# 45 किलो की कीया बनर्जी ने डेडलिफ्ट में उठाया 140 किलो वजन, जीता वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल

> सिर्फ 45.70 किलोग्राम वजन वाली 21 वर्षीय कीया बनर्जी ने साउथ अफ्रीका में हुई IPF वर्ल्ड चैंपियनशिप में 140 किलोग्राम की डेडलिफ्ट कर सिल्वर मेडल जीता, कुल 280 किलोग्राम भार उठाकर उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की।

**Type:** article · **Category:** खेल · **Published:** 2026-09-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/sports/45-kilo-ki-kiya-banerjee-ne-dedaliphta-men-uthaya-140-kilo-vajana-jita-varlda-chainpiyanashipa-men-silvara-medala-28403 · **Language:** Hindi
**Tags:** कीया बनर्जी, पावरलिफ्टिंग, डेडलिफ्ट, IPF चैंपियनशिप, सिल्वर मेडल, महिला खिलाड़ी, वर्ल्ड चैंपियनशिप

पावरलिफ्टिंग की दुनिया में भारत को एक नया सितारा मिल गया है। मात्र 45.70 किलोग्राम की काया वाली 21 वर्षीय कीया बनर्जी ने डेडलिफ्ट में अपने वजन से करीब तीन गुना भारी वजन उठाकर सबको चौंका दिया। यह कारनामा उन्होंने किसी सामान्य मुकाबले में नहीं, बल्कि विश्व स्तरीय चैंपियनशिप के मंच पर कर दिखाया।

## सन सिटी में रचा कमाल
साउथ अफ्रीका के सन सिटी शहर में IPF वर्ल्ड सब-जूनियर और जूनियर क्लासिक पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप का आयोजन हुआ, जिसमें कीया ने 47 किलोग्राम भार वर्ग में हिस्सा लिया। इंडिविजुअल डेडलिफ्ट स्पर्धा में उन्होंने 140 किलोग्राम भार जमीन से उठाकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। गौर करने वाली बात यह है कि उनका अपना वजन इस भार के तीसरे हिस्से से भी कम, यानी सिर्फ 45.70 किलोग्राम है, जिससे उनकी ताकत और तकनीक दोनों का अंदाजा लगाया जा सकता है।

## स्क्वाट और बेंच प्रेस में भी दिखाया दम
चैंपियनशिप में कीया की काबिलियत सिर्फ डेडलिफ्ट तक सीमित नहीं रही। उन्होंने स्क्वाट राउंड में 90 किलोग्राम भार उठाया और बेंच प्रेस में 50 किलोग्राम वजन के साथ अपनी पकड़ मजबूत साबित की। पावरलिफ्टिंग में आमतौर पर इन तीनों स्पर्धाओं, यानी स्क्वाट, बेंच प्रेस और डेडलिफ्ट के प्रदर्शन को जोड़कर ही खिलाड़ी की कुल रैंकिंग तय होती है। कीया के मामले में तीनों स्पर्धाओं को मिलाकर कुल भार 280 किलोग्राम रहा, जिसके आधार पर उन्हें अपने वर्ग में सिल्वर मेडल दिया गया।

## कौन हैं कीया बनर्जी
21 साल की कीया बनर्जी भारत की उन गिनी-चुनी युवा खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्होंने बेहद कम उम्र में स्ट्रेंथ स्पोर्ट्स में अपनी अलग पहचान बना ली है। लगातार कड़ी ट्रेनिंग और सख्त अनुशासन के बलबूते उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भी कई बार पदक जीते हैं, और अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी काबिलियत साबित कर दी है। सब-जूनियर और जूनियर वर्ग जैसी शुरुआती श्रेणियों में इस तरह का प्रदर्शन भविष्य में उनसे और बड़ी उम्मीदें बंधाता है।

## महिला खिलाड़ियों के लिए मिसाल
कीया की यह उपलब्धि खासतौर पर उन युवा लड़कियों के लिए एक मिसाल बनकर सामने आई है जो भारी वजन उठाने वाले खेलों की दुनिया में अब तक बनी पुरानी सोच और बंदिशों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ना चाहती हैं। स्ट्रेंथ स्पोर्ट्स को लंबे समय तक पुरुष-प्रधान माना जाता रहा है, लेकिन कीया जैसी खिलाड़ी इस धारणा को हर प्रतियोगिता के साथ चुनौती दे रही हैं। उनका सफर यह साबित करता है कि लगातार मेहनत, सही तकनीक और मजबूत इरादों से किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

## इसका आप पर असर
कीया बनर्जी की यह कामयाबी सीधे तौर पर आम पाठक की जेब या रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित नहीं करती, लेकिन फिटनेस और स्ट्रेंथ स्पोर्ट्स में करियर बनाने की सोच रखने वालों के लिए यह एक अहम संकेत जरूर है।

- **युवा एथलीटों के लिए:** कीया की उपलब्धि दिखाती है कि सही ट्रेनिंग और अनुशासन से कम उम्र में भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर पदक जीता जा सकता है। जो युवा पावरलिफ्टिंग में करियर बनाना चाहते हैं, उनके लिए यह एक व्यावहारिक उदाहरण है कि किस तरह की मेहनत जरूरी होती है।
- **महिला खिलाड़ियों के लिए:** स्ट्रेंथ स्पोर्ट्स को अब भी कई जगह पुरुष-प्रधान खेल माना जाता है। कीया जैसी उपलब्धियां यह भरोसा दिलाती हैं कि सही मार्गदर्शन मिलने पर महिलाएं भी भारी वजन वाली स्पर्धाओं में शीर्ष स्तर पर पहुंच सकती हैं।
- **फिटनेस के शौकीनों के लिए:** डेडलिफ्ट, स्क्वाट और बेंच प्रेस जैसे बुनियादी अभ्यास सही तकनीक के साथ किए जाएं तो शरीर की ताकत कितनी बढ़ाई जा सकती है, यह इसका जीता-जागता उदाहरण है।
- **पैरेंट्स के लिए:** जो अभिभावक अपने बच्चों को पारंपरिक खेलों से हटकर स्ट्रेंथ स्पोर्ट्स में भेजने पर विचार कर रहे हैं, उनके लिए यह उदाहरण भरोसा बढ़ाने वाला हो सकता है कि इस क्षेत्र में भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान संभव है।

## सवाल-जवाब

### 1. कीया बनर्जी कौन हैं?
कीया बनर्जी भारत की 21 वर्षीय उभरती हुई पावरलिफ्टर हैं, जिन्होंने IPF वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता है।

### 2. उन्होंने कौन सा मेडल जीता?
उन्होंने इंडिविजुअल डेडलिफ्ट इवेंट में सिल्वर मेडल जीता।

### 3. यह चैंपियनशिप कहां आयोजित हुई?
यह चैंपियनशिप साउथ अफ्रीका के सन सिटी शहर में हुई।

### 4. कीया ने डेडलिफ्ट में कितना वजन उठाया?
उन्होंने डेडलिफ्ट में 140 किलोग्राम वजन उठाया।

### 5. कुल मिलाकर उन्होंने कितना वजन उठाया?
स्क्वाट, बेंच प्रेस और डेडलिफ्ट मिलाकर उन्होंने कुल 280 किलोग्राम वजन उठाया।

### 6. कीया किस वजन वर्ग में प्रतिस्पर्धा करती हैं?
वह 47 किलोग्राम भार वर्ग में प्रतिस्पर्धा करती हैं।

### 7. कीया का खुद का वजन कितना है?
उनका शरीर का वजन 45.70 किलोग्राम है।

### 8. यह चैंपियनशिप किस उम्र वर्ग के खिलाड़ियों के लिए थी?
यह IPF वर्ल्ड सब-जूनियर और जूनियर क्लासिक पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप थी।

## प्रेरणा और सबक
कीया बनर्जी की कहानी बताती है कि सही दिशा में लगातार मेहनत किसी भी बड़ी उपलब्धि की नींव बन सकती है।

- **अनुशासन सबसे बड़ी ताकत:** कीया ने कम उम्र में ही खुद को कड़े प्रशिक्षण और अनुशासन के लिए समर्पित किया, जिसका नतीजा अंतरराष्ट्रीय मंच पर मेडल के रूप में सामने आया।
- **अपने वजन से बड़ा लक्ष्य:** महज 45.70 किलोग्राम की काया के साथ 140 किलोग्राम भार उठाना दिखाता है कि सीमाएं शरीर के आकार से नहीं, बल्कि तैयारी और इरादों से तय होती हैं।
- **हर स्पर्धा में संतुलन:** डेडलिफ्ट के साथ-साथ स्क्वाट और बेंच प्रेस में भी बेहतर प्रदर्शन बताता है कि किसी एक क्षेत्र में महारत के साथ बाकी पहलुओं पर भी बराबर ध्यान देना जरूरी है।
- **युवाओं के लिए रास्ता खोलना:** कीया की सफलता खासकर युवा लड़कियों के लिए यह भरोसा बढ़ाती है कि वे भी स्ट्रेंथ स्पोर्ट्स जैसे कम पहचाने गए क्षेत्रों में आगे बढ़ सकती हैं।

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