चांगवॉन में रचा इतिहास, मिल्ली शाह ने जीता गोल्ड तो राकेश निदागुंडी को मिला सिल्वर दक्षिण कोरिया में आयोजित 2026 WSPS वर्ल्ड चैंपियनशिप में मिल्ली शाह ने R2 राइफल टीम स्पर्धा में स्वर्ण और राकेश निदागुंडी ने R1 में रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया। दक्षिण कोरिया के चांगवॉन में चल रही 2026 WSPS वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारतीय दल ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। राइफल टीम स्पर्धाओं में शानदार निशाना साधते हुए मिल्ली शाह और राकेश निदागुंडी ने देश के लिए क्रमशः गोल्ड और सिल्वर मेडल अपने नाम किए। इस प्रतियोगिता में भारत ने पैरा शूटिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप के इतिहास में पहली बार राइफल टीम इवेंट का कोई पदक जीतकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। R2 और R1 टीम स्पर्धाओं में शानदार निशाना अहमदाबाद से जुड़े इस सफर में दोनों निशानेबाजों ने अपनी-अपनी स्पर्धाओं में बेहतरीन एकाग्रता दिखाई। मिल्ली शाह ने R2 टीम इवेंट में शीर्ष स्थान हासिल करते हुए गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया। वहीं उनके साथी एथलीट राकेश निदागुंडी ने R1 टीम इवेंट में दमदार खेल दिखाते हुए सिल्वर मेडल भारत की झोली में डाला। इन दोनों पोडियम फिनिश ने वैश्विक पैरा शूटिंग परिदृश्य में भारत की बढ़ती धमक को मजबूती से रेखांकित किया है। सफलता के पीछे हाई-परफॉर्मेंस ट्रेनिंग का आधार मिल्ली शाह के लिए यह स्वर्ण पदक उनके अंतरराष्ट्रीय करियर में एक और मील का पत्थर साबित हुआ है। दूसरी तरफ राकेश निदागुंडी का रजत पदक भारतीय पैरा राइफल शूटिंग के उज्ज्वल भविष्य और प्रतिभा की गहराई को प्रदर्शित करता है। ये दोनों निशानेबाज विजयी भारत फाउंडेशन (VBF) के एथलीट हैं और संस्था के हाई-परफॉर्मेंस सेंटर में नियमित अभ्यास करते हैं। इस केंद्र की आधुनिक व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य एथलीटों को विश्व स्तरीय प्रतियोगिताओं के दबाव से निपटने और निरंतर पदक जीतने के योग्य बनाना है। चांगवॉन में मिली दोहरी सफलता इसी समर्पित व्यवस्था और लंबे समय से चल रहे प्रशिक्षण की पुष्टि करती है। इसका आप पर असर भारतीय पैरा खेलों में राइफल टीम स्पर्धाओं का यह पहला पदक देश में पैरा एथलीटों के लिए नए अवसर और उत्साह लेकर आया है। • एथलीटों के लिए: इस ऐतिहासिक जीत से अन्य पैरा खिलाड़ियों को राइफल स्पर्धाओं में आगे आने का हौसला मिलेगा। इससे नए उभरते निशानेबाजों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की राह आसान होगी। • खेल ढांचे पर प्रभाव: संस्थागत और हाई-परफॉर्मेंस ट्रेनिंग सेंटरों की अहमियत साबित हुई है। ऐसे प्रशिक्षण तंत्रों को और अधिक समर्थन मिलने की संभावना मजबूत होगी। • वैश्विक पहचान: विश्व चैंपियनशिप में राइफल टीम पोडियम से अंतरराष्ट्रीय पैरा सर्किट में भारत की रैंकिंग और साख बढ़ेगी। इससे भविष्य के टूर्नामेंटों में भारतीय दल को अतिरिक्त मनोवैज्ञानिक बढ़त मिलेगी। • खेल प्रेमियों के लिए: पैरा शूटिंग स्पर्धाओं को मुख्यधारा में अधिक दर्शक और कवरेज मिलने का रास्ता खुलेगा। खेल प्रशंसक अब राइफल टीम स्पर्धाओं में भी निरंतर पदकों की उम्मीद कर सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ यह ऐतिहासिक सफलता सुनियोजित हाई-परफॉर्मेंस ट्रेनिंग और दोनों एथलीटों के शानदार तकनीकी तालमेल का नतीजा है। • व्यवस्थित प्रशिक्षण प्रणाली: दोनों निशानेबाज विजयी भारत फाउंडेशन के हाई-परफॉर्मेंस सेंटर में लंबे समय से अभ्यास कर रहे थे। इस व्यवस्था का प्राथमिक लक्ष्य खिलाड़ियों को विश्व स्तरीय टूर्नामेंटों के दबाव का सामना करने के लिए तैयार करना रहा है। • दबाव में सटीक प्रदर्शन: चांगवॉन के कड़े मुकाबले में मिल्ली शाह और राकेश निदागुंडी ने अपनी-अपनी स्पर्धाओं में निरंतर एकाग्रता बनाए रखी। इसी तकनीकी अनुशासन ने उन्हें क्रमशः स्वर्ण और रजत पदक तक पहुंचाया। • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: इससे पहले भारत ने पैरा शूटिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप की राइफल टीम स्पर्धाओं में कोई पदक नहीं जीता था। इस जीत ने टीम स्पर्धाओं में पदक का सूखा समाप्त कर दिया। सवाल-जवाब 1. 2026 WSPS वर्ल्ड चैंपियनशिप का आयोजन कहाँ हो रहा है? इस प्रतियोगिता का आयोजन दक्षिण कोरिया के चांगवॉन शहर में किया जा रहा है। 2. मिल्ली शाह ने किस स्पर्धा में पदक जीता? मिल्ली शाह ने R2 राइफल टीम स्पर्धा में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता। 3. राकेश निदागुंडी को कौन सा पदक मिला? राकेश निदागुंडी ने R1 राइफल टीम स्पर्धा में रजत पदक हासिल किया। 4. यह जीत भारतीय पैरा शूटिंग के लिए ऐतिहासिक क्यों है? भारत ने पैरा शूटिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप के राइफल टीम इवेंट में पहली बार पदक अपने नाम किए हैं। 5. दोनों एथलीट किस संस्था में प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं? दोनों एथलीट विजयी भारत फाउंडेशन (VBF) के हाई-परफॉर्मेंस सेंटर में ट्रेनिंग करते हैं। प्रेरणा और सबक मिल्ली शाह और राकेश निदागुंडी की यह ऐतिहासिक जीत दिखाती है कि सही प्रशिक्षण और अटूट समर्पण से किसी भी वैश्विक मंच पर नए मानक गढ़े जा सकते हैं। • लगातार अभ्यास की ताकत: उच्च स्तर के प्रशिक्षण पर निरंतर भरोसा रखने से बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। नियमित तैयारी ही निर्णायक पलों में आत्मविश्वास देती है। • इतिहास रचने का हौसला: जब किसी क्षेत्र में पहले से सफलता का रिकॉर्ड न हो, तब भी नई शुरुआत की जा सकती है। पहली बार पदक जीतकर दोनों एथलीटों ने नई राह बनाई है। • संस्थागत सहयोग का महत्व: किसी भी प्रतिभा को निखारने के लिए सही मार्गदर्शन और व्यवस्था जरूरी होती है। उचित सपोर्ट सिस्टम के साथ खिलाड़ी अपनी पूरी क्षमता का प्रदर्शन कर पाते हैं। https://trendkia.com/sports/changwon-men-racha-itihasa-milli-shah-ne-jita-golda-to-rakesh-nidagundi-ko-mila-silvara-34183 TrendKia — Har trend, sabse pehle.