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  "title": "ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मुरली श्रीशंकर ने 8.09 मीटर छलांग लगाकर जीता सिल्वर मेडल, मुक्केबाजों ने बनाए 10 पदक के नए कीर्तिमान",
  "summary": "कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के सातवें दिन मुरली श्रीशंकर ने पुरुषों की लंबी कूद में 8.09 मीटर की छलांग लगाकर रजत पदक हासिल किया, जबकि भारतीय मुक्केबाजी दल ने 10 मेडल पक्के कर नया इतिहास रचा।",
  "content": "ग्लासगो में आयोजित हो रहे राष्ट्रमंडल खेल 2026 का सातवां दिन भारतीय खेल प्रेमियों के लिए दोहरी खुशी लेकर आया। एथलेटिक्स के मैदान में देश के बेहतरीन खिलाड़ी मुरली श्रीशंकर ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। पुरुषों की लंबी कूद स्पर्धा में कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच उन्होंने 8.09 मीटर की उत्कृष्ट छलांग लगाकर भारत को रजत पदक दिलाया। इस शानदार उपलब्धि के साथ ही टूर्नामेंट में भारत के आधिकारिक पदकों की कुल संख्या 13 हो गई है। इसी दिन भारतीय मुक्केबाजी दल ने भी रिंग के भीतर अपने अभूतपूर्व प्रदर्शन से इतिहास के पन्नों में नया रिकॉर्ड दर्ज करा दिया।\n\nमुरली श्रीशंकर का 8.09 मीटर का प्रयास और पदक तालिका का समीकरण\nपुरुषों की लंबी कूद के फाइनल मुकाबले में प्रतिस्पर्धा बेहद कठिन और रोमांचक थी। मुरली श्रीशंकर ने अपनी तकनीकी दक्षता और अनुशासन का परिचय देते हुए 8.09 मीटर की दूरी तय की और दूसरा स्थान प्राप्त किया। स्वर्ण पदक जमायका के दिग्गज एथलीट ताजे गेल के नाम रहा, जिन्होंने 8.15 मीटर की दूरी मापकर पहला स्थान हासिल किया। वहीं मेजबान स्कॉटलैंड के स्टीफन मैकेंजी ने 8.08 मीटर के प्रयास के साथ कांस्य पदक पर कब्जा जमाया। श्रीशंकर महज 0.06 मीटर के बेहद मामूली अंतर से स्वर्ण पदक जीतने से चूक गए, लेकिन वैश्विक स्तर पर उनका यह निरंतर प्रदर्शन देश के लिए बहुत बड़ा गर्व का क्षण है।\n\n2024 की गंभीर चोट के बाद वापसी और लगातार दूसरा राष्ट्रमंडल पदक\nमुरली श्रीशंकर का यह रजत पदक सिर्फ एक खेल उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह उनकी मानसिक दृढ़ता और कभी न हार मानने वाले रवैये का प्रतीक है। वर्ष 2024 में एक अत्यंत गंभीर चोट के कारण उन्हें पेरिस ओलंपिक से बाहर होना पड़ा था। किसी भी पेशेवर एथलीट के करियर के लिए ऐसी चोट बेहद निराशाजनक साबित हो सकती है। लंबे रिहैबिलिटेशन, कठोर शारीरिक प्रशिक्षण और अटूट लगन के बल पर उन्होंने दोबारा ट्रैक पर वापसी की। यह राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में उनका लगातार दूसरा पदक है, क्योंकि इससे पूर्व उन्होंने 2022 के संस्करण में भी भारत के लिए रजत पदक जीता था। चोट से उभरकर पोडियम तक का यह सफर देश के उभरते हुए युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल है।\n\nमुक्केबाजी रिंग में ऐतिहासिक धमाका: एक ही संस्करण में 10 पदक पक्के\nएथलेटिक्स ट्रैक पर श्रीशंकर की इस सफलता से ठीक पहले भारतीय मुक्केबाज़ों ने रिंग के अंदर नया इतिहास रच दिया था। सातवें दिन के मुकाबलों में भारतीय मुक्केबाज़ों ने उत्कृष्ट आक्रामक खेल और रक्षात्मक कौशल का प्रदर्शन करते हुए एक ही राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए 10 पदक पक्के कर लिए। राष्ट्रमंडल खेलों के पूरे इतिहास में यह पहला अवसर है जब भारतीय मुक्केबाजी दल ने किसी एकल संस्करण में इतने अधिक पदक सुनिश्चित किए हैं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने वैश्विक मुक्केबाजी परिदृश्य में भारत के बढ़ते वर्चस्व को साबित किया है।\n\nसेमीफाइनल में पहुंचे 6 प्रमुख मुक्केबाज़ और उनका शानदार प्रदर्शन\nसातवें दिन छह प्रमुख भारतीय मुक्केबाजों ने अपने-अपने क्वार्टरफाइनल मुकाबले जीतकर सेमीफाइनल का टिकट कटाया और भारत के लिए कम से कम कांस्य पदक पक्के कर दिए। अंकुश यादव ने शुरुआत से ही अपनी आक्रामक रणनीति से विरोधी खिलाड़ी को बैकफुट पर रखा। साक्षी चौधरी ने रिंग में अपनी अद्भुत गति और चपलता से बाउट अपने नाम की। अरुंधति चौधरी ने अपने तकनीकी संतुलन और सटीक कॉम्बिनेशन पंचों का सहारा लिया। सचिन सिवाच ने अपने सटीक टाइमिंग वाले पंचों से प्रतिद्वंद्वी को कोई मौका नहीं दिया। हैवीवेट वर्ग में नरेंद्र बेरवाल ने अपनी शारीरिक क्षमता और पंचिंग पावर का प्रदर्शन करते हुए एकतरफा जीत दर्ज की। वहीं जैस्मिन लम्बोरिया ने चतुर रणनीतिक खेल के जरिए मुकाबला जीतकर पदक पक्के करने के क्रम को पूरा किया।\n\nभारत के लिए आगे की उम्मीदें और ग्लासगो में बढ़ता जोश\nग्लासगो 2026 में सातवें दिन मिली इन जुड़वां सफलताओं ने पूरे भारतीय दल में नए उत्साह का संचार कर दिया है। मुक्केबाजी में जहां 10 पदक सुरक्षित हो चुके हैं, वहीं आने वाले सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबलों में इन पदकों का रंग (गोल्ड, सिल्वर या ब्रॉन्ज) तय होना अभी बाकी है। लंबी कूद में श्रीशंकर के रजत पदक ने एथलेटिक्स दल के अन्य खिलाड़ियों का भी हौसला बुलंद किया है। भारतीय एथलीटों का यह निरंतर बेहतर होता प्रदर्शन आने वाले दिनों में और भी कई पदकों की उम्मीद जगा रहा है।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: देश में खेलों के प्रति युवाओं का रुझान बढ़ेगा और एथलेटिक्स तथा मुक्केबाजी में नए खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी।\n\nखेल प्रेमियों के लिए: कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की पदक तालिका 13 तक पहुंचने से प्रशंसकों के लिए आने वाले दिनों में और स्वर्ण पदक देखने का अवसर रहेगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मुरली श्रीशंकर ने कितना लंबा दांव लगाकर रजत पदक जीता?\nमुरली श्रीशंकर ने पुरुषों की लंबी कूद स्पर्धा में 8.09 मीटर की छलांग लगाकर रजत पदक हासिल किया।\n\n2. पुरुषों की लंबी कूद में स्वर्ण और कांस्य पदक किसने जीता?\nजमायका के ताजे गेल ने 8.15 मीटर छलांग लगाकर स्वर्ण पदक और स्कॉटलैंड के स्टीफन मैकेंजी ने 8.08 मीटर के साथ कांस्य पदक जीता।\n\n3. ग्लासगो गेम्स में भारतीय मुक्केबाजों ने क्या नया रिकॉर्ड बनाया?\nभारतीय मुक्केबाजी दल ने एक ही राष्ट्रमंडल खेलों में रिकॉर्ड 10 पदक पक्के करने की ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।\n\n4. कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के सातवें दिन किन भारतीय मुक्केबाजों ने जीत दर्ज की?\nअंकुश यादव, साक्षी चौधरी, अरुंधति चौधरी, सचिन सिवाच, नरेंद्र बेरवाल और जैस्मिन लम्बोरिया ने अपने-अपने मुकाबले जीतकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया।\n\n5. मुरली श्रीशंकर 2024 के पेरिस ओलंपिक में क्यों भाग नहीं ले पाए थे?\nसाल 2024 में करियर को खतरे में डालने वाली एक गंभीर चोट के कारण मुरली श्रीशंकर पेरिस ओलंपिक से बाहर हो गए थे।\n\nप्रेरणा और सबक\nचोट के बाद मानसिक मजबूती: 2024 में पेरिस ओलंपिक छूटने जैसी बड़ी निराशा के बाद भी श्रीशंकर ने हिम्मत नहीं हारी और खुद को दोबारा साबित किया।\n\nअनुशासित रिहैबिलिटेशन: गंभीर शारीरिक समस्याओं से बाहर आने के लिए कड़ा शारीरिक अनुशासन और नियमित ट्रेनिंग सबसे जरूरी है।\n\nनिरंतरता का महत्व: 2022 के बाद 2026 में भी रजत पदक जीतकर उन्होंने साबित किया कि सफलता एक बार का तुक्का नहीं बल्कि लगातार कड़ी मेहनत का परिणाम होती है।",
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  "category": "खेल",
  "publishedAt": "2026-07-29",
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