एशियन गेम्स के कड़े मुकाबले से बाहर होने के बाद छलका पीवी सिंधू का दर्द, वापसी का किया कड़ा संकल्प एशियन गेम्स के क्वार्टर फाइनल में हारने के बाद पीवी सिंधू ने सोशल मीडिया पर अपनी निराशा साझा की और कहा कि वह कमियों पर काम करके वापसी करेंगी। नई दिल्ली: प्रतिष्ठित एशियन गेम्स से निराशाजनक तरीके से बाहर होने के बाद दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधू का दर्द खुलकर सामने आया है। हालांकि, इस हार के बाद उपजे दर्द ने उनके भीतर और अधिक सफलता हासिल करने के संकल्प को और अधिक मजबूत कर दिया है। पीवी सिंधू ने अपनी कमियों पर पूरी मेहनत से काम करने का वादा करते हुए यह स्पष्ट किया कि एक निराशाजनक नतीजा उस लंबे सफर को कभी भी परिभाषित नहीं कर सकता, जो उनके जीवन और खेल करियर के लिए बहुत मायने रखता है। पीवी सिंधू का यह अभियान रविवार को चीन की खिलाड़ी चेन यूफेई के खिलाफ खेले गए कड़े क्वार्टर फाइनल मुकाबले में हार के साथ समाप्त हो गया। मैच के दौरान एक ऐसा भी पल आया जब वह जीत हासिल करने से महज तीन अंक दूर थीं, लेकिन इसके बाद उन्हें लगातार संघर्ष करना पड़ा और अंततः 21-11, 18-21, 10-21 के अंतर से हार का सामना करना पड़ा। इस मुकाबले ने एक बार फिर खेल के मैदान पर दबाव के क्षणों में रणनीति और फिटनेस की अहमियत को उजागर किया है। हार के बाद भावनाओं को समझने के लिए चाहिए था समय पीवी सिंधू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी भावनाओं को साझा करते हुए लिखा कि इस पूरी स्थिति को शब्दों में बयां करने के लिए उन्हें कुछ समय की आवश्यकता थी। उनका एशियन गेम्स का सफर अब थम चुका है और वह इस हार से आहत हैं। उन्होंने बताया कि क्वार्टर फाइनल मैच में मुकाबला अपने पक्ष में करने से वह मात्र तीन अंक दूर थीं और उनके जेहन में बार-बार वही तीन अंक घूम रहे हैं कि कैसे वह जीत उनके हाथ से फिसल गई। इस 31 वर्षीय स्टार खिलाड़ी ने खुले तौर पर यह स्वीकार किया कि महत्वपूर्ण और निर्णायक मौकों पर लंबे समय तक चलने वाली थकाऊ रैलियों में वह एक बार फिर पिछड़ गईं। हाल ही में चीन में हुए उनके मुकाबलों के दौरान भी इसी तरह की लंबी रैलियों ने परिणाम तय करने में मुख्य भूमिका निभाई थी। उन्होंने अपने विचार रखते हुए कहा कि उनके पास जीत का पूरा मौका था और अब उस सुनहरे अवसर को हाथ से निकल जाने का गहरा दर्द महसूस हो रहा है। चौथी बार एशियन गेम्स में ले रही थीं हिस्सा इस निराशा को अपने पूरे अभियान की पहचान बनने देने के बजाय पीवी सिंधू ने खेल के दौरान दबाव के क्षणों में सामने आई कमियों को दूर करने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि वह और उनकी पूरी सपोर्ट टीम पहले से ही उन अहम मौकों पर मुकाबला सफलतापूर्वक खत्म करने की क्षमता को बेहतर बनाने पर काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि वे इस कमजोरी को जल्द ही सुधार लेंगे। पीवी सिंधू ने साल 2014 में अपने पहले एशियन गेम्स के पदार्पण से लेकर 12 साल बाद अपने चौथे एशियन गेम्स में हिस्सा लेने तक के पूरे सफर पर गर्व महसूस किया। उन्होंने अपने संदेश में लिखा कि गर्व करने की कई ठोस वजहें मौजूद हैं। साल 2014 में अपने पहले एशियन गेम्स से लेकर अब अपने चौथे खेलों तक, भारत के लिए लगातार 12 साल तक अपना शत-प्रतिशत देने का यह एक लंबा सफर रहा है। वह खुद को इस पूरी भावना को गहराई से महसूस करने देना चाहती हैं। उनका मानना है कि एक दर्दनाक नतीजा उस शानदार सफर को कभी भी धुंधला नहीं कर सकता, जो उनके दिल के इतने करीब है। बेहद व्यस्त शेड्यूल और शारीरिक थकान का असर पीवी सिंधू ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए लिखा कि वह आहत जरूर हैं, लेकिन यह पूरी तरह से स्वाभाविक है। उन्हें इस बात की खुशी है कि खेल उनके लिए आज भी इतना महत्व रखता है कि हार पर उन्हें तकलीफ होती है। उन्होंने कहा कि वह आज भी कोर्ट पर अपनी पूरी ऊर्जा और दमखम के साथ खेलना चाहती हैं। यही अटूट भावना उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। एशियन गेम्स के बेहद व्यस्त और कड़े कार्यक्रम ने भी पीवी सिंधू की शारीरिक सहनशक्ति की कड़ी परीक्षा ली, जिसके दौरान उन्हें मात्र 18 घंटे के भीतर कुल तीन-तीन मुकाबले खेलने पड़े। उनका शेड्यूल इतना कठिन था कि तीसरे मैच के बाद वह रात को करीब तीन बजे अपने कमरे में वापस लौट पाईं और फिर अगली सुबह ठीक 8:30 बजे उन्हें दोबारा मैच खेलने के लिए कोर्ट पर उतरना पड़ा। उन्होंने इस स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि इतने कम अंतराल में लगातार तीन मैच खेलने का असर उनके शरीर पर जरूर पड़ा। हालांकि, जिस बेहतरीन प्रशिक्षण शिविर ने उन्हें हर मुकाबला जीतने का कारण दिया था, उसके बाद वह मैदान पर इससे कहीं अधिक बेहतर परिणाम हासिल करना चाहती थीं। प्रशंसकों के अटूट समर्थन के लिए जताया आभार अपने चौथे एशियन गेम्स के इस पूरे अनुभव के दौरान पीवी सिंधू ने अपने तमाम प्रशंसकों का भी दिल से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जो देशवासी देर रात तक जागकर उनके मुकाबले देखते रहे और लगातार उनका हौसला बढ़ाते रहे, वह उन सभी के लिए ही वे आखिरी तीन अंक हासिल करना चाहती थीं ताकि सबको गर्व महसूस हो सके। पीवी सिंधू ने अंत में कहा कि उन सभी लोगों का बहुत-बहुत धन्यवाद, जो देर रात तक जागे, लगातार उनका समर्थन किया और उन पर पूरा भरोसा बनाए रखा। उन्होंने कहा कि वह उन आखिरी तीन अंकों को हम सभी के लिए जीतना चाहती थीं। मुश्किल समय में उनके साथ मजबूती से खड़े रहने के लिए उन्होंने सभी का धन्यवाद किया और यह वादा किया कि वह और अधिक मेहनत के साथ फिर से मैदान पर वापसी करेंगी। सवाल-जवाब 1. पीवी सिंधू एशियन गेम्स से किस दौर में बाहर हुईं? पीवी सिंधू एशियन गेम्स के क्वार्टर फाइनल मुकाबले में हारकर बाहर हो गईं। 2. क्वाटर फाइनल मैच में पीवी सिंधू को किस खिलाड़ी ने हराया? पीवी सिंधू को चीन की खिलाड़ी चेन यूफेई के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। 3. क्वार्टर फाइनल मैच का स्कोर क्या रहा था? मुकाबले का स्कोर सिंधू के खिलाफ 21-11, 18-21, 10-21 रहा। 4. पीवी सिंधू ने अपने किस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भावनाएं साझा कीं? पीवी सिंधू ने एक्स प्लेटफॉर्म पर अपने विचार और भावनाएं साझा कीं। 5. पीवी सिंधू ने अपने करियर में कुल कितने एशियन गेम्स में हिस्सा लिया है? पीवी सिंधू ने साल 2014 से लेकर अब तक अपने चौथे एशियन गेम्स में हिस्सा लिया है। प्रेरणा और सबक पीवी सिंधू के सफर से मिलने वाली प्रेरणा और महत्वपूर्ण सबक: • कड़ी मेहनत और सुधार: हार के बाद निराश होने के बजाय अपनी कमियों को पहचानकर उन पर लगातार काम करना चाहिए। • खेल के प्रति समर्पण: करियर के लंबे सफर और उतार-चढ़ाव के बावजूद खेल के प्रति अपना जुनून और जज्बा हमेशा जिंदा रखना चाहिए। • लंबी प्रतिबद्धता: देश के लिए लगातार कई वर्षों तक अपना शत-प्रतिशत योगदान देने की मानसिक दृढ़ता रखनी चाहिए। • चुनौतियों का सामना: शारीरिक थकान और बेहद कठिन शेड्यूल जैसी मुश्किल परिस्थितियों के बीच भी मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास करना चाहिए। https://trendkia.com/sports/asian-games-ke-mukabale-se-bahara-hone-ke-bada-chhalaka-pv-sindhu-ka-darda-vapasi-ka-kiya-kara-snkalpa-39884 TrendKia — Har trend, sabse pehle.