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  "type": "article",
  "title": "आइची-नागोया में हजारों खिलाड़ियों की भूख मिटाने उतरी शेफ्स की अंतरराष्ट्रीय फौज, परोसे जा रहे 450 लजीज पकवान",
  "summary": "जापान के आइची-नागोया में जुटे 17 हजार से अधिक एथलीटों और कोचिंग स्टाफ के लिए 25 देशों के 80 शेफ हर दिन 450 प्रकार के व्यंजन तैयार कर रहे हैं।",
  "content": "अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता की परीक्षा सिर्फ मैदान पर नहीं होती, बल्कि पर्दे के पीछे उनके खान-पान की जरूरतों को पूरा करना भी आयोजकों के लिए एक विशाल परीक्षा साबित होता है। जापान की धरती पर आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 के औपचारिक आगाज के साथ ही विभिन्न मुल्कों के सत्रह हजार से ज्यादा खिलाड़ी और उनके सहयोगी दल यहां पहुंच चुके हैं। 16 दिनों की इस मैराथन खेल प्रतियोगिता में 43 विभिन्न स्पर्धाओं के भीतर पदकों की होड़ मचेगी। हालांकि खिलाड़ियों के रहने के इंतजाम को लेकर शुरुआती तौर पर कुछ नाराजगी देखने को मिली है, लेकिन उनके आहार और खान-पान के मोर्चे पर बेहद भव्य और सटीक व्यवस्था खड़ी की गई है।\n\nरसोई का महाविस्तार और रोजाना खपने वाली विशाल रसद\nइस बड़े पैमाने की प्रतियोगिता में खिलाड़ियों के पोषण को बनाए रखने के लिए खाद्य सामग्री की खपत हैरान करने वाले आंकड़ों तक पहुंच चुकी है। हर चौबीस घंटे के भीतर खिलाड़ियों के भोजन कक्ष में साठ हजार केले, दो टन चिकन और एक टन चावल की खपत दर्ज की जा रही है। इसके साथ ही पैंतीस हजार पीस ब्रेड और तीस किलोग्राम बादाम प्रतिदिन रसोइयों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे हैं। खिलाड़ियों को उनके मनपसंद स्वाद के साथ आवश्यक कैलोरी और पोषण देने के मकसद से रोजाना 450 अलग-अलग प्रकार के व्यंजन परोसने की योजना अमल में लाई जा रही है।\n\nतड़के पांच बजे से देर रात तक सक्रिय रहने वाला संचालन तंत्र\nइतने बड़े दल के लिए भोजन जुटाना किसी साधारण बावर्चीखाने का काम नहीं, बल्कि घड़ी की सुइयों के साथ तालमेल बिठाकर चलने वाला एक जटिल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क है। ग्लोबल हॉस्पिटैलिटी ग्रुप के संस्थापक पीटर राइट के मुताबिक यह महज थाली में खाना सजाना नहीं बल्कि एक विशालकाय आपूर्ति श्रृंखला का संचालन है। यह व्यवस्था सुबह तड़के 5 बजे भोजन की पहली खेप बाहर भेजने के साथ सक्रिय होती है और लगातार काम करते हुए देर रात 1 बजे जाकर थमती है। इस जटिल कार्यप्रणाली को सुचारू बनाए रखने के लिए 25 मुल्कों से आए 80 मुख्य शेफ दिन-रात जुटे हुए हैं, जबकि उनके साथ लगभग 200 कर्मचारियों का कार्यबल सहयोग कर रहा है। भोजन की सूची को दिनभर में चार बार बदला जाता है, जिसमें प्रातःकालीन नाश्ता, दोपहर का मुख्य भोजन, रात का डिनर और देर रात की हल्की खुराक शामिल है।\n\nघरेलू स्वाद और भावनात्मक जुड़ाव की अहमियत\nखिलाड़ियों के खान-पान की विविधता पर चर्चा करते हुए पीटर राइट ने बताया कि जब कोई नया खिलाड़ी पहली दफा विदेश आता है, तो वह उसी स्वाद को तलाशता है जो उसे अपनी मां के हाथ से मिलता रहा है या जो उसका स्थानीय खाना रहा है। यही वजह है कि आयोजन भले ही जापानी जमीन पर हो रहा हो, पर खाने की मेज केवल सुशी अथवा साशिमी तक सीमित नहीं है। मेन्यू में थाई, कोरियाई, चीनी, मलेशियन, पश्चिम एशियाई और भारतीय पकवानों को व्यापक जगह दी गई है। भारतीय दल और एशियाई उपमहाद्वीप के खिलाड़ियों के लिए रोगन जोश, गाढ़ी दालें, तीखी करी, ताजा चटनी, गर्मागर्म नान और पारंपरिक बिरयानी का पुख्ता प्रबंध किया गया है।\n\nधार्मिक पाबंदियां और रसोई के सूक्ष्म नियम\nइस बहुराष्ट्रीय रसोई में विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों की खान-पान मान्यताओं का भी पूरी बारीकी से सम्मान किया जा रहा है। मांस की आपूर्ति में झटका और हलाल दोनों प्रकार के विकल्पों को अलग-अलग रखा गया है ताकि किसी भी दल की भावनाएं आहत न हों। इसके अलावा रसोइयों के बीच सूक्ष्म सामग्रियों को लेकर होने वाले मतभेदों का भी खास ध्यान रखा गया है। विभिन्न एशियाई व्यंजनों में इस्तेमाल होने वाले सोया सॉस के मामले में जापानी, कोरियाई और चीनी शेफ अपनी-अपनी मूल रेसिपी के हिसाब से अलग सॉस का इस्तेमाल करते हैं। चार दशकों से अधिक का तजुर्बा रखने वाले पीटर राइट पहले सिडनी, बीजिंग और रियो ओलंपिक के अलावा वैंकूवर शीतकालीन खेलों और दो कॉमनवेल्थ गेम्स में भोजन प्रबंधन संभाल चुके हैं, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय रसोइयों के मिजाज की गहरी समझ है।\n\nबिरयानी की प्रामाणिकता और मेलबर्न का वह पुराना सबक\nस्वाद की इसी मौलिकता को लेकर पीटर राइट वर्ष 1992 के उस चर्चित लम्हे को याद करते हैं जब मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में इंग्लैंड और पाकिस्तान की टीमें विश्व कप के खिताबी मुकाबले में आमने-सामने थीं। उस मैच के दिन पाकिस्तानी टीम प्रबंधन की तरफ से बिरयानी की खास फरमाइश आई थी। तब युवा शेफ रहे राइट ने अनुभव न होने के बावजूद यह दावा कर दिया था कि वे इसे आसानी से बना लेंगे। इंटरनेट के अभाव वाले उस दौर में राइट ने अपनी टीम में शामिल एक भारतीय रसोइए की मां को एमसीजी के किचन में आमंत्रित किया, जिन्होंने पूरी टीम को पारंपरिक विधि सिखाई। मैच समाप्त होने पर जब पाकिस्तानी मैनेजर से स्वाद का जायजा लिया गया, तो उन्होंने कहा कि यह खाना अच्छा था लेकिन यह पाकिस्तानी बिरयानी के बजाय भारतीय बिरयानी थी। तब राइट को लगा था कि दोनों में कोई खास अंतर नहीं होता, मगर मैनेजर ने साफ किया कि दोनों का स्वाद और संरचना भिन्न है। राइट के अनुसार उस दिन उन्हें पकवानों की क्षेत्रीय पहचान और उनकी असल प्रामाणिकता का सबसे बड़ा सबक मिला था, जो आज इस खेल महाकुंभ में भी काम आ रहा है।\n\nइसका आप पर असर\nअंतरराष्ट्रीय आयोजनों में बड़े पैमाने पर की जाने वाली खान-पान व्यवस्था खेल प्रबंधन और रसद क्षेत्र में काम करने वालों के लिए एक बेहतरीन केस स्टडी प्रस्तुत करती है।\n\n• भारतीय एथलीटों के लिए: सुदूर देश में भारतीय व्यंजन और विशिष्ट आहार मिलने से खिलाड़ियों को घरेलू वातावरण का अनुभव होता है। इससे प्रतियोगियों को अपनी ऊर्जा बनाए रखने और खेल पर ध्यान केंद्रित करने में सीधी मदद मिलती है।\n• खेल प्रबंधकों और शेफ्स के लिए: विभिन्न संस्कृतियों और धार्मिक नियमों के अनुसार खाना तैयार करने का यह मॉडल बड़े खेल आयोजनों के लिए मानक तैयार करता है। विभिन्न देशों के स्वाद और सामग्रियों की बारीकियों को समझना कैटरिंग उद्योग के लिए जरूरी सीख है।\n• खेल प्रेमियों के लिए: मैदान पर खिलाड़ियों के प्रदर्शन के पीछे छिपी विशाल प्रशासनिक और खान-पान व्यवस्था की जानकारी मिलती है। यह दिखाता है कि एक पदक जीतने के पीछे किस तरह का व्यापक सहायक तंत्र काम करता है।\n• आयोजन प्रबंधन में सुधार के लिए: खिलाड़ियों द्वारा आवास पर असंतोष और भोजन की व्यवस्था पर संतुष्टि आयोजकों को संतुलित बुनियादी ढांचा बनाने की सीख देती है। आगे आने वाले आयोजनों में रहने और खाने दोनों के समान स्तर पर ध्यान देना आवश्यक होगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nएशियन गेम्स में इस स्तर का खान-पान ढांचा इसलिए खड़ा किया गया क्योंकि हजारों एथलीटों की पोषण संबंधी जरूरतें और सांस्कृतिक पसंद पूरी तरह भिन्न होती हैं।\n\n• बहुसांस्कृतिक दल और पोषण: 43 विभिन्न खेलों में भाग लेने वाले 17,000 से अधिक दल सदस्यों को कठोर शारीरिक मुकाबले के लिए भारी मात्रा में कैलोरी की जरूरत होती है। विभिन्न एशियाई मुल्कों के खान-पान की विविधता को पूरा करने के लिए ही 450 तरह के व्यंजनों का चयन किया गया।\n• अनुभवी नेतृत्व की योजना: चार दशकों तक ओलंपिक और राष्ट्रमंडल खेलों में काम कर चुके पीटर राइट को इस बात की समझ थी कि खिलाड़ियों को घरेलू स्वाद देना कितना आवश्यक है। इसी अनुभव के कारण 25 देशों के 80 शेफ्स को जोड़कर इस बहुराष्ट्रीय रसोई का निर्माण किया गया।\n• धार्मिक और पारंपरिक मान्यताएं: हलाल और झटका मांस की आवश्यकता तथा विभिन्न मुल्कों की विशिष्ट सामग्री प्राथमिकताओं के कारण रसोई को इतने व्यापक स्तर पर अलग-अलग वर्गों में संचालित करना पड़ा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 में कितने खिलाड़ी और स्टाफ पहुंचे हैं?\nइस आयोजन में भाग लेने के लिए विभिन्न देशों के 17,000 से अधिक एथलीट और कोचिंग स्टाफ वहां पहुंचे हैं।\n\n2. खिलाड़ियों के लिए रोजाना कितनी रसद की खपत हो रही है?\nहर दिन 60 हजार केले, दो टन चिकन, एक टन चावल, 35,000 पीस ब्रेड और 30 किलोग्राम बादाम की खपत हो रही है।\n\n3. इस विशाल रसोई का संचालन कौन संभाल रहा है?\nग्लोबल हॉस्पिटैलिटी ग्रुप के संस्थापक पीटर राइट के नेतृत्व में 25 देशों के 80 शेफ और करीब 200 कर्मचारी इसका संचालन कर रहे हैं।\n\n4. रसोई में दिनभर में कितनी बार मेन्यू बदला जाता है?\nनाश्ता, दोपहर का खाना, रात का खाना और देर रात का हल्का भोजन मिलाकर मेन्यू दिन में चार बार बदला जाता है।\n\n5. भारतीय खिलाड़ियों के लिए कौन-कौन से व्यंजन उपलब्ध हैं?\nमेन्यू में दाल, करी, रोगन जोश, चटनी, नान और बिरयानी जैसे पारंपरिक भारतीय व्यंजन शामिल किए गए हैं।\n\n6. पीटर राइट को बिरयानी की विविधता का सबक कब मिला था?\nउन्हें यह सबक 1992 में मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर हुए विश्व कप फाइनल के दौरान पाकिस्तानी टीम के मैनेजर के फीडबैक से मिला था।",
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  "publishedAt": "2026-09-19",
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