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  "title": "ऐची-नागोया में सुरुचि और कमलजीत ने लगाया सटीक निशाना, भारत के खाते में आया दूसरा स्वर्ण पदक",
  "summary": "10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड इवेंट में सुरुचि सिंह और कमलजीत की जोड़ी ने शानदार वापसी करते हुए भारत को दूसरा गोल्ड मेडल दिलाया।",
  "content": "आईची-नागोया में जारी महाद्वीपीय स्पर्धा में तीन दिनों के लंबे इंतजार को खत्म करते हुए भारतीय निशानेबाजों ने देश की झोली में दूसरा स्वर्ण पदक डाल दिया। शुक्रवार, 25 सितंबर की सुबह 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम स्पर्धा में इंदर सिंह सुरुचि और कमलजीत की जोड़ी ने शीर्ष स्थान हासिल कर यह ऐतिहासिक सफलता दर्ज की। इस वर्ग में भारत के लिए पदक जीतने का यह अंतिम अवसर था। आमतौर पर निशानेबाजी प्रतियोगिता में भारतीय दल का प्रदर्शन बेहद मजबूत रहता है, लेकिन इस बार शुरुआती मुकाबलों में निशानेबाज अपनी लय तलाशने के लिए जूझ रहे थे।\n\nशुरुआती निराशा के बाद शानदार वापसी\nव्यक्तिगत स्पर्धाओं में दोनों ही निशानेबाजों का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा था। व्यक्तिगत क्वालिफिकेशन दौर में कमलजीत नौवें स्थान पर रहे, जबकि सुरुचि 26वें पायदान पर खिसक गई थीं। इस वजह से दोनों ही खिलाड़ी एकल फाइनल की दौड़ से बाहर हो गए थे। इतना ही नहीं, भारत को पुरुष और महिला टीम स्पर्धाओं में भी पोडियम तक पहुंचे बिना खाली हाथ संतोष करना पड़ा था। हालांकि मिक्स्ड इवेंट के निर्णायक मुकाबले में दोनों ने जबर्दस्त मानसिक मजबूती दिखाई और 484.6 अंक बटोरकर तालिका में सबसे ऊपर रहते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया।\n\nक्वालिफिकेशन दौर में दिखाया गजब का तालमेल\nफाइनल तक पहुंचने की राह भारतीय जोड़ी के लिए आसान नहीं थी। शुरुआती सीरीज में दोनों ने मिलकर 196 अंक जुटाए। इसके बाद दूसरी सीरीज में 195 अंक जोड़कर अपने कुल स्कोर को 391 तक पहुंचाया। तीसरी और अंतिम सीरीज में पुनः 196 अंकों का मजबूत प्रदर्शन करते हुए दोनों ने कुल 587 अंक हासिल किए, जिसमें 29 इनर-10 निशाने शामिल रहे। नियमों के मुताबिक क्वालिफिकेशन राउंड की शीर्ष चार जोड़ियों को ही फाइनल में प्रवेश मिलता है, और भारतीय जोड़ी ने समय रहते दबाव को पीछे छोड़ते हुए खिताबी मुकाबले का टिकट पक्का किया।\n\nएथलेटिक्स से निशानेबाजी तक कमलजीत का संघर्ष\nहरियाणा के रेवाड़ी जिले के सुल्खा गांव के निवासी कमलजीत 10 मीटर एयर पिस्टल और 50 मीटर पिस्टल दोनों विधाओं में विशेषज्ञता रखते हैं। साल 2019 में निशानेबाजी में कदम रखने वाले कमलजीत पहले एथलेटिक्स ट्रैक पर किस्मत आजमा रहे थे, लेकिन चोट लगने के कारण उन्हें ट्रैक-एंड-फील्ड स्पर्धाओं को अलविदा कहना पड़ा। इसके बाद उन्होंने शूटिंग को चुना, जहां शुरुआती दौर में उन्हें भारी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा।\n\nकोर्स की फीस तथा विभिन्न टूर्नामेंट्स के भारी खर्च के चलते एक समय उन्होंने खेल छोड़ने का भी विचार बना लिया था। कठिन परिस्थितियों में माता-पिता से मिले निरंतर समर्थन ने उनका हौसला बनाए रखा। अगले दो-तीन वर्षों की कड़ी तपस्या के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय जूनियर सर्किट में अपनी धाक जमाई। कोरिया में आयोजित 2023 आईएसएसएफ जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप के 50 मीटर पिस्टल जूनियर पुरुष वर्ग में उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया था। उसी मजबूत प्रदर्शन के दम पर वे सीनियर स्तर पर 10 मीटर और 50 मीटर दोनों स्पर्धाओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।\n\nइसका आप पर असर\nइस ऐतिहासिक जीत से अंतरराष्ट्रीय खेलों में भारतीय निशानेबाजी का मनोबल बढ़ा है और युवा एथलीटों के लिए नए अवसर खुलेंगे।\n\n• भारत में: निशानेबाजी के क्षेत्र में ओलंपिक और एशियाई खेलों के लिए सरकार तथा खेल संघों से मिलने वाले समर्थन में तेजी आएगी। इससे ग्रासरूट स्तर पर उभरते युवा निशानेबाजों को प्रशिक्षण उपकरण और बुनियादी ढांचा हासिल करने में मदद मिलेगी।\n• हरियाणा में: राज्य के ग्रामीण इलाकों में खेल अकादमियों और वित्तीय मदद से जुड़े नियमों को नई मजबूती मिलेगी। रेवाड़ी जैसे जिलों के जमीनी एथलीटों को चोट के बाद अन्य खेलों में पुनर्वास के लिए बेहतर मार्गदर्शन मिल सकेगा।\n• खेल प्रेमियों के लिए: पदक तालिका में भारत की स्थिति सुधरने से आने वाले अन्य मुकाबलों के प्रति दर्शकों का उत्साह बढ़ेगा। इससे गैर-क्रिकेटिंग खेलों के प्रसारण और फॉलोअरशिप में उल्लेखनीय इजाफा देखने को मिल सकता है।\n• एथलीटों के लिए: ट्रैक छोड़कर शूटिंग में शीर्ष मुकाम हासिल करने की यह कहानी गंभीर चोटों से जूझ रहे खिलाड़ियों को नया करियर विकल्प तलाशने की प्रेरणा देगी। खेल प्रशासक भी चोटिल एथलीटों के ट्रांजिशन प्रोग्राम पर अधिक ध्यान दे सकते हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह स्वर्ण पदक तकनीकी सटीकता, दबाव में बेहतर तालमेल और पहले की विफलताओं से मिली सीख का सीधा परिणाम है।\n\n• सीनियर स्तर पर सुधार: दोनों निशानेबाज व्यक्तिगत फाइनल की दौड़ से बाहर हो चुके थे, जिससे उन्होंने दबाव मुक्त होकर अपनी तकनीकी कमियों को सुधारा। मिक्स्ड इवेंट में सीधे प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित करने से उन्हें बेहतर रिदम हासिल करने में मदद मिली।\n• क्वालिफिकेशन में नियंत्रण: शुरुआती दौर में 196 और 195 की सीरीज के बाद अंतिम सीरीज में 196 अंक बटोरना उनके लगातार प्रदर्शन को दर्शाता है। 29 इनर-10 शॉट्स ने उन्हें अन्य शीर्ष टीमों के मुकाबले मजबूत बढ़त दिला दी।\n• पूर्व अंतरराष्ट्रीय अनुभव: कमलजीत के पास 2023 जूनियर विश्व चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने का ठोस अनुभव था। दबाव के क्षणों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली उस पूर्व सफलता ने फाइनल राउंड में निर्णायक भूमिका निभाई।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. भारत को आईची-नागोया में दूसरा गोल्ड मेडल किस स्पर्धा में मिला?\nभारत को यह दूसरा स्वर्ण पदक 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम स्पर्धा में हासिल हुआ।\n\n2. इस मिक्स्ड टीम में कौन-से दो भारतीय निशानेबाज शामिल थे?\nइस टीम में इंदर सिंह सुरुचि और कमलजीत की जोड़ी शामिल थी।\n\n3. फाइनल राउंड में भारतीय जोड़ी ने कितने अंक हासिल कर शीर्ष स्थान पाया?\nभारतीय जोड़ी ने फाइनल में 484.6 अंक जुटाकर पहला स्थान प्राप्त किया।\n\n4. क्वालिफिकेशन राउंड में भारतीय जोड़ी का कुल स्कोर क्या रहा?\nक्वालिफिकेशन दौर में दोनों ने कुल 587 अंक हासिल किए, जिसमें 29 इनर-10 शामिल रहे।\n\n5. व्यक्तिगत स्पर्धाओं में कमलजीत और सुरुचि का प्रदर्शन कैसा रहा था?\nव्यक्तिगत क्वालिफिकेशन में कमलजीत नौवें और सुरुचि 26वें स्थान पर रहे थे, जिससे दोनों फाइनल में जगह नहीं बना पाए थे।\n\n6. कमलजीत मूल रूप से किस राज्य और जिले से ताल्लुक रखते हैं?\nकमलजीत हरियाणा के रेवाड़ी जिले के सुल्खा गांव के रहने वाले हैं।\n\n7. शूटिंग में आने से पहले कमलजीत किस खेल में सक्रिय थे?\nशूटिंग शुरू करने से पहले कमलजीत एथलेटिक्स के खिलाड़ी थे, लेकिन चोट के कारण उन्हें ट्रैक छोड़ना पड़ा।\n\n8. कमलजीत ने जूनियर विश्व चैंपियनशिप में कब और कौन-सा पदक जीता था?\nकमलजीत ने 2023 में कोरिया में आयोजित आईएसएसएफ जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप की 50 मीटर पिस्टल स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता था।\n\nप्रेरणा और सबक\nकमलजीत का सफर यह सिखाता है कि करियर में आने वाले अप्रत्याशित झटके और आर्थिक संकट भी निरंतर मेहनत के आगे रास्ता बदल देते हैं।\n\n• विपरीत परिस्थितियों में नया रास्ता: चोट के कारण एथलेटिक्स ट्रैक छूट जाने के बाद उन्होंने खेल से दूरी बनाने के बजाय निशानेबाजी को नए करियर के रूप में अपनाया। कभी-कभी एक विधा का अंत नए और बड़े अवसर की शुरुआत बन जाता है।\n• आर्थिक तंगी से पार पाना: भारी खर्च और फीस की चिंताओं के बीच उन्होंने खेल छोड़ने का ख्याल मन में आने के बावजूद अभ्यास जारी रखा। वित्तीय तंगी के दौर में धैर्य रखना अंततः खेल जगत में पहचान दिलाता है।\n• पारिवारिक समर्थन की अहमियत: माता-पिता के दृढ़ विश्वास ने उनके आत्मविश्वास को डगमगाने नहीं दिया। कठिन परिस्थितियों में अपनों का साथ सबसे बड़ी प्रेरणा साबित होता है।\n• कड़ी मेहनत का फल: मात्र चार वर्षों में बुनियादी प्रशिक्षण से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक तक पहुंचना उनकी लगन का प्रमाण है। निरंतर अभ्यास से किसी भी क्षेत्र में असाधारण सफलता हासिल की जा सकती है।",
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  "category": "खेल",
  "publishedAt": "2026-09-25",
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    "एशियन गेम्स",
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