# 36 साल की उम्र में मनप्रीत कौर ने जीता कांस्य, एशियन गेम्स 2026 में 17.17 मीटर गोला फेंककर रचा नया इतिहास

> चार साल के डोपिंग प्रतिबंध और जीवन के संघर्षों को पीछे छोड़ते हुए 36 वर्षीय मनप्रीत कौर ने एशियन गेम्स 2026 में 17.17 मीटर के थ्रो के साथ शॉट पुट में कांस्य पदक जीत लिया.

**Type:** article · **Category:** खेल · **Published:** 2026-09-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/sports/36-sala-ki-umra-men-manpreet-kaur-ne-jita-kansya-asian-games-2026-men-17-17-mitara-gola-phenkakara-racha-naya-itihasa-38547 · **Language:** Hindi
**Tags:** मनप्रीत कौर, एशियन गेम्स 2026, शॉट पुट, भारतीय एथलेटिक्स, कांस्य पदक, गोला फेंक

अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर भारतीय एथलीटों के दृढ़ संकल्प की गूंज एक बार फिर सुनाई दी है. पंजाब के एक साधारण कृषक परिवार से निकलकर एशियन गेम्स 2026 के पोडियम तक पहुंचीं शॉट पुट खिलाड़ी मनप्रीत कौर ने भारत की झोली में कांस्य पदक डालकर देश का मान बढ़ाया है. 36 वर्ष की आयु में जब अधिकांश एथलीट संन्यास की योजना बनाने लगते हैं, तब मनप्रीत ने अपने चौथे प्रयास में 17.17 मीटर का शक्तिशाली थ्रो दर्ज कर तीसरा स्थान सुनिश्चित किया. यह पदक इस खेल महाकुंभ में भारत का कुल 21वां पदक बना. इसके साथ ही वह एशियन गेम्स के इतिहास में महिला शॉट पुट स्पर्धा में पदक हासिल करने वाली तीसरी भारतीय महिला खिलाड़ी बन गई हैं.

## खेतों से निकलकर राष्ट्रीय पटल पर बनाई मजबूत पहचान
पंजाब के ग्रामीण परिवेश में जन्मीं मनप्रीत कौर का पालन-पोषण एक किसान परिवार में हुआ. सीमित संसाधनों, साधारण सुविधाओं और कठिन आर्थिक परिस्थितियों के बीच उनके पिता की निरंतर मेहनत ने मनप्रीत को जीवन में जुझारू बनना सिखाया. बचपन से ही विपरीत हालातों से जूझने की ताकत रखने वाली मनप्रीत ने अपनी व्यक्तिगत पहचान गढ़ने के लिए खेल के मैदान की राह चुनी. उन्होंने ताकत, गति और तकनीक के सटीक समन्वय वाले खेल शॉट पुट को अपनाया. शारीरिक क्षमता और नियमित अभ्यास के बल पर उन्होंने काफी कम समय में घरेलू स्तर पर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की और राष्ट्रीय फलक पर भारतीय एथलेटिक्स दल का एक प्रमुख स्तंभ बन गईं.

## चार साल के डोपिंग प्रतिबंध का गहरा सदमा और वापसी की लड़ाई
सफलता के शिखर पर पहुंचने के बाद मनप्रीत कौर के करियर को उस वक्त भारी झटका लगा जब 2017 में वह डोपिंग परीक्षण में विफल पाई गईं. इस परीक्षण के बाद उन पर चार साल का कड़ा प्रतिबंध लगा दिया गया. एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के एथलीट के लिए जीवन के चार बेशकीमती साल मैदान और प्रतियोगिताओं से बाहर बिताना किसी करियर के अंत जैसा माना जाता है. खेल जगत के कई जानकारों ने यह मान लिया था कि मनप्रीत का सफर अब हमेशा के लिए थम चुका है. लेकिन इस कड़े दौर में भी उन्होंने अपना धैर्य नहीं खोया. उन्होंने घर पर रहकर खुद को शारीरिक रूप से दुरुस्त रखा, मानसिक दृढ़ता बनाए रखी और प्रतिबंध खत्म होने के दिन की तैयारी में निरंतर पसीना बहाती रहीं.

## प्रतिबंध समाप्ति के बाद अंतरराष्ट्रीय फलक पर दोबारा मजबूत उपस्थिति
चार वर्षों की अवधि पूरी होने के बाद जब मनप्रीत ने ट्रैक एंड फील्ड पर कदम रखा, तो उनका मकसद केवल प्रतिभागिता करना नहीं था बल्कि खेल जगत में अपनी खोई हुई साख और सम्मान को फिर से बहाल करना था. उन्होंने अपनी तकनीकी दक्षता और अनुशासन के जरिए खुद को साबित करने की दिशा में काम किया. बैंकॉक में संपन्न हुई 2023 एशियन चैंपियनशिप में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया. इस पदक ने उनके आत्मविश्वास में जान फूंक दी और यह संकेत दे दिया कि उनके भीतर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का दमखम अब भी बरकरार है. घरेलू टूर्नामेंटों में कई राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज रखने वाली मनप्रीत ने इसके बाद अपना पूरा ध्यान आगामी बड़े मंचों पर केंद्रित कर दिया.

## एशियन गेम्स 2026 के फाइनल में एक-एक थ्रो का रोमांचक विवरण
एशियन गेम्स 2026 की महिला शॉट पुट स्पर्धा का फाइनल मुकाबला अत्यंत प्रतिस्पर्धी साबित हुआ. मनप्रीत ने मुकाबले के पहले ही राउंड से आक्रामक रुख अपनाया. उनके प्रदर्शन में हर प्रयास के साथ सुधार साफ दिखाई दिया

- **पहला प्रयास:** मुकाबले की शुरुआत में उन्होंने 16.32 मीटर का थ्रो फेंककर एक स्थिर आधार तैयार किया.
- **दूसरा प्रयास:** तकनीक में थोड़ा सुधार करते हुए उन्होंने गोले को 16.41 मीटर की दूरी तक पहुंचाया.
- **तीसरा प्रयास:** अपनी गति और ताकत को बढ़ाते हुए उन्होंने 16.80 मीटर की प्रभावशाली दूरी नापी.
- **चौथा प्रयास:** यह उनके जीवन का सबसे निर्णायक थ्रो साबित हुआ, जिसमें उन्होंने 17.17 मीटर का विशाल थ्रो फेंककर 17 मीटर के प्रतिष्ठित बैरियर को पार कर लिया.
- **पांचवां प्रयास:** चौथे प्रयास के बाद उन्होंने 16.75 मीटर की स्थिर दूरी दर्ज कराई.
- **छठा प्रयास:** अंतिम प्रयास में उन्होंने पूरी ताकत झोंकने की कोशिश की लेकिन यह प्रयास फाउल करार दिया गया.

चौथे राउंड में फेंका गया उनका 17.17 मीटर का थ्रो उन्हें अंतिम परिणाम में कांस्य पदक दिलाने के लिए पूरी तरह निर्णायक रहा.

## उम्र और बाधाओं को पीछे छोड़कर रचा नया कीर्तिमान
एक किसान की बेटी से लेकर अंतरराष्ट्रीय पोडियम तक का मनप्रीत का यह सफर केवल एक खेल उपलब्धि नहीं है, बल्कि मानसिक दृढ़ता का प्रमाण भी है. 36 साल की उम्र में खेल के शीर्ष स्तर पर शारीरिक प्रतिस्पर्धा करना और डोपिंग प्रतिबंध के अंधेरे दौर से उबरकर देश के लिए पदक जीतना यह साबित करता है कि समर्पण के आगे परिस्थितियां गौण हो जाती हैं. एशियन गेम्स की शॉट पुट स्पर्धा में पदक जीतने वाली तीसरी भारतीय महिला बनकर उन्होंने देश के उभरते खिलाड़ियों के सामने संघर्ष और दृढ़ संकल्प की एक बड़ी मिसाल पेश की है.

## इसका आप पर असर
मनप्रीत कौर की यह जीत भारतीय एथलेटिक्स में उम्र और असफलताओं से जुड़ी रूढ़ियों को तोड़ते हुए खिलाड़ियों और खेल प्रशंसकों के लिए एक बड़ा संदेश देती है.

- **एथलीटों और युवाओं के लिए:** यह उपलब्धि साबित करती है कि चार साल के लंबे अंतराल और 36 साल की उम्र के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीता जा सकता है. उभरते खिलाड़ी इससे प्रेरणा लेकर करियर की विपरीत परिस्थितियों और असफलताओं में उम्मीद बनाए रख सकते हैं.
- **भारतीय खेल प्रशंसकों के लिए:** एशियन गेम्स 2026 में भारत का पदक खाता 21वें पदक के साथ और समृद्ध हुआ है. ट्रैक एंड फील्ड में भारतीय महिलाओं की बढ़ती दावेदारी से प्रशंसकों को आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में और अधिक पोडियम फिनिश देखने को मिलेंगे.
- **पंजाब के खेल पारिस्थितिकी तंत्र के लिए:** ग्रामीण पृष्ठभूमि के किसान परिवार से निकली बेटी की यह सफलता राज्य के जमीनी खिलाड़ियों के विश्वास को मजबूत करेगी. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रैक एंड फील्ड और शक्ति आधारित खेलों के प्रति युवा लड़कियों की भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा.
- **खेल नीति और कोचिंग के लिए:** अनुभवी खिलाड़ियों को लंबे ब्रेक या बैन के बाद भी सही तकनीकी और मनोवैज्ञानिक समर्थन मिलने पर पदक की संभावना बनी रहती है. खेल अकादमियों और प्रशिक्षकों के लिए यह केस स्टडी की तरह काम करेगा कि कैसे कठिन परिस्थितियों से वापसी कराई जाए.

## ऐसा क्यों हुआ
मनप्रीत कौर द्वारा एशियन गेम्स 2026 में कांस्य पदक जीतने के पीछे निरंतर तकनीकी सुधार, मानसिक दृढ़ता और चरणबद्ध वापसी की योजना मुख्य कारण रही.

- **फाइनल में निरंतर सुधार:** मनप्रीत ने फाइनल मुकाबले में अपने थ्रो की दूरी लगातार बढ़ाई और चौथे प्रयास में 17.17 मीटर का आंकड़ा छू लिया. 16.32 मीटर से शुरू करके 17 मीटर के स्तर को पार करना उनके अनुभव और दबाव झेलने की क्षमता का नतीजा था.
- **2023 की वापसी से मिला संबल:** चार साल के प्रतिबंध के बाद उन्होंने बैंकॉक में आयोजित 2023 एशियन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर खुद को मानसिक रूप से तैयार किया था. इस सफलता ने उन्हें बड़े मंचों पर दोबारा दावेदारी पेश करने का आत्मविश्वास दिया.
- **निजी संघर्ष और जुझारूपन:** ग्रामीण पृष्ठभूमि और एक किसान पिता की देखरेख में पले-बढ़े होने के कारण उनके भीतर कठिन परिस्थितियों से लड़ने का स्वभाव बना. 2017 के प्रतिबंध के बावजूद उन्होंने अभ्यास नहीं छोड़ा और शारीरिक फिटनेस को बनाए रखा.

## सवाल-जवाब

### 1. एशियन गेम्स 2026 में मनप्रीत कौर ने कौन सा पदक जीता?
मनप्रीत कौर ने महिला शॉट पुट स्पर्धा में 17.17 मीटर के थ्रो के साथ कांस्य पदक जीता.

### 2. इस खेल महाकुंभ में भारत का यह कौन सा पदक था?
एशियन गेम्स 2026 में यह पदक भारत की झोली में आया कुल 21वां पदक था.

### 3. मनप्रीत कौर ने फाइनल मुकाबले में 17.17 मीटर का थ्रो किस प्रयास में किया?
उन्होंने अपने चौथे प्रयास में 17.17 मीटर की दूरी तय की, जो उनके पदक जीतने का आधार बना.

### 4. एशियन गेम्स के महिला शॉट पुट इतिहास में मनप्रीत कौर का क्या स्थान है?
वह एशियन गेम्स की महिला शॉट पुट स्पर्धा में पदक जीतने वाली तीसरी भारतीय महिला एथलीट बन गई हैं.

### 5. मनप्रीत कौर पर किस वर्ष डोपिंग प्रतिबंध लगा था और यह कितने समय का था?
मनप्रीत कौर पर 2017 में डोपिंग परीक्षण में विफल होने के बाद चार साल का प्रतिबंध लगाया गया था.

### 6. प्रतिबंध के बाद उन्होंने किस प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक जीता था?
उन्होंने बैंकॉक में आयोजित 2023 एशियन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर सफल वापसी की थी.

### 7. एशियन गेम्स 2026 में पदक जीतने के समय मनप्रीत कौर की उम्र कितनी थी?
पदक जीतने के समय शॉट पुट एथलीट मनप्रीत कौर की उम्र 36 वर्ष थी.

## प्रेरणा और सबक
चार साल के कड़े प्रतिबंध और उम्र के दबाव को पीछे छोड़कर पोडियम पर लौटना किसी भी व्यक्ति के लिए जीवन के गहरे सबक प्रदान करता है.

- **असफलता को अंत न समझें:** 2017 में चार साल के डोपिंग बैन का सामना करने के बावजूद मनप्रीत ने खेल को अलविदा नहीं कहा बल्कि अपनी वापसी की तैयारी जारी रखी.
- **उम्र केवल एक आंकड़ा है:** 36 वर्ष की आयु में 17.17 मीटर का थ्रो फेंककर पदक जीतना यह दिखाता है कि समर्पण और फिटनेस हो तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती.
- **कदम दर कदम सुधार पर ध्यान दें:** फाइनल मुकाबले में उन्होंने 16.32 मीटर से शुरुआत कर चौथे प्रयास में 17.17 मीटर तक अपनी दूरी बढ़ाई, जो निरंतर सुधार की ताकत को दर्शाता है.
- **साधारण पृष्ठभूमि से बड़ी उड़ान संभव है:** पंजाब के एक साधारण किसान की बेटी होते हुए भी उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया.

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