# शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा और मंगलवार व्रत का विशेष संयोग, देखें दैनिक पंचांग और शुभ समय

> 13 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्रि की तृतीया तिथि पर मां चंद्रघंटा और पवनपुत्र हनुमान की संयुक्त आराधना का योग बन रहा है। इस दिन के सभी शुभ मुहूर्त, राहुकाल, नक्षत्र और पूजा विधि की पूरी जानकारी यहां दी गई है।

**Type:** article · **Category:** अध्यात्म · **Published:** 2026-10-14 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/spirituality/shardiya-navratri-ke-tisare-dina-man-chandraghanta-ki-puja-aura-mngalavara-vrata-ka-vishesha-snyoga-dekhen-dainika-pnchanga-aura-s-47555 · **Language:** Hindi
**Tags:** आज का पंचांग, शारदीय नवरात्रि, मां चंद्रघंटा, मंगलवार व्रत, हनुमान पूजा, शुभ मुहूर्त, राहुकाल

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में 13 अक्टूबर 2026 को मंगलवार व्रत और शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन का महत्वपूर्ण धार्मिक संयोग बन रहा है। इस विशेष तिथि पर देवी दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की उपासना की जाएगी और साथ ही संकटमोचन हनुमानजी की विशेष पूजा-अर्चना का विधान संपन्न होगा। पंचांगीय गणना के अनुसार इस दिन आश्विन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि रात 11:27 बजे तक प्रभावी रहेगी, जिसके बाद चतुर्थी तिथि का आरंभ होगा। आकाश मंडल में विशाखा नक्षत्र 14 अक्टूबर की रात 01:43 बजे तक रहेगा। इसके अतिरिक्त प्रीति योग रात 08:24 बजे तक रहेगा, जिसके बाद आयुष्मान योग आरंभ होगा। करण में तैतिल सुबह 10:46 बजे तक रहेगा, जिसके उपरांत गर करण रात 11:27 बजे तक रहेगा और फिर वणिज करण का प्रभाव रहेगा। ग्रहों की स्थिति देखें तो सूर्य देव कन्या राशि में स्थित रहेंगे, जबकि चंद्रमा तुला राशि से निकलकर वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। इस दिन उत्तर दिशा का दिशाशूल प्रभावी रहेगा।

## धार्मिक महत्व और पूजा का फल
धार्मिक परंपरा में मंगलवार का दिन भगवान हनुमान और नवग्रहों में सेनापति माने जाने वाले मंगल ग्रह की उपासना के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। वहीं नवरात्रि के तीसरे दिन सिंहवाहिनी और मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र धारण करने वाली मां चंद्रघंटा की पूजा का विधान है। इन दोनों पावन अनुष्ठानों का एक ही दिन पड़ना भक्तों के लिए अत्यंत दुर्लभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन पूरे मनोयोग से व्रत रखने और दोनों शक्तियों की आराधना करने से भक्तों को असीम साहस, आत्मविश्वास, मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संबल मिलता है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन व्रत रखकर श्री हनुमान चालीसा का पाठ करने से जीवन के समस्त भय और विघ्न दूर होते हैं। इसके साथ ही कुंडली में यदि मंगल दोष का प्रभाव हो या मंगल ग्रह कमजोर स्थिति में हो, तो इस पूजा से उसके अशुभ प्रभावों में कमी आती है और मंगल ग्रह मजबूत होता है।

## मंगलवार व्रत और मां चंद्रघंटा की संयुक्त पूजा विधि
इस पावन दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि नित्यकर्मों से निवृत्त होना चाहिए। इसके बाद स्वच्छ लाल या नारंगी रंग के वस्त्र धारण करके पूजा और व्रत का संकल्प लेना चाहिए। पूजा स्थल पर भगवान हनुमान के समक्ष चमेली के तेल के 5 दीपक प्रज्वलित करने का विधान है। इसके उपरांत सिंदूर, चमेली का तेल और ताजे पुष्प बजरंगबली को अर्पित करने चाहिए। श्रद्धापूर्वक मिष्ठान या फलों का भोग लगाकर हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ करना चाहिए। इसके साथ ही नवरात्रि के तीसरे दिन के पूजन के अंतर्गत मां चंद्रघंटा की विधिवत चौकी सजाएं। माता रानी को लाल या पीले रंग के पुष्प, अक्षत, रोली और फल श्रद्धापूर्वक अर्पित करें। मां के समक्ष शुद्ध गाय के घी का दीपक जलाकर 'ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥' मंत्र का कम से कम 108 बार या यथाशक्ति जाप करना चाहिए और अंत में माता की आरती उतारनी चाहिए।

## दान-पुण्य और मंगल ग्रह की शांति के उपाय
ज्योतिषीय दृष्टि से मंगलवार के दिन किए गए पुण्य कार्यों का कई गुना फल प्राप्त होता है। इस दिन हनुमान चालीसा का पाठ करने के साथ-साथ किसी जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराने से हनुमानजी प्रसन्न होते हैं और कुंडली में मंगल ग्रह के शुभ फलों में वृद्धि होती है। इसके अलावा मंगल दोष के निवारण और शुभ ऊर्जा के प्रवाह के लिए इस दिन लाल रंग के वस्त्र या मसूर की दाल का दान करना विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। किसी भी नए और मांगलिक कार्य को करने से पूर्व दिन के शुभ और अशुभ समय का ध्यान रखना शास्त्रों में अनिवार्य बताया गया है।

## 13 अक्टूबर 2026 के शुभ मुहूर्त
धार्मिक अनुष्ठानों और शुभ कार्यों के संपादन के लिए इस दिन के शुभ मुहूर्त निम्नलिखित समय पर रहेंगे

- **ब्रह्म मुहूर्त:** सुबह 04:42 बजे से सुबह 05:31 बजे तक
- **अभिजीत मुहूर्त:** सुबह 11:45 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक
- **विजय मुहूर्त:** दोपहर 02:04 बजे से दोपहर 02:50 बजे तक
- **गोधूलि मुहूर्त:** शाम 05:55 बजे से शाम 06:20 बजे तक
- **अमृत काल:** शाम 04:14 बजे से शाम 05:57 बजे तक
- **निशिता मुहूर्त:** रात 11:43 बजे से देर रात 12:33 बजे (14 अक्टूबर) तक
- **शिववास स्थिति:** रात 11:27 बजे तक सभा में, उसके बाद क्रीड़ा में

## दिन के अशुभ समय और वर्जित काल
किसी भी मांगलिक कार्य, यात्रा या नए उपक्रम को शुरू करते समय अशुभ समय का त्याग करना श्रेयस्कर होता है। इस दिन के वर्जित काल इस प्रकार हैं

- **राहुकाल:** दोपहर 03:01 बजे से शाम 04:28 बजे तक
- **यमगण्ड:** सुबह 09:15 बजे से सुबह 10:41 बजे तक
- **गुलिक काल:** दोपहर 12:08 बजे से दोपहर 01:35 बजे तक
- **दुर्मुहूर्त:** सुबह 08:40 बजे से सुबह 09:26 बजे तक
- **विडाल योग:** सुबह 06:21 बजे से देर रात 01:43 बजे (14 अक्टूबर) तक
- **विंछुड़ो:** शाम 07:12 बजे से अगले दिन सुबह 06:22 बजे (14 अक्टूबर) तक
- **दिशाशूल:** उत्तर दिशा में रहेगा, इसलिए उत्तर की ओर यात्रा करने से बचें

## इसका आप पर असर
13 अक्टूबर 2026 को नवरात्रि के तीसरे दिन और मंगलवार व्रत का मेल पूजा, संकल्प और शुभ कार्यों के समय निर्धारण को प्रभावित करता है।

- **धार्मिक अनुष्ठान:** इस दिन मां चंद्रघंटा और बजरंगबली की पूजा एक साथ करने का अवसर मिलेगा। भक्त सुबह स्नान के बाद लाल या नारंगी वस्त्र पहनकर पूजा संपन्न कर सकते हैं।
- **समय प्रबंधन:** किसी भी नए कार्य की शुरुआत के लिए अभिजीत मुहूर्त सबसे श्रेष्ठ रहेगा। दोपहर 11:45 बजे से 12:31 बजे के बीच शुभ कार्य किए जा सकते हैं।
- **कार्य निषेध:** राहुकाल के दौरान महत्वपूर्ण आर्थिक या मांगलिक निर्णय टालने चाहिए। दोपहर 03:01 बजे से 04:28 बजे तक नया कार्य शुरू करने से बचना चाहिए।
- **यात्रा योजना:** मंगलवार को उत्तर दिशा में दिशाशूल होने के कारण इस ओर की यात्रा टालनी चाहिए। यदि यात्रा अपरिहार्य हो तो धार्मिक उपाय अपनाकर ही प्रस्थान करें।
- **दान और उपाय:** जरूरतमंदों को मसूर दाल और लाल वस्त्र देने से मंगल दोष के प्रभाव में कमी आती है। यह दान मंगलवार की दोपहर तक संपन्न करना लाभकारी माना जाता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह पंचांगीय स्थिति आश्विन शुक्ल तृतीया तिथि, मंगलवार के संयोग और ग्रहों के गोचर से निर्मित हुई है। खगोलीय चक्र और वैदिक गणनाओं के अनुसार तिथियों और नक्षत्रों का यह तालमेल विशिष्ट आध्यात्मिक ऊर्जा उत्पन्न करता है।

- **तिथि और नक्षत्र का मेल:** आश्विन शुक्ल तृतीया तिथि और विशाखा नक्षत्र के एक साथ आने से मां चंद्रघंटा की उपासना का विशेष दिन बना है। यह तिथि रात 11:27 बजे तक प्रभावी रहने के कारण दिनभर पूजन का अवसर देती है।
- **वार और पर्व का संयोग:** मंगलवार का दिन मंगल ग्रह और हनुमानजी से जुड़ा है, जो नवरात्रि के तीसरे दिन के साथ मिलकर दोहरा धार्मिक महत्व पैदा करता है। इस मिलन से देवी शक्ति और पवनपुत्र की आराधना एक ही दिन संभव हुई है।
- **ग्रहों का राशि परिवर्तन:** सूर्य के कन्या राशि में तथा चंद्रमा के तुला से वृश्चिक राशि में जाने के कारण मुहूर्त और चौघड़िया समय निर्धारित हुए हैं। इन्हीं ग्रहीय स्थितियों के आधार पर राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त के कालखंड तय होते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. 13 अक्टूबर 2026 को नवरात्रि के किस स्वरूप की पूजा की जाएगी?
इस दिन शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन के तहत मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की जाएगी।

### 2. इस दिन का सबसे शुभ अभिजीत मुहूर्त किस समय रहेगा?
अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:45 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक प्रभावी रहेगा।

### 3. 13 अक्टूबर 2026 को राहुकाल का समय क्या है?
इस दिन राहुकाल दोपहर 03:01 बजे से शाम 04:28 बजे तक रहेगा, जिस दौरान शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।

### 4. हनुमानजी की पूजा के लिए इस दिन क्या अर्पित करना चाहिए?
हनुमानजी के समक्ष चमेली के तेल के 5 दीपक जलाएं और सिंदूर, चमेली का तेल तथा पुष्प अर्पित करें।

### 5. इस दिन किस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए?
पंचांग के अनुसार इस दिन उत्तर दिशा का दिशाशूल है, इसलिए उत्तर दिशा की यात्रा करने से बचना चाहिए।

### 6. मंगल ग्रह की शांति के लिए इस दिन क्या दान करना शुभ माना गया है?
इस दिन जरूरतमंदों को मसूर की दाल या लाल वस्त्र दान करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

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