एम्सटेलवीन में वेल्स पर भारत की 3-1 से धमाकेदार जीत, हरमनप्रीत सिंह ने दागे दो गोल वेगनेर स्टेडियम में खेले गए पूल डी के शुरुआती मैच में भारतीय टीम ने वेल्स को 3-1 से पराजित किया। कप्तान हरमनप्रीत सिंह के दो गोल और संजय के एक गोल की मदद से भारत ने 50 साल बाद विश्व कप पदक जीतने के अपने अभियान का शानदार आगाज किया। पांच दशकों के लंबे अंतराल के बाद विश्व कप में पदक हासिल करने का सपना लेकर उतरी भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने अपने अभियान की बेहद मजबूत और विजयी शुरुआत की है। नीदरलैंड्स के एम्सटेलवीन स्थित वेगनेर स्टेडियम में खेले गए पूल डी के अपने पहले मुकाबले में भारतीय टीम ने वेल्स को 3-1 से करारी शिकस्त देकर पूरे तीन अंक हासिल किए। लगभग 10,000 दर्शकों की क्षमता वाले इस ऐतिहासिक मैदान पर मौजूद भारतीय प्रशंसकों के भारी समर्थन के बीच खिलाड़ियों ने एक पल के लिए भी निराशा का मौका नहीं दिया। भारतीय टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने बेहतरीन ड्रैग फ्लिक का प्रदर्शन करते हुए मैच के 11वें और 43वें मिनट में दो शानदार गोल दागे, जिसके लिए उन्हें 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुना गया। टीम के लिए मैच का पहला गोल आठवें मिनट में युवा डिफेंडर संजय ने पेनल्टी कॉर्नर के जरिए किया था। दूसरी ओर, अपने हॉकी इतिहास का केवल दूसरा विश्व कप खेल रही वेल्स की टीम के लिए इकलौता गोल सैम वेल्श ने 56वें मिनट में सांत्वना स्वरूप दागा। पहला क्वार्टर: वेल्स के शुरुआती दबाव के बाद भारत का पलटवार और दो गोल की बढ़त मैच का आगाज वेल्स के आक्रामक रवैये के साथ हुआ, जिसने शुरुआती पांच मिनटों में गेंद पर अपना नियंत्रण बनाए रखा। खेल के दूसरे ही मिनट में वेल्स ने भारतीय हाफ में गंभीर सेंध लगाई, जब फ्रेड न्यूबोल्ड ने वृत्त के भीतर जैक प्रिचार्ड को एक सटीक पास दिया। हालांकि, भारतीय गोलकीपर सूरज करकेरा ने सतर्कता दिखाते हुए प्रिचार्ड के खतरनाक शॉट को समय पर नाकाम कर दिया। इसके ठीक बाद रिबाउंड पर फ्रेड न्यूबोल्ड ने दोबारा गोल पर निशाना साधा, लेकिन उनका शॉट गोलपोस्ट के ऊपर से निकल गया। फ्रेड न्यूबोल्ड ने शुरुआती मिनटों में भारतीय रक्षा पंक्ति को लगातार व्यस्त रखा और पांचवें मिनट में एक बार फिर गोल करने का प्रयास किया, लेकिन गेंद सीधे गोलकीपर करकेरा के हाथों में चली गई। वेल्स के इन शुरुआती छापों के बाद भारतीय टीम ने अपनी रणनीति बदलते हुए जवाबी हमले तेज किए। खेल के सातवें मिनट में मध्यक्रम के स्टार खिलाड़ी हार्दिक सिंह ने बेहतरीन मैदानी सूझबूझ से भारत के लिए पहला पेनल्टी कॉर्नर हासिल किया। उस समय कप्तान हरमनप्रीत सिंह मैदान पर मौजूद नहीं थे, इसलिए ड्रैग फ्लिक की जिम्मेदारी संजय को सौंपी गई। संजय का पहला प्रयास भले ही चूक गया और गेंद पहले रशर के पैर से टकरा गई, लेकिन नियम के तहत भारत को तुरंत दूसरा पेनल्टी कॉर्नर मिल गया। इस बार आठवें मिनट में संजय ने कोई गलती नहीं की और दाहिनी ओर डाइव लगा रहे वेल्स के गोलकीपर को छकाते हुए अपनी सीधी और सनसनाती ड्रैग फ्लिक से गेंद को सीधे नेट में पहुंचाकर भारत का खाता खोल दिया। इसके ठीक तीन मिनट बाद, 10वें मिनट में जरमनप्रीत सिंह ने दाहिने विंग से जबरदस्त रफ्तार दिखाते हुए वेल्स के सर्कल के करीब प्रवेश किया, हालांकि उनकी रिवर्स हिट सटीक निशाना नहीं साध सकी। भारत का दबदबा यहीं नहीं रुका और 11वें मिनट में टीम को मैच का तीसरा पेनल्टी कॉर्नर मिला। इस बार मैदान पर मौजूद कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने अपनी महारत का परिचय दिया और शक्तिशाली ड्रैग फ्लिक से गोल दागकर भारत को 2-0 की मजबूत बढ़त दिला दी। एक मिनट बाद ही वेल्स ने गोल अंतर कम करने की कोशिश की, लेकिन जरमनप्रीत के नेतृत्व में भारतीय रक्षा पंक्ति ने मुस्तैदी दिखाते हुए उनके हमले को नाकाम कर दिया। पहले क्वार्टर के समाप्त होने से ठीक एक मिनट पहले भारत को चौथा पेनल्टी कॉर्नर भी मिला, लेकिन इस बार हरमनप्रीत की फ्लिक गोलपोस्ट से बाहर चली गई। दूसरा क्वार्टर: मनप्रीत सिंह का मील का पत्थर और वेल्स का चूकना पहले क्वार्टर की समाप्ति पर भारत के पास 2-0 की बढ़त थी। दूसरे क्वार्टर के शुरुआती मिनट (16वें मिनट) में ही इस विश्व कप के सबसे अनुभवी भारतीय खिलाड़ी मनप्रीत सिंह ने, जो अपना 417वां अंतरराष्ट्रीय मैच खेल रहे थे, टीम के लिए एक और पेनल्टी कॉर्नर बनाया। हालांकि, इस मौके पर हरमनप्रीत के शॉट को मनप्रीत सही तरीके से ट्रैप नहीं कर सके और मनदीप सिंह का डिफ्लैक्शन का प्रयास भी निष्फल रहा। खेल के 19वें मिनट में वेल्स को गोल करने का सबसे बेहतरीन मौका मिला। वेल्स के रक्षकों ने रक्षा पंक्ति से एक लंबा और सटीक पास आगे भेजा, जिसने भारतीय डिफेन्स को छकाते हुए जैक प्रिचार्ड को सीधे गोलकीपर मोहित एचएस और डिफेंडर संजय के सामने ला खड़ा किया। गोलकीपर मोहित स्थिति को भांपते हुए तेजी से आगे आए, लेकिन प्रिचार्ड का शॉट भाग्यवश गोलपोस्ट से टकराकर बाहर निकल गया और भारत की बढ़त सुरक्षित रही। दूसरे क्वार्टर के अंतिम क्षणों में भारत को एक और अच्छा मौका मिला जब सुखजीत ने दाहिनी ओर मौजूद राजिंदर को पास दिया, जिन्होंने तुरंत गोल पर निशाना लगाया, पर उनका शॉट लक्ष्य से चूक गया। इस तरह हाफटाइम तक भारतीय टीम 2-0 से आगे रही। तीसरा और चौथा क्वार्टर: हरमनप्रीत का दूसरा गोल और अंतिम मिनटों का हाई ड्रामा हाफटाइम के बाद तीसरे क्वार्टर में भारतीय टीम ने अपनी वही आक्रामक गति और लय बरकरार रखी। टीम के लगातार दबाव का फल 42वें मिनट में मिला जब भारत को एक और पेनल्टी कॉर्नर हासिल हुआ। 43वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर पर कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने अपनी ड्रैग फ्लिक से बायीं ओर एक जोरदार शॉट दागा, जिसे वेल्स का गोलकीपर रोक नहीं पाया। इस दूसरे व्यक्तिगत गोल के साथ हरमनप्रीत ने भारत की बढ़त को 3-0 कर दिया। मैच का अंतिम और चौथा क्वार्टर बेहद रोमांचक रहा। नए टूर्नामेंट प्रारूप को ध्यान में रखते हुए भारतीय टीम की योजना बड़े अंतर से जीत दर्ज करने और अपनी क्लीन शीट बनाए रखने की थी। हालांकि, 54वें मिनट में वेल्स को मैच का अपना पहला पेनल्टी कॉर्नर मिला। इस पर फर्लोंग ने एक अत्यंत शक्तिशाली शॉट लगाया, लेकिन भारतीय गोलकीपर मोहित एचएस ने बेहतरीन डाइव लगाकर अद्भुत बचाव किया। इसके बावजूद 56वें मिनट में मैदान पर नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला। पेनल्टी कॉर्नर के रिबाउंड पर सैम वेल्श ने गेंद को गोल के भीतर पहुंचा दिया। उस वक्त मैदान पर सीटी बज चुकी थी, जिस पर भारतीय टीम ने तुरंत अंपायर रेफरल की मांग की। टीवी अंपायर ने रीप्ले की जांच करने के बाद गोल को जायज ठहराया क्योंकि सीटी की आवाज पूरी तरह गूंजने से पहले ही गेंद गोल रेखा के पार जा चुकी थी। इस प्रकार वेल्स ने अपना खाता खोला और स्कोर 3-1 हो गया। कोच क्रेग फुल्टोन की भावी चुनौतियां और इंग्लैंड से अगला मुकाबला हालांकि भारतीय टीम ने अपने शुरुआती मैच में जीत हासिल कर 3 अंक सुरक्षित कर लिए हैं, लेकिन मैच के आखिरी मिनटों में एक गोल गंवाने से मुख्य कोच क्रेग फुल्टोन पूरी तरह संतुष्ट नहीं होंगे। नए नियमों और गोल अंतर के महत्व को देखते हुए भारतीय टीम को अपनी रक्षात्मक एकाग्रता अंतिम सीटी बजने तक बनाए रखनी होगी। पूल डी में भारत का अगला मुकाबला इंग्लैंड के खिलाफ होना है, जो बेहद कठिन माना जा रहा है। ऐसे में इंग्लैंड के खिलाफ मैदान में उतरने से पहले कोच क्रेग फुल्टोन को अपनी टीम की कमजोरियों, विशेषकर अंतिम क्षणों में गोल खाने की आदत पर काम करना होगा। वहीं दूसरी तरफ, अपना दूसरा विश्व कप खेल रही वेल्स की टीम भले ही मैच हार गई हो, पर शुरुआती और अंतिम मिनटों में दिखाए गए जज्बे से वे सकारात्मक संकेत ले सकती है। इसका आप पर असर भारतीय हॉकी प्रशंसक: पूल डी के पहले मैच में 3-1 की इस मजबूत जीत से भारत का क्वार्टर फाइनल की दौड़ में आगे बढ़ना आसान होगा और 50 साल बाद विश्व कप पदक जीतने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। सवाल-जवाब 1. भारत और वेल्स के बीच विश्व कप मैच का नतीजा क्या रहा? भारत ने वेल्स को 3-1 से हराकर अपने विश्व कप अभियान की विजयी शुरुआत की। 2. भारत की ओर से गोल किस-किस खिलाड़ी ने दागे? भारत के लिए कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने 11वें और 43वें मिनट में दो गोल किए, जबकि संजय ने 8वें मिनट में टीम का पहला गोल दागा। 3. वेल्स की टीम के लिए इकलौता गोल किसने और कब किया? वेल्स के लिए सैम वेल्श ने 56वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर के रिबाउंड पर गोल किया। 4. इस मैच में 'प्लेयर ऑफ द मैच' का पुरस्कार किसे मिला? दो शानदार पेनल्टी कॉर्नर गोल दागने वाले भारतीय कप्तान हरमनप्रीत सिंह को 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुना गया। 5. पूल डी में भारत का अगला मुकाबला किस टीम से होगा? भारत का अगला मुकाबला पूल डी की मजबूत टीम इंग्लैंड से होगा। https://trendkia.com/sports/amstelveen-men-wales-para-india-ki-3-1-se-dhamakedara-jita-harmanpreet-singh-ne-dage-do-gola-17077 TrendKia — Har trend, sabse pehle.