# कॉमनवेल्थ गेम्स के पदक विजेताओं से मिले पीएम नरेंद्र मोदी, मुक्केबाज नरेंद्र बेरवाल ने सुनाया मजेदार किस्सा

> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली स्थित 7 लोक कल्याण मार्ग पर राष्ट्रमंडल खेल 2026 के भारतीय पदक विजेताओं की मेजबानी की, जहां एथलीटों ने अपने यादगार अनुभव और दिलचस्प कहानियां साझा कीं।

**Type:** article · **Category:** खेल · **Published:** 2026-08-10 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/sports/commonwealth-games-ke-padaka-vijetaon-se-mile-pm-narendra-modi-mukkebaja-narender-berwal-ne-sunaya-majedara-kissa-15617 · **Language:** Hindi
**Tags:** नरेंद्र मोदी, राष्ट्रमंडल खेल 2026, नरेंद्र बेरवाल, मीराबाई चानू, जादुमणि सिंह, खेल समाचार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली स्थित अपने आधिकारिक आवास 7 लोक कल्याण मार्ग पर राष्ट्रमंडल खेल 2026 में देश का नाम रोशन करने वाले भारतीय एथलीटों की मेजबानी की। इस दौरान खिलाड़ियों ने अपनी सफलता के सफर के साथ-साथ कई दिलचस्प और यादगार कहानियां भी साझा कीं। पीएम मोदी ने सभी खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना की और उनका हौसला बढ़ाया।

## पाकिस्तानी प्रतिद्वंद्वी से जुड़ा मजेदार किस्सा
पुरुषों की 90 किलोग्राम से अधिक वर्ग की मुक्केबाजी स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले मुक्केबाज नरेंद्र बेरवाल ने बातचीत के दौरान एक पुराना किस्सा सुनाया, जिसे सुनकर प्रधानमंत्री भी अपनी हंसी नहीं रोक सके। नरेंद्र बेरवाल ने वर्ष 2015 के वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स का जिक्र किया, जहां उन्होंने एक पाकिस्तानी मुक्केबाज को मात दी थी। मैच के दौरान दोनों ही खिलाड़ियों के चेहरे पर कट लग गया था, जिसके बाद उन्हें टांके लगवाने के लिए मेडिकल रूम में जाना पड़ा।

मेडिकल रूम में उस पाकिस्तानी खिलाड़ी ने उनसे मजाक में कहा कि उनके नाम, उनके कोच के नाम और भारत के प्रधानमंत्री के नाम में समानता है, जिससे उसे इस नाम से चिढ़ होने लगी है। मुक्केबाज के इस वाकये को सुनकर पीएम मोदी मुस्कुरा दिए।

## कारगिल विजय दिवस पर ऐतिहासिक सफलता
बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने 55 किलोग्राम वर्ग के मुक्केबाज जादुमणि सिंह के शानदार प्रदर्शन को भी सराहा। जादुमणि ने राष्ट्रमंडल खेलों में 26 जुलाई को एक पाकिस्तानी मुक्केबाज को शिकस्त दी थी। 26 जुलाई का दिन भारत में 1999 के कारगिल युद्ध की याद में विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है।

भारतीय सशस्त्र बलों में सेवाएं दे रहे जादुमणि ने अपनी इस जीत को सेना को समर्पित किया था। पीएम मोदी ने उनके इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि एक सैनिक के तौर पर अपनी जीत सेना को समर्पित करके उन्होंने उस गौरवशाली क्षण को और खास बना दिया।

## मीराबाई चानू का भावुक पल और पोडियम की यादें
भारोत्तोलन में ग्लास्गो में 48 किलोग्राम वर्ग के दौरान कुल 190 किलोग्राम का रिकॉर्ड भार उठाकर स्वर्ण पदक हासिल करने वाली मीराबाई चानू से भी प्रधानमंत्री ने संवाद किया। जब प्रधानमंत्री ने पोडियम पर उनके भावुक होने की वजह पूछी, तो मीराबाई ने बताया कि यह पिछले चार वर्षों से अपने भीतर दबाकर रखी गई भावनाओं के बाहर आने का पल था। इस मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने मीराबाई चानू को लड्डू खिलाकर उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई दी।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** देश के शीर्ष एथलीटों को मिलने वाला यह सर्वोच्च प्रोत्साहन युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करता है।

## सवाल-जवाब

### 1. पीएम मोदी ने किस स्थान पर कॉमनवेल्थ गेम्स के पदक विजेताओं से मुलाकात की?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली स्थित अपने आधिकारिक आवास 7 लोक कल्याण मार्ग पर पदक विजेताओं की मेजबानी की।

### 2. मुक्केबाज नरेंद्र बेरवाल ने पीएम मोदी को कौन सी घटना सुनाई?
नरेंद्र बेरवाल ने 2015 वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स में एक पाकिस्तानी मुक्केबाज को हराने के बाद मेडिकल रूम में हुई मजेदार बातचीत का किस्सा सुनाया।

### 3. जादुमणि सिंह ने अपनी जीत किस दिन हासिल की थी और इसे किसे समर्पित किया?
जादुमणि सिंह ने 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के दिन जीत दर्ज की थी और अपना पदक भारतीय सशस्त्र बलों को समर्पित किया।

### 4. मीराबाई चानू ने ग्लास्गो में कितना भार उठाकर स्वर्ण पदक जीता था?
मीराबाई चानू ने 48 किलोग्राम वर्ग में रिकॉर्ड 190 किलोग्राम भार उठाकर स्वर्ण पदक हासिल किया था।

## प्रेरणा और सबक
**प्रेरणा और सीख:**

- **दीर्घकालिक दृढ़ संकल्प:** मीराबाई चानू की चार साल की मेहनत दिखाती है कि बड़ी सफलताओं के लिए सालों का धैर्य और अनुशासन जरूरी है।
- **खेल भावना और हास्य:** कठिन मुकाबलों के बाद भी मैदान से बाहर एक स्वस्थ और हल्के फुल्के अंदाज को बनाए रखना खिलाड़ियों की मानसिक मजबूती को दर्शाता है।
- **देशभक्ति और समर्पण:** जादुमणि सिंह की तरह अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि को देश और सेना को समर्पित करना सच्चे एथलीट की पहचान है।

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