# बाकू में सिल्वर मेडल जीतकर स्वदेश लौटीं पहलवान संध्या विश्नोई, भीलवाड़ा रेलवे स्टेशन पर जोरदार स्वागत

> भीलवाड़ा के पुर की 17 वर्षीय पहलवान संध्या विश्नोई ने बाकू में आयोजित अंडर-17 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के 46 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक हासिल किया। चार साल के कड़े अभ्यास और पारिवारिक संघर्ष के दम पर उन्होंने वैश्विक स्तर पर भारत का परचम लहराया है।

**Type:** article · **Category:** खेल · **Published:** 2026-08-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/sports/baku-men-silvara-medala-jitakara-svadesha-lautin-pahalavana-sandhya-bishnoi-bhilwara-relave-steshana-para-joradara-svagata-13042 · **Language:** Hindi
**Tags:** संध्या विश्नोई, भीलवाड़ा, विश्व कुश्ती चैंपियनशिप, अंडर-17 कुश्ती, सिल्वर मेडल, राजस्थान खेल

अजरबैजान की राजधानी बाकू में आयोजित अंडर-17 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में भारत का नाम रोशन करने के बाद युवा महिला पहलवान संध्या विश्नोई अपने गृहनगर भीलवाड़ा वापस लौट आई हैं। 46 किलोग्राम भार वर्ग में देश के लिए सिल्वर मेडल जीतकर लौटीं इस होनहार खिलाड़ी का भीलवाड़ा रेलवे स्टेशन पर ऐतिहासिक अभिनंदन किया गया। भीलवाड़ा जिले के उपनगर पुर की रहने वाली संध्या ने अपनी इस शानदार सफलता से यह साबित कर दिया है कि अगर लगन और हौसले बुलंद हों, तो सीमित संसाधनों के बावजूद विश्व स्तर पर सफलता प्राप्त की जा सकती है।

## बाकू में संध्या विश्नोई का दबदबा और फाइनल तक की राह
विश्व चैंपियनशिप के दौरान 46 किलोग्राम स्पर्धा में संध्या विश्नोई का प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा। उनके कोच कल्याण विश्नोई ने प्रतिस्पर्धा के विवरण के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि संध्या ने टूर्नामेंट के शुरुआती दौर से ही अपने प्रतिद्वंद्वियों पर पूरी तरह दबाव बनाए रखा। अपने पहले मुकाबले में उन्होंने पोलैंड की महिला पहलवान को 10-0 के एकतरफा अंतर से करारी शिकस्त दी। इसके बाद क्वार्टर फाइनल मैच में भी उन्होंने अपने बेहतरीन दांव-पेच का प्रदर्शन करते हुए रूस की पहलवान को 10-0 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया।

सेमीफाइनल मुकाबले में संध्या ने अद्भुत गति और तकनीक का परिचय दिया। कजाकिस्तान की महिला पहलवान इनजहू के खिलाफ खेले गए इस महत्वपूर्ण मैच में उन्होंने महज 30 सेकंड के भीतर शानदार दांव लगाते हुए विपक्षी खिलाड़ी को चित कर दिया और सीधे फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली। हालांकि, स्वर्ण पदक के लिए हुए अंतिम मुकाबले में उन्हें जापान की पहलवान कोकोना मंकीनो के हाथों 11-2 से हार का सामना करना पड़ा। इस पराजय के बावजूद 46 किलोग्राम भार वर्ग में सिल्वर मेडल हासिल कर उन्होंने इतिहास रच दिया। कोच कल्याण विश्नोई के अनुसार, उनका अगला लक्ष्य विश्व चैंपियन बनना है और इसके लिए आने वाले समय में प्रशिक्षण को और अधिक कठोर बनाया जाएगा।

## रेलवे स्टेशन पर उमड़ा जनसैलाब और ढोल-नगाड़ों की गूंज
विश्व पटल पर भारत का परचम लहराने के बाद जब संध्या भीलवाड़ा रेलवे स्टेशन पहुंचीं, तो पूरा परिसर उत्सव के माहौल में डूब गया। स्टेशन पर मौजूद खेल प्रेमियों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। ढोल-नगाड़ों की थाप पर लोग झूमते नजर आए और भारत माता के जयघोष से पूरा स्टेशन गूंज उठा। उपस्थित लोगों ने संध्या विश्नोई को फूल-मालाओं से लाद दिया और उनके इस अंतरराष्ट्रीय कारनामे पर गर्व जताया।

## चार साल की कठोर तपस्या और परिवार का त्याग
अपनी इस अभूतपूर्व उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए संध्या विश्नोई ने बताया कि वह पिछले चार सालों से लगातार कुश्ती के मैदान में कठिन साधना कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए मेडल जीतना उनके बचपन के सपने के सच होने जैसा है। संध्या ने अपनी इस कामयाबी का श्रेय अपने माता-पिता, अपने कोच और अपने मामा को दिया। उन्होंने कहा कि उनके परिजनों और मार्गदर्शकों के अटूट विश्वास, त्याग तथा मार्गदर्शन की वजह से ही वह इस मुकाम तक पहुंचने में सफल हुई हैं। संध्या का कहना है कि अब उनका अगला ध्येय विश्व चैंपियनशिप में भारत के लिए गोल्ड मेडल हासिल करना है, ताकि अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा सबसे ऊपर लहरा सके।

## कारखाने में मजदूरी करने वाले पिता का भावुक संघर्ष
संध्या की इस स्वर्णिम सफलता के पीछे उनके परिवार का सालों पुराना कठिन संघर्ष जुड़ा हुआ है। उनके पिता निर्मल उर्फ कालू विश्नोई भीलवाड़ा की एक स्थानीय फैक्ट्री में मजदूरी का काम करते हैं। अपनी बेटी की जीत पर भावुक होते हुए उन्होंने बताया कि संध्या पिछले चार वर्षों से पुर स्थित शिव व्यायामशाला में कुश्ती की बारीकियां सीख रही हैं। वह खुद रोजाना सुबह और शाम को अपनी बेटी को अभ्यास के लिए व्यायामशाला लेकर जाते रहे हैं। सीमित आर्थिक संसाधनों और दैनिक चुनौतियों के बावजूद संध्या ने कभी हिम्मत नहीं हारी। पिता ने कहा कि बेटी की इस लगन और मेहनत ने आज न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे भीलवाड़ा और भारत देश का नाम गर्व से ऊंचा कर दिया है।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की महिला पहलवानों का शानदार प्रदर्शन देश की जमीनी खेल प्रतिभाओं और युवा महिला खिलाड़ियों को प्रेरित करता है।
- **भीलवाड़ा में:** सीमित साधनों में पुर की बेटी की इस ऐतिहासिक सफलता से स्थानीय स्तर पर खेल सुविधाओं और शिव व्यायामशाला जैसे संस्थानों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

## सवाल-जवाब

### 1. संध्या विश्नोई ने बाकू में किस भार वर्ग में सिल्वर मेडल जीता?
संध्या विश्नोई ने अजरबैजान के बाकू में आयोजित अंडर-17 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के 46 किलोग्राम भार वर्ग में सिल्वर मेडल जीता।

### 2. फाइनल मुकाबले में संध्या विश्नोई का सामना किससे हुआ?
स्वर्ण पदक के मुकाबले में संध्या विश्नोई का सामना जापान की पहलवान कोकोना मंकीनो से हुआ, जिसमें उन्हें 11-2 से पराजय का सामना करना पड़ा।

### 3. सेमीफाइनल मुकाबले में संध्या ने विरोधी पहलवान को कितने समय में हराया?
सेमीफाइनल में संध्या विश्नोई ने कजाकिस्तान की पहलवान इनजहू को महज 30 सेकंड में दांव लगाकर चित कर दिया।

### 4. संध्या विश्नोई कहां अभ्यास करती हैं और उनके कोच कौन हैं?
संध्या पिछले चार सालों से भीलवाड़ा के पुर स्थित शिव व्यायामशाला में अभ्यास कर रही हैं और उनके कोच कल्याण विश्नोई हैं।

### 5. संध्या विश्नोई के पिता क्या काम करते हैं?
संध्या के पिता निर्मल उर्फ कालू विश्नोई भीलवाड़ा की एक स्थानीय फैक्ट्री में मजदूरी करते हैं।

## प्रेरणा और सबक
- **निरंतरता और अनुशासन:** 4 साल तक रोज सुबह और शाम नियम से अभ्यास करने की प्रतिबद्धता ही बड़ी सफलता की नींव बनती है।
- **संसाधनों से ऊपर सोच:** आर्थिक सीमाओं या सीमित सुविधाओं को अपने सपनों और लक्ष्य के रास्ते में बाधा नहीं बनने देना चाहिए।
- **परिवार का संबल:** माता-पिता और मार्गदर्शकों का त्याग तथा अटूट विश्वास किसी भी खिलाड़ी की यात्रा में सबसे बड़ी ताकत होता है।
- **हार से सीखकर आगे बढ़ना:** फाइनल मुकाबले की चुनौती के बाद भी तुरंत अपने अगले लक्ष्य के लिए तैयारी को मजबूत करने का सकारात्मक दृष्टिकोण।

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