# अहमदाबाद में भारतीय पैरा तीरंदाजों का दबदबा, एक ही दिन में जीते 2 स्वर्ण सहित 5 पदक

> अहमदाबाद में आयोजित पैरा तीरंदाजी विश्व सीरीज के चौथे दिन भारत ने दो स्वर्ण, दो रजत और एक कांस्य पदक हासिल किया। स्वाति चौधरी ने शानदार खेल दिखाते हुए व्यक्तिगत और मिश्रित स्पर्धा में दो पदक अपने नाम किए।

**Type:** article · **Category:** खेल · **Published:** 2026-09-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/sports/ahmedabad-men-bharatiya-paira-tirndajon-ka-dabadaba-eka-hi-dina-men-jite-2-svarna-sahita-5-padaka-30030 · **Language:** Hindi
**Tags:** पैरा तीरंदाजी, विश्व सीरीज, अहमदाबाद, हरविंदर सिंह, स्वाति चौधरी, तोमन कुमार, भारतीय खेल

अहमदाबाद में चल रही पैरा तीरंदाजी विश्व सीरीज के चौथे दिन भारतीय खिलाड़ियों ने जबरदस्त निशानेबाजी का प्रदर्शन करते हुए कुल पांच पदक अपने नाम किए। प्रतियोगिता के समापन से ठीक एक दिन पहले भारतीय दल ने दो स्वर्ण, दो रजत और एक कांस्य पदक जीतकर अपनी श्रेष्ठता साबित की। पुरुषों की कंपाउंड और रिकर्व टीम स्पर्धाओं में भारत ने स्वर्णिम सफलता हासिल की। वहीं महिला खिलाड़ी स्वाति चौधरी ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए एक ही दिन में दो अलग-अलग स्पर्धाओं में पदक जीतकर इतिहास रचा।

## पुरुष टीमों ने कंपाउंड और रिकर्व स्पर्धाओं में दिलाया स्वर्ण
पुरुषों की कंपाउंड टीम स्पर्धा के फाइनल मुकाबले में मौजूदा विश्व चैंपियन तोमन कुमार और श्याम सुंदर स्वामी की जोड़ी का मुकाबला इराक के अब्बास कादिम और अनवर अलदावोद से हुआ। भारतीय जोड़ी ने शुरुआत में कुछ धीमी गति दिखाई, लेकिन जल्द ही सही लय पकड़ते हुए सटीक निशाने लगाए। तोमन और श्याम सुंदर ने अंतिम क्षणों तक दबदबा बनाए रखते हुए इराक की टीम को 152-139 के बड़े अंतर से हराकर स्वर्ण पदक पर कब्जा किया।

दूसरी ओर, पुरुष रिकर्व टीम स्पर्धा में दो बार के पैरालंपिक पदक विजेता हरविंदर सिंह और उनके साथी विजय सुंडी की जोड़ी ने फाइनल में स्लोवाकिया के डेविड इवान और डेनिस इवान की चुनौती का सामना किया। पहले सेट में 34-37 से पिछड़ने के बाद भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार वापसी की। हरविंदर और सुंडी ने अगले तीनों सेट 36-31, 38-34 और 35-31 से अपने नाम करते हुए मुकाबला 6-2 से जीत लिया और भारत की झोली में दूसरा स्वर्ण पदक डाला।

## स्वाति चौधरी का दोहरा पदक धमाका और महिला रिकर्व का रजत
भारत की स्टार एथलीट स्वाति चौधरी के लिए प्रतियोगिता का चौथा दिन बेहद यादगार रहा। स्वाति ने मिश्रित टीम डब्ल्यू-1 (रिकर्व/कंपाउंड) स्पर्धा में आदिल मोहम्मद नजीर अंसारी के साथ मिलकर रजत पदक हासिल किया। इसके बाद दोपहर के सत्र में वह महिला व्यक्तिगत डब्ल्यू-1 वर्ग के कांस्य पदक प्लेऑफ में उतरीं। इस मुकाबले में स्वाति ने व्यक्तिगत तटस्थ एथलीट (एआईएन) के रूप में खेल रही रूस की एलेना क्रुतोवा को 6-2 से पराजित कर कांस्य पदक हासिल किया।

महिला रिकर्व टीम स्पर्धा में भारत की भावना और पूजा की जोड़ी को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। फाइनल मुकाबले में भारतीय जोड़ी को चीन की मजबूत टीम के हाथों 0-6 (23-34, 33-35, 30-31) से हार का सामना करना पड़ा। चीनी तीरंदाजों की सटीक निशानेबाजी के सामने भारतीय जोड़ी पूरे मैच में वापसी करने में असमर्थ रही।

## मिश्रित टीम और महिला कंपाउंड के फाइनल के आंकड़े
मिश्रित टीम डब्ल्यू-1 के खिताबी मुकाबले में स्वाति चौधरी और आदिल मोहम्मद नजीर अंसारी की जोड़ी चेक गणराज्य की शार्का पुल्तार मुसिलोवा और डेविड द्राहोनिंस्की से भिड़ी। भारतीय जोड़ी को इस मुकाबले में 1-5 (31-38, 33-37, 33-33) से पराजय झेलनी पड़ी और उन्हें रजत पदक से ही संतोष करना पड़ा।

महिला कंपाउंड टीम स्पर्धा में भारतीय टीम कांस्य पदक जीतने से चूक गई। शीतल देवी और पायल नाग की जोड़ी तीसरे स्थान के प्लेऑफ मुकाबले में चीन की वांग हुईटिंग और गाओ फांग्शिया की जोड़ी से हार गई। चीन की तीरंदाजों ने एकतरफा प्रदर्शन करते हुए यह मैच 6-0 (34-23, 35-33, 31-30) से जीतकर कांस्य पदक पर कब्जा जमाया।

## इसका आप पर असर
यह शानदार प्रदर्शन भारतीय पैरा खेल पारिस्थितिकी तंत्र के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित करता है।

- **भारत में:** अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय पैरा एथलीटों की यह बड़ी सफलता देश में पैरा-स्पोर्ट्स के प्रति बुनियादी ढांचे और प्रायोजन में वृद्धि को प्रेरित करेगी। इससे युवा दिव्यांग एथलीटों को विश्व स्तरीय प्रशिक्षण सुविधाओं तक बेहतर पहुंच प्राप्त होगी।
- **खेल प्रेमियों के लिए:** वैश्विक स्तर पर तीरंदाजी में भारत की निरंतर बढ़त से आगामी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश की पदक संभावना मजबूत हुई है। प्रशंसक अब आगामी पैरालंपिक चक्र में और अधिक पदक की उम्मीद कर सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
भारतीय पैरा तीरंदाजों की इस सफलता के पीछे गहन अभ्यास, तकनीकी निरंतरता और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का अनुभव प्रमुख कारण रहा है।

- **मानसिक दृढ़ता और वापसी:** पुरुषों की रिकर्व टीम ने पहला सेट गंवाने के बावजूद मजबूत वापसी की, जो दबाव के क्षणों में उनके उत्कृष्ट मानसिक संतुलन को दर्शाता है।
- **अनुभवी खिलाड़ियों का नेतृत्व:** विश्व चैंपियन तोमन कुमार और पैरालंपिक पदक विजेता हरविंदर सिंह जैसे दिग्गजों की उपस्थिति ने टीम के युवा सदस्यों में जीत का आत्मविश्वास जगाया।
- **तकनीकी निपुणता:** कंपाउंड और डब्ल्यू-1 श्रेणियों में सटीक निशानेबाजी भारतीय कोचों द्वारा कराए गए विशेष प्रशिक्षण और तकनीकी सुधारों का परिणाम है।

## सवाल-जवाब

### 1. अहमदाबाद में चौथे दिन भारत ने कुल कितने पदक जीते?
भारत ने पैरा तीरंदाजी विश्व सीरीज के चौथे दिन दो स्वर्ण, दो रजत और एक कांस्य सहित कुल 5 पदक जीते।

### 2. पुरुष कंपाउंड टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक किसने जीता?
तोमन कुमार और श्याम सुंदर स्वामी की भारतीय जोड़ी ने इराक को 152-139 से हराकर स्वर्ण पदक जीता।

### 3. हरविंदर सिंह और विजय सुंडी ने किस टीम को हराकर स्वर्ण जीता?
पुरुष रिकर्व टीम स्पर्धा के फाइनल में हरविंदर और सुंडी ने स्लोवाकिया की टीम को 6-2 से पराजित किया।

### 4. स्वाति चौधरी ने प्रतियोगिता में क्या विशेष उपलब्धि हासिल की?
स्वाति चौधरी ने एक ही दिन में दो पदक जीते, जिनमें मिश्रित टीम डब्ल्यू-1 में रजत और व्यक्तिगत डब्ल्यू-1 में कांस्य पदक शामिल है।

### 5. महिला रिकर्व टीम स्पर्धा का फाइनल परिणाम क्या रहा?
भावना और पूजा की भारतीय जोड़ी को फाइनल में चीन के हाथों 0-6 से हारकर रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

## प्रेरणा और सबक
अहमदाबाद में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणादायक है जो चुनौतियों के बावजूद सफलता हासिल करना चाहता है।

- **दबाव में हार न मानना:** हरविंदर सिंह और विजय सुंडी ने पहला सेट हारने के बाद जिस तरह वापसी की, वह सिखाता है कि शुरुआती असफलता से निराश हुए बिना लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखना चाहिए।
- **एक ही दिन में दोहरा प्रयास:** स्वाति चौधरी द्वारा एक ही दिन में दो अलग-अलग श्रेणियों में पदक जीतना यह साबित करता है कि निरंतर शारीरिक व मानसिक सहनशक्ति से कठिन उपलब्धियां पाई जा सकती हैं।
- **धीमी शुरुआत से उबरना:** तोमन कुमार और श्याम सुंदर स्वामी का फाइनल में धीमी शुरुआत के बाद नियंत्रण बनाना दर्शाता है कि धैर्य रखकर किसी भी स्थिति को अपने पक्ष में मोड़ा जा सकता है।

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