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  "type": "article",
  "title": "इंग्लैंड के खिलाफ ड्रॉ से भारतीय महिला हॉकी टीम विश्व कप के दूसरे दौर में, गोलकीपरों का शानदार प्रदर्शन",
  "summary": "एम्सटेलवीन में खेले गए एफआईएच महिला हॉकी विश्व कप के अंतिम पूल मैच में भारत ने इंग्लैंड के साथ 0-0 से ड्रॉ खेलकर दूसरे दौर में जगह बना ली। बिछू देवी और सविता पूनिया के शानदार बचाव की बदौलत भारत पेनल्टी कॉर्नर गंवाने के बावजूद आगे बढ़ा।",
  "content": "एम्सटेलवीन के प्रतिष्ठित मैदान पर एफआईएच महिला हॉकी विश्व कप के बेहद रोमांचक और सांस रोक देने वाले अंतिम पूल मुकाबले में भारतीय महिला हॉकी टीम ने इंग्लैंड के खिलाफ 0-0 से संघर्षपूर्ण ड्रॉ खेलकर प्रतियोगिता के दूसरे दौर में अपनी जगह पक्की कर ली है। भारतीय टीम को अगले चरण में प्रवेश करने के लिए इस मैच में केवल एक ड्रॉ की आवश्यकता थी, जिसे हासिल करने में टीम सफल रही। मैच के अंतिम पलों में मैदान पर जबरदस्त तनाव देखने को मिला, जब इंग्लैंड ने जीत दर्ज करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। हालांकि, मुकाबले की समाप्ति से ठीक 30 सेकंड पहले भारतीय युवा गोलकीपर बिछू देवी ने अपनी बायीं तरफ बेहतरीन डाइव लगाते हुए एक निश्चित गोल को बचा लिया और भारत का विश्व कप अभियान बरकरार रखा। इस शानदार रक्षात्मक खेल के बावजूद, पूरे मैच के दौरान भारतीय टीम की फॉरवर्ड लाइन और पेनल्टी कॉर्नर निष्पादन में कई गंभीर खामियां उजागर हुईं।\n\nड्रामैटिक अंतिम 30 सेकंड और गोलकीपरों का साहसिक प्रदर्शन\nइंग्लैंड के खिलाफ खेले गए इस महामुकाबले का अंतिम क्षण बेहद नाटकीय रहा। मैच खत्म होने में जब केवल दो मिनट का समय बचा था, तब इंग्लैंड की टीम ने जोखिम उठाते हुए अपने गोलकीपर को मैदान से हटा लिया और एक अतिरिक्त मैदानी खिलाड़ी को मैदान में उतारकर पूरी तरह आक्रामक रुख अपना लिया। इंग्लैंड का यह ऑल-आउट अटैक भारतीय रक्षापंक्ति के लिए परीक्षा की घड़ी साबित हुआ। मैच की अंतिम सीटी बजने से महज 30 सेकंड पहले इंग्लैंड की फॉरवर्ड खिलाड़ी ने भारतीय गोलपोस्ट पर करारा प्रहार किया। गेंद गोलरेखा पार करने ही वाली थी कि भारत की युवा गोलकीपर बिछू देवी ने बिजली की गति से अपनी बायीं ओर छलांग लगाई और शानदार बचाव करते हुए भारत को हार से बचा लिया।\n\nयद्यपि भारत ने ड्रॉ खेलकर विश्व कप के अगले दौर का टिकट हासिल कर लिया, लेकिन टीम के मुख्य कोच शोर्ड मारिन खिलाड़ियों के प्रदर्शन से बिलकुल संतुष्ट नजर नहीं आए। मैच के दौरान भारतीय टीम ने आक्रमण, पासिंग और गेंद पर नियंत्रण के मामले में कई बुनियादी गलतियां कीं। विशेष रूप से पेनल्टी कॉर्नर को गोल में तब्दील करने की विफलता कोच मारिन के लिए गहरी चिंता का विषय बनी हुई है। इसके बावजूद, अनुभवी सविता पूनिया और युवा बिछू देवी जैसी भारतीय गोलकीपरों के असाधारण प्रदर्शन की बदौलत भारत मुकाबला गोलरहित ड्रॉ पर रोकने में सफल रहा। 300 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेल चुकीं कप्तान व गोलकीपर सविता पूनिया ने अपनी परिपक्वता और अनुभव का लोहा मनवाते हुए इंग्लैंड के खतरनाक हमलों को नाकाम किया।\n\nपहला क्वार्टर: आक्रामक शुरुआत, अचानक बारिश और गवाएं तीन पेनल्टी कॉर्नर\nमुकाबले की शुरुआत में भारतीय महिला हॉकी टीम ने बेहद आक्रामक अंदाज अपनाया और पहले 15 मिनट के खेल में इंग्लैंड की रक्षापंक्ति पर लगातार दबाव बनाए रखा। शुरुआती 15 मिनट के भीतर ही भारत को गोल करने के तीन बेहतरीन मौके पेनल्टी कॉर्नर के रूप में मिले, लेकिन टीम इनमें से एक भी अवसर को भुनाने में नाकाम रही। मैच के चौथे ही मिनट में भारतीय खिलाड़ी सुनेलिटा ने शानदार मैदानी चाल चलते हुए टीम को पहला पेनल्टी कॉर्नर दिलाया। पेनल्टी कॉर्नर के दौरान नवनीत द्वारा लगाए गए शॉट पर गेंद गोलपोस्ट के भीतर चली गई और भारतीय खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई। कोच शोर्ड मारिन भी जश्न मनाने लगे, परंतु अंपायर ने तुरंत गोल को खारिज कर दिया। रिप्ले में साफ दिखा कि गेंद गोलरेखा पार करने से पहले भारतीय खिलाड़ी इशिका की स्टिक से टकराई थी, जिसके कारण गोल अमान्य करार दिया गया।\n\nइसके बाद खेल के सातवें मिनट में भारत को मैच का दूसरा पेनल्टी कॉर्नर मिला। इसी दौरान मैदान पर अचानक तेज बारिश शुरू हो गई, जिससे खेल की परिस्थितियां थोड़ी कठिन हो गईं। नवनीत ने अपनी ट्रेडमार्क हिट से गेंद को दाहिनी ओर से गोलपोस्ट में भेजने का प्रयास किया, लेकिन उनका शॉट थोड़ा गलत दिशा में चला गया और गेंद बायें कॉर्नर से बाहर निकल गई। गेंद अभी भी इंग्लैंड के डेंजर सर्कल के भीतर ही मौजूद थी और भारतीय खिलाड़ियों ने आक्रामकता बनाए रखी। इसी दौरान इशिका ने मुस्तैदी दिखाते हुए भारत के लिए तीसरा पेनल्टी कॉर्नर हासिल कर लिया। इस बार ड्रैग फ्लिकर दीपिका के पास गोल करने का मौका था, लेकिन उनकी ड्रैग फ्लिक सटीक नहीं रह सकी और गेंद गोलपोस्ट के बाहर की ओर चली गई।\n\nलगातार तीन पेनल्टी कॉर्नर गंवाने के बाद इंग्लैंड की टीम ने पलटवार करना शुरू किया। 10वें मिनट में इंग्लैंड को मैच का अपना पहला पेनल्टी कॉर्नर हासिल हुआ। इंग्लैंड की ओर से 117 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुकीं अनुभवी खिलाड़ी सोफी हैमिल्टन ने करारी ड्रैग फ्लिक लगाई। हालांकि, भारत की रशर सुनेलिटा ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए गेंद को अपने शरीर और स्टिक से रोका, जिसके बाद ज्योति ने बड़ी चतुराई से गेंद को डेंजर सर्कल से बाहर निकालकर खतरा टाल दिया। अगले ही मिनट (11वें मिनट) इंग्लैंड ने बायीं ओर से खतरनाक हमला बोला। टेस्सा हॉवर्ड ने गेंद पर नियंत्रण बनाकर 278 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुकीं इंग्लैंड की सबसे अनुभवी खिलाड़ी लिली ओसले को बेहतरीन पास दिया। हालांकि, लिली ओसले सही समय पर फिनिशिंग शॉट नहीं लगा सकीं और गेंद गोलपोस्ट से दूर चली गई। बारिश थमने के बाद मैदान पर खिली धूप के बीच पहला क्वार्टर बिना किसी गोल के 0-0 की बराबरी पर समाप्त हुआ।\n\nदूसरा क्वार्टर: चूका हुआ सुनहरा मौका और 10 खिलाड़ियों वाली इंग्लैंड टीम\nदूसरे क्वार्टर की शुरुआत में भी दोनों टीमों के बीच गेंद पर कब्जे के लिए कड़ी टक्कर देखने को मिली। 21वें मिनट में भारत के पास मैदानी गोल करने का एक बेहद सुनहरा मौका आया। नवनीत ने मैदान के दाहिने हिस्से से अकेले गेंद को आगे बढ़ाया और इंग्लैंड के डिफेंडरों को चकमा देते हुए कप्तान सलीमा टेटे को पास दिया। सलीमा ने बेसलाइन की तरफ से तेज दौड़ लगाते हुए डेंजर सर्कल में दाखिल हो रही इशिका को गेंद सौंपी। इशिका के पास स्वयं शॉट लगाने या सलीमा को वापस पास देने का विकल्प था, लेकिन सलीमा को वापस पास देने के प्रयास में गेंद पर से उनका नियंत्रण छूट गया और भारत के हाथ से गोल करने का एक निश्चित अवसर निकल गया।\n\nमैच के 24वें मिनट में भारतीय फॉरवर्ड लालरेम्सियामी ने अपनी फुर्ती के बल पर इंग्लैंड के डिफेंडर को गलती करने पर मजबूर किया और भारत को चौथा पेनल्टी कॉर्नर दिलाया। टूर्नामेंट से पहले बेहतरीन फॉर्म में चल रही दीपिका ने इस पेनल्टी कॉर्नर पर बेहद दमदार ड्रैग फ्लिक लगाई। गेंद तेजी से गोलपोस्ट के कोने की तरफ जा रही थी, परंतु इंग्लैंड की गोलकीपर मिरियम प्रिचार्ड ने अपने दाहिने पैर को पूरी तरह फैलाकर एक हैरतअंगेज बचाव किया। मिरियम प्रिचार्ड के इस शानदार सेव ने भारत को बढ़त लेने से रोक दिया।\n\nइसके तुरंत बाद इंग्लैंड ने जवाबी हमला बोलते हुए मैच का अपना दूसरा पेनल्टी कॉर्नर हासिल किया। इंग्लैंड की डार्सी बोर्न ने इस पेनल्टी कॉर्नर पर शॉट लगाया, लेकिन उनका शॉट काफी कमजोर रहा जिसे भारतीय गोलकीपर बिछू देवी ने बिना किसी परेशानी के आसानी से रोक लिया। अगले ही मिनट इंग्लैंड को एक और पेनल्टी कॉर्नर मिला, लेकिन उनकी वेरिएशन्स की रणनीति पूरी तरह नाकाम साबित हुई। दूसरे क्वार्टर के अंतिम मिनट में इंग्लैंड की खिलाड़ी टेस्सा हॉवर्ड को फाउल करने के कारण पीला कार्ड दिखाया गया। इस कार्ड के चलते टेस्सा हॉवर्ड को 5 मिनट के लिए मैदान से बाहर जाना पड़ा। इसके परिणामस्वरूप इंग्लैंड की टीम को हाफटाइम से ठीक पहले और तीसरे क्वार्टर की शुरुआत में 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा। हालांकि, भारतीय टीम इस संख्यात्मक बढ़त का फायदा उठाने में पूरी तरह असफल रही और हाफटाइम तक स्कोर 0-0 ही रहा।\n\nतीसरा क्वार्टर: खारिज हुआ नवनीत का गोल और सविता पूनिया की जांबाजी\nहाफटाइम के बाद तीसरे क्वार्टर के पहले ही मिनट (31वें मिनट) में भारत ने आक्रामक रुख अपनाते हुए मैच का पांचवां पेनल्टी कॉर्नर हासिल किया। सलीमा टेटे द्वारा लगाए गए शॉट पर गेंद इंग्लैंड की डिफेंडर की स्टिक से टकरा गई, जिसके कारण अंपायर ने भारत को लगातार छठा पेनल्टी कॉर्नर प्रदान किया। छठा पेनल्टी कॉर्नर भारत के लिए बेहद विवादित और रोमांचक रहा। नवनीत ने स्टॉप के बाद गेंद को बेहद खूबसूरती से इंग्लैंड के गोलपोस्ट के भीतर डाल दिया। भारतीय खिलाड़ियों ने गोल का जश्न मनाना शुरू कर दिया, लेकिन अंपायर ने गोल को खारिज कर दिया। अंपायर के नियम के अनुसार, यह ड्रैग फ्लिक नहीं बल्कि एक सीधी हिट थी और गेंद हवा में उछलती हुई गोल के भीतर गई थी। नियमों के तहत पेनल्टी कॉर्नर पर ऐसा शॉट जमीन को छूते हुए ही गोलपोस्ट में जाना चाहिए था। गेंद खतरनाक ऊंचाई पर होने के कारण गोल को अमान्य घोषित कर दिया गया।\n\nइसके बाद इंग्लैंड की टीम ने भारतीय रक्षापंक्ति पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया। तीसरे क्वार्टर में भारतीय टीम की ओर से कई गलतियां हुईं, जिसके कारण भारत ने इस क्वार्टर में ही इंग्लैंड को पांच पेनल्टी कॉर्नर दे डाले। 37वें मिनट में इंग्लैंड को चौथा पेनल्टी कॉर्नर मिला। इंग्लैंड की खिलाड़ी ने करारा शॉट लगाया, जिसे भारतीय गोलकीपर सविता पूनिया ने बेहतरीन तरीके से ब्लॉक किया। गेंद रिबाउंड होकर वापस आई और इंग्लैंड की फॉरवर्ड ने रिवर्स हिट लगाई, लेकिन 300 से ज्यादा मैच खेल चुकीं सविता पूनिया ने अपने दाहिने हाथ से गेंद को हवा में ऊपर की तरफ धकेलते हुए डेंजर क्षेत्र से बाहर निकाल दिया।\n\nखेल के 43वें मिनट में इंग्लैंड को लगातार तीन पेनल्टी कॉर्नर (पांचवां, छठा और सातवां) मिले। यह समय भारतीय टीम के लिए सबसे कठिन था, लेकिन अनुभवी गोलकीपर सविता पूनिया और भारतीय रशर साक्षी ने अविश्वसनीय रक्षात्मक कौशल का परिचय दिया। साक्षी ने अपनी जान की परवाह न करते हुए इंग्लैंड की ड्रैग फ्लिकरों के शॉट्स को ब्लॉक किया, जबकि सविता ने गोलपोस्ट के नीचे दीवार बनकर खड़े रहने का काम किया। भारतीय खिलाड़ियों द्वारा गलतियां करने का सिलसिला जारी रहा और 45वें मिनट में इंग्लैंड को आठवां पेनल्टी कॉर्नर मिल गया। इस बार कप्तान सलीमा टेटे ने तेजी से आगे आकर गेंद को ब्लॉक किया और तीसरे क्वार्टर का अंत भी गोलरहित बराबरी पर हुआ।\n\nचौथा क्वार्टर: पेनल्टी कॉर्नर का सैलाब, गवाया गया रेफरल और अंतिम घेराबंदी\nअंतिम और चौथे क्वार्टर में मुकाबले का रोमांच चरम पर पहुंच गया। 50वें मिनट में इंग्लैंड की टीम ने एक बार फिर भारतीय डेंजर सर्कल में घुसपैठ की और मैच का नौवां पेनल्टी कॉर्नर हासिल किया। भारतीय टीम ने अंपायर के इस फैसले के खिलाफ वीडियो रेफरल लेने का निर्णय लिया। हालांकि, वीडियो अंपायर ने मैदानी अंपायर के फैसले को बरकरार रखा, जिसके कारण भारत ने अपना कीमती रेफरल गंवा दिया। भारतीय रक्षापंक्ति दबाव में नजर आ रही थी और 51वें मिनट में इंग्लैंड ने स्वयं वीडियो रेफरल लेकर 10वां पेनल्टी कॉर्नर हासिल कर लिया।\n\n10वें पेनल्टी कॉर्नर पर इंग्लैंड की ड्रैग फ्लिकर ने गोल के निचले कोने को निशाना बनाकर शॉट लगाया, लेकिन गोलकीपर बिछू देवी ने शानदार फुर्ती दिखाते हुए गेंद को रोक लिया और नवनीत ने मुस्तैदी से गेंद को सर्कल से बाहर क्लियर कर दिया। इस प्रकार इंग्लैंड अपने 10 पेनल्टी कॉर्नर में से एक को भी गोल में बदलने में सफल नहीं हो सका। वहीं दूसरी तरफ, पूरे मैच में भारत को 6 पेनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन दीपिका और नवनीत जैसे स्टार खिलाड़ी इन्हें गोल में तब्दील नहीं कर सके।\n\nमैच के अंतिम दो मिनट में इंग्लैंड ने अपनी गोलकीपर को वापस बुलाकर 11 मैदानी खिलाड़ियों के साथ खेल दिखाया, लेकिन बिछू देवी के अंतिम 30 सेकंड वाले ऐतिहासिक सेव ने इंग्लैंड की तमाम कोशिशों पर पानी फेर दिया। मैच खत्म होने की सीटी बजते ही भारतीय खिलाड़ियों ने राहत की सांस ली।\n\nपूल डी का अंतिम समीकरण और एफआईएच विश्व कप के दूसरे दौर का सफर\nइस मुकाबले से पहले पूल डी के एक अन्य महत्वपूर्ण मैच में चीन की महिला हॉकी टीम ने दक्षिण अफ्रीका को 5-1 के बड़े अंतर से मात देकर अंक तालिका में शीर्ष स्थान हासिल किया। इस जीत के साथ चीन ने पूल डी में पहला स्थान प्राप्त करते हुए सीधे अगले दौर के लिए क्वालिफाई किया। दूसरी ओर, भारतीय महिला हॉकी टीम ने पूल डी के अपने तीन मुकाबलों में एक जीत और दो ड्रॉ दर्ज किए। इस प्रदर्शन के बदौलत भारत कुल 5 अंकों के साथ पूल डी में दूसरे स्थान पर रहा और एफआईएच महिला हॉकी विश्व कप के दूसरे दौर (क्रॉसओवर चरण) में अपनी जगह पक्की की।\n\nयद्यपि भारत अगले दौर में पहुंचने में सफल रहा है, लेकिन टीम के सामने कई गंभीर चुनौतियां मौजूद हैं। टूर्नामेंट से पहले शानदार फॉर्म में चल रही दीपिका और नवनीत का पेनल्टी कॉर्नर पर फ्लॉप रहना टीम के लिए चिंताजनक है। इसके अतिरिक्त, पासिंग की सटीकता, बॉल कंट्रोल और विरोधी टीम को अनावश्यक पेनल्टी कॉर्नर देने जैसी कमियों को भारत को नॉकआउट चरण से पहले दुरुस्त करना होगा। यदि भारत को विश्व कप में आगे का सफर तय करना है, तो कोच शोर्ड मारिन के मार्गदर्शन में टीम को अपने आक्रमण और पेनल्टी कॉर्नर निष्पादन में भारी सुधार करना होगा।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: एफआईएच महिला हॉकी विश्व कप के दूसरे दौर में भारत की जगह पक्की होने से देशभर के खेल प्रेमियों और हॉकी प्रशंसकों में खुशी की लहर है।\n\nप्रशंसकों के लिए: पेनल्टी कॉर्नर की नाकामियों के बावजूद टीम इंडिया के डिफेंस और गोलकीपरों के शानदार प्रदर्शन ने आगामी नॉकआउट मुकाबलों से पहले बड़ी उम्मीदें जगाई हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. भारत और इंग्लैंड के बीच महिला हॉकी विश्व कप मैच का नतीजा क्या रहा?\nभारत और इंग्लैंड का मुकाबला 0-0 से गोलरहित ड्रॉ पर समाप्त हुआ।\n\n2. इस ड्रॉ के साथ भारतीय टीम ने टूर्नामेंट में क्या हासिल किया?\nइस ड्रॉ की मदद से भारतीय महिला हॉकी टीम ने एफआईएच विश्व कप के दूसरे दौर (क्रॉसओवर चरण) में प्रवेश कर लिया।\n\n3. पूल डी की अंक तालिका में भारतीय टीम किस स्थान पर रही?\nभारत तीन मैचों में एक जीत और दो ड्रॉ के साथ 5 अंक लेकर पूल डी में दूसरे स्थान पर रहा, जबकि चीन शीर्ष पर रहा।\n\n4. मैच के आखिरी 30 सेकंड में किस भारतीय खिलाड़ी ने निर्णायक बचाव किया?\nगोलकीपर बिछू देवी ने अपने बायीं ओर शानदार डाइव लगाकर आखिरी 30 सेकंड में निश्चित गोल होने से बचाया।\n\n5. भारत को इस मैच में कुल कितने पेनल्टी कॉर्नर मिले और नतीजे क्या रहे?\nभारत को मैच में 6 पेनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन टीम एक को भी गोल में बदलने में नाकाम रही।\n\n6. चीन और दक्षिण अफ्रीका के मैच का परिणाम क्या रहा?\nचीन ने अपने आखिरी पूल मैच में दक्षिण अफ्रीका को 5-1 से हराकर पूल डी में पहला स्थान हासिल किया।\n\nप्रेरणा और सबक\nमैच से मिली मुख्य प्रेरणाएं और सीख:\n\n• दबाव में शांति और संयम: आखिरी 30 सेकंड में बिछू देवी का शानदार डाइविंग सेव दिखाता है कि सबसे मुश्किल क्षणों में भी एकाग्रता नहीं खोनी चाहिए।\n• अनुभव का सही उपयोग: 300 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुकीं सविता पूनिया ने लगातार तीन पेनल्टी कॉर्नर बचाकर टीम को संकट से निकाला।\n• गलतियों के बावजूद जुझारूपन: बार-बार पेनल्टी कॉर्नर गंवाने के बाद भी भारतीय डिफेंस ने अपना हौसला नहीं टूटने दिया और गोल नहीं होने दिया।\n• टीम वर्क और सामूहिक प्रयास: हमलावर लाइन की विफलता के बावजूद रशर और गोलकीपरों के बीच तालमेल ने टीम को क्वालिफिकेशन दिलाया।",
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  "publishedAt": "2026-08-21",
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    "महिला हॉकी विश्व कप",
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