# चरखी दादरी के सुजीत कलकल ने एशियन गेम्स में रचा इतिहास, कुश्ती में भारत को दिलाया पहला स्वर्ण पदक

> इंजीनियरिंग छोड़कर कुश्ती को चुनने वाले 23 वर्षीय सुजीत कलकल ने एशियन गेम्स 2026 में 2-9 से पिछड़ने के बाद ऐतिहासिक वापसी करते हुए ताजिकिस्तान के पहलवान को मात देकर स्वर्ण पदक जीत लिया।

**Type:** article · **Category:** खेल · **Published:** 2026-10-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/sports/charkhi-dadri-ke-sujeet-kalkal-ne-asian-games-men-racha-itihasa-kushti-men-india-ko-dilaya-pahala-svarna-padaka-41919 · **Language:** Hindi
**Tags:** सुजीत कलकल, एशियन गेम्स 2026, कुश्ती, फ्रीस्टाइल रेसलिंग, चरखी दादरी, गोल्ड मेडल, भारतीय कुश्ती

एशियन गेम्स 2026 के मैट पर भारतीय पहलवान सुजीत कलकल ने वह कर दिखाया जो लंबे समय तक कुश्ती प्रेमियों की यादों में ताजा रहेगा। पुरुषों की 65 किलोग्राम फ्रीस्टाइल स्पर्धा के खिताबी मुकाबले में उन्होंने ताजिकिस्तान के शीर्ष पहलवान अब्दुलमजीद कुडिएव को बेहद रोमांचक संघर्ष में 10-9 के अंतर से शिकस्त दी। यह मुकाबला सुजीत के संयम और मानसिक मजबूती की सबसे बड़ी परीक्षा साबित हुआ। मुकाबले के शुरुआती दौर में भारतीय पहलवान पूरी तरह बैकफुट पर दिखाई दे रहे थे और पहले हाफ की समाप्ति तक स्कोर 2-9 था। सात अंकों के विशाल अंतर से पिछड़ने के बावजूद सुजीत ने हिम्मत नहीं हारी और दूसरे हाफ में आक्रामक दांव-पेच लगाते हुए लगातार आठ अंक बटोरे। इस सनसनीखेज पलटवार ने न केवल भारत की झोली में एशियन गेम्स 2026 का 15वां स्वर्ण पदक डाला, बल्कि मौजूदा खेलों में कुश्ती का पहला गोल्ड मेडल भी पक्का कर दिया। साल 2018 के बाद से एशियन गेम्स में भारत का कुश्ती में यह पहला स्वर्ण पदक है। यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग ने भी इस शानदार मुकाबले पर सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि 9-2 के बड़े अंतर से पिछड़ने के बाद सुजीत ने 10-9 से अविश्वसनीय जीत दर्ज की।

## किताबों की दुनिया छोड़ अखाड़े की राह
हरियाणा के खेल परिवेश से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिरंगा लहराने वाले सुजीत कलकल चरखी दादरी जिले के इमलौता गांव के निवासी हैं। 23 वर्षीय सुजीत केवल मैट पर ही महारथी नहीं रहे हैं, बल्कि स्कूल के दिनों में वे पढ़ाई में भी बेहद अव्वल थे। उन्होंने जब अपनी 12वीं कक्षा की परीक्षा पास की थी, तब उनके अंक 90 प्रतिशत आए थे। इतनी शानदार अकादमिक सफलता के बाद आमतौर पर परिवारों में यही धारणा बनती है कि बच्चा तकनीकी शिक्षा की राह चुनेगा। परिवार के लोगों को भी उम्मीद थी कि सुजीत अपनी मेधा के बल पर जेईई की तैयारी करेंगे और भविष्य में इंजीनियर बनेंगे। इसके बावजूद सुजीत का दिल कभी कॉलेज की किताबों या तकनीकी फॉर्मूलों में नहीं अटका। बचपन से ही उनका एक ही ख्वाब था कि वे अखाड़े में उतरें और देश का प्रतिनिधित्व करें। उन्होंने स्पष्ट फैसला लिया कि वे इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा के पीछे भागने के बजाय अपनी पूरी ताकत कुश्ती की बारीकियों को निखारने में लगाएंगे। उनके इस साहसिक निर्णय पर माता-पिता और परिजनों ने भी पूरा भरोसा जताया और उनका हर कदम पर साथ दिया।

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## विश्व स्तर पर लगातार मजबूत होती पकड़
एशियन गेम्स 2026 का यह स्वर्ण पदक कोई अचानक मिला संयोग नहीं है, बल्कि पिछले कई वर्षों की कड़ी तपस्या का परिणाम है। इस महाद्वीपीय खेल से पहले सुजीत के करियर का सबसे बड़ा मुकाम पिछले साल आयोजित अंडर-23 विश्व चैंपियनशिप में आया था। वहां उन्होंने पुरुषों के 65 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग के फाइनल में उज्बेकिस्तान के उमिदजोन जलोलोव को एकतरफा अंदाज में 10-0 से तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर हराकर विश्व खिताब जीता था। उस चैंपियनशिप से पहले सुजीत के नाम कोई वैश्विक खिताब दर्ज नहीं था, लेकिन एशियाई महाद्वीप के जूनियर स्तर पर वे पहले ही अपना लोहा मनवा चुके थे। सुजीत ने इससे पहले अंडर-23 एशियाई चैंपियनशिप में दो बार (वर्ष 2022 और वर्ष 2025 में) स्वर्ण पदक अपने नाम किए थे। इसके अलावा उन्होंने साल 2022 में अंडर-20 एशियाई चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक भी हासिल किया था। हर आयु वर्ग में लगातार पदक जीतकर खुद को साबित करने वाले सुजीत ने अब सीनियर स्तर के सबसे बड़े मंच पर स्वर्णिम सफलता हासिल कर अपने फैसले को सही साबित कर दिया है।

## इसका आप पर असर
सुजीत कलकल की यह जीत भारतीय खेल जगत और युवा एथलीटों के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन बनकर सामने आई है।

- **भारत में:** यह ऐतिहासिक जीत दर्शाती है कि सही प्रशिक्षण और मानसिक दृढ़ता से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बड़ी से बड़ी चुनौती को पार किया जा सकता है। इससे भारतीय कुश्ती दल का मनोबल बढ़ेगा और आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक तालिका में सुधार की उम्मीदें मजबूत होंगी।
- **हरियाणा में:** चरखी दादरी और आसपास के ग्रामीण अंचलों के युवाओं के लिए यह सफलता खेल को एक पूर्णकालिक करियर के रूप में चुनने की प्रेरणा देगी। स्थानीय अखाड़ों और प्रशिक्षण केंद्रों में आधुनिक सुविधाओं के विस्तार की मांग को बल मिलेगा, जिससे उभरते पहलवानों को बेहतर मंच मिल सकेगा।
- **खेल प्रेमियों के लिए:** 2018 के बाद पहली बार एशियन गेम्स कुश्ती में स्वर्ण पदक आने से फैंस में नया उत्साह जागा है। 65 किग्रा भार वर्ग में भारत का दबदबा एक बार फिर वैश्विक स्तर पर स्थापित हुआ है।
- **छात्रों और अभिभावकों के लिए:** 90 प्रतिशत अंक लाने के बावजूद कुश्ती चुनकर सफल होने की यह कहानी पारंपरिक करियर विकल्पों के दायरे से बाहर सोचने का हौसला देती है। यह उदाहरण दिखाता है कि अगर बच्चे की प्रतिभा और रुचि को परिवार का पूरा सहयोग मिले तो गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में भी सर्वोच्च सफलता संभव है।

## ऐसा क्यों हुआ
सुजीत कलकल की यह खिताबी जीत उनके तकनीकी संयम, पिछले अनुभवों और बड़े मुकाबलों में हार न मानने के जज्बे के कारण संभव हुई।

- **मुकाबले का तात्कालिक कारण:** फाइनल मुकाबले के पहले हाफ में सुजीत ताजिकिस्तान के अब्दुलमजीद कुडिएव से 2-9 से बुरी तरह पिछड़ चुके थे। दूसरे हाफ में उन्होंने अपनी रणनीति बदलते हुए बेहद आक्रामक दांव लगाए और लगातार आठ अंक हासिल करके स्कोर 10-9 कर दिया।
- **अनुभव और पृष्ठभूमि का लाभ:** सुजीत इससे पहले अंडर-23 विश्व चैंपियनशिप और दो बार अंडर-23 एशियाई चैंपियनशिप जीत चुके थे। कड़े अंतरराष्ट्रीय दबाव को संभालने के इसी अनुभव ने उन्हें सात अंकों के अंतर से पिछड़ने के बावजूद शांत रहकर मुकाबला पलटने का आधार दिया।
- **पारिवारिक निर्णय और प्रतिबद्धता:** 12वीं में 90 प्रतिशत अंक आने के बाद इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़कर कुश्ती पर पूरी तरह केंद्रित होना उनकी सफलता का मूल कारण बना। परिवार से मिले निरंतर समर्थन ने उन्हें बिना किसी भटकाव के अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी करने की आजादी दी।

## सवाल-जवाब

### 1. सुजीत कलकल ने एशियन गेम्स 2026 में कौन सा पदक जीता है?
सुजीत कलकल ने पुरुषों की 65 किलोग्राम फ्रीस्टाइल कुश्ती में स्वर्ण पदक (गोल्ड मेडल) जीता है।

### 2. फाइनल मुकाबले में सुजीत का मुकाबला किस पहलवान से था और स्कोर क्या रहा?
फाइनल में उनका सामना ताजिकिस्तान के अब्दुलमजीद कुडिएव से हुआ, जिसे सुजीत ने रोमांचक मुकाबले में 10-9 से हराया।

### 3. मैच के पहले हाफ में सुजीत का स्कोर क्या था?
मुकाबले के पहले हाफ की समाप्ति पर सुजीत कलकल ताजिकिस्तान के पहलवान से 2-9 के अंतर से पीछे चल रहे थे।

### 4. एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए इस पदक का क्या महत्व है?
यह मौजूदा खेलों में भारत का 15वां स्वर्ण पदक है और साथ ही 2018 के बाद से कुश्ती में भारत का पहला एशियन गेम्स गोल्ड है।

### 5. सुजीत कलकल मूल रूप से कहां के रहने वाले हैं?
सुजीत हरियाणा के चरखी दादरी जिले के इमलौता गांव के रहने वाले हैं।

### 6. सुजीत ने पढ़ाई छोड़कर कुश्ती को करियर के रूप में क्यों चुना?
12वीं में 90 प्रतिशत अंक लाने के बावजूद सुजीत का बचपन से सपना पहलवान बनने का था, इसलिए उन्होंने जेईई की तैयारी न करके कुश्ती को चुना।

### 7. एशियन गेम्स से पहले सुजीत की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि क्या थी?
उन्होंने पिछले साल अंडर-23 विश्व चैंपियनशिप के 65 किग्रा फाइनल में उज्बेकिस्तान के उमिदजोन जलोलोव को 10-0 से हराकर स्वर्ण पदक जीता था।

### 8. सुजीत ने जूनियर एशियाई स्तर पर कौन से खिताब जीते हैं?
सुजीत ने दो बार अंडर-23 एशियाई चैंपियनशिप (2022 और 2025) और एक बार अंडर-20 एशियाई चैंपियनशिप (2022) का स्वर्ण पदक जीता है।

## प्रेरणा और सबक
सुजीत कलकल की यह स्वर्णिम यात्रा उन सभी युवाओं के लिए एक बड़ा उदाहरण है जो अपनी रुचि को अपना पेशा बनाना चाहते हैं।

- **सच्चे जुनून को प्राथमिकता दें:** पढ़ाई में 90 प्रतिशत अंक होने के बावजूद सुजीत ने समाज के तय ढर्रे पर चलने के बजाय अपनी वास्तविक पसंद यानी कुश्ती को चुना। जब आप अपनी रुचि के क्षेत्र में पूरी लगन से मेहनत करते हैं, तो सफलता निश्चित रूप से कदम चूमती है।
- **मुश्किल घड़ी में संयम न खोएं:** फाइनल मुकाबले में 2-9 से पिछड़ने के बाद भी सुजीत ने आत्मसमर्पण नहीं किया और अंत तक लड़ते रहे। जीवन या खेल में परिस्थितियां कितनी भी विपरीत हों, एकाग्रता और धैर्य बनाए रखकर वापसी की जा सकती है।
- **परिवार का समर्थन सबसे बड़ी ताकत:** सुजीत की सफलता में उनके परिवार के खुले विचारों और भरोसे का अहम योगदान रहा। अपने बच्चों के सपनों को समझना और उन पर विश्वास जताना उनकी प्रतिभा को पंख लगा देता है।
- **चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ना जरूरी:** सुजीत ने सीधे सीनियर स्तर पर सफलता नहीं पाई, बल्कि अंडर-20 और अंडर-23 प्रतियोगिताओं में खुद को साबित करते हुए आगे बढ़े। किसी भी क्षेत्र में शीर्ष पर पहुंचने के लिए बुनियादी स्तर पर लगातार अनुभव हासिल करना बेहद आवश्यक है।

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