# लॉस एंजिलिस 2028 का टिकट पक्का कर जयपुर की मोना अग्रवाल ने रचा इतिहास

> दक्षिण कोरिया में पैरा विश्व निशानेबाजी चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर मोना अग्रवाल ने लॉस एंजिलिस पैरालिंपिक 2028 का कोटा हासिल कर लिया है। वह इस महाकुंभ के लिए क्वालिफाई करने वाली देश की पहली शूटर बनी हैं।

**Type:** article · **Category:** खेल · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/sports/jaipur-shooter-mona-agarwal-secures-los-angeles-2028-paralympics-berth-with-world-championship-silver-34288 · **Language:** Hindi
**Tags:** मोना अग्रवाल, पैरा शूटिंग, लॉस एंजिलिस 2028, अवनी लेखारा, चांगवोन विश्व कप, अर्जुन अवॉर्ड

दक्षिण कोरिया के चांगवोन शहर में आयोजित पैरा विश्व निशानेबाजी चैंपियनशिप में राजस्थान की राजधानी जयपुर की प्रतिभावान शूटर मोना अग्रवाल ने अपने अचूक निशाने के दम पर नया इतिहास लिख दिया है। उन्होंने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग व्यक्तिगत स्पर्धा में 250.0 का स्कोर खड़ा करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। इस शानदार उपलब्धि के साथ ही उन्होंने 2028 में अमेरिका के लॉस एंजिलिस में होने वाले पैरालिंपिक खेलों के लिए भारतीय दल का पहला निशानेबाजी कोटा पक्का कर लिया है। पेरिस पैरालिंपिक के बाद यह लगातार दूसरा अवसर होगा जब वह दुनिया के सबसे बड़े खेल मंच पर तिरंगे का मान बढ़ाएंगी।

## टीम स्पर्धा में अवनी और मिली के साथ मिलकर जीता स्वर्ण
चांगवोन की इस विश्व स्तरीय प्रतियोगिता में भारतीय निशानेबाजों का दबदबा देखने को मिला। मोना ने R2 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग SH1 वर्ग में व्यक्तिगत रजत जीतने के अलावा टीम इवेंट में भी स्वर्णिम सफलता हासिल की। उन्होंने हमवतन स्टार शूटर अवनी लेखारा और साथी निशानेबाज मिली शाह के साथ मिलकर कुल 1878.6 अंकों का विशाल स्कोर बनाया और भारत की झोली में चमचमाता स्वर्ण पदक डाल दिया। व्यक्तिगत फाइनल राउंड में सर्बिया की अनुभवी निशानेबाज क्रिस्टीना ट्रिफुनोविक ने पहला स्थान हासिल कर स्वर्ण पदक जीता, जबकि मोना बेहद करीबी मुकाबले में दूसरे स्थान पर रहीं और देश के लिए ऐतिहासिक पैरालिंपिक टिकट हासिल करने में सफल रहीं।

## टीवी स्क्रीन से शुरू हुआ अंतरराष्ट्रीय शूटर बनने का सफर
मोना के खेल जीवन की दास्तान किसी फिल्मी पटकथा से कम रोमांचक नहीं है। कुछ साल पहले तक वह अपने कमरे में बैठकर टीवी स्क्रीन पर अन्य एथलीटों को पदक जीतते देखती थीं और सोचती थीं कि क्या वह भी कभी इस मुकाम पर पहुंच पाएंगी। टोक्यो पैरालिंपिक के दौरान जब जयपुर की ही अवनी लेखरा ने स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया, तब मोना घर पर बैठी टीवी देख रही थीं। अवनी की उस ऐतिहासिक जीत ने मोना के भीतर एक नई चिंगारी सुलगा दी। उन्होंने तय किया कि शारीरिक चुनौतियों और व्हीलचेयर को अपनी कमजोरी नहीं बनने देंगी, बल्कि इसी के सहारे खेल के मैदान में देश का नाम रोशन करेंगी। अवनी की प्रेरणा को अपना हथियार बनाकर उन्होंने पहली बार राइफल थामने का फैसला किया।

## वॉलीबॉल कोर्ट से शूटिंग रेंज तक का कठिन संघर्ष
निशानेबाजी की दुनिया में कदम रखने से पहले मोना वॉलीबॉल के खेल में हाथ आजमाती थीं। इसके बाद उन्होंने जयपुर की एकलव्य शूटिंग अकादमी में जाकर विधिवत अभ्यास शुरू किया। शुरुआती दौर काफी तकलीफदेह और अभावों से भरा रहा। उनके पास शूटिंग के आधुनिक उपकरण तक मौजूद नहीं थे और खेल से जुड़े साजो-सामान का इंतजाम करना एक बड़ी चुनौती थी। जब तक उन्होंने पेरिस पैरालिंपिक में अपनी छाप नहीं छोड़ी, तब तक खेल जगत में उनकी कोई खास पहचान नहीं थी। इस पूरे कठिन सफर में उनके कोच योगेश शेखावत ढाल बनकर उनके साथ खड़े रहे, जिन्हें मोना अपनी सफलता की सबसे मजबूत रीढ़ मानती हैं।

## लगातार सटीक निशाने और पदकों की झड़ी
अपनी क्षमता को निखारने के बाद मोना ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में लगातार मेडल जीतकर अपनी योग्यता सिद्ध की। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित पहले पैरा विश्व कप में उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया था और अवनी लेखरा को पछाड़ते हुए पेरिस पैरालिंपिक के लिए पहला प्रवेश पत्र पाया था। पेरिस पैरालिंपिक 2024 में उन्होंने व्यक्तिगत कांस्य पदक जीतकर दुनिया में अपनी पहचान पक्की की। इसके अतिरिक्त सर्बिया के नोवी सैड में खेली गई WSPS विश्व कप प्रतियोगिता में उन्होंने कांस्य पदक जीता था और पैरा शूटिंग विश्व कप 2023 में भी वह कांस्य पदक अपने नाम कर चुकी हैं।

## अड़चनों को पार कर देश की पहली निशानेबाज बनने का गौरव
लॉस एंजिलिस खेलों का टिकट हासिल करने से पहले एक मौके पर मोना केवल 0.3 अंक के मामूली फासले से क्वालिफिकेशन पाने से चूक गई थीं। उस दर्दनाक झटके से उबरते हुए उन्होंने अपने फोकस को और मजबूत किया और सीधे दक्षिण कोरिया की धरती पर पोडियम फिनिश करके लॉस एंजिलिस का टिकट कटाने वाली पहली भारतीय शूटर बन गईं। खेल जगत में उनके इसी असाधारण योगदान को देखते हुए भारत सरकार उन्हें प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से अलंकृत कर चुकी है। इसके साथ ही उन्हें महाराजा अग्रसेन ग्लोबल आइकॉन अवॉर्ड समेत राज्य और केंद्र स्तर पर कई अन्य सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। भारत के प्रधानमंत्री भी सार्वजनिक मंच से उनकी खेल प्रतिभा की मुक्तकंठ से सराहना कर चुके हैं।

## इसका आप पर असर
मोना अग्रवाल की इस ऐतिहासिक जीत ने भारतीय पैरा खेलों में नए मानक स्थापित किए हैं और युवाओं के लिए नए अवसर खोले हैं।

- **भारत में:** देश भर के पैरा एथलीटों को यह संदेश मिलता है कि संसाधन की कमी के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शुरुआती कोटा हासिल किया जा सकता है। इससे भारतीय खेल प्राधिकरण और खेल संघों का ध्यान पैरा शूटिंग के शुरुआती प्रशिक्षण और फंडिंग पर और अधिक केंद्रित होगा।
- **जयपुर में:** राजस्थान और जयपुर के स्थानीय खेल अकादमियों में आधुनिक शूटिंग इक्विपमेंट की मांग और सुविधाएं बढ़ेंगी। शहर के दिव्यांग युवाओं को खेल को पूर्णकालिक करियर के रूप में चुनने का नया हौसला मिलेगा।
- **खेल प्रशंसकों के लिए:** लॉस एंजिलिस 2028 के लिए भारत के पदक अभियान की शुरुआत चार साल पहले ही बेहद सकारात्मक रूप में हो चुकी है। प्रशंसकों को अब मोना और अवनी की जोड़ी से आगामी प्रतियोगिताओं में भी दोहरे पदकों की उम्मीद रहेगी।
- **प्रशिक्षकों और अकादमियों के लिए:** ग्रासरूट स्तर पर एकलव्य अकादमी जैसे केंद्रों की पहचान बढ़ेगी और नए कोचों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण तकनीक अपनाने की प्रेरणा मिलेगी। इससे राज्यों में स्थानीय स्तर पर प्रतिभा खोज अभियानों में तेजी आएगी।

## ऐसा क्यों हुआ
मोना अग्रवाल की यह उपलब्धि उनकी तकनीकी एकाग्रता, पिछले असफलताओं से सीखने की क्षमता और विश्व स्तरीय मुकाबले में दबाव झेलने के कौशल का नतीजा है।

- **सीधे कारण:** दक्षिण कोरिया के चांगवोन में 10 मीटर एयर राइफल फाइनल के दौरान मोना ने लगातार सटीक शॉट लगाए और 250.0 का विशाल स्कोर खड़ा किया। यह उच्च स्कोर उन्हें रजत पदक और अनिवार्य पैरालिंपिक कोटा दिलाने के लिए पर्याप्त साबित हुआ।
- **अतीत की सीख:** इससे पहले की एक प्रतियोगिता में मोना महज 0.3 अंक के मामूली अंतर से क्वालिफिकेशन हासिल करने से चूक गई थीं। उस विफलता के बाद उन्होंने अपने कोच योगेश शेखावत के साथ मिलकर अपने शूटिंग रूटीन और ट्रिगर नियंत्रण को और अधिक सटीक बनाया।
- **टीम वर्क और आत्मविश्वास:** अवनी लेखारा और मिली शाह के साथ मिलकर टीम स्पर्धा में 1878.6 अंक से स्वर्ण जीतने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा। इस टीम सफलता ने व्यक्तिगत मुकाबले के दौरान उन पर से दबाव काफी कम कर दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. मोना अग्रवाल ने कौन सी प्रतियोगिता में पैरालिंपिक 2028 का कोटा हासिल किया?
मोना अग्रवाल ने दक्षिण कोरिया के चांगवोन में आयोजित पैरा विश्व निशानेबाजी चैंपियनशिप के दौरान यह कोटा हासिल किया।

### 2. व्यक्तिगत फाइनल में मोना अग्रवाल का स्कोर क्या रहा?
उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग स्पर्धा में 250.0 अंक का स्कोर बनाकर रजत पदक जीता।

### 3. टीम स्पर्धा में मोना के साथ किन अन्य खिलाड़ियों ने स्वर्ण पदक जीता?
मोना अग्रवाल के साथ अवनी लेखारा और मिली शाह ने मिलकर टीम स्पर्धा में 1878.6 अंकों के साथ स्वर्ण पदक जीता।

### 4. व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक किस खिलाड़ी ने जीता?
व्यक्तिगत स्पर्धा का स्वर्ण पदक सर्बिया की क्रिस्टीना ट्रिफुनोविक ने अपने नाम किया।

### 5. निशानेबाजी शुरू करने से पहले मोना अग्रवाल कौन सा खेल खेलती थीं?
शूटिंग रेंज में कदम रखने से पहले मोना अग्रवाल वॉलीबॉल खेलती थीं।

### 6. मोना अग्रवाल अपने खेल का श्रेय किस कोच को देती हैं?
मोना अपनी सफलता का मुख्य श्रेय अपने कोच योगेश शेखावत को देती हैं।

## प्रेरणा और सबक
मोना अग्रवाल का सफर दिखाता है कि अभावों और शारीरिक सीमाओं के बावजूद दृढ़ संकल्प से किसी भी सपने को साकार किया जा सकता है।

- **प्रेरणा को कर्म में बदलना:** दूसरों की सफलता देखकर केवल ताली बजाने के बजाय उसे अपने लक्ष्य की शुरुआत का माध्यम बनाएं, जैसा मोना ने अवनी को टीवी पर देखकर किया।
- **संसाधनों के अभाव को बहाना न बनाना:** विश्व स्तरीय उपकरण न होने पर भी जो साधन उपलब्ध हों, उसी से अभ्यास शुरू करें और समय के साथ अपनी प्रतिभा साबित करें।
- **सख्त असफलता से न टूटना:** महज 0.3 अंक से क्वालिफिकेशन चूकने के बाद भी हिम्मत न हारें, बल्कि कमियों को पहचानकर दोगुनी मेहनत से वापसी करें।
- **मार्गदर्शक का सम्मान:** अपनी यात्रा में कोच और मेंटर्स के योगदान को पहचानें और कठिन समय में उनके निर्देशों पर भरोसा बनाए रखें।

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