एशियाई खेलों में भारतीय खिलाड़ी क्विम्सी डिसूजा टेकबॉल सेमीफाइनल में हारीं, अब कांस्य पदक पर निगाहें एशियाई खेलों में पहली बार शामिल किए गए टेकबॉल के महिला सिंगल्स सेमीफाइनल में भारत की क्विम्सी डिसूजा को इंडोनेशिया की सुमाया के हाथों कड़े संघर्ष के बाद हार का सामना करना पड़ा। एशियाई खेलों के महिला सिंगल्स टेकबॉल सेमीफाइनल मुकाबले में भारतीय उम्मीदों को उस समय झटका लगा जब देश की खिलाड़ी क्विम्सी डिसूजा को शिकस्त झेलनी पड़ी। स्वर्ण पदक की दौड़ में आगे बढ़ने के लिए उनका सामना इंडोनेशिया की खिलाड़ी सुमाया से हुआ। शुरुआती बढ़त हासिल करने और जुझारू खेल दिखाने के बावजूद वह अपनी लय को बरकरार नहीं रख सकीं। इस हार के चलते उनका फाइनल में पहुंचकर सोने का तमगा जीतने का सफर समाप्त हो गया, लेकिन वह प्रतियोगिता से पूरी तरह बाहर नहीं हुई हैं और अब उनके पास कांस्य पदक हासिल करने का मौका रहेगा। शुरुआती बढ़त के बाद सुमाया ने पलटा मुकाबला मुकाबले की शुरुआत में मुंबई की एथलीट क्विम्सी डिसूजा का दबदबा देखने को मिला। उन्होंने बेहतरीन नियंत्रण का प्रदर्शन करते हुए पहला गेम 12-7 के अंतर से अपने नाम कर लिया था। हालांकि, इसके बाद प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी सुमाया ने जोरदार वापसी की और खेल को बराबरी पर लाकर निर्णायक तीसरे गेम तक खींच लिया। दूसरे और तीसरे गेम में क्विम्सी पिछड़ती चली गईं, जहां सुमाया ने लगातार नौ अंक बनाकर मैच पर पूरी तरह कब्जा कर लिया। अंततः क्विम्सी यह मुकाबला 12-7, 9-12, 7-12 के स्कोर से हार गईं। फुटबॉल और एथलेटिक्स से नए खेल तक का सफर टेकबॉल के मैदान पर उतरने से पहले क्विम्सी डिसूजा राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में सक्रिय थीं, जहां उन्होंने फुटबॉल के साथ-साथ 1500 मीटर दौड़ स्पर्धा में भी हिस्सा लिया था। उन्होंने इस नए खेल को अपनाने का फैसला तब किया, जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर ब्राजील के दिग्गज फुटबॉलर रोनाल्डिन्हो को इस खेल में अपना कौशल प्रदर्शित करते हुए देखा था। वहीं से प्रेरित होकर उन्होंने टेबल टेनिस और फुटबॉल के इस अनोखे मिश्रण को गंभीरता से खेलना शुरू किया। रविवार को कांस्य पदक का मुकाबला और खेल की पृष्ठभूमि भारतीय खिलाड़ी अब रविवार को होने वाले कांस्य पदक के प्लेऑफ मुकाबले में अपनी चुनौती पेश करेंगी। एशियाई खेलों के मंच पर टेकबॉल स्पर्धा को पहली बार आधिकारिक रूप से शामिल किया गया है। यह खेल मूल रूप से फुटबॉल और टेबल टेनिस का एक मिला-जुला रूप है, जिसकी शुरुआत साल 2014 में हंगरी के तीन फुटबॉल प्रशंसकों गैबोर बोरसानी, ग्योरगी गैटियन और विक्टर हुस्जार ने की थी। घुमावदार टेबल और खेल के नियम इस खेल की पहली आधिकारिक टेकबॉल विश्व चैंपियनशिप का आयोजन साल 2017 में बुडापेस्ट के भीतर किया गया था। इस स्पर्धा के नियमों के तहत खिलाड़ी हाथों और बाजुओं को छोड़कर शरीर के किसी भी हिस्से का उपयोग कर सकते हैं। वे एक मानक आकार की फुटबॉल को एक विशेष घुमावदार टेबल पर उछालते हैं, जिसके बीच में एक पारदर्शी प्लेक्सीग्लास का विभाजन लगा होता है। इस महाद्वीपीय खेल आयोजन में टेकबॉल के पदार्पण से खेल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक लोकप्रियता और विस्तार मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इसका आप पर असर भारतीय खेल प्रेमियों और उभरते एथलीटों के लिए एशियाई खेलों में नए खेलों का शामिल होना नए रास्ते खोलता है। • खेल प्रेमियों के लिए: भारतीय दल अब रविवार को होने वाले मैच में एक ऐतिहासिक कांस्य पदक जीतने की कतार में है। प्रशंसक इस नए खेल में भारत के पहले पदक अभियान पर अपनी नजरें रख सकते हैं। • युवा एथलीटों के लिए: पारंपरिक ट्रैक और फुटबॉल पृष्ठभूमि वाले खिलाड़ियों के लिए नए वैश्विक खेलों में मौके बढ़ रहे हैं। सोशल मीडिया से प्रेरित होकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल में पहचान बनाई जा सकती है। • खेल विकास के लिए: एशियाई खेलों में टेकबॉल के पदार्पण से देश में इस खेल के बुनियादी ढांचे को बढ़ावा मिलेगा। आने वाले वर्षों में स्कूल और क्लब स्तर पर घुमावदार टेबल और नई ट्रेनिंग सुविधाएं देखने को मिल सकती हैं। • प्रसारण और दर्शकों के लिए: फुटबॉल और टेबल टेनिस के इस नए संयोजन को देखने के नए अवसर मिलेंगे। दर्शक आने वाले दिनों में विभिन्न खेल मंचों पर इस आधुनिक खेल के रोमांच का आनंद ले सकेंगे। ऐसा क्यों हुआ भारतीय खिलाड़ी क्विम्सी डिसूजा को पहले गेम में मिली बढ़त के बाद भी सेमीफाइनल मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा। • मोमेंटम में बदलाव: क्विम्सी ने पहले गेम में 12-7 से जीत दर्ज की थी, लेकिन प्रतिद्वंद्वी सुमाया ने दूसरे गेम में अपनी रणनीति बदलकर जोरदार वापसी की। इसके चलते भारतीय खिलाड़ी पर दबाव बढ़ गया और मुकाबला निर्णायक गेम में चला गया। • लगातार अंकों का नुकसान: तीसरे और निर्णायक गेम में इंडोनेशियाई खिलाड़ी ने लगातार नौ अंक हासिल किए। इस तेज आक्रमण का क्विम्सी के पास कोई जवाब नहीं रहा और वह मैच से पूरी तरह बाहर हो गईं। • शारीरिक और तकनीकी तालमेल: टेकबॉल में हाथों के इस्तेमाल के बिना घुमावदार टेबल पर फुटबॉल को लगातार नियंत्रित रखना होता है। लंबे समय तक खेलने पर थोड़ी सी भी चूक सीधे प्रतिद्वंद्वी को आसान अंक दिला देती है। सवाल-जवाब 1. क्विम्सी डिसूजा सेमीफाइनल में किससे हारीं? क्विम्सी डिसूजा को एशियाई खेलों के सेमीफाइनल में इंडोनेशिया की खिलाड़ी सुमाया के खिलाफ हार झेलनी पड़ी। 2. सेमीफाइनल मुकाबले का अंतिम स्कोर क्या रहा? यह मुकाबला तीन गेम तक चला, जिसमें सुमाया ने क्विम्सी को 12-7, 9-12, 7-12 से मात दी। 3. क्या क्विम्सी डिसूजा के पास अब भी पदक जीतने का मौका है? हाँ, वह प्रतियोगिता से बाहर नहीं हुई हैं और रविवार को कांस्य पदक के प्लेऑफ मुकाबले में खेलेंगी। 4. क्विम्सी डिसूजा ने टेकबॉल खेलना कैसे शुरू किया था? उन्होंने इंस्टाग्राम पर ब्राजील के फुटबॉलर रोनाल्डिन्हो को खेलते देखकर इस खेल को शुरू करने की प्रेरणा ली थी। 5. टेकबॉल खेल का आविष्कार कब और कहाँ हुआ था? इस खेल का आविष्कार साल 2014 में हंगरी में गैबोर बोरसानी, ग्योरगी गैटियन और विक्टर हुस्जार ने किया था। 6. टेकबॉल की पहली विश्व चैंपियनशिप कब आयोजित हुई थी? पहली आधिकारिक टेकबॉल विश्व चैंपियनशिप का आयोजन 2017 में बुडापेस्ट में किया गया था। प्रेरणा और सबक क्विम्सी डिसूजा का एक पारंपरिक धावक और फुटबॉलर से अंतरराष्ट्रीय टेकबॉल खिलाड़ी बनने का सफर प्रेरणा देता है। • नई राह चुनने का साहस: अपने प्राथमिक खेल फुटबॉल और दौड़ से हटकर एक बिल्कुल नए खेल को अपनाना साहसिक फैसला था। किसी अपरिचित खेल में हाथ आजमाने से नए अंतरराष्ट्रीय अवसर खुल सकते हैं। • आधुनिक माध्यमों से सीख: सोशल मीडिया पर दिग्गज खिलाड़ी के वीडियो देखकर खेल सीखने की ललक जगाना एक सकारात्मक दृष्टिकोण है। आधुनिक डिजिटल मंचों का उपयोग अपनी प्रतिभा को नई दिशा देने के लिए किया जा सकता है। • हार के बाद भी पदक की उम्मीद: सेमीफाइनल में हारने के बावजूद प्रतियोगिता में बने रहना और कांस्य पदक के लिए तैयारी करना मानसिक मजबूती दिखाता है। किसी एक असफलता से पूरा अभियान खत्म नहीं होता। https://trendkia.com/sports/asian-games-men-bharatiya-khilari-quimcy-dsouza-teqball-semiphainala-men-harin-aba-kansya-padaka-para-nigahen-33555 TrendKia — Har trend, sabse pehle.