# हॉकी इंडिया ने महानिदेशक आर के श्रीवास्तव के सारे अधिकार छीने, जर्सी विवाद समेत लगे आठ गंभीर आरोप

> हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने महानिदेशक कमांडर आर के श्रीवास्तव को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए तत्काल प्रभाव से उनके सभी प्रशासनिक अधिकार समाप्त कर दिए हैं।

**Type:** article · **Category:** खेल · **Published:** 2026-09-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/sports/hockey-india-ne-dg-commander-r-k-srivastava-ke-sare-adhikara-chhine-jarsi-vivada-sameta-lage-atha-gnbhira-aropa-31657 · **Language:** Hindi
**Tags:** हॉकी इंडिया, दिलीप टिर्की, आर के श्रीवास्तव, जर्सी विवाद, स्पोर्ट्स न्यूज़, भारतीय हॉकी

भारतीय खेल जगत में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिला है। हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने राष्ट्रीय खेल संगठन के महानिदेशक कमांडर आर के श्रीवास्तव को एक विस्तृत कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही तत्काल प्रभाव से उनके सभी प्रशासनिक और कार्यकारी अधिकार छीन लिए गए हैं। यह कदम संगठन के भीतर चल रहे गहरे आंतरिक मतभेदों को उजागर करता है। श्रीवास्तव के खिलाफ कुल आठ गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनमें राष्ट्रीय पुरुष और महिला टीमों की पारंपरिक जर्सी के रंग को बदलने का विवाद और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना कर विदेश यात्रा पर जाना शामिल है।

 

## सारे अधिकार समाप्त और चार सप्ताह का समय

हॉकी इंडिया के अध्यक्ष कार्यालय द्वारा जारी किए गए निर्देशों के अनुसार, आर के श्रीवास्तव के कामकाज पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। जारी किए गए कारण बताओ नोटिस में कहा गया है, "तत्काल प्रभाव से हॉकी इंडिया के महानिदेशक के रूप में आपके सभी अधिकार समाप्त किए जाते हैं।" इसके तहत वह आगामी आदेश तक हॉकी इंडिया के उपनियमों के अनुसार किसी भी अधिकार का उपयोग नहीं कर सकेंगे और न ही संगठन की ओर से कोई आधिकारिक कार्य करेंगे। अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने अपने कानूनी प्रतिनिधियों के माध्यम से यह नोटिस भिजवाया है, जिसमें श्रीवास्तव को अपना पक्ष रखने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है। यदि वह इस निर्धारित अवधि के भीतर स्पष्टीकरण देने में विफल रहते हैं, तो उपलब्ध प्रशासनिक रिकॉर्ड के आधार पर उनके खिलाफ एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

 

## जर्सी के रंग में बदलाव पर भारी विवाद

महानिदेशक के खिलाफ लगाए गए आरोपों में सबसे प्रमुख मामला भारतीय राष्ट्रीय टीम की खेलने वाली पोशाक यानी जर्सी के रंग को बदलने से जुड़ा है। भारतीय टीम लंबे समय से अपनी पारंपरिक नीली जर्सी में खेलती रही है, लेकिन हाल ही में इसे बदलकर नारंगी रंग का कर दिया गया था। इस नए रंग की जर्सी को सार्वजनिक रूप से पेश भी कर दिया गया था। नोटिस के अनुसार, जर्सी के रंग में इतना बड़ा बदलाव करने से पहले हॉकी इंडिया के अध्यक्ष या कार्यकारी समिति से कोई विचार-विमर्श नहीं किया गया और न ही उनकी अनुमति ली गई। जब इस निर्णय के अधिकार, खिलाड़ियों और कोचों के साथ किए गए परामर्श और इसकी मंजूरी से जुड़े दस्तावेजी सबूत मांगे गए, तो बार-बार निर्देश मिलने के बावजूद श्रीवास्तव कोई भी प्रस्ताव या मंजूरी का रिकॉर्ड पेश करने में असमर्थ रहे। जर्सी का रंग बदलने के पीछे मैदान पर दृश्यता यानी विजिबिलिटी के कारणों का हवाला दिया गया था, जिसने खेल प्रेमियों और पूर्व खिलाड़ियों के बीच गहरा विवाद पैदा कर दिया था।

 

## आदेश की अवहेलना कर विदेश यात्रा करने का आरोप

दूसरा गंभीर आरोप कमांडर आर के श्रीवास्तव द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की अनदेखी कर विदेश यात्रा करने से जुड़ा है। हॉकी इंडिया के अध्यक्ष कार्यालय ने श्रीवास्तव को विशेष रूप से निर्देश दिया था कि वह विश्व कप के लिए नीदरलैंड और बेल्जियम की यात्रा नहीं करेंगे। उन्हें भारत में ही रहकर घरेलू हॉकी इंडिया लीग (HIL) के आगामी सत्र की तैयारियों, फ्रेंचाइजी समन्वय, रणनीतिक योजना और अन्य तत्काल सुलझाए जाने वाले प्रशासनिक मुद्दों पर अपना ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी गई थी। 30 जुलाई को भेजे गए एक आधिकारिक ईमेल में भी उन्हें स्पष्ट रूप से भारत में रहने के लिए कहा गया था। इसके बावजूद, श्रीवास्तव ने इन निर्देशों की अनदेखी की और विदेश यात्रा पर चले गए। नोटिस में उनके इस कदम को अध्यक्ष के पद का सीधा अपमान और आदेश की स्पष्ट अवज्ञा माना गया है। उन्होंने खुद को उन व्यक्तियों से ऊपर रखा जिन्हें इस दौरे के लिए आधिकारिक तौर पर चुना गया था।

 

## अन्य छह गंभीर प्रशासनिक खामियां

इन दो मुख्य विवादों के अलावा, श्रीवास्तव पर छह अन्य प्रशासनिक विफलताएं और मनमानी करने के आरोप भी लगे हैं। इनमें जर्सी विवाद के दौरान PR एजेंसी और मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंधात्मक निर्देश शामिल हैं, जिससे संगठन की छवि प्रभावित हुई। इसके साथ ही, दक्षिण अफ्रीका के दौरे के दौरान भारतीय खिलाड़ियों द्वारा किए गए कथित दुर्व्यवहार के मामले को सही तरीके से न संभालना भी उनके आरोपों की सूची में दर्ज है। राष्ट्रीय टीम के मुख्य कोच क्रेग फुल्टन से जुड़े स्पष्टीकरण के मामले में भी उन पर लापरवाही बरतने की बात कही गई है। इसके अलावा, विक्रम पाल के ICC और POSH (यौन उत्पीड़न रोकथाम) रिकॉर्ड के रख-रखाव में विफलता, विकास अंपायर सुमित मोहाइट से संबंधित विवादित मामला और अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ (FIH), एशियाई हॉकी महासंघ (AHF) तथा अन्य राष्ट्रीय खेल संघों के साथ अनधिकृत बाहरी पत्राचार करने का आरोप भी उन पर लगाया गया है। हॉकी इंडिया का कहना है कि यह कार्रवाई किसी अंतिम दंड के रूप में नहीं है, बल्कि संगठन में अनुशासन, पारदर्शिता और सुचारु संचालन सुनिश्चित करने के लिए की गई है।

## इसका आप पर असर
हॉकी इंडिया में चल रहे इस बड़े प्रशासनिक विवाद का असर भारतीय खेल प्रशंसकों और घरेलू हॉकी के बुनियादी ढांचे पर पड़ना तय है।

- **प्रशासनिक कामकाज पर असर:** महानिदेशक के निलंबन से हॉकी इंडिया के दैनिक निर्णयों में देरी हो सकती है। इसका सीधा असर आने वाले समय में राष्ट्रीय टीमों के प्रबंधन और टूर्नामेंटों के आयोजन पर पड़ेगा।
- **हॉकी इंडिया लीग की तैयारियां:** आगामी HIL सत्र की योजनाएं और फ्रेंचाइजी के साथ तालमेल प्रभावित हो सकता है। नए अधिकारियों को यह जिम्मेदारी संभालनी होगी जिससे तैयारियों की समयसीमा पर दबाव बढ़ेगा।
- **जर्सी का भविष्य:** जर्सी विवाद सामने आने के बाद यह संभव है कि राष्ट्रीय टीम एक बार फिर अपनी पारंपरिक नीली पोशाक में मैदान पर उतरे। इससे भारतीय प्रशंसकों की भावनाएं फिर से टीम के साथ मजबूती से जुड़ेंगी।
- **खेल प्रशासन में पारदर्शिता:** इस सख्त प्रशासनिक कार्रवाई से खेल संघों के भीतर जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ेगी। यह अन्य खेल अधिकारियों के लिए भी नियमों का पालन करने की दृष्टि से एक कड़ा संदेश है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह प्रशासनिक संकट हॉकी इंडिया के भीतर कार्यकारी अधिकारों के दुरुपयोग और आपसी तालमेल की कमी के कारण खड़ा हुआ है।

- **एकतरफा फैसले लेना:** महानिदेशक ने बिना कार्यकारी समिति और अध्यक्ष की मंजूरी के जर्सी के रंग को बदलने जैसे बड़े फैसले लिए। इस मनमानी कार्रवाई ने संगठन के सर्वोच्च नेतृत्व को नाराज कर दिया।
- **आदेशों की अवहेलना:** अध्यक्ष द्वारा घरेलू लीग पर ध्यान केंद्रित करने के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, महानिदेशक ने विदेश यात्रा का विकल्प चुना। इस अनुशासनात्मक उल्लंघन ने विवाद को और बढ़ा दिया।
- **प्रशासनिक रिकॉर्ड की कमी:** महत्वपूर्ण निर्णयों, जैसे कि खिलाड़ियों से परामर्श या जर्सी परिवर्तन की मंजूरी के संबंध में कोई लिखित कागजी सबूत या संकल्प प्रस्तुत नहीं किया जा सका, जिससे प्रशासनिक विफलता स्पष्ट हुई।

## सवाल-जवाब

### 1. हॉकी इंडिया ने किसके खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया है?
हॉकी इंडिया ने अपने महानिदेशक कमांडर आर के श्रीवास्तव के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

### 2. आर के श्रीवास्तव पर क्या मुख्य आरोप लगाए गए हैं?
उन पर कुल आठ आरोप लगे हैं, जिनमें बिना अनुमति राष्ट्रीय टीम की जर्सी का रंग बदलना और अध्यक्ष के निर्देशों का उल्लंघन कर विदेश यात्रा करना शामिल है।

### 3. स्पष्टीकरण देने के लिए श्रीवास्तव को कितना समय दिया गया है?
उन्हें नोटिस मिलने के बाद अपना लिखित जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है।

### 4. क्या यह कार्रवाई कोई अंतिम अनुशासनात्मक दंड है?
नहीं, हॉकी इंडिया ने स्पष्ट किया है कि यह अंतिम अनुशासनात्मक दंड नहीं है, बल्कि संगठन में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए एक अंतरिम कदम है।

### 5. जर्सी विवाद का मुख्य कारण क्या था?
टीम की पारंपरिक नीली जर्सी को बिना अध्यक्ष या कार्यकारी समिति की मंजूरी के बदलकर नारंगी रंग का कर दिया गया था, जिससे विवाद खड़ा हुआ।

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