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  "title": "2036 ओलंपिक की तैयारी तेज, केंद्र सरकार ने खेलो इंडिया और खेल महासंघों के लिए 36,441 करोड़ रुपये मंजूर किए",
  "summary": "केंद्रीय मंत्रिमंडल ने खेलो इंडिया और राष्ट्रीय खेल महासंघों की सहायता के लिए अगले पांच वर्षों हेतु कुल 36,441 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट को हरी झंडी दे दी है।",
  "content": "नई दिल्ली में आयोजित एक अहम बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश के खेल इतिहास की सबसे बड़ी पहलों में से एक को आगे बढ़ाते हुए खेलो इंडिया योजना के विस्तार और राष्ट्रीय खेल महासंघों को मिलने वाली सहायता यानी एएनएसएफ के बजट को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत अगले पांच वर्षों की अवधि के लिए कुल 36,441 करोड़ रुपये के भारी-भरकम खर्च का प्रावधान किया गया है, जिसे आजादी के बाद का सबसे बड़ा और सबसे महत्वाकांक्षी खेल विकास कार्यक्रम करार दिया जा रहा है।\n\nखेलो इंडिया योजना के लिए भारी भरकम राशि आवंटित\nसरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार खेलो इंडिया योजना के लिए आगामी पांच वर्षों में 29,054 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। इस व्यापक योजना का मुख्य उद्देश्य देश के कोने-कोने से जमीनी स्तर पर छिपे हुए प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की खोज करना और उन्हें विश्व स्तरीय प्रशिक्षण देकर तैयार करना है। इसके पीछे सरकार का बड़ा लक्ष्य भारत को वैश्विक खेल पटल पर एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करना है, ताकि देश 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों और 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी की अपनी मजबूत दावेदारी को सफलतापूर्वक साकार कर सके।\n\nराष्ट्रीय खेल महासंघों के लिए वित्तीय सहायता\nइस बड़े वित्तीय पैकेज के दूसरे हिस्से के रूप में राष्ट्रीय खेल महासंघों यानी एनएसएफ को सहायता प्रदान करने के वास्ते अगले पांच वर्षों के लिए 7,387 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है। यहां यह बताना प्रासंगिक होगा कि वर्ष 2026-27 के लिए अकेले इस विशेष मद के तहत पहले 425 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान रखा गया था। सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बयान में इस बात पर जोर दिया गया है कि स्वीकृत किया गया यह नया बजट पिछले खेलो इंडिया कार्यक्रम की तुलना में लगभग आठ गुना अधिक है, जो देश के युवाओं के सर्वांगीण विकास, राष्ट्र निर्माण और भारत को एक वैश्विक खेल महाशक्ति के रूप में स्थापित करने के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को साफ तौर पर उजागर करता है।\n\nस्कूल स्तर पर खेलों को मजबूत करने की नई पहल\nदेश में स्कूली शिक्षा के शुरुआती दौर से ही खेल संस्कृति को बढ़ावा देने और उसे मजबूत करने के उद्देश्य से सरकार ने दो बिल्कुल नई पहलों की शुरुआत की है, जिन्हें खेलो इंडिया फीडर स्कूल और खेलो इंडिया उत्कृष्ट विद्यालय का नाम दिया गया है। इन दोनों ही नई पहलों का मूल उद्देश्य खेलों को औपचारिक और मुख्यधारा की शिक्षा के साथ जोड़ना है, ताकि कम उम्र में ही प्रतिभाशाली बच्चों की सटीक पहचान की जा सके और उन्हें एक व्यवस्थित तथा वैज्ञानिक ढांचे के तहत आगे बढ़ाया जा सके।\n\nकोचिंग, विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर जोर\nएएनएसएफ योजना के अंतर्गत वर्ष 2026-31 की आगामी अवधि के लिए देश के भारतीय खिलाड़ियों और पूरी खेल टीमों को उच्च स्तरीय कोचिंग, उन्नत खेल विज्ञान, आधुनिक खेल उपकरण, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण और बड़ी प्रतियोगिताओं में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए वित्तीय मदद दी जाएगी। साथ ही प्रशिक्षण शिविरों के आयोजन और विदेशी विशेषज्ञों की बहुमूल्य सेवाओं के लिए भी धन उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया है कि यह पहल ग्लोबल साउथ के देशों के साथ खेल सहयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के पारंपरिक और स्वदेशी खेलों का भी जोरदार प्रचार-प्रसार करेगी।\n\nविशेष श्रेणियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म को बढ़ावा\nइस पूरी योजना के तहत महिला खिलाड़ियों, पैरा-एथलीटों, स्वदेशी खेलों के साथ-साथ शांति, समावेशन और सामुदायिक विकास के एक सशक्त माध्यम के रूप में खेलों को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इसके अलावा इस विस्तृत योजना के दायरे में राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं के सफल आयोजन और भारत की धरती पर प्रमुख अंतरराष्ट्रीय खेल स्पर्धाओं की मेजबानी के लिए भी पर्याप्त वित्तीय सहायता प्रदान करने की व्यवस्था की गई है। खेल क्षेत्र में पारदर्शिता और तकनीक का उपयोग बढ़ाने के लिए एक एकीकृत डिजिटल स्पोर्ट्स प्लेटफॉर्म विकसित करने का भी प्रस्ताव रखा गया है, जिसके माध्यम से खिलाड़ियों का आधिकारिक डेटाबेस, खेल अवसंरचना, विभिन्न प्रतियोगिताएं, कोचिंग संसाधन, प्रतिभा का मूल्यांकन, वित्तीय सहायता और फिट इंडिया अभियान से जुड़ी तमाम महत्वपूर्ण जानकारियां एक ही मंच पर आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी।\n\nप्रतिभा खोज तंत्र और भविष्य की रूपरेखा\nसरकार का मानना है कि यह आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म देश में डेटा-आधारित योजना निर्माण को बढ़ावा देगा, प्रशासन व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाएगा और हर खिलाड़ी के व्यक्तिगत विकास में मददगार साबित होगा। सरकार ने पूरा विश्वास जताया है कि इस पुनर्गठित और वृहद योजना से भारत की दीर्घकालिक खेल महत्वाकांक्षाओं के लिए एक बहुत मजबूत और टिकाऊ आधार तैयार हो सकेगा, जिसमें ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की मेजबानी की देश की दावेदारी भी मजबूती से शामिल है। इसके अलावा योजना के तहत एक और बड़ा सुधार करते हुए मौजूदा खेलो इंडिया एथलीट्स कार्यक्रम के साथ ही इमर्जिंग खेलो इंडिया एथलीट्स नामक एक बिल्कुल नई श्रेणी भी बनाई जा रही है। देश के दूर-दराज के इलाकों से खेल प्रतिभाओं की खोज करने के वास्ते एक मजबूत राष्ट्रीय प्रतिभा खोज तंत्र भी विकसित किया जाएगा, जिसके तहत क्षेत्रीय समितियां, समर्पित स्काउट्स, हाई परफॉर्मेंस निदेशक और हाई परफॉर्मेंस मैनेजर मिलकर देशभर के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की लगातार खोज करेंगे, उनकी प्रगति पर पैनी नजर रखेंगे और उनके समग्र विकास में हरसंभव सहयोग प्रदान करेंगे।\n\nइसका आप पर असर\nयह निर्णय देश के युवाओं, उभरते खिलाड़ियों और खेल से जुड़े लोगों को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।\n\n• भारत में: देश भर के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को बेहतर कोचिंग, आधुनिक उपकरण और अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग के लिए वित्तीय सहायता और छात्रवृत्ति का सीधा लाभ मिलेगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. खेलो इंडिया और खेल महासंघों के लिए कुल कितने बजट को मंजूरी दी गई है?\nकेंद्रीय मंत्रिमंडल ने अगले पांच वर्षों के लिए कुल 36,441 करोड़ रुपये के खर्च को मंजूरी दी है।\n\n2. खेलो इंडिया योजना के लिए अगले पांच वर्षों में कितना आवंटन किया गया है?\nइस योजना के लिए अगले पांच वर्षों में 29,054 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।\n\n3. राष्ट्रीय खेल महासंघों की सहायता के लिए कितनी राशि निर्धारित की गई है?\nमहासंघों की सहायता के लिए अगले पांच वर्षों में 7,387 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।\n\n4. सरकार इस भारी निवेश के जरिए किन अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी करना चाहती है?\nसरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक खेल केंद्र बनाना है ताकि देश 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों और 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी की दावेदारी पेश कर सके।",
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  "category": "खेल",
  "publishedAt": "2026-08-03",
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    "खेलो इंडिया",
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