जापान में भारतीय तीरंदाजों का जलवा, महिला कंपाउंड टीम ने विश्व रिकॉर्ड बनाकर जीता स्वर्ण पदक आईची-नागोया एशियन गेम्स में भारतीय महिला कंपाउंड तीरंदाजी टीम ने चीन को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। ज्योति सुरेखा वेन्नम, पृथिका प्रदीप और चिकिता तनिपार्थी की तिकड़ी ने 238 अंकों के साथ विश्व रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए इतिहास रचा। आईची-नागोया में चल रहे एशियन गेम्स से भारत के लिए बेहद शानदार खबर सामने आई है। बुधवार की सुबह भारतीय महिला कंपाउंड तीरंदाजी टीम ने फाइनल मुकाबले में चीन को मात देकर देश की झोली में सातवां स्वर्ण पदक डाल दिया। इस खिताबी मुकाबले में भारतीय तिकड़ी ने 238 अंकों का बेहतरीन स्कोर खड़ा किया और विश्व रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए सोने पर सटीक निशाना साधा। अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहराने वाली इस ऐतिहासिक टीम में अनुभवी ज्योति सुरेखा वेन्नम, युवा सनसनी पृथिका प्रदीप और प्रतिभाशाली चिकिता तनिपार्थी शामिल रहीं। अनुभवी ज्योति सुरेखा वेन्नम का शानदार सफर टीम की अगुवाई कर रहीं ज्योति सुरेखा वेन्नम भारतीय तीरंदाजी की सबसे स्थापित और अनुभवी खिलाड़ियों में गिनी जाती हैं। बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के दबाव में शांत रहकर सटीक प्रदर्शन करने की उनकी क्षमता अद्वितीय है। आंध्र प्रदेश के चल्लापल्ली में 3 जुलाई 1996 को जन्मीं ज्योति ने अपने खेल जीवन की शुरुआत तैराकी से की थी और राष्ट्रीय स्तर पर तैराकी में हिस्सा लिया था। हालांकि, बहुत कम उम्र में ही उन्होंने तीरंदाजी की बारीकियां सीखीं और धीरे-धीरे दुनिया की शीर्ष कंपाउंड तीरंदाजों की कतार में शामिल हो गईं। साल 2022 के हांगझोऊ एशियन गेम्स में ज्योति ने महिला व्यक्तिगत, महिला टीम और मिक्स्ड टीम तीनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतकर एक ही संस्करण में तीन गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय तीरंदाज बनने की ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की थी। उनके खाते में वर्ल्ड चैंपियनशिप, वर्ल्ड कप, एशियन गेम्स और एशियन चैंपियनशिप के कई स्वर्ण पदक दर्ज हैं। खेल जगत में उनके अभूतपूर्व योगदान को देखते हुए साल 2017 में उन्हें अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। महाराष्ट्र की 18 वर्षीय पृथिका प्रदीप की तेज तरक्की इस स्वर्ण पदक विजेता टीम की दूसरी अहम सदस्य महाराष्ट्र की रहने वाली पृथिका प्रदीप हैं। 27 सितंबर 2008 को जन्मीं महज 18 साल की पृथिका भारतीय तीरंदाजी में तेजी से उभरता हुआ नाम हैं। उन्होंने कक्षा पांचवीं में सिर्फ एक शौक के तौर पर तीर-धनुष थामा था, लेकिन उनकी लगन ने इस शौक को जल्द ही पेशेवर करियर में बदल दिया। पृथिका के लगातार शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्हें साल 2025 में पहली बार भारतीय महिला कंपाउंड टीम में शामिल किया गया था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कम समय में ही उन्होंने अपनी गहरी छाप छोड़ी है और अब तक कुल सात अंतरराष्ट्रीय पदक अपने नाम कर चुकी हैं। फाइनल मुकाबले में भी उन्होंने अपने शांत स्वभाव और सटीक निशानों से टीम को मजबूत बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभाई। किसान परिवार से निकलीं तेलंगाना की चिकिता तनिपार्थी तीकड़ी की तीसरी सदस्य 21 वर्षीय चिकिता तनिपार्थी हैं, जिन्होंने एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। तेलंगाना के एक किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली चिकिता का जन्म साल 2005 में हुआ था। जब वह दूसरी कक्षा में पढ़ती थीं, तब उनके पिता के मार्गदर्शन में उन्होंने तीरंदाजी का अभ्यास शुरू किया था। शुरुआत में समय बिताने के लिए शुरू हुआ यह खेल धीरे-धीरे उनके जीवन का सबसे बड़ा जुनून बन गया। चिकिता ने साल 2021 में औपचारिक रूप से पेशेवर तीरंदाजी शुरू की और अपनी कड़ी मेहनत के बल पर साल 2025 तक राष्ट्रीय सीनियर टीम में जगह बना ली। साल 2025 में ही उन्होंने वर्ल्ड आर्चरी यूथ चैंपियनशिप के अंडर-21 महिला व्यक्तिगत वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तहलका मचाया था। कई वैश्विक पदक जीत चुकीं चिकिता ने महिला कंपाउंड टीम स्पर्धा में स्वर्ण जीतने के बाद मिक्स्ड कंपाउंड इवेंट के फाइनल में भी अपनी जगह पक्की की है। केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने X पर लिखा कि महिला कंपाउंड टीम ने सटीकता और कौशल का बेमिसाल प्रदर्शन करते हुए विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की और देश को गौरवान्वित किया। इसका आप पर असर महिला कंपाउंड तीरंदाजी टीम की यह जीत भारतीय खेलों में कंपाउंड वर्ग के बढ़ते दबदबे को दर्शाती है और उभरते एथलीटों को विश्व स्तरीय प्रशिक्षण सुविधाएं मिलने का मार्ग प्रशस्त करती है। • भारतीय खेलों में: भारत की वैश्विक खेल रैंकिंग में सुधार होगा और पदकों की संख्या में वृद्धि दर्ज की जाएगी। कंपाउंड तीरंदाजी को राष्ट्रीय स्तर पर अधिक वित्तीय सहयोग और प्रायोजक मिलने की संभावना बढ़ जाएगी। • खेल प्रेमियों और प्रशंसकों के लिए: तीरंदाजी जैसे गैर-पारंपरिक खेलों के प्रति दर्शकों की रुचि और टेलीविजन दर्शक संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। प्रशंसक अब आगामी मिक्स्ड कंपाउंड फाइनल स्पर्धा में भी पदक की उम्मीद लगाए बैठेंगे। • युवा एथलीटों के लिए: छोटे शहरों और ग्रामीण परिवेश के महत्वाकांक्षी खिलाड़ियों में राष्ट्रीय टीम तक पहुंचने का आत्मविश्वास पैदा होगा। राज्य संघों द्वारा युवा तीरंदाजों के लिए आधुनिक अभ्यास अकादमियां और प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। • आगामी प्रतियोगिताओं पर: अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में विरोधी टीमों पर भारतीय तीरंदाजों का मनोवैज्ञानिक दबाव कायम रहेगा। आगामी मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ी शीर्ष वरीयता के साथ मैदान में उतरेंगे। ऐसा क्यों हुआ भारतीय महिला तीरंदाजी टीम की इस ऐतिहासिक जीत के पीछे वर्षों की अनुशासित तैयारी, रणनीतिक निरंतरता और घरेलू स्तर पर उभरी नई प्रतिभाओं का सटीक तालमेल रहा है। • सटीक निशानेबाजी और टीम तालमेल: फाइनल मैच के दबाव के दौरान सभी तीनों खिलाड़ियों ने लगातार दस और नौ अंकों के दायरे में तीर चलाए। 238 अंकों का विशाल स्कोर खड़ा करना खिलाड़ियों के मानसिक संतुलन और तकनीकी एकरूपता का प्रत्यक्ष नतीजा था। • अनुभव और युवा ऊर्जा का संयोजन: टीम में जहां ज्योति सुरेखा वेन्नम जैसी अनुभवी तीरंदाज का मार्गदर्शन मौजूद था, वहीं युवा निशानेबाजों की निर्भीक शैली ने बड़ा अंतर पैदा किया। इस संतुलन ने विपरीत परिस्थितियों में भी टीम को बिखरने नहीं दिया। • मजबूत तैयारी और फॉर्म: खिलाड़ियों ने हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और विश्व चैंपियनशिप में निरंतर पदक जीतकर अपनी लय बनाए रखी थी। इस निरंतर वैश्विक अनुभव ने खिलाड़ियों को बड़े मुकाबलों के लिए पूरी तरह तैयार रखा। सवाल-जवाब 1. भारतीय महिला कंपाउंड तीरंदाजी टीम ने कौन सा पदक जीता? भारतीय महिला कंपाउंड तीरंदाजी टीम ने फाइनल में चीन को हराकर स्वर्ण पदक जीता। 2. इस फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम का कुल स्कोर कितना था? भारतीय टीम ने 238 अंकों का स्कोर बनाया और विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की। 3. स्वर्ण पदक विजेता टीम में कौन-कौन सी खिलाड़ी शामिल थीं? टीम में ज्योति सुरेखा वेन्नम, पृथिका प्रदीप और चिकिता तनिपार्थी शामिल थीं। 4. ज्योति सुरेखा वेन्नम ने 2022 एशियन गेम्स में क्या कारनामा किया था? ज्योति ने 2022 हांगझोऊ एशियन गेम्स में महिला व्यक्तिगत, महिला टीम और मिक्स्ड टीम तीनों में तीन स्वर्ण पदक जीते थे। 5. पृथिका प्रदीप की उम्र कितनी है और उन्होंने कब तीरंदाजी शुरू की थी? पृथिका की उम्र 18 साल है और उन्होंने कक्षा पांचवीं में एक हॉबी के तौर पर तीरंदाजी शुरू की थी। 6. चिकिता तनिपार्थी किस राज्य से संबंध रखती हैं? चिकिता तनिपार्थी तेलंगाना के एक किसान परिवार से ताल्लुक रखती हैं। प्रेरणा और सबक ग्रामीण परिवेश और साधारण परिवारों से निकलकर विश्व रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीतने वाली यह कहानी हर युवा के लिए प्रेरणा का स्रोत है। • शौक को समर्पण में बदलना: पांचवीं कक्षा में मनोरंजन के तौर पर शुरू किया गया खेल भी कठोर अभ्यास से करियर बन सकता है। पृथिका प्रदीप का सफर दिखाता है कि कम उम्र में चुनी गई दिशा में अडिग रहने से बड़ी सफलता मिलती है। • साधनों की कमी कभी बाधा नहीं: एक साधारण किसान परिवार से आने वाली चिकिता तनिपार्थी ने साबित किया कि लगन के आगे मुश्किलें टिक नहीं सकतीं। आर्थिक सीमाओं के बावजूद पिता के मार्गदर्शन और अटूट मेहनत से विश्व मंच जीता जा सकता है। • बदलाव से घबराना नहीं: ज्योति सुरेखा वेन्नम ने राष्ट्रीय स्तर पर तैराकी करने के बाद तीरंदाजी की राह पकड़ी और विश्व की शीर्ष खिलाड़ी बनीं। अपने कौशल को सही दिशा में मोड़ने का साहस इंसान को नई ऊंचाइयों पर ले जाता है। • अनुभव और एकता की शक्ति: जब अनुभवी और नए खिलाड़ी एक साझा लक्ष्य के लिए एकजुट होते हैं, तो विश्व रिकॉर्ड जैसी ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल होती हैं। https://trendkia.com/sports/japana-men-indian-tirndajon-ka-jalava-mahila-knpaunda-tima-ne-vishva-rikorda-banakara-jita-svarna-padaka-40709 TrendKia — Har trend, sabse pehle.