया जाता है, जो अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक माना गया है।

## विजयादशमी और प्रतिमा विसर्जन की विदाई बेला
महिषासुरमर्दिनी के रूप में मां दुर्गा असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की शाश्वत विजय का संदेश देती हैं। यह समूचा पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित न रहकर नारी शक्ति के सम्मान और आंतरिक ऊर्जा के जागरण का अवसर भी प्रदान करता है। अनुष्ठान का समापन 2 अक्टूबर 2025, गुरुवार को विजयादशमी के पावन अवसर पर होगा। इस दिन अपराजिता पूजन के पश्चात नदियों और तालाबों के पवित्र जल में मां दुर्गा की मृण्मयी प्रतिमाओं का विसर्जन कर उन्हें भावभीनी विदाई दी जाएगी।

## इसका आप पर असर
साल 2025 में शारदीय नवरात्रि का उत्सव 10 दिनों तक चलने से श्रद्धालुओं, पूजा समितियों और यात्रियों को अपनी योजनाओं में बदलाव करना होगा।

- **भारत में:** पंचांगीय परिवर्तन से देश भर में उपवास और पूजा के नियम 10 दिनों तक लागू रहेंगे। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को अपने पारण और अनुष्ठानों की तिथियों का पहले से प्रबंधन करना होगा।
- **पूर्वी भारत में:** पश्चिम बंगाल, असम और ओडिशा के पंडाल आयोजकों को दर्शनार्थियों के लिए अतिरिक्त दिन की व्यवस्था करनी होगी। स्थानीय प्रशासन और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को भीड़ नियंत्रण हेतु विस्तारित सुरक्षा योजनाएं बनानी होंगी।
- **पूजा सामग्री बाजार:** 108 कमल के फूलों और 108 दीपों की मांग संधि पूजा के लिए 30 सितंबर की शाम को चरम पर रहेगी। खरीदारों को बाजार में बढ़ती मांग के मद्देनजर सामग्री की अग्रिम बुकिंग करानी होगी।
- **यात्रा और अवकाश:** 2 अक्टूबर को गांधी जयंती और विजयादशमी एक साथ होने से यात्रा करने वालों को लंबी छुट्टियां मिलेंगी। रेल और सड़क मार्ग से यात्रा की योजना बनाने वाले यात्रियों को टिकटों की व्यवस्था पहले से पूरी करनी होगी।

## ऐसा क्यों हुआ
वर्ष 2025 में नवरात्रि की अवधि में एक दिन की बढ़ोतरी ज्योतिषीय पंचांग गणना और तिथियों के खगोलीय संचलन पर आधारित है।

- **तृतीया तिथि का विस्तार:** सूर्योदय कालीन गणना के अनुसार पंचांग में तृतीया तिथि दो दिनों तक प्रभावी रह रही है। जब कोई तिथि दो दिवसों तक व्याप्त रहती है, तो पूरे उत्सव का चक्र एक दिन आगे बढ़ जाता है।
- **शास्त्रीय विधान:** वैदिक ज्योतिष में उदयातिथि के सिद्धांत का कड़ाई से पालन किया जाता है। इसी शास्त्रीय गणना के कारण नौ दिवसीय पर्व स्वाभाविक रूप से 10 दिनों के चक्र में परिवर्तित हो गया है।
- **संधिकाल का समय निर्धारण:** अष्टमी और नवमी तिथि के संगम पर संधि पूजा का निर्धारण ग्रहों और चंद्रमा की सटीक चाल पर निर्भर करता है। इस गणना से 30 सितंबर की रात्रि 07:36 बजे से 08:24 बजे का समय मां चामुंडा की उपासना के लिए निश्चित हुआ है।

## सवाल-जवाब

### 1. वर्ष 2025 में शारदीय नवरात्रि कब से कब तक मनाई जाएगी?
यह पावन पर्व 22 सितंबर 2025, सोमवार से शुरू होकर 1 अक्टूबर 2025, बुधवार तक चलेगा, जबकि प्रतिमा विसर्जन 2 अक्टूबर को होगा।

### 2. इस वर्ष नवरात्रि 9 के बजाय 10 दिनों की क्यों होगी?
पंचांग गणना के अनुसार तृतीया तिथि दो दिनों तक प्रभावी रहने के कारण नवरात्रि उत्सव की अवधि 10 दिनों की होगी।

### 3. षष्ठी तिथि पर मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है?
28 सितंबर 2025 को षष्ठी तिथि पर प्रतिमा स्थापना का उत्तम मुहूर्त सुबह 06:08 बजे से 10:30 बजे तक निर्धारित है।

### 4. संधि पूजा का समय और अनुष्ठान क्या है?
संधि पूजा 30 सितंबर 2025 की रात्रि 07:36 बजे से 08:24 बजे तक होगी, जिसमें 108 दीपों और 108 कमल पुष्पों से मां चामुंडा की विशेष आराधना की जाएगी।

### 5. विजयादशमी और प्रतिमा विसर्जन किस दिन होगा?
मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन 2 अक्टूबर 2025, गुरुवार को विजयादशमी के पावन पर्व पर नदियों और तालाबों में संपन्न किया जाएगा।

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