जापान के पैरा एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों का जलवा, स्वर्ण पदकों का पिछला रिकॉर्ड बराबर आईची नागोया में आयोजित पैरा एशियन गेम्स 2026 में भारतीय एथलीटों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 106 पदक अपने नाम कर लिए हैं। इस दौरान देश ने स्वर्ण पदकों के पिछले रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है और कुल पदकों के मामले में भी नया इतिहास रचने के बेहद करीब है। जापान के आईची नागोया में खेले जा रहे पैरा एशियन गेम्स 2026 में भारतीय एथलीटों का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा है और टीम ने इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया है। साल 2022 में हांगझोऊ में हुए एशियन पैरा गेम्स के दौरान देश ने जितने कुल 28 गोल्ड मेडल जीते थे, इस बार भारतीय खिलाड़ियों ने उतनी ही स्वर्ण पदक संख्या की बराबरी कर ली है। मौजूदा समय में मेडल टैली में भारत चौथे पायदान पर बना हुआ है, जिसके खाते में कुल 106 मेडल आ चुके हैं। इनमें 28 गोल्ड के साथ-साथ 34 सिल्वर और 44 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं। अब खेल प्रेमियों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या भारत हांगझोऊ में बनाए गए कुल 108 पदकों के अपने सर्वकालिक रिकॉर्ड को पार कर पाएगा या नहीं, जिसे पीछे छोड़ने के लिए अब महज 3 मेडल की दरकार है। नवीन शिवकुमार और संदीप कुमार का ऐतिहासिक प्रदर्शन प्रतियोगिता का पांचवां दिन भारतीय दल के लिए बेहद यादगार साबित हुआ, जिसमें देश के कई दिग्गज खिलाड़ियों ने पदक तालिका में इजाफा किया। दिन की शुरुआत पैरा बैडमिंटन मुकाबले से हुई, जहां महिला सिंगल्स SH6 कैटेगिरी में नित्या श्री ने शानदार खेल दिखाते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया। इसके तुरंत बाद पुरुष पैरा बैडमिंटन इवेंट के SL4 वर्ग में नवीन शिवकुमार ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए देश के लिए गोल्ड मेडल जीता। पैरा एथलेटिक्स की स्पर्धा में भी भारत का परचम लहराया, जहां निमिषा सुरेश ने महिला लॉन्ग जंप T47 कैटेगिरी में सिल्वर मेडल अपने नाम किया। इसके अलावा संदीप कुमार ने पुरुषों की 400 मीटर (T44) फाइनल रेस इवेंट में नया रिकॉर्ड बनाते हुए महज 52.28 सेकेंड में दौड़ पूरी की और गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाकर इतिहास रच दिया। इसी स्पर्धा के 400 मीटर T64 वर्ग में अजय ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश का मान बढ़ाया। शूटिंग के मैदान पर भी भारतीय खिलाड़ियों का जलवा देखने को मिला, जहां महिला 50m राइफल 3 पोजीशन SH1 कैटेगिरी में मोना ने बेहतरीन निशाना साधते हुए गोल्ड मेडल हासिल किया। नितेश और थुलसिमथी ने मिक्स्ड डबल्स में जीता रजत पदक बैडमिंटन कोर्ट पर मिक्स्ड डबल्स के SL3-SU5 वर्ग में नितेश कुमार और थुलसिमथी मुरुगेसन की जोड़ी ने भी शानदार चुनौती पेश करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया। खिताबी मुकाबले में उनका सामना कड़े प्रतिद्वंद्वी पैरालंपिक चैंपियन लीनी रात्री ओकिला और हिकमत रमदानी की जोड़ी से हुआ। यह मुकाबला काफी रोमांचक रहा और दोनों पक्षों के बीच तीन सेटों तक संघर्ष चला, अंत में भारतीय जोड़ी को 2-1 से हार का सामना करना पड़ा। हालांकि मुकाबले की शुरुआत में नितेश और थुलसिमथी ने बेहतरीन खेल दिखाते हुए पहला सेट 21-11 से अपने नाम कर लिया था, लेकिन इसके बाद के दोनों सेटों में इंडोनेशियाई खिलाड़ियों ने वापसी की और भारतीय जोड़ी को 21-19 तथा 21-14 से शिकस्त दी। इसका आप पर असर पैरा एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों के इस ऐतिहासिक प्रदर्शन से देश में दिव्यांग खेलों के प्रति जागरूकता और सम्मान में भारी बढ़ोतरी होगी। • भारत में: खेलप्रेमियों और युवा एथलीटों को पैरा खेलों में करियर बनाने के लिए बड़ी प्रेरणा मिलेगी। विभिन्न राज्यों की सरकारें और खेल मंत्रालय इस सफलता के बाद पैरा एथलीटों के लिए बुनियादी ढांचे और सुविधाओं को और मजबूत कर सकते हैं। सवाल-जवाब 1. पैरा एशियन गेम्स 2026 कहाँ आयोजित किए जा रहे हैं? यह प्रतियोगिता जापान के आईची नागोया में आयोजित की जा रही है। 2. भारत ने पैरा एशियन गेम्स में अब तक कुल कितने पदक जीत लिए हैं? भारत ने इन खेलों में अब तक कुल 106 पदक अपने नाम कर लिए हैं। 3. भारत के खाते में कितने स्वर्ण पदक आए हैं? भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक 28 स्वर्ण पदक जीते हैं, जो पिछले हांगझोऊ खेलों के रिकॉर्ड के बराबर हैं। 4. संदीप कुमार ने किस इवेंट में रिकॉर्ड बनाया? संदीप कुमार ने पुरुषों की 400 मीटर (T44) फाइनल रेस में 52.28 सेकेंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता। 5. नितेश और थुलसिमथी ने किस खेल में पदक जीता? नितेश कुमार और थुलसिमथी मुरुगेसन ने पैरा बैडमिंटन के मिक्स्ड डबल्स SL3-SU5 वर्ग में रजत पदक जीता। प्रेरणा और सबक भारतीय पैरा एथलीटों की यह सफलता शारीरिक बाधाओं को पार कर दृढ़ संकल्प के साथ मुकाम हासिल करने की एक अद्भुत मिसाल है। • कड़ी मेहनत और अभ्यास: खिलाड़ियों ने साबित कर दिया कि निरंतर अभ्यास और अटूट फोकस से किसी भी चुनौती को हराया जा सकता है। • चुनौतियों से पार पाना: विपरीत परिस्थितियों के बावजूद एथलीटों ने मानसिक मजबूती का परिचय देते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन किया। • लक्ष्य के प्रति समर्पण: पिछले संस्करण के रिकॉर्ड की बराबरी करना और उससे आगे निकलने का जज्बा यह सिखाता है कि हमेशा अपने पिछले प्रदर्शन से बेहतर करने की कोशिश करनी चाहिए। https://trendkia.com/sports/japan-ke-para-asian-games-mein-bharatiya-khiladiyon-ka-jalwa-swarn-padkon-ka-pichhla-record-barabar-52978 TrendKia — Har trend, sabse pehle.