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  "type": "article",
  "title": "एशियाई खेलों में भारतीय दल का जलवा, पदकों की संख्या 17 तक पहुंची",
  "summary": "एशियाई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने ट्रैक, निशानेबाजी और वुशू समेत कई स्पर्धाओं में पदक जीतकर अपनी संख्या 17 कर ली है, जबकि हॉकी और कबड्डी में भी शानदार जीत दर्ज की।",
  "content": "महाद्वीपीय खेल महाकुंभ में भारतीय दल की रफ्तार लगातार तेज होती जा रही है। विभिन्न स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों ने अपने दमखम से कई पोडियम स्थान हासिल किए, जिससे देश की कुल पदक संख्या अब 17 तक पहुंच गई है। इन पदकों में एक स्वर्ण, सात रजत और नौ कांस्य पदक शामिल हैं। ट्रैक और फील्ड से लेकर निशानेबाजी रेंज, पानी की लहरों और सांडा रिंग तक खिलाड़ियों ने कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कराए। इसके अतिरिक्त, पारंपरिक टीम स्पर्धाओं में भी भारत की मजबूत स्थिति बरकरार रही।\n\nलंबी दूरी की दौड़ में सालों का सूखा खत्म\nट्रैक और फील्ड मुकाबलों की शुरुआत भारत के लिए बेहद यादगार साबित हुई, जहां महिलाओं की 10,000 मीटर दौड़ में देश को एक अहम कामयाबी मिली। पच्चीस साल की सीमा कुमारी ने इस बेहद थका देने वाली स्पर्धा में जबरदस्त दमखम दिखाते हुए 32:50.05 सेकंड का समय निकाला और तीसरे स्थान पर रहकर कांस्य पदक अपने नाम किया। इस स्पर्धा में भारत को लंबे अरसे बाद कोई पदक मिला है। इससे पहले साल 2010 में देश की दो धाविकाओं ने इस दौड़ में पोडियम हासिल किया था, जब प्रीजा श्रीधरन ने सोने का तमगा और कविता राउत ने चांदी का पदक जीता था। इस ताजा दौड़ का स्वर्ण पदक बहरीन की धाविका विनफ्रेड यावी ने 32:39.18 के समय के साथ हासिल किया, जबकि जापान की नोजोमी तनाका ने 32:41.54 का समय निकालकर रजत पदक जीता।\n\nरिले दौड़ का ड्रामा और आधिकारिक रजत पदक\nट्रैक पर मिक्स्ड 4×400 मीटर रिले स्पर्धा का मुकाबला काफी रोमांचक और नाटकीय उतार-चढ़ाव से भरा रहा। भारतीय चौकड़ी, जिसमें टीएस मनु, एमआर पूवम्मा, विशाल टीके और विथ्या रामराज शामिल थे, ने मिलकर 3:14.46 का बेहतरीन समय निकाला और दूसरे स्थान पर फिनिश लाइन पार की। इस स्पर्धा में बहरीन की टीम ने 3:12.87 का नया गेम्स रिकॉर्ड समय दर्ज करते हुए पहला स्थान हासिल किया और स्वर्ण पदक अपने खाते में डाला।\n\nदौड़ समाप्त होने के बाद कुछ समय के लिए काफी अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गई थी। यूएई की तरफ से दर्ज की गई एक विरोध याचिका के चलते आयोजकों ने नतीजों की घोषणा रोक दी थी। हालांकि, तकनीकी समीक्षा के बाद आयोजकों ने यूएई की टीम को नियमों के उल्लंघन के चलते अयोग्य करार दे दिया। इसके साथ ही भारत का दूसरा स्थान और रजत पदक आधिकारिक तौर पर पक्का हो गया। इस खास रिले स्पर्धा में भारत का यह लगातार तीसरा पदक है। इससे पूर्व भारतीय दल ने 2018 के संस्करण में शीर्ष स्थान हासिल करते हुए स्वर्ण जीता था और पिछले आयोजनों में भी रजत पदक पर कब्जा किया था।\n\nनिशानेबाजी रेंज में स्कीट टीम की शानदार उपलब्धि\nनिशानेबाजी रेंज पर मिक्स्ड टीम स्कीट स्पर्धा में भारतीय जोड़ी ने देश के लिए एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। अनंतजीत सिंह नरूका और परिनाज़ धालीवाल ने सटीक निशानेबाजी का मुजाहिरा करते हुए तीसरे स्थान के साथ कांस्य पदक पर अपना कब्जा जमाया। एशियाई खेलों के इतिहास में मिक्स्ड टीम स्कीट श्रेणी में भारत का यह पहला पदक दर्ज हुआ है।\n\nइस कांस्य के साथ ही भारतीय स्कीट दस्ते ने केवल दो दिनों के भीतर कुल तीन पदक जुटाकर अपनी चुनौती का शानदार अंत किया। इससे ठीक पहले पुरुष टीम वर्ग में अनंतजीत सिंह नरूका, भवतेघ सिंह गिल और मेराज अहमद खान की तिकड़ी ने कांस्य पदक जीता था। वहीं महिला वर्ग में परिनाज़ धालीवाल, राइजा ढिल्लों और माहेश्वरी चौहान की टीम ने भी सटीक तालमेल दिखाते हुए तीसरा स्थान हासिल कर कांस्य पदक अपने नाम किया था।\n\nमार्शल आर्ट्स रिंग में रोशिबिना का अद्वितीय सफर\nवुशू के सांडा मुकाबले में रोशिबिना देवी नाओरम ने अपनी असाधारण प्रतिभा का लोहा मनवाया। महिलाओं के 60 किलोग्राम भार वर्ग के खिताबी मुकाबले में उनका सामना मेजबान देश चीन की झांग शियाओयू से हुआ। इस कड़े फाइनल मैच में रोशिबिना को 0-2 (कुल 10-0 अंक) के अंतर से शिकस्त झेलनी पड़ी, जिसके चलते उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा।\n\nइस खिताबी हार के बावजूद रोशिबिना ने भारतीय वुशू इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया। वह इन खेलों में लगातार दूसरा रजत पदक जीतने वाली खिलाड़ी बन गईं। इसके साथ ही वह तीन एशियाई खेल पदक अपने नाम करने वाली भारत की सबसे कामयाब वुशू एथलीट बन चुकी हैं। उन्होंने वर्ष 2018 के खेलों में कांस्य पदक जीता था, जिसके बाद 2023 के आयोजन में रजत और अब एक बार फिर रजत पदक हासिल किया। रोशिबिना का दल में शामिल होना भी एक दिलचस्प घटनाक्रम रहा, क्योंकि वह प्राथमिक चयन ट्रायल्स में पिछड़ गई थीं। लेकिन साथी खिलाड़ी दिव्यांशी चौधरी के चोटिल होने के कारण उन्हें अंतिम समय में टीम में अवसर मिला, जिसे उन्होंने पदक में तब्दील कर दिखाया।\n\nरोइंग स्पर्धा में ऐतिहासिक कांस्य पदक\nपानी की लहरों पर लड़े गए मुकाबलों में भी भारतीय नौकायन खिलाड़ियों ने अपनी छाप छोड़ी। पुरुषों की डबल स्कल्स स्पर्धा में सतनाम सिंह और सलमान खान की जोड़ी ने कड़े संघर्ष के बीच 6:13.25 का समय निकाला और तीसरे स्थान पर रहते हुए कांस्य पदक झटका। एशियाई खेलों के इतिहास में पुरुषों के डबल स्कल्स वर्ग में भारत की झोली में आया यह पहला पदक है।\n\nरेस के शुरुआती चरण में भारतीय नाव बेहद मजबूत स्थिति में थी। 1,500 मीटर की दूरी तय होने तक सतनाम और सलमान दूसरे स्थान पर चल रहे थे और रजत की दौड़ में सबसे आगे दिख रहे थे। हालांकि, आखिरी के 500 मीटर के थका देने वाले फासले में विपक्षी नौकाओं ने रफ्तार बढ़ाई, जिसके चलते भारतीय टीम तीसरे पायदान पर खिसक गई। इस रेस का स्वर्ण पदक चीन के रोअर्स ने अपने नाम किया, जबकि उज्बेकिस्तान की टीम ने दूसरे स्थान पर रहते हुए रजत पदक हासिल किया।\n\nट्रैक और फील्ड की अन्य चुनौतियों में प्रदर्शन\nएथलेटिक्स के अन्य मैदानों पर भी भारतीय खिलाड़ियों ने कड़ी टक्कर दी। महिलाओं की ट्रिपल जंप प्रतियोगिता में भारत की आशा इलांगो बेहद करीबी अंतर से पदक से वंचित रह गईं। आशा ने अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास में 13.83 मीटर की छलांग लगाई, जो चीन की प्रतिस्पर्धी यी ली के सर्वश्रेष्ठ आंकड़े के बिल्कुल बराबर थी। मुकाबला टाई होने के बाद दोनों एथलीटों के दूसरे सर्वश्रेष्ठ प्रयास की जांच की गई, जिसमें चीनी खिलाड़ी का 13.79 मीटर का प्रयास आशा के 13.65 मीटर से बेहतर निकला। इस तकनीकी अंतर के कारण आशा चौथे स्थान पर खिसक गईं और पोडियम से चूक गईं।\n\nउधर तेज दौड़ के मैदान पर पुरुषों की 100 मीटर स्प्रिंट में भारतीय धावकों ने अपनी गति का अच्छा प्रदर्शन किया। अनिमेश कुजूर ने 10.36 सेकंड का समय लेकर और देश के राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक गुरिंदरवीर सिंह ने 10.38 सेकंड की दौड़ पूरी करके अपनी-अपनी हीट से आगे बढ़ते हुए सेमीफाइनल में जगह सुरक्षित कर ली है।\n\nहॉकी और कबड्डी में दबदबे के साथ आगे बढ़े कदम\nटीम स्पर्धाओं के मैदान पर भारत की दोनों मजबूत टीमों ने अपना वर्चस्व पूरी तरह साबित किया। पुरुष हॉकी में भारतीय टीम ने अपने आक्रामक खेल से कोरिया को एकतरफा अंदाज में 8-2 के भारी अंतर से रौंद दिया। इस मैच में दिलप्रीत सिंह ने 10वें, 26वें और 32वें मिनट में शानदार फील्ड गोल दागते हुए अपनी हैटट्रिक पूरी की। उनके अलावा अभिषेक ने दो बार गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचाया, जबकि शिलानंद लाकड़ा, हरमनप्रीत सिंह और राजिंदर सिंह ने एक-एक गोल दागे। टूर्नामेंट में यह भारतीय टीम की लगातार तीसरी जीत रही, जिसकी बदौलत वह पूल ए की अंक तालिका में शीर्ष पर काबिज है।\n\nकबड्डी के मैट पर भी गत चैंपियन भारतीय टीमों ने अपना विजय अभियान जारी रखा। पुरुष टीम ने चीनी ताइपे को 37-21 के स्कोर से पराजित किया, जबकि महिला वर्ग में भारतीय खिलाड़ियों ने जापान को 50-25 के बड़े अंतर से मात दी। इन दोनों शानदार जीतों के साथ ही भारत की दोनों टीमें सेमीफाइनल में प्रवेश कर चुकी हैं, जिससे देश के दो और कांस्य पदक सुनिश्चित हो गए हैं।\n\nस्क्वैश कोर्ट पर भारतीय खिलाड़ियों की कामयाबी\nस्क्वैश कोर्ट पर भी भारतीय दल के लिए दिन काफी सकारात्मक रहा। महिला एकल वर्ग में युवा खिलाड़ी अनाहत सिंह ने बेहतरीन खेल दिखाते हुए सिंगापुर की वाई इन्न आउ योंग को सीधे गेमों में 3-0 से हरा दिया। वहीं दूसरे मुकाबले में तन्वी खन्ना ने वाई ह्न्न आउ योंग के खिलाफ 3-1 से जीत हासिल की। अब क्वार्टर फाइनल के मंच पर दोनों भारतीय खिलाड़ी एक-दूसरे के खिलाफ खेलेंगी। पुरुष एकल में अभय सिंह और वीर चोतरानी ने भी अपने-अपने प्रतिद्वंद्वियों को मात देकर क्वार्टर फाइनल का टिकट कटाया। इसके साथ ही मिश्रित युगल वर्ग में जोशना चिनप्पा और वेलावन सेंथिलकुमार की अनुभवी जोड़ी ने भी जीत दर्ज करते हुए अंतिम आठ में अपनी जगह पक्की कर ली है।\n\nइसका आप पर असर\nएशियाई खेलों में भारतीय दल की इस बहुआयामी सफलता से देश के खेल प्रशंसकों और युवा एथलीटों में भारी उत्साह का संचार हुआ है।\n\n• प्रशंसकों के लिए: भारतीय दल के 17 पदक तक पहुंचने और सेमीफाइनल में जगह बनाने से आने वाले दिनों में और पदक पक्के हो गए हैं। दर्शक हॉकी, कबड्डी और स्क्वैश के महत्वपूर्ण नॉकआउट मुकाबलों में खिलाड़ियों के खेल का सीधा आनंद ले सकते हैं।\n• ओलंपिक और भविष्य की तैयारी: एथलेटिक्स और रोइंग जैसे खेलों में ऐतिहासिक पदक युवा खिलाड़ियों के लिए प्रोत्साहन का बड़ा जरिया बनेंगे। इन नतीजों से भारतीय खेल प्राधिकरण और संबंधित महासंघों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों की सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी।\n• कबड्डी और हॉकी में दबदबा: दोनों खेलों में सेमीफाइनल और पूल की शीर्ष स्थिति ने भारत की पारंपरिक खेल ताकत को फिर से साबित किया है। प्रशंसकों को अब इन पारंपरिक वर्गों में स्वर्ण पदकों की मजबूत उम्मीद बंधी है।\n• महिला खिलाड़ियों की उपलब्धियां: सीमा कुमारी और रोशिबिना देवी जैसे एथलीटों का प्रदर्शन देश में महिला खेलों के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण को और मजबूत करेगा। इससे राज्य स्तर पर उभरती युवा महिला खिलाड़ियों को आगे आने की नई प्रेरणा मिलेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nभारतीय एथलीटों की यह व्यापक सफलता खेल महासंघों की बेहतर तैयारी, प्रतिस्पर्धी अनुभव और विषम परिस्थितियों में खिलाड़ियों के संयम का नतीजा है।\n\n• तैयारी और तकनीकी मजबूती: एथलेटिक्स और रोइंग जैसे कठिन तकनीकी खेलों में खिलाड़ियों ने अपनी गति और सहनशक्ति पर विशेष काम किया था। इस निरंतर अभ्यास के कारण सीमा कुमारी और सतनाम-सलमान की जोड़ी ने पोडियम तक पहुंचकर पुराने सूखे को समाप्त किया।\n• नियमों के पालन का परिणाम: मिक्स्ड रिले में भारतीय टीम ने अनुशासन और गति का संतुलन बनाए रखा। यूएई द्वारा तकनीकी नियमों के उल्लंघन के बाद भारतीय टीम का रजत पदक इसलिए बहाल हुआ क्योंकि भारतीय चौकड़ी ने अपनी लेन और गति में कोई फाउल नहीं किया था।\n• प्रतिभा की गहराई और बैकअप तैयारी: वुशू में रोशिबिना देवी का रजत पदक इस बात का प्रमाण है कि दल में अतिरिक्त खिलाड़ियों का स्तर भी शीर्ष दर्जे का है। दिव्यांशी के चोटिल होने पर रोशिबिना को मिला अवसर उन्होंने अपने पुराने अनुभव के दम पर भुनाया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. एशियाई खेलों में भारत के पास अब कुल कितने पदक हैं?\nभारत के पास कुल 17 पदक हो चुके हैं, जिसमें एक स्वर्ण, सात रजत और नौ कांस्य पदक शामिल हैं।\n\n2. महिलाओं की 10,000 मीटर दौड़ में सीमा कुमारी ने कौन सा पदक जीता?\nसीमा कुमारी ने 32:50.05 का समय निकालकर कांस्य पदक जीता, जो 2010 के बाद इस स्पर्धा में भारत का पहला पदक है।\n\n3. मिक्स्ड 4×400 मीटर रिले टीम में कौन-कौन से धावक शामिल थे?\nइस चौकड़ी में टीएस मनु, एमआर पूवम्मा, विशाल टीके और विथ्या रामराज शामिल थे, जिन्होंने रजत पदक जीता।\n\n4. रोशिबिना देवी ने वुशू में क्या नया इतिहास रचा?\nरोशिबिना देवी नाओरम ने लगातार दूसरा रजत पदक जीता और तीन एशियाई खेल पदक जीतने वाली भारत की सबसे सफल वुशू खिलाड़ी बन गईं।\n\n5. पुरुष हॉकी मैच में भारत ने कोरिया को किस अंतर से हराया?\nभारतीय पुरुष हॉकी टीम ने कोरिया को 8-2 से हराया, जिसमें दिलप्रीत सिंह ने हैटट्रिक जमाई।\n\n6. रोइंग में पुरुषों के डबल स्कल्स का कांस्य पदक किसने जीता?\nसतनाम सिंह और सलमान खान की जोड़ी ने 6:13.25 का समय निकालकर पुरुषों के डबल स्कल्स में कांस्य पदक हासिल किया।\n\nप्रेरणा और सबक\nभारतीय खिलाड़ियों के इस खेल प्रदर्शन से अनुशासन, विपरीत परिस्थितियों में हार न मानने और मिले मौकों को भुनाने की अनमोल सीख मिलती है।\n\n• मौकों का पूरा लाभ उठाना: चयन ट्रायल्स में चूकने के बाद भी रोशिबिना ने अपनी तैयारी नहीं छोड़ी और मौका मिलते ही ऐतिहासिक रजत पदक जीत दिखाया। यह सिखाता है कि अवसर कभी भी आ सकता है, इसलिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।\n• धैर्य और निरंतर प्रयास: सीमा कुमारी ने 10,000 मीटर जैसी कठिन दौड़ में धैर्यपूर्वक दौड़ते हुए 14 साल बाद देश को पदक दिलाया। लगातार मेहनत कठिन से कठिन चुनौतियों के बीच भी परिणाम लेकर आती है।\n• टीम का आपसी तालमेल: मिक्स्ड रिले और निशानेबाजी में व्यक्तिगत कौशल के साथ-साथ एक-दूसरे पर भरोसा जीत की कुंजी साबित हुआ। सामूहिक प्रयासों में व्यक्तिगत अहंकार से बड़ा टीम का साझा लक्ष्य होता है।",
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  "publishedAt": "2026-09-24",
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