# गोंडा में डॉ. प्रत्युष राज ने 15 हजार बच्चों को बनाया आत्मरक्षा में माहिर, 25 सालों से दे रहे मुफ्त ताइक्वांडो प्रशिक्षण

> उत्तर प्रदेश के गोंडा में डॉ. प्रत्युष राज पिछले ढाई दशक से जरूरतमंद बच्चों को ताइक्वांडो और आत्मरक्षा का निशुल्क प्रशिक्षण देकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** खेल · **Published:** 2026-10-11 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/sports/gonda-men-dr-pratyush-raj-ne-15-hajara-bachchon-ko-banaya-atmaraksha-men-mahira-25-salon-se-de-rahe-muphta-taekwondo-prashikshana-46202 · **Language:** Hindi
**Tags:** गोंडा, डॉ प्रत्युष राज, ताइक्वांडो, आत्मरक्षा, खेल समाचार, उत्तर प्रदेश, निशुल्क प्रशिक्षण

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में खेल और आत्मरक्षा के क्षेत्र में बदलाव की एक अनूठी मिसाल देखने को मिल रही है। गोंडा ताइक्वांडो एसोसिएशन के सचिव डॉ. प्रत्युष राज पिछले करीब 25 वर्षों से लगातार बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम में जुटे हुए हैं। अपनी इस लंबी यात्रा के दौरान उन्होंने लगभग 15 हजार बच्चों को ताइक्वांडो और सेल्फ डिफेंस की बिल्कुल मुफ्त ट्रेनिंग दी है। उनका मुख्य ध्येय बच्चों के भीतर विपरीत परिस्थितियों से निपटने का साहस पैदा करना और उन्हें मानसिक एवं शारीरिक रूप से मजबूत बनाना है।

## कमजोर पृष्ठभूमि के बच्चों को अवसर देने की सोच
इस पूरे सेवा अभियान की नींव उस समय पड़ी जब डॉ. प्रत्युष राज को अपने गुरु से जीवन में कुछ सार्थक करने की प्रेरणा प्राप्त हुई। उन्होंने अनुभव किया कि समाज में आर्थिक परेशानियों और तंगी की वजह से कई प्रतिभाशाली बच्चे खेलों में आगे नहीं बढ़ पाते। इसी खाई को पाटने के इरादे से उन्होंने निर्धन परिवारों के बच्चों को निशुल्क मार्शल आर्ट्स सिखाने का संकल्प लिया। जब वे शुरुआत में गोंडा पहुंचे थे, तब स्थानीय स्तर पर ताइक्वांडो को लेकर लगभग शून्य जागरूकता थी। कई विद्यालयों में शिक्षक और आम लोग अक्सर उनसे सवाल पूछते थे कि आखिर ताइक्वांडो क्या होता है।

## जागरूकता अभियान और विशेष प्रशिक्षण शिविर
खेल के प्रति फैली इस अनभिज्ञता को दूर करने के लिए उन्होंने निजी स्कूलों में जाकर मुफ्त कोचिंग सत्र आयोजित करने शुरू किए। इस दौरान उन्होंने केवल बच्चों को ही मार्शल आर्ट्स के गुर नहीं सिखाए, बल्कि उनके माता-पिता और अभिभावकों को भी खेल तथा सुरक्षा के महत्व से भली-भांति अवगत कराया। नियमित अभ्यास के अलावा समय-समय पर विशेष प्रशिक्षण शिविरों का भी आयोजन किया जाता है। हाल ही में लगाए गए ऐसे ही एक कैंप के जरिए लगभग 700 छात्र-छात्राओं को आत्मरक्षा के जरूरी पैंतरे सिखाए गए हैं, ताकि वे किसी भी विषम स्थिति में अपनी सुरक्षा स्वयं कर सकें।

## राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहुंच रही प्रतिभाएं
डॉ. प्रत्युष राज के इस जमीनी प्रयास का असर अब खेल के बड़े मैदानों पर साफ दिखाई दे रहा है। उनके मार्गदर्शन में तैयार हुए कई खिलाड़ी जिला और प्रदेश स्तर से आगे निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। उनका दृढ़ विश्वास है कि छोटे कस्बों के बच्चों में हुनर की कोई कमी नहीं होती, बस उन्हें उचित मार्गदर्शन और सही मंच मिलने की दरकार होती है। खेल के क्षेत्र में अपने समर्पण के 25 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में दिसंबर महीने में एक भव्य खेल आयोजन करने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने साफ किया है कि आर्थिक विषमताओं को प्रतिभा की राह में रोड़ा नहीं बनने दिया जाएगा और यह निशुल्क प्रशिक्षण अभियान भविष्य में भी इसी तरह बदस्तूर जारी रहेगा।

## इसका आप पर असर
इस पहल से खेल के क्षेत्र में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए निशुल्क प्रशिक्षण और करियर के नए द्वार खुलते हैं।

- **भारत में:** यह जमीनी स्तर पर खेलों को बढ़ावा देने और छोटे शहरों से राष्ट्रीय प्रतिभाओं को तलाशने का एक अनुकरणीय मॉडल प्रस्तुत करता है। अन्य क्षेत्रों के प्रशिक्षक भी कमजोर पृष्ठभूमि के बच्चों के लिए ऐसे निशुल्क मंच तैयार करने की प्रेरणा ले सकते हैं।
- **गोंडा में:** स्थानीय बच्चों को बिना किसी फीस के पेशेवर मार्शल आर्ट्स सीखने और आत्मरक्षा की तकनीकें हासिल करने का सीधा अवसर मिलता है। हाल ही में प्रशिक्षित 700 बच्चों की तरह अन्य छात्र भी आने वाले शिविरों में शामिल होकर अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।
- **अभिभावकों के लिए:** बच्चों की सुरक्षा को लेकर माता-पिता की चिंता कम होती है और खेल के खर्च का आर्थिक बोझ भी नहीं पड़ता। वे बिना किसी वित्तीय दबाव के अपनी संतानों को मार्शल आर्ट्स में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।
- **युवा एथलीटों के लिए:** जिला और राज्य स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचने के रास्ते बिना किसी वित्तीय रुकावट के सुलभ होते हैं। सही मार्गदर्शन मिलने से खेल को पेशेवर करियर के रूप में अपनाने का आत्मविश्वास बढ़ता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह पहल आर्थिक असमानता को दूर करने और आत्मरक्षा के प्रति सामाजिक जागरूकता बढ़ाने की व्यक्तिगत प्रेरणा से शुरू हुई।

- **गुरु से मिली प्रेरणा:** डॉ. प्रत्युष राज को अपने गुरु के मार्गदर्शन से यह सीख मिली कि समाज के वंचित वर्ग को आगे बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। इसी विचार ने उन्हें कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि के बच्चों के लिए काम करने हेतु प्रेरित किया।
- **आर्थिक विषमता की समस्या:** कई प्रतिभाशाली युवा केवल इसलिए खेलों में अपनी पहचान नहीं बना पाते क्योंकि उनके पास प्रशिक्षण की फीस देने के संसाधन नहीं होते। इस बाधा को मिटाने के लिए उन्होंने ताइक्वांडो की पूरी कोचिंग निशुल्क देने का मार्ग चुना।
- **जागरूकता का अभाव:** शुरुआती वर्षों में गोंडा के कई स्कूलों और आम लोगों को ताइक्वांडो खेल के बारे में बुनियादी जानकारी तक नहीं थी। इस खेल को लोकप्रिय बनाने और बच्चों को शारीरिक रूप से सशक्त करने के लिए निजी विद्यालयों में जाकर अभियान चलाना पड़ा।

## सवाल-जवाब

### 1. डॉ. प्रत्युष राज कौन हैं और वे किस पद पर कार्यरत हैं?
डॉ. प्रत्युष राज गोंडा ताइक्वांडो एसोसिएशन के सचिव हैं और पिछले करीब 25 वर्षों से खेल के क्षेत्र में सक्रिय हैं।

### 2. वे अब तक कितने बच्चों को निशुल्क आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दे चुके हैं?
वे अब तक लगभग 15 हजार बच्चों को निशुल्क सेल्फ डिफेंस और ताइक्वांडो की ट्रेनिंग दे चुके हैं।

### 3. उन्होंने मुफ्त ताइक्वांडो प्रशिक्षण देने की शुरुआत क्यों की थी?
अपने गुरु से प्रेरणा पाकर उन्होंने यह पहल शुरू की, ताकि आर्थिक तंगी के कारण प्रतिभाएं खेलों में पीछे न छूट जाएं।

### 4. हाल ही में आयोजित शिविर में कितने बच्चों को ट्रेनिंग दी गई?
हाल ही में आयोजित एक प्रशिक्षण शिविर में करीब 700 बच्चों को निशुल्क आत्मरक्षा की तकनीकें सिखाई गईं।

### 5. प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले छात्र किन स्तरों तक खेल रहे हैं?
उनके यहां से प्रशिक्षित कई बच्चे जिला, राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक की प्रतियोगिताओं में भाग ले रहे हैं।

### 6. दिसंबर महीने में किस कार्यक्रम की योजना बनाई जा रही है?
ताइक्वांडो के क्षेत्र में 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में दिसंबर में एक बड़े खेल कार्यक्रम के आयोजन की योजना है।

## प्रेरणा और सबक
सच्ची लगन और निःस्वार्थ सेवा से सीमित संसाधनों के बीच भी हजारों जिंदगियों में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

- **मार्गदर्शन की शक्ति:** अपने गुरु से मिली सही सीख को समाज के भले के लिए कार्यरूप में बदलना जीवन को उद्देश्य देता है। सकारात्मक सलाह से प्रेरित होकर उठाया गया एक छोटा कदम भी दूरगामी प्रभाव छोड़ता है।
- **आर्थिक बाधाओं को चुनौती:** अगर प्रतिभा को सही अवसर और मंच दिया जाए, तो गरीबी कभी भी कामयाबी की राह में दीवार नहीं बन सकती। निस्वार्थ सहयोग से वंचित वर्ग के बच्चे भी अंतरराष्ट्रीय मुकाम हासिल कर सकते हैं।
- **धैर्य और निरंतरता:** किसी भी बड़े सामाजिक बदलाव के लिए समय लगता है, जैसा कि 25 वर्षों के अटूट समर्पण से साबित हुआ है। शुरुआती संकोच और जागरूकता की कमी के बावजूद लगातार डटे रहना अंततः सफलता दिलाता है।
- **समुदाय के प्रति उत्तरदायित्व:** अपनी कला और ज्ञान को केवल व्यावसायिक लाभ तक सीमित न रखकर समाज के उत्थान में लगाना ही सच्चा नेतृत्व है। आने वाली पीढ़ी को सक्षम बनाना समाज के प्रति सबसे बड़ा योगदान है।

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