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  "title": "हैदराबाद में 27 टीमों को पछाड़कर बिहार ने जीता रग्बी खिताब, जहानाबाद के रोहित भी टीम में शामिल",
  "summary": "जहानाबाद के 16 साल के रोहित कुमार ने हैदराबाद में हुए राष्ट्रीय रग्बी फुटबॉल टूर्नामेंट में बिहार को महाराष्ट्र को हराकर चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई। कबड्डी छोड़कर रग्बी अपनाने वाले इस खिलाड़ी का अगला लक्ष्य अब इंटरनेशनल स्तर पर खेलना है।",
  "content": "बिहार के जहानाबाद जिले से एक 16 साल के खिलाड़ी ने रग्बी में ऐसा कमाल किया है कि पूरा जिला उस पर गर्व कर रहा है। रोहित कुमार नाम के इस युवा खिलाड़ी ने हैदराबाद में हुए राष्ट्रीय रग्बी फुटबॉल टूर्नामेंट में बिहार की टीम को चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई। रोहित का घर जिला मुख्यालय से करीब 13 किलोमीटर दूर है, लेकिन दूरी उसके सपनों के आड़े नहीं आई।\n\nहैदराबाद में हुआ बड़ा मुकाबला\nहैदराबाद में आयोजित इस राष्ट्रीय रग्बी फुटबॉल प्रतियोगिता में देशभर की 27 टीमों ने हिस्सा लिया। बिहार के खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट में दमदार खेल दिखाया और टीम फाइनल तक पहुंचने में कामयाब रही। फाइनल मुकाबले में बिहार की टीम का सामना महाराष्ट्र की टीम से हुआ, और बिहार ने उसे हराकर ट्रॉफी अपने नाम कर ली। बिहार से कुल 12 खिलाड़ियों की टीम चुनी गई थी, और रोहित इस पूरी टीम का हिस्सा थे। जिन 7 खिलाड़ियों ने फाइनल मैच खेलकर टीम को ट्रॉफी दिलाई, उनमें रोहित का नाम भी शामिल था।\n\nकबड्डी के मैदान से रग्बी तक का मोड़\nशकूराबाद बाजार में रहने वाले रोहित कुमार का चयन अंडर 18 राष्ट्रीय रग्बी फुटबॉल टूर्नामेंट में उनके शानदार प्रदर्शन के आधार पर हुआ। रोहित ने आज से करीब 4 साल पहले खेल की दुनिया में कदम रखा था, लेकिन शुरुआत में उनका मन कबड्डी में लगा हुआ था। उस समय उन्हें यह अंदाजा भी नहीं था कि किसी खेल को खेलते हुए राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा जा सकता है। जिस मैदान पर रोहित कबड्डी की प्रैक्टिस करते थे, वहीं एक कोच दूसरे बच्चों को रग्बी सिखाने आते थे। इसी दौरान रोहित की मुलाकात उस कोच से हुई, जिन्होंने उन्हें सलाह दी कि उनके पास सही काबिलियत और ऊर्जा दोनों है, इसलिए उन्हें रग्बी खेलना चाहिए।\n\nअसफलता के बाद मिली कामयाबी\nकोच की इस सलाह ने रोहित के पूरे खेल करियर की दिशा बदल दी। उन्होंने रग्बी में हाथ आजमाना शुरू किया और सुबह-शाम मैदान में मेहनत करने लगे। करीब 2 साल की मेहनत के बाद रोहित ने रग्बी के लिए पहला टेस्ट दिया, लेकिन उसमें उन्हें सफलता नहीं मिली। हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी। इस साल हैदराबाद वाले टूर्नामेंट के लिए कड़ी मेहनत के बाद दोबारा टेस्ट दिया और इस बार वे सफल रहे। इस सफलता ने उन्हें अंडर 18 नेशनल रग्बी फुटबॉल टूर्नामेंट खेलने का मौका दिया, और यहीं से उनके खेल करियर की नई शुरुआत हुई। रोहित सिर्फ टीम का हिस्सा बनकर नहीं रह गए, बल्कि टूर्नामेंट के सभी मैच खेले और अपनी काबिलियत साबित की।\n\n10 साल की उम्र से मैदान में पसीना बहा रहे रोहित\nरोहित कुमार ने अपनी इस उपलब्धि पर कहा, \"शुरू से खेल के प्रति लगाव रहा है. यही कारण है कि 10 साल की उम्र से ही ग्राउंड पर जाकर पसीना बहा रहा था.\" उन्होंने बताया कि खेल में ज्यादा दिलचस्पी होने की वजह से पढ़ाई के लिए कम समय मिल पाता था, जिस वजह से घर पर कई बार डांट भी सुननी पड़ती थी। लेकिन इसके बावजूद वे लगातार अपनी प्रतिभा को निखारने में जुटे रहे। जब उनके बड़े भाई को उनकी इस मेहनत के बारे में पता चला, तो उन्होंने भी साथ देना शुरू कर दिया। इसी बीच रोहित को यह बड़ी उपलब्धि मिली। जीत के बाद जब वे घर लौटे तो हर कोई उनकी तारीफ कर रहा था, और अब पूरा परिवार उनका साथ देने के लिए आगे आ रहा है। रोहित ने आगे कहा कि उनका अगला लक्ष्य इंटरनेशनल स्तर पर खेलना है।\n\nकोच बोले, रोहित में है अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जाने की काबिलियत\nरोहित के कोच विकास कुमार ने कहा, \"रोहित एक होनहार खिलाड़ी है. यदि इस पर मेहनत किया जाए तो जिले का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो सकता है.\" उन्होंने आगे कहा कि उनकी पूरी कोशिश है कि रोहित को एक बड़ा प्लेटफॉर्म मिले, ताकि उसकी प्रतिभा और निखर सके। जहानाबाद जैसे छोटे जिले से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले रोहित की कहानी अब जिले के दूसरे बच्चों के लिए भी एक मिसाल बन गई है, जो खेल के मैदान में अपना भविष्य तलाश रहे हैं।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: यह कहानी दिखाती है कि छोटे शहरों और गांवों के खिलाड़ी भी रग्बी जैसे कम चर्चित खेल में मेहनत के दम पर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकते हैं, जिससे और युवा इस खेल की तरफ आकर्षित हो सकते हैं।\n• जहानाबाद और बिहार में: रोहित की इस उपलब्धि के बाद जिले में रग्बी के प्रति दिलचस्पी बढ़ सकती है, और स्थानीय कोच व प्रशासन नए खिलाड़ियों को तैयार करने पर ध्यान दे सकते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. रोहित कुमार कहां के रहने वाले हैं?\nरोहित बिहार के जहानाबाद जिले के शकूराबाद बाजार के रहने वाले हैं, उनका घर जिला मुख्यालय से करीब 13 किलोमीटर दूर है।\n\n2. रोहित की उम्र कितनी है?\nरोहित कुमार 16 साल के हैं।\n\n3. राष्ट्रीय रग्बी टूर्नामेंट कहां हुआ था?\nयह टूर्नामेंट हैदराबाद में हुआ था, जिसमें 27 टीमों ने हिस्सा लिया।\n\n4. फाइनल में बिहार का सामना किस टीम से हुआ?\nफाइनल में बिहार की टीम का सामना महाराष्ट्र की टीम से हुआ, जिसे हराकर बिहार ने ट्रॉफी जीती।\n\n5. रोहित पहले कौन सा खेल खेलते थे?\nरोहित पहले कबड्डी खेला करते थे, बाद में एक कोच की सलाह पर उन्होंने रग्बी अपनाया।\n\n6. फाइनल टीम में कितने खिलाड़ी थे और रोहित की क्या भूमिका थी?\nफाइनल में टीम को ट्रॉफी दिलाने वाले 7 खिलाड़ियों में रोहित भी शामिल थे, जबकि पूरी बिहार टीम में 12 खिलाड़ी थे।\n\n7. रोहित का अगला लक्ष्य क्या है?\nरोहित का अगला लक्ष्य इंटरनेशनल स्तर पर रग्बी खेलना है।\n\n8. रोहित के कोच का नाम क्या है?\nरोहित के कोच का नाम विकास कुमार है।\n\nप्रेरणा और सबक\n• सही सलाह पर भरोसा करें: कबड्डी खेलते वक्त एक कोच की सलाह मानकर रोहित ने रग्बी अपनाया, जिससे उनका पूरा करियर बदल गया।\n• रोज मेहनत जरूरी है: रोहित सुबह-शाम मैदान में पसीना बहाते रहे, तभी वे राष्ट्रीय टीम तक पहुंच पाए।\n• असफलता से हार न मानें: पहला टेस्ट देने के बाद असफल होने पर भी रोहित ने कोशिश जारी रखी और अगली बार सफल हुए।\n• आलोचना के बावजूद डटे रहें: पढ़ाई कम करने पर घर में डांट सुनने के बावजूद रोहित ने अपनी प्रतिभा निखारना जारी रखा।\n• सफलता परिवार का साथ भी लाती है: जीत के बाद रोहित के परिवार ने भी उनका साथ देना शुरू कर दिया, जो दिखाता है कि नतीजे मुश्किल राहों को भी आसान बना देते हैं।",
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  "category": "खेल",
  "publishedAt": "2026-07-18",
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