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  "type": "article",
  "title": "अनंतजीत सिंह नरुका ने शूटिंग में रचा इतिहास, एशियन गेम्स में दो ब्रॉन्ज मेडल झटककर ओलंपिक पर टिकी नजरें",
  "summary": "जयपुर के निशानेबाज अनंतजीत सिंह नरुका ने जापान में आयोजित एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए दो ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए हैं और अब उनका मुख्य लक्ष्य आगामी ओलंपिक में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है।",
  "content": "खेल के मैदान पर देश का सिर गर्व से ऊंचा करने वाले एशियन गेम्स में राजस्थान के प्रतिभाशाली निशानेबाज अनंतजीत सिंह नरुका ने दो ब्रॉन्ज मेडल हासिल कर एक नया इतिहास रच दिया है। जापान की धरती पर चल रही इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में भारतीय शॉटगन स्कीट टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने यह शानदार उपलब्धि हासिल की है। इस सफर में माहेश्वरी चौहान के साथ जोड़ी बनाते हुए उन्होंने पहला ब्रॉन्ज मेडल जीता, जबकि व्यक्तिगत स्पर्धा के फाइनल मुकाबले में भी उनका प्रदर्शन बेहद सराहनीय रहा और वह चौथे स्थान पर रहे।\n\nएक ही स्पर्धा में दोहरे पदक की ऐतिहासिक सफलता\nइस महामुकाबले में अनंतजीत सिंह नरुका ने केवल एक नहीं बल्कि दो ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए। पुरुषों के स्कीट टीम इवेंट में उन्होंने मैराज अहमद खान और भवतेघ सिंह गिल के साथ मिलकर देश के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीता। व्यक्तिगत स्पर्धा के दौरान भी उन्होंने अपने कौशल का परिचय देते हुए 125 में से 119 का मजबूत स्कोर हासिल किया और फाइनल तक का सफर तय किया। स्कीट मेंस और स्कीट मिक्स्ड टीम दोनों श्रेणियों में पदक जीतकर उन्होंने साबित कर दिया कि वह देश के शीर्ष निशानेबाजों में से एक हैं।\n\nचीन से लेकर जापान तक लगातार शानदार प्रदर्शन\nयह कोई पहला मौका नहीं है जब अनंतजीत सिंह नरुका ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहराया हो। इससे पहले चीन के होंग्झू शहर में हुए पिछले एशियन गेम्स में भी उन्होंने व्यक्तिगत स्पर्धा में सिल्वर मेडल और टीम इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। इस प्रकार चीन से जापान तक के सफर में पदक जीतने वाले वह लगातार दो बार एशियन गेम्स में मेडल अपने नाम करने वाले राजस्थान के पहले खिलाड़ी बन गए हैं। उनकी यह निरंतरता खेल जगत में उनकी गहरी पकड़ को दर्शाती है।\n\nशुरुआती जीवन और खेल में प्रवेश की बात करें तो उन्हें यह विरासत परिवार से ही मिली है। उनके पिता दलपत सिंह उनके पहले गाइड और पर्सनल कोच बने जिन्होंने उन्हें चौदह साल की उम्र में शूटिंग की बारीकियां सिखाईं। साल 2012 में उन्होंने इस खेल में कदम रखा और 2013 में नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया की जूनियर भारतीय शूटिंग टीम का हिस्सा बने। राष्ट्रीय शॉटगन चैंपियनशिप में उन्होंने पुरुष स्कीट स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीतकर अपनी शानदार क्षमता का परिचय दिया था।\n\nराष्ट्रीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय फलक तक का सफर\nसाल 2015 की राष्ट्रीय शॉटगन चैंपियनशिप से शुरू हुआ उनका यह सफर ओलंपिक तक बेहद गौरवशाली रहा है। उन्होंने एशियाई खेलों से लेकर विश्व कप, विश्व चैंपियनशिप, आईएसएसएफ वर्ल्ड कप और पेरिस ओलंपिक तक भारत का प्रतिनिधित्व किया है और कई पदक देश की झोली में डाले हैं। जापान में अपनी सफलता का परचम लहराने वाले अनंतजीत सिंह नरुका देश के बेहतरीन स्कीट निशानेबाजों में गिने जाते हैं। साल 2023 के एशियन गेम्स में भी उन्होंने पुरुषों की स्कीट स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतकर इस इवेंट में भारत को पहला पदक दिलाया था। इसके अलावा उन्होंने एशियन शूटिंग चैंपियनशिप 2025 में व्यक्तिगत गोल्ड मेडल और आईएसएसएफ वर्ल्ड कप फाइनल में ब्रॉन्ज मेडल भी जीता है।\n\nउनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और खेल के प्रति झुकाव की बात करें तो उनका जन्म 1 जुलाई 1998 को राजस्थान की राजधानी जयपुर में हुआ था। वह टोंक जिले के उनियारा के पूर्व शाही परिवार से ताल्लुक रखते हैं और वर्तमान में उनकी उम्र 28 वर्ष है। शाही राजपूत परिवार में जन्म लेने के कारण बचपन से ही हथियार और बंदूकें उनके जीवन का हिस्सा रहीं, जिससे उनका रुझान इस खेल की तरफ स्वाभाविक रूप से हुआ। अपनी प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने जयपुर के प्रतिष्ठित जयश्री पेरिवाल इंटरनेशनल स्कूल से पूरी की और उच्च शिक्षा के लिए सेंट जेवियर्स कॉलेज में दाखिला लिया। बचपन में उनका ध्यान एथलेटिक्स, क्रिकेट, गोल्फ, स्क्वैश और टेबल टेनिस जैसे कई खेलों पर था, लेकिन पिता से प्रभावित होकर उन्होंने शूटिंग को अपना मुख्य रास्ता चुना।\n\nलॉस एंजिल्स ओलंपिक की तैयारी में जुटे खिलाड़ी\nएशियन गेम्स में शानदार सफलता हासिल करने के बाद अब अनंतजीत सिंह नरुका का पूरा ध्यान आगामी लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 की तैयारियों पर केंद्रित है। इसके लिए उन्होंने क्वालिफाई भी कर लिया है और उनका सपना देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर विश्व मंच पर भारत का नाम रोशन करना है। पेरिस ओलंपिक 2024 के मिक्स्ड स्कीट इवेंट में वह पदक के बेहद करीब पहुंचे थे और कांस्य पदक के मुकाबले में उन्हें मात्र एक अंक के अंतर से हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन उस अनुभव से सीख लेते हुए वह अब अपनी कमियों को दूर कर रहे हैं और ओलंपिक की दिशा में कड़ी मेहनत कर रहे हैं।\n\nइसका आप पर असर\nयह सफलता भारतीय खेल जगत और विशेष रूप से उभरते निशानेबाजों के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करना चाहते हैं।\n\n• भारत में: देश के निशानेबाजों को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने के लिए और अधिक प्रोत्साहन और संसाधन मिलने की उम्मीद है।\n• जयपुर में: स्थानीय युवाओं और खेल प्रेमियों में शूटिंग के प्रति रुझान बढ़ेगा और क्षेत्रीय स्तर पर खेल बुनियादी ढांचे को बढ़ावा मिलेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह सफलता वर्षों की कड़ी मेहनत, समर्पित कोचिंग और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अभ्यास का परिणाम है।\n\n• कठिन प्रशिक्षण: शुरुआती उम्र से ही पेशेवर मार्गदर्शन और अनुशासन ने निशानेबाज को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने योग्य बनाया।\n• पारिवारिक पृष्ठभूमि: खेल के माहौल और पैतृक प्रेरणा ने उन्हें शुरुआती दौर से ही शॉटगन शूटिंग में महारत हासिल करने में मदद की।\n• अनुभव: पिछले टूर्नामेंटों और ओलंपिक जैसे बड़े मंचों पर खेलने के अनुभव ने उनके प्रदर्शन में सुधार किया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अनंतजीत सिंह नरुका ने एशियन गेम्स में कितने मेडल जीते?\nउन्होंने एशियन गेम्स में दो ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए।\n\n2. अनंतजीत सिंह नरुका का संबंध किस खेल से है?\nवह शॉटगन स्कीट शूटिंग के जाने-माने खिलाड़ी हैं।\n\n3. उन्होंने शूटिंग की शुरुआत कब की थी?\nउन्होंने 14 साल की उम्र में साल 2012 में शूटिंग की शुरुआत की थी।\n\n4. उनके पहले कोच कौन थे?\nउनके पिता दलपत सिंह उनके पहले गाइड और पर्सनल कोच रहे हैं।\n\n5. उनका अगला बड़ा लक्ष्य क्या है?\nउनका अगला मुख्य लक्ष्य आगामी लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है।\n\nप्रेरणा और सबक\nअनंतजीत सिंह नरुका की यह यात्रा उन युवाओं के लिए एक मिसाल है जो खेल के क्षेत्र में मुकाम हासिल करना चाहते हैं।\n\n• कम उम्र में शुरुआत: किसी भी खेल में महारत हासिल करने के लिए कम उम्र से ही सही दिशा में प्रयास शुरू करना बेहद फायदेमंद होता है।\n• निरंतरता: लगातार असफलताओं और नजदीकी हार से सीख लेकर अपने खेल में सुधार करना सफलता की कुंजी है।\n• लक्ष्य पर फोकस: बड़े टूर्नामेंटों के दबाव के बीच अपने मूल लक्ष्य यानी ओलंपिक पदक पर नजर बनाए रखना जरूरी है।",
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  "category": "खेल",
  "publishedAt": "2026-09-26",
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    "एशियन गेम्स 2026",
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