# भागलपुर के 12वीं के छात्र प्रिंस का पंचक सिलाट में अंतरराष्ट्रीय चयन, 33 देशों के मुकाबले में उतरेंगे

> भागलपुर के परबत्ती निवासी प्रिंस ने आर्थिक तंगी से लड़ते हुए पंचक सिलाट की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में जगह बनाई है। पिता के झालमुड़ी के स्टॉल और सीमित संसाधनों के बीच प्रिंस अब अंडर-17 वर्ग में देश के लिए पदक जीतने की तैयारी में जुटे हैं।

**Type:** article · **Category:** खेल · **Published:** 2026-10-29 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/sports/bhagalpur-ke-12vin-ke-chhatra-prince-ka-pencak-silat-men-antararashtriya-chayana-33-deshon-ke-mukabale-men-utarenge-53205 · **Language:** Hindi
**Tags:** पंचक सिलाट, भागलपुर, प्रिंस, बिहार खेल, मार्शल आर्ट, सफलता की कहानी, किलकारी

कठिन आर्थिक परिस्थितियां भी मजबूत इरादों के सामने टिक नहीं पाती हैं और बिहार के भागलपुर में ऐसा ही एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है। भागलपुर के परबत्ती इलाके में रहने वाले 12वीं कक्षा के छात्र प्रिंस ने अपनी लगन के दम पर मार्शल आर्ट खेल पंचक सिलाट की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए चुनी गई भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की कर ली है। एक साधारण से कमरे में सजी ट्राफियां, मेडल और ढेरों प्रशस्ति पत्र इस बात का जीवंत प्रमाण हैं कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो तो सीमित साधन कभी भी रास्ते की रुकावट नहीं बनते।

## पिता का अधूरा सपना पूरा करने के लिए 2012 से शुरू हुआ सफर
इंडोनेशिया की पारंपरिक मार्शल आर्ट विद्या पंचक सिलाट में महारत हासिल करने वाले प्रिंस ने इस खेल का विधिवत प्रशिक्षण साल 2012 में शुरू किया था। वह स्थानीय किलकारी भवन में नियमित प्रशिक्षण लेते आ रहे हैं। अपनी 12वीं कक्षा की पढ़ाई के साथ खेल के बीच तालमेल बैठाना आसान नहीं होता, लेकिन प्रिंस खेल के लिए हर दिन मैदान में करीब पांच घंटे कड़ा अभ्यास करते हैं। इस अनुशासित दिनचर्या और अनवरत अभ्यास का ही परिणाम है कि आज उनका चयन अंतरराष्ट्रीय स्तर के बड़े मंच के लिए हुआ है। प्रिंस बताते हैं कि उनके पिता भी कभी खेल की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाना चाहते थे, मगर मजबूरियों के चलते उनका वह सपना अधूरा रह गया था। अब प्रिंस खेल के मैदान में पसीना बहाकर अपने पिता के उसी अधूरे अरमान को हकीकत में बदलने की कोशिश में लगे हैं।

## 33 देशों की टीमों के बीच बिहार से प्रिंस का हुआ इकलौता चयन
आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में दुनियाभर के लगभग 33 देशों की टीमें अपनी दावेदारी पेश करने आ रही हैं। इस वैश्विक मुकाबले में प्रिंस का चयन अंडर-17 वर्ग में हुआ है, जो जूनियर कैटेगरी का हिस्सा है। प्रिंस के अनुसार, इस विशिष्ट वर्ग में पूरे बिहार राज्य से केवल उन्हीं का चयन हुआ है। अब उनका मुख्य उद्देश्य इस वैश्विक पटल पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए देश के लिए पदक हासिल करना है। इस बड़े लक्ष्य को साधने के लिए वह अपनी तैयारियों में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं और प्रतिदिन पांच घंटे की कड़ी ट्रेनिंग से अपनी तकनीक और ताकत को निखार रहे हैं।

## नाश्ते और झालमुड़ी की दुकान से चलती है परिवार की रोजी-रोटी
प्रिंस का परिवार बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आता है। उनके पिता झालमुड़ी और नाश्ते की एक छोटी दुकान चलाकर पूरे परिवार का भरण-पोषण करते हैं। चार भाई-बहनों में सबसे बड़े प्रिंस अकेले ऐसे नहीं हैं जो खेल से जुड़े हैं, बल्कि उनके अन्य भाई-बहन भी राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हैं। बेटे के अंतरराष्ट्रीय चयन पर पिता की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा, हालांकि आर्थिक तंगी के कारण एक होनहार खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार करने में परिवार को भारी आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। पिता का कहना है कि यदि सरकार अथवा संबंधित खेल विभाग की ओर से जरूरी वित्तीय मदद और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, तो प्रिंस वैश्विक स्तर पर और अधिक शानदार प्रदर्शन कर सकता है। परिवार को पूरी आशा है कि खेल प्रतिभा को देखते हुए सरकारी स्तर पर प्रोत्साहन जरूर मिलेगा।

## किलकारी संस्थान ने की सराहना, मदद का दिया भरोसा
प्रिंस की इस बड़ी उपलब्धि पर किलकारी के प्रमंडल स्तर के अधिकारी साहिल राज ने उनकी अथक मेहनत और समर्पण की प्रशंसा की है। साहिल राज के अनुसार, प्रिंस शुरुआत से ही बेहद अनुशासित और लगनशील खिलाड़ी रहे हैं और अतीत में भी कई पदक अपने नाम कर चुके हैं। यह चयन उनके वर्षों के परिश्रम का स्वाभाविक फल है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि संस्थान की ओर से प्रिंस को हरसंभव तकनीकी और संस्थागत सहयोग दिया जाएगा, साथ ही उनका पूरा प्रयास रहेगा कि इस प्रतिभाशाली खिलाड़ी को सरकार की ओर से भी आवश्यक आर्थिक सहायता दिलाई जा सके ताकि उसकी यात्रा निर्बाध रूप से जारी रहे।

## इसका आप पर असर
यह उपलब्धि सीमित आर्थिक संसाधनों के बीच खेल में करियर बनाने का सपना देख रहे युवाओं के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन है।

- **बिहार में:** भागलपुर और बिहार के अन्य जिलों में बुनियादी सुविधाओं के अभाव में अभ्यास कर रहे युवा खिलाड़ियों को सरकारी योजनाओं और खेल मंचों का सहारा लेने की प्रेरणा मिलेगी। यह चयन राज्य में मार्शल आर्ट जैसे गैर-पारंपरिक खेलों की पहचान और सरकारी प्रोत्साहन की जरूरत को उजागर करता है।
- **भारत में:** देश के उभरते खिलाड़ियों के परिवारों के लिए यह साबित करता है कि स्थानीय खेल अकादमियों और सतत अभ्यास के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा जा सकता है। यह खेल संघों पर जमीनी स्तर के होनहार एथलीटों को समय पर वित्तीय मदद और उपकरण देने का दबाव भी बनाता है।
- **युवा एथलीटों के लिए:** पढ़ाई के साथ रोजाना पांच घंटे का अनुशासित अभ्यास समय प्रबंधन की मिसाल पेश करता है। छात्र और नवोदित खिलाड़ी अपनी पढ़ाई को रोड़े की तरह देखे बिना अपनी खेल महत्वाकांक्षाओं को संतुलित करना सीख सकते हैं।
- **खेल अकादमियों के लिए:** किलकारी जैसे स्थानीय केंद्रों की भूमिका को बल मिलता है कि वे सुदूर क्षेत्रों से भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिभा तराश सकते हैं। इससे जिला स्तर पर खेल केंद्रों के विस्तार और उनके बजट को बढ़ाने की मांग तेज हो सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
प्रिंस का चयन एक दशक से अधिक समय की निरंतर ट्रेनिंग और पिता के अधूरे सपनों को पूरा करने की मजबूत इच्छाशक्ति का परिणाम है।

- **दीर्घकालिक अभ्यास:** प्रिंस ने साल 2012 में इंडोनेशियाई मार्शल आर्ट पंचक सिलाट की औपचारिक ट्रेनिंग शुरू की थी। एक दशक से भी ज्यादा समय से किलकारी भवन में लगातार प्रशिक्षण लेने और रोजाना पांच घंटे के मैदान अभ्यास ने उनके तकनीकी कौशल को शीर्ष स्तर पर पहुंचाया।
- **पारिवारिक संकल्प:** प्रिंस के पिता स्वयं पूर्व में एक खिलाड़ी बनने का सपना देखते थे, जो आर्थिक चुनौतियों के कारण पूरा नहीं हो पाया था। पारिवारिक संघर्षों के बावजूद पिता ने बेटे को मैदान में जाने से नहीं रोका, जिससे प्रिंस को मानसिक संबल मिला।
- **राज्य स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन:** राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर लगातार हासिल की गई जीतों और पदकों के दम पर चयनकर्ताओं ने अंडर-17 वर्ग में पूरे बिहार से अकेले प्रिंस को इस 33 देशों की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए चुना।

## सवाल-जवाब

### 1. प्रिंस किस खेल से जुड़े हैं और वे कहां के रहने वाले हैं?
प्रिंस बिहार के भागलपुर जिले के परबत्ती इलाके के रहने वाले हैं और वे इंडोनेशियाई मार्शल आर्ट पंचक सिलाट के खिलाड़ी हैं।

### 2. प्रिंस का चयन किस प्रतियोगिता और किस वर्ग में हुआ है?
प्रिंस का चयन पंचक सिलाट की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के अंडर-17 वर्ग में हुआ है, जिसमें करीब 33 देशों की टीमें हिस्सा लेंगी।

### 3. प्रिंस ने इस खेल का अभ्यास कब से शुरू किया था?
प्रिंस ने साल 2012 में पंचक सिलाट सीखना शुरू किया था और वे किलकारी भवन में रोजाना लगभग पांच घंटे अभ्यास करते हैं।

### 4. प्रिंस के परिवार का भरण-पोषण कैसे होता है?
प्रिंस के पिता एक छोटी-सी नाश्ते और झालमुड़ी की दुकान चलाते हैं, जिससे पूरे परिवार का खर्च चलता है।

### 5. क्या प्रिंस के परिवार में अन्य लोग भी खेल से जुड़े हैं?
हां, प्रिंस चार भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं और उनके भाई-बहन भी राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हैं।

### 6. प्रिंस के खेल करियर को लेकर किलकारी के अधिकारी ने क्या कहा?
किलकारी के प्रमंडल स्तर के अधिकारी साहिल राज ने प्रिंस की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि उसे संस्था और सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

## प्रेरणा और सबक
एक सामान्य परिवार से निकलकर वैश्विक खेल मंच तक पहुंचने की प्रिंस की यह यात्रा जीवन में कई अहम सबक देती है।

- **सीमित साधन कभी बहाना नहीं बनते:** छोटे से घर और बुनियादी संसाधनों के बीच रहकर भी प्रिंस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना नाम दर्ज कराया, जिससे साफ है कि इच्छाशक्ति साधनों से बड़ी होती है।
- **निरंतरता ही सफलता की कुंजी है:** साल 2012 से रोजाना पांच घंटे मैदान पर पसीना बहाने का अनुशासन बताता है कि बड़ी उपलब्धियां रातोंरात नहीं, बल्कि वर्षों के सतत अभ्यास से हासिल होती हैं।
- **पारिवारिक संघर्ष को प्रेरणा में बदलना:** पिता की आर्थिक तंगी और उनके अधूरे खेल के सपने को बोझ समझने के बजाय प्रिंस ने उसे अपना सबसे बड़ा संबल और प्रेरणास्रोत बनाया।
- **अध्ययन और जुनून का संतुलन:** 12वीं कक्षा की पढ़ाई के दबाव के बावजूद खेल के लिए समर्पित समय निकालना साबित करता है कि कुशल समय प्रबंधन से दोनों मोर्चों पर आगे बढ़ा जा सकता है।

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