राजस्थान में कुश्ती को बढ़ावा देने की पहल, 600 पहलवानों को बांटे गए 1100 किलो देसी घी के पैकेट राजस्थान राज्य कुश्ती संघ ने कोटा में चल रहे दंगल के दौरान 600 से अधिक पहलवानों को करीब 1100 किलो शुद्ध देसी घी बांटने की अनूठी पहल की है, ताकि खिलाड़ियों को बेहतर पोषण मिल सके और राज्य को कुश्ती का गढ़ बनाया जा सके। प्राचीन काल में चार्वाक दार्शनिक ने सुखद जीवन के लिए कर्ज लेकर भी घी पीने की बात कही थी, लेकिन अब राजस्थान के पहलवानों को अपनी खुराक के लिए कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। राजस्थान राज्य कुश्ती संघ की नई योजना के तहत पहलवानों को रियायती और पोष्टिक संसाधनों के साथ शुद्ध घी उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे बिना किसी आर्थिक चिंता के अपने अभ्यास पर पूरा ध्यान केंद्रित कर सकें। कोटा के दंगल में अनूठी पहल इस योजना की शुरुआत कोटा के 133वें राष्ट्रीय दशहरा मेले में आयोजित चंबल राजस्थान केसरी कुश्ती दंगल के दौरान देखने को मिली। प्रदेशभर से आए 600 से ज्यादा पहलवानों के बीच करीब 1100 किलो गाय का शुद्ध देसी घी वितरित किया गया। इस पूरी मुहिम का खर्च राजस्थान राज्य कुश्ती संघ और सरस डेयरी मिलकर उठा रहे हैं, ताकि खिलाड़ियों की डाइट मजबूत हो सके। पहलवानों को मिल रही विशेष सुविधाएं संघ का साफ उद्देश्य हरियाणा की तर्ज पर राजस्थान को भी कुश्ती का बड़ा केंद्र बनाना है। राजस्थान राज्य कुश्ती संघ के अध्यक्ष राजीव दत्ता का कहना है कि खेलों में युवाओं की रुचि बढ़ाने के लिए आकर्षक पुरस्कार राशि और उच्च स्तर की सुविधाएं बेहद जरूरी हैं। इसी कड़ी में पहलवानों को घी के साथ-साथ जूते, खेल ड्रेस, पानी की बोतलें और अन्य आवश्यक खेल सामग्री भी मुफ्त मुहैया कराई जा रही है। हवाई सफर और यात्रा की सुविधा दूरदराज के मुकाबलों में हिस्सा लेने जाने वाले खिलाड़ियों की फिटनेस और आराम का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए पहलवानों को हवाई सफर की सुविधा दी जा रही है, ताकि लंबी यात्रा की थकान खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर असर न डाले और वे तरोताजा होकर मैट या अखाड़े में उतर सकें। खिलाड़ियों की प्रतिक्रिया और पोषण का महत्व भीलवाड़ा से आए पहलवान आरु चौधरी ने बताया कि अखाड़े के पसीने के साथ शरीर को मजबूत बनाए रखने के लिए घी बेहद आवश्यक खुराक है। वहीं महिला पहलवान आरती का कहना है कि कुश्ती पूरी तरह ताकत और स्ट्रेंथ का खेल है, जिसमें बेहतर डाइट ही प्रतिद्वंद्वी को कड़ी चुनौती देने की क्षमता देती है। नशे से दूर रहने का संदेश और भविष्य की तैयारी इस दंगल के जरिए किक द ड्रग्स, पिक द स्पोर्ट्स की थीम पर युवाओं को नशे जैसी बुरी आदतों से दूर रहने और खेल से जुड़ने का कड़ा संदेश दिया जा रहा है। संघ की योजना उन खिलाड़ियों को विशेष सहायता देने की है जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए मेडल जीतकर लाएंगे। इसका आप पर असर यह पहल राजस्थान के स्थानीय पहलवानों के खान-पान, पोषण स्तर और खेल सुविधाओं में सीधे सुधार करेगी। • भारत में: देशभर के पारंपरिक अखाड़ों और कुश्ती संघों को खिलाड़ियों के पोषण और आधुनिक सुविधाओं के लिए ऐसी प्रेरणादायक योजनाएं शुरू करने का प्रोत्साहन मिलेगा। • कोटा में: स्थानीय और आसपास के जिलों से आए 600 से अधिक पहलवानों को मुफ्त देसी घी और खेल सामग्री मिलने से उनकी आर्थिक चिंताएं कम होंगी और वे बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे। ऐसा क्यों हुआ कुश्ती जैसे शारीरिक रूप से बेहद कठिन खेल में सफलता हासिल करने के लिए पारंपरिक रूप से उच्च कैलोरी और संतुलित आहार की आवश्यकता होती है। राजस्थान राज्य कुश्ती संघ ने इस बात को पहचाना कि कई प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ी आर्थिक तंगी के कारण उच्च श्रेणी का पोषण और सही खेल उपकरण नहीं जुटा पाते हैं। • पोषक तत्वों की कमी: कड़े अभ्यासों और कुश्ती के मुकाबलों में स्टैमिना बनाए रखने के लिए शुद्ध देसी घी को पारंपरिक रूप से सबसे प्रभावी ऊर्जा स्रोत माना जाता है। • पड़ोसी राज्यों से प्रेरणा: हरियाणा जैसे राज्यों ने कुश्ती में वैश्विक स्तर पर जो रुतबा हासिल किया है, उसके पीछे मजबूत बुनियादी ढांचा और खिलाड़ियों को मिलने वाली विशेष खुराक मुख्य कारण रही है। • आर्थिक सहयोग की जरूरत: ग्रामीण और मध्यमवर्गीय परिवारों से आने वाले खिलाड़ियों के लिए जूते, ड्रेस और दूरदराज के सफर का खर्च उठाना मुश्किल होता है, जिसे संघ ने अब पूरा करने का बीड़ा उठाया है। सवाल-जवाब 1. राजस्थान राज्य कुश्ती संघ ने कितने पहलवानों को घी बांटा है? संघ ने प्रदेशभर से आए 600 से ज्यादा पहलवानों को देसी घी बांटा है। 2. कुल कितने किलो घी का वितरण किया गया है? इस पहल के तहत करीब 1100 किलो शुद्ध गाय का देसी घी वितरित किया गया है। 3. यह घी वितरण कार्यक्रम किस आयोजन के दौरान हुआ? यह कार्यक्रम कोटा के 133वें राष्ट्रीय दशहरा मेले में चल रहे चंबल राजस्थान केसरी कुश्ती दंगल के दौरान हुआ। 4. इस पहल का खर्च कौन उठा रहा है? इस पहल का खर्च राजस्थान राज्य कुश्ती संघ सरस डेयरी के साथ मिलकर उठा रहा है। 5. पहलवानों को घी के अलावा और क्या-क्या सुविधाएं मिल रही हैं? पहलवानों को घी के साथ जूते, खेल ड्रेस, पानी की बोतलें और प्रतियोगिताओं में आने-जाने के लिए हवाई सफर की सुविधा दी जा रही है। 6. राजस्थान राज्य कुश्ती संघ के अध्यक्ष कौन हैं? राजस्थान राज्य कुश्ती संघ के अध्यक्ष राजीव दत्ता हैं। प्रेरणा और सबक स्थानीय पहलवानों और खेल प्रेमियों के लिए इस पूरी योजना से महत्वपूर्ण सीख मिलती है कि कड़े अनुशासन और सही मार्गदर्शन से किसी भी खेल में ऊंचाई हासिल की जा सकती है। • उचित पोषण को प्राथमिकता दें: शारीरिक क्षमता और स्टैमिना बढ़ाने के लिए संतुलित एवं पारंपरिक आहार का होना सबसे पहली शर्त है। • बुरी आदतों से दूर रहें: किक द ड्रग्स जैसी मुहिम यह सिखाती है कि नशे से दूर रहकर ही खेल और जीवन में बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। • संसाधनों की कमी को बाधा न बनने दें: यदि प्रतिभा और सही लगन हो, तो संघ और संस्थाएं मदद के लिए आगे आती हैं, जरूरत सिर्फ लगातार मेहनत करने की है। https://trendkia.com/sports/rajasthan-men-wrestling-ko-barhava-dene-ki-pahala-600-pahalavanon-ko-bante-gae-1100-kilo-desi-ghee-ke-paiketa-57304 TrendKia — Har trend, sabse pehle.