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  "type": "article",
  "title": "पाली की शूटर कामना उदावत ने नेशनल ट्रायल में साधा स्वर्णिम निशाना, विश्व कप टीम में पक्की की जगह",
  "summary": "डॉ. करणी सिंह शूटिंग रेंज में आयोजित चौथे भारतीय टीम ट्रायल में शॉटगन स्कीट स्पर्धा का गोल्ड जीतकर कामना उदावत ने इटली में होने वाले विश्व कप का टिकट कटाया।",
  "content": "नई दिल्ली स्थित डॉ. करणी सिंह शूटिंग रेंज में आयोजित चौथे इंडियन टीम ट्रायल में राजस्थान के पाली मारवाड़ की निशानेबाज कामना उदावत ने अपनी असाधारण प्रतिभा का प्रदर्शन किया। रायपुर क्षेत्र के छोटे से गांव माकड़वाली की रहने वाली इस प्रतिभाशाली एथलीट ने शॉटगन स्कीट शूटिंग स्पर्धा में अपने अचूक निशानों और जबर्दस्त मानसिक संयम के दम पर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। प्रतियोगिता के दौरान उनका यह प्रदर्शन न केवल पोडियम पर शीर्ष स्थान दिलाने वाला रहा, बल्कि इसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके सफर की नई इबारत भी लिख दी।\n\nगोल्ड मेडल के साथ विश्व कप टीम में पक्का किया स्थान\nराष्ट्रीय चयन ट्रायल में शीर्ष स्थान हासिल करने के साथ ही कामना उदावत ने अंतरराष्ट्रीय शूटिंग खेल परिसंघ (ISSF) शॉटगन स्कीट विश्व कप के लिए भारतीय राष्ट्रीय टीम में जगह बना ली। खेल करियर के लिहाज से यह पड़ाव किसी भी निशानेबाज के लिए बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि राष्ट्रीय ट्रायल में जीत हासिल करना केवल एक घरेलू तमगा नहीं, बल्कि वैश्विक मंच का आधिकारिक प्रवेश पत्र बन गया।\n\nइस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता की मेजबानी इटली के पोर्पोटो शहर को सौंपी गई, जहाँ 11 से 20 सितंबर 2026 तक मुकाबले निर्धारित रहे। विश्व स्तरीय मंच पर भारतीय दल का प्रतिनिधित्व करते हुए कामना दुनिया भर के दिग्गज और अनुभवी शूटरों के सामने अपनी मजबूत चुनौती पेश करने के इरादे से मैदान में उतरीं।\n\nमाकड़वाली से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक का सफर\nपाली जिले की रायपुर तहसील स्थित माकड़वाली जैसे ग्रामीण अंचल से निकलकर राष्ट्रीय पटल पर छा जाना और फिर वैश्विक टीम तक पहुँचना एक असाधारण यात्रा है। सज्जन सिंह उदावत की बेटी कामना ने यह मुकाम रातों-रात हासिल नहीं किया, बल्कि इसके पीछे उनकी निरंतरता, कठिन अभ्यास और बेहतरीन तकनीक का बड़ा योगदान रहा। उनकी यह उपलब्धि साबित करती है कि खेल में आगे बढ़ने के लिए साधन या बड़े शहर का होना ही जरूरी नहीं, बल्कि अटूट लगन और मेहनत से भी शीर्ष पर पहुँचा जा सकता है।\n\nगृह क्षेत्र में जश्न और भविष्य की उम्मीदें\nकामना की इस स्वर्णिम कामयाबी की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव माकड़वाली और समूचे रायपुर क्षेत्र में पहुँची, हर तरफ उल्लास का माहौल बन गया। स्थानीय खेल प्रेमियों, ग्रामीणों और परिजनों ने एक-दूसरे का मुंह मीठा कराकर इस ऐतिहासिक पल का जश्न मनाया। पूरे पाली जिले के लिए यह अत्यंत गर्व का क्षण साबित हुआ, जहाँ हर कोई अब यही उम्मीद कर रहा है कि वे अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में भी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन जारी रखेंगी और देश, राजस्थान एवं अपने गांव का नाम रोशन करेंगी।\n\nइसका आप पर असर\nइस उपलब्धि से राजस्थान और देश के ग्रामीण इलाकों के उभरते खिलाड़ियों के लिए नए अवसर और प्रेरणा का मार्ग प्रशस्त होता है।\n\n• भारत में: राष्ट्रीय शूटिंग दल को शॉटगन स्कीट स्पर्धा में एक मजबूत और निरंतर प्रदर्शन करने वाली युवा निशानेबाज मिल गई है। इससे अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भारत के पदक जीतने की संभावनाओं को मजबूती मिलती है।\n• पाली और राजस्थान में: ग्रामीण अंचल से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चयन होने से स्थानीय खेल प्रतिभाओं का हौसला बढ़ेगा। इससे जिले में बुनियादी खेल ढाँचे और शूटिंग प्रशिक्षण सुविधाओं की माँग तथा विकास को गति मिल सकती है।\n• युवा एथलीटों के लिए: यह साबित करता है कि सीमित संसाधनों वाले गांव से भी कठिन परिश्रम के जरिए राष्ट्रीय टीम में जगह बनाई जा सकती है। महत्वाकांक्षी खिलाड़ी इसे अपनी खेल यात्रा के लिए एक बड़े उदाहरण के रूप में देख सकते हैं।\n• प्रशंसकों और स्थानीय समुदाय के लिए: स्थानीय क्षेत्र में खेलों के प्रति जागरूकता और समर्थन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। परिवार और खेल संगठन अब युवाओं को शूटिंग जैसे ओलंपिक खेलों में भाग लेने के लिए अधिक प्रोत्साहित करेंगे।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह चयन और स्वर्ण पदक राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित कड़े टीम ट्रायल में निरंतर तकनीकी श्रेष्ठता का सीधा परिणाम है।\n\n• सीधा कारण: नई दिल्ली की डॉ. करणी सिंह शूटिंग रेंज में आयोजित चौथे इंडियन टीम ट्रायल की शॉटगन स्कीट स्पर्धा में कामना उदावत ने सर्वोच्च स्कोर बनाते हुए स्वर्ण पदक जीता। राष्ट्रीय चयन प्रणाली में शीर्ष स्थान प्राप्त करने वाले एथलीट को सीधे भारतीय टीम में स्थान दिया जाता है।\n• तकनीकी तैयारी और निरंतरता: कामना की यह सफलता रातों-रात नहीं आई, बल्कि गहन अभ्यास, उत्कृष्ट खेल भावना और दबाव के क्षणों में संयम बनाए रखने की उनकी क्षमता के कारण संभव हुई। कठिन परिस्थितियों में उनके सटीक निशानों ने उन्हें बढ़त दिलाई।\n• चयन प्रक्रिया का प्रारूप: भारतीय शूटिंग निकाय अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं जैसे विश्व कप के लिए निष्पक्ष प्रदर्शन के आधार पर ट्रायल आयोजित करता है। इन ट्रायल में शीर्ष वरीयता प्राप्त निशानेबाजों को ही अंतरराष्ट्रीय टीम का आधिकारिक प्रवेश पत्र मिलता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कामना उदावत ने किस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता?\nउन्होंने नई दिल्ली के डॉ. करणी सिंह शूटिंग रेंज में आयोजित चौथे इंडियन टीम ट्रायल की शॉटगन स्कीट स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता।\n\n2. कामना उदावत किस जिले और गांव की रहने वाली हैं?\nकामना राजस्थान के पाली जिले के अंतर्गत रायपुर तहसील के माकड़वाली गांव की निवासी हैं।\n\n3. उनके पिता का नाम क्या है?\nउनके पिता का नाम सज्जन सिंह उदावत है।\n\n4. स्वर्ण पदक जीतने के बाद उनका चयन किस टूर्नामेंट के लिए हुआ?\nउनका चयन इटली के पोर्पोटो में 11 से 20 सितंबर 2026 तक आयोजित होने वाले आईएसएसएफ शॉटगन स्कीट विश्व कप के लिए भारतीय टीम में हुआ।\n\nप्रेरणा और सबक\nएक सुदूर गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय शूटिंग मंच तक का सफर युवाओं के लिए कई मूल्यवान सबक पेश करता है।\n\n• संसाधनों से बड़ा संकल्प: माकड़वाली जैसे छोटे ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर चमकना दिखाता है कि प्रतिभा किसी महानगर की मोहताज नहीं होती। सच्ची लगन और दिन-रात की मेहनत बड़े से बड़े अभाव को हरा सकती है।\n• दबाव में धैर्य का महत्व: शूटिंग जैसे मानसिक खेल में केवल निशाना लगाना नहीं, बल्कि तनाव के बीच संयम बनाए रखना जीत की असली कुंजी होता है। निरंतर अभ्यास से ही ऐसा मानसिक अनुशासन विकसित किया जा सकता है।\n• सतत प्रयास से सफलता: बड़ी उपलब्धियां अचानक नहीं मिलतीं, बल्कि वे नियमित अभ्यास और निरंतर सुधार का परिणाम होती हैं। असफलता या कठिनाइयों के बावजूद प्रक्रिया पर विश्वास बनाए रखना जरूरी है।",
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  "category": "खेल",
  "publishedAt": "2026-09-23",
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    "कामना उदावत",
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