# राजस्थान स्टेट अंडर-23 एथलेटिक्स में सुशीला प्रजापत ने 10,000 मीटर रेस में हासिल किया स्वर्ण पदक, करियर की 8वीं स्वर्णिम सफलता

> राजस्थान स्टेट अंडर-23 एथलेटिक्स में सुशीला प्रजापत ने 10,000 मीटर में स्वर्ण और 5,000 मीटर में रजत पदक जीता है। डीडवाना-कुचामन की रहने वाली सुशीला का यह 8वां स्वर्ण पदक है और अब वह राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पदकों पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।

**Type:** article · **Category:** खेल · **Published:** 2026-08-29 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/sports/rajasthan-steta-andara-23-ethaletiksa-men-sushila-prajapat-ne-10-000-mitara-resa-men-hasila-kiya-svarna-padaka-kariyara-ki-8vin-sv-23960 · **Language:** Hindi
**Tags:** सुशीला प्रजापत, राजस्थान एथलेटिक्स, 10000 मीटर दौड़, डीडवाना कुचामन, बीएसएफ एथलीट, गोल्ड मेडल

राजस्थान की होनहार लंबी दूरी की धावक सुशीला प्रजापत ने एक बार फिर अपनी उत्कृष्ट खेल प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्णिम सफलता प्राप्त की है। राजस्थान स्टेट अंडर-23 एथलेटिक्स चैंपियनशिप के दौरान सुशीला ने 10,000 मीटर दौड़ स्पर्धा में शानदार गति का प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके अतिरिक्त, 5,000 मीटर की दौड़ स्पर्धा में भी उन्होंने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हुए रजत पदक जीता। 10,000 मीटर में हासिल किया गया यह स्वर्ण पदक उनके खेल करियर की 8वीं स्वर्णिम उपलब्धि बन गया है। सीमित आर्थिक साधनों वाले साधारण परिवार से निकलकर एथलेटिक्स की दुनिया में दर्जनों पदक हासिल करने वाला उनका यह सफर कड़ी मेहनत और संघर्ष की एक प्रेरक मिसाल प्रस्तुत करता है।

## ग्रामीण पगडंडियों से शुरू हुआ खेल का सफर
डीडवाना-कुचामन जिले के अंतर्गत आने वाले हीरावती गांव की निवासी सुशीला प्रजापत की सफलता के पीछे एक लंबा और कठिन संघर्ष छिपा हुआ है। उनके पिता मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं, जिसके कारण उनके घर की आर्थिक स्थिति हमेशा चुनौतीपूर्ण बनी रही। परिवार में वित्तीय तंगी के बावजूद सुशीला ने कभी अपनी खेल आकांक्षाओं को कमजोर नहीं पड़ने दिया। शुरुआत में गांव में अपनी सहेलियों के साथ सामान्य रूप से दौड़ना उनका एक सहज शौक था, लेकिन धीरे-धीरे यही अभ्यास उनके जीवन का मुख्य जुनून बन गया। परिस्थितियों से समझौता न करते हुए उन्होंने दौड़ने की अपनी इस प्रतिभा को निखारा और प्रतिस्पर्धी मैदान में कदम रखने की तैयारी की।

## 2022 से अब तक पदकों का स्वर्णिम रिकॉर्ड
सुशीला प्रजापत के प्रतिस्पर्धी खेल करियर की औपचारिक शुरुआत वर्ष 2022 में हुई, जब उन्होंने चूरू में आयोजित जूनियर स्टेट लेवल एथलेटिक्स प्रतियोगिता में भाग लिया। अपने पहले ही बड़े राज्य स्तरीय आयोजन में उन्होंने 3 किलोमीटर दौड़ स्पर्धा में स्वर्ण पदक और 1500 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर अपनी क्षमता साबित की। इसके बाद उन्होंने विभिन्न क्रॉस कंट्री प्रतियोगिताओं तथा अंडर-23 वर्ग की स्पर्धाओं में लगातार हिस्सा लिया और अपनी अलग पहचान बनाई। वर्ष 2023 के दौरान अजमेर और बीकानेर में आयोजित एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में उन्होंने क्रमशः रजत और कांस्य पदक हासिल किए। उसी वर्ष झुंझुनूं में संपन्न हुई अंडर-23 प्रतियोगिता में सुशीला ने 10 किलोमीटर और 5 किलोमीटर दोनों दौड़ स्पर्धाओं में दोहरा स्वर्ण पदक जीतकर अपनी श्रेष्ठता साबित की। वर्तमान में उनके करियर के कुल पदकों की संख्या 14 तक पहुँच चुकी है, जिसमें 8 स्वर्ण पदक, 4 रजत पदक और 2 कांस्य पदक शामिल हैं।

## प्रतिदिन 15 से 18 किमी का कड़ा प्रशिक्षण
लंबी दूरी की धावक के रूप में अपनी बढ़त बनाए रखने के लिए सुशीला नियमित रूप से कड़ी मेहनत और अनुशासित दिनचर्या का पालन करती हैं। वह प्रतिदिन अपनी ट्रेनिंग के दौरान लगभग 15 से 18 किलोमीटर तक दौड़ की प्रैक्टिस करती हैं। सुशीला का स्पष्ट मानना है कि लंबी दूरी की दौड़ों में केवल प्राकृतिक प्रतिभा होना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि इसके साथ निरंतर अभ्यास, अनुशासन और मानसिक दृढ़ता की आवश्यकता होती है। इसी सोच को ध्यान में रखते हुए वह हर सुबह तड़के अपनी ट्रेनिंग पर निकल जाती हैं और विभिन्न प्रतियोगिताओं के बीच मिलने वाले अंतराल में भी अपने अभ्यास के क्रम को कभी टूटने नहीं देतीं।

## बीएसएफ की नौकरी के साथ अंतरराष्ट्रीय मंच का सपना
लगभग छह महीने पहले सुशीला प्रजापत का चयन सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में हुआ है। वर्तमान में वह अपनी सरकारी नौकरी की प्रशासनिक एवं सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों को निभाते हुए अपनी खेल तैयारियों में संतुलन बनाए हुए हैं। हालांकि सुशीला पूर्व में भी राष्ट्रीय स्तर की कई एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी हैं, लेकिन राष्ट्रीय मंच पर अभी तक उन्हें पदक प्राप्त नहीं हो सका है। यही कारण है कि उनका अगला प्रमुख लक्ष्य राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पहला पदक जीतना और इसके बाद अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में जगह बनाकर देश का प्रतिनिधित्व करना है।

## इसका आप पर असर
सुशीला प्रजापत की यह उपलब्धि भारत के ग्रामीण क्षेत्रों की उभरती खेल प्रतिभाओं और अनुशासित प्रशिक्षण के महत्व को रेखांकित करती है।

- **भारत में:** यह सफलता देश के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले युवा एथलीटों के लिए एक बड़ा प्रेरणास्रोत है। जमीनी स्तर पर सही मार्गदर्शन और कड़ी मेहनत से राष्ट्रीय खेल परिदृश्य में नए प्रतिभावान खिलाड़ियों को आगे आने का प्रोत्साहन मिलता है।
- **राजस्थान में:** डीडवाना-कुचामन और आसपास के जिलों की युवा महिला धावकों के लिए खेल सुविधाओं और स्थानीय कोचिंग को प्रोत्साहन मिलेगा। राज्य सरकार और खेल अकादमियों द्वारा ग्रामीण प्रतिभाओं को बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाए जाने की संभावना है।
- **युवा एथलीटों के लिए:** सुशीला की नियमित 15-18 किमी दैनिक ट्रेनिंग प्रणाली यह स्पष्ट करती है कि लंबी दूरी की दौड़ में निरंतरता ही सफलता की कुंजी है। नवोदित खिलाड़ियों को अपनी दिनचर्या में अनुशासन और कड़े अभ्यास को शामिल करने की सीख मिलती है।
- **सुरक्षा बलों में खेल कोटा:** बीएसएफ में नियुक्ति के साथ खेल करियर जारी रखना यह दर्शाता है कि सरकारी नौकरी के साथ भी उच्च स्तरीय एथलेटिक्स में सफलता पाई जा सकती है। इससे सेना और अर्धसैनिक बलों में खेल कोटे के जरिए करियर बनाने की चाह रखने वाले युवाओं का भरोसा मजबूत होता है।

## सवाल-जवाब

### 1. राजस्थान स्टेट अंडर-23 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में सुशीला प्रजापत ने कौन से पदक जीते?
सुशीला प्रजापत ने 10,000 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक और 5,000 मीटर दौड़ में रजत पदक हासिल किया।

### 2. सुशीला प्रजापत के खेल करियर में अब तक कुल कितने पदक हैं?
उनके नाम कुल 14 पदक दर्ज हैं, जिनमें 8 स्वर्ण, 4 रजत और 2 कांस्य पदक शामिल हैं।

### 3. सुशीला प्रजापत किस जिले और गांव की रहने वाली हैं?
वह राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के हीरावती गांव की निवासी हैं।

### 4. सुशीला प्रजापत का दैनिक अभ्यास रूटीन क्या है?
वह सहनशक्ति और गति बनाए रखने के लिए रोजाना लगभग 15 से 18 किलोमीटर दौड़ने की प्रैक्टिस करती हैं।

### 5. सुशीला प्रजापत वर्तमान में किस संगठन में कार्यरत हैं?
उन्होंने लगभग छह महीने पहले सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ज्वाइन किया है और अपनी नौकरी के साथ अभ्यास जारी रखा है।

### 6. सुशीला प्रजापत के आगे के खेल लक्ष्य क्या हैं?
उनका अगला मुख्य लक्ष्य राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक जीतना और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करना है।

## प्रेरणा और सबक
मजदूर परिवार की आर्थिक चुनौतियों से निकलकर राज्य स्तर पर 8 स्वर्ण पदक जीतने वाली सुशीला प्रजापत का सफर हर युवा के लिए सीख और प्रेरणा से भरा है।

- **संसाधनों से बड़ा संकल्प:** आर्थिक परिस्थितियाँ कठिन होने के बावजूद सुशीला ने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं भटकने दिया। यह साबित करता है कि सफलता के लिए सुविधाओं से अधिक मजबूत इच्छाशक्ति मायने रखती है।
- **निरंतरता ही सफलता का मार्ग है:** प्रतिदिन 15-18 किलोमीटर दौड़ने का उनका रूटीन सिखाता है कि किसी भी क्षेत्र में शीर्ष पर पहुँचने के लिए रोज की कड़ी मेहनत और अनुशासन जरूरी है।
- **छोटी शुरुआत से बड़ा लक्ष्य:** गांव में सहेलियों के साथ साधारण दौड़ से शुरुआत कर राज्य स्तर पर दबदबा बनाना यह दर्शाता है कि हर बड़ी उपलब्धि की नींव एक छोटी और ईमानदार शुरुआत पर टिकी होती है।
- **दोहरी जिम्मेदारियों का कुशलता से प्रबंधन:** बीएसएफ की नौकरी और राष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग के बीच संतुलन बनाकर उन्होंने दिखाया है कि समर्पण होने पर पेशेवर कर्तव्यों के साथ सपनों को भी जिया जा सकता है।

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