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  "title": "गाजीपुर के रेवतीपुर में छह दशकों से ज्यादा पुरानी फुटबॉल प्रतियोगिता, उमड़ती है भारी भीड़",
  "summary": "उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रेवतीपुर में पिछले 64 वर्षों से दशहरा के मौके पर फुटबॉल टूर्नामेंट का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देश भर से कई दिग्गज टीमें हिस्सा लेती हैं।",
  "content": "उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले का रेवतीपुर गांव इन दिनों किसी बड़े खेल आयोजन के केंद्र के रूप में चर्चा में है। आमतौर पर देश भर में क्रिकेट के प्रति दीवानगी देखी जाती है, लेकिन इस इलाके में फुटबॉल का ऐसा रोमांच छाया रहता है कि मैदान से लेकर आसपास की छतों तक दर्शकों का तांता लग जाता है। जब लोग घरों की छतों और खेल परिसर की सीमाओं पर भारी संख्या में एकत्र होते हैं, तो ऐसा आभास होता है मानो कोई बड़ा मुकाबला चल रहा हो। स्थानीय स्तर पर आयोजित होने वाला यह फुटबॉल उत्सव किसी बड़े पर्व से कम नहीं है और इसका आयोजन हर साल दशहरा के पवित्र अवसर पर किया जाता है।\n\n64 वर्षों से चली आ रही ऐतिहासिक परंपरा\nइस अनूठी खेल परंपरा की शुरुआत नवकवि युवक संघ खटीपुर के बैनर तले की गई थी। स्थानीय निवासियों के सहयोग से शुरू हुए इस आयोजन की नींव स्व. द्विजेन्द्र नाथ राय (बुच्चीराय), मंगला प्रसाद राय और रामअवध पाण्डेय जैसे प्रतिष्ठित लोगों ने रखी थी। बीते 64 वर्षों से निरंतर आयोजित होते-आते इस टूर्नामेंट ने अपनी एक मजबूत ऐतिहासिक पहचान बना ली है और यह केवल गाजीपुर तक सीमित न रहकर दूरदराज के क्षेत्रों में भी अपनी एक अलग साख कायम कर चुका है।\n\nदेशभर से पहुंचती हैं नामचीन टीमें\nइस प्रतियोगिता के आयोजन और कमेंट्री से जुड़े मृत्युंजय राय ‘अमर’ के अनुसार, हर साल इस प्रतिष्ठित फुटबॉल महाकुंभ में लगभग 15 से 20 टीमें भाग लेती हैं। इसमें बिहार के पटना, मध्य प्रदेश, दिल्ली समेत देश के विभिन्न राज्यों और महानगरों की शीर्ष टीमें तथा कई प्रतिष्ठित हॉस्टल्स के दल अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं। इन टीमों को प्रतियोगिता में आमंत्रित करने की प्रक्रिया आयोजन से एक महीना पहले ही शुरू कर दी जाती है। यहां खेले जाने वाले सभी मुकाबले अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आयोजित किए जाते हैं, जिसके कारण देश के कोने-कोने से बेहतरीन खिलाड़ी अपना कौशल दिखाने के लिए रेवतीपुर पहुंचते हैं।\n\nमैच देखने के लिए बचाकर रखते हैं छुट्टियां\nइस फुटबॉल आयोजन को लेकर स्थानीय जनता में इतना उत्साह रहता है कि लोग महीनों पहले से अपने अवकाश संचित कर लेते हैं, ताकि क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और खिताबी मुकाबले के पल न छूट जाएं। मृत्युंजय राय बताते हैं कि मुकाबलों के दौरान खेल परिसर का दृश्य बेहद भव्य होता है। मैदान के चारों तरफ आमतौर पर 5 से 6 हजार दर्शक मौजूद रहते हैं। जिस दिन फाइनल मुकाबला होता है, उस दिन स्थिति यह हो जाती है कि मैदान के भीतर केवल खिलाड़ी और गेंद ही दिखते हैं, जबकि बाउंड्रीवॉल, छतों और आसपास की हर जगह पर केवल लोगों की भीड़ नजर आती है, और एक इंच जमीन भी खाली नहीं बचती।\n\nजब रेवतीपुर के स्थानीय खिलाड़ियों और टीमों की बात आती है, तो यहां खेल का स्तर काफी उन्नत माना जाता है। गांव में दो से तीन मजबूत टीमें सक्रिय हैं, जिनके सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को चुनकर एक ‘बेस्ट इलेवन’ (Best Eleven) तैयार की जाती है, जो इस टूर्नामेंट में अपनी मजबूत चुनौती पेश करती है। राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के मार्गदर्शन और प्रशिक्षण ने यहां के युवाओं में फुटबॉल के प्रति रुचि को और अधिक प्रगाढ़ कर दिया है।\n\nआधुनिक तकनीक से जुड़ रहे हैं खेल प्रेमी\nइस पारंपरिक फुटबॉल प्रतियोगिता की विशेषता केवल मैदान में जुटने वाली हजारों की भीड़ तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके प्रसारण का तरीका भी आधुनिक है। मुकाबलों की लाइव स्ट्रीमिंग की जाती है और खेल परिसर के विहंगम दृश्य कैद करने के लिए ड्रोन का उपयोग किया जाता है। दशहरे के मेलों और अवकाश के समय रेवतीपुर का यह खेल मैदान खेल प्रेमियों के लिए किसी तीर्थ स्थल से कम नहीं प्रतीत होता, जहां प्रत्येक वर्ष खेल भावना और उत्साह का एक नया इतिहास रचा जाता है।\n\nइसका आप पर असर\nयह आयोजन स्थानीय स्तर पर खेल संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है।\n\n• उत्तर प्रदेश में: स्थानीय दर्शकों और खेलप्रेमियों के लिए यह उत्सव मनोरंजन और मेलजोल का बड़ा माध्यम बनता है।\n• रेवतीपुर में: टूर्नामेंट के दौरान स्थानीय बाजारों और दुकानों में चहल-पहल बढ़ती है जिससे व्यापार को बढ़ावा मिलता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह परंपरा ग्रामीण युवाओं को खेल से जोड़ने और स्थानीय स्तर पर खेल प्रतिभाओं को निखारने के उद्देश्य से शुरू की गई थी।\n\n• ग्रामीण पहल: स्थानीय गणमान्य लोगों ने क्षेत्र में फुटबॉल के प्रति रुचि बनाए रखने के लिए छह दशक पहले इसकी नींव रखी थी।\n• मानक स्तर: अंतरराष्ट्रीय नियमों और बेहतर प्रबंधन के कारण देश भर की दिग्गज टीमें यहां आने के लिए आकर्षित होती हैं।\n• सामुदायिक सहयोग: ग्रामीणों के निरंतर सहयोग और आयोजकों के प्रयासों से यह आयोजन हर साल बड़े पैमाने पर संभव होता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. गाजीपुर के रेवतीपुर में फुटबॉल टूर्नामेंट कितने वर्षों से आयोजित हो रहा है?\nयह टूर्नामेंट पिछले 64 वर्षों से लगातार आयोजित किया जा रहा है।\n\n2. इस फुटबॉल प्रतियोगिता की शुरुआत किसने की थी?\nइस परंपरा की नींव स्व. द्विजेन्द्र नाथ राय (बुच्चीराय), मंगला प्रसाद राय और रामअवध पाण्डेय जैसे गणमान्य लोगों ने रखी थी।\n\n3. इस टूर्नामेंट में हर साल लगभग कितनी टीमें हिस्सा लेती हैं?\nइस प्रतियोगिता में हर साल लगभग 15 से 20 टीमें भाग लेती हैं।\n\n4. मैच देखने के लिए मैदान में कितने दर्शक जुटते हैं?\nमैच के दौरान मैदान के चारों ओर लगभग 5 से 6 हजार दर्शक मौजूद रहते हैं।\n\n5. इस आयोजन का प्रबंधन कौन करता है?\nनवकवि युवक संघ खटीपुर के तत्वावधान में स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से इस प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है।",
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  "category": "खेल",
  "publishedAt": "2026-10-16",
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