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  "type": "article",
  "title": "श्रीलंकाई एथलीट रमेश पथिरागे थरंगा ने राष्ट्रमंडल खेलों में 89.75 मीटर थ्रो से जीता स्वर्ण, नीरज चोपड़ा को मिला रजत",
  "summary": "क्रिकेट में 134 किमी/घंटा की गति से गेंदबाजी करने वाले श्रीलंका के 23 वर्षीय रमेश पथिरागे थरंगा ने कॉमनवेल्थ गेम्स की भाला फेंक स्पर्धा में 89.75 मीटर के विशाल थ्रो के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया, जबकि भारत के नीरज चोपड़ा दूसरे स्थान पर रहे।",
  "content": "कॉमनवेल्थ गेम्स की भाला फेंक स्पर्धा में एक नया इतिहास रचा गया है, जब श्रीलंका के 23 वर्षीय एथलीट रमेश पथिरागे थरंगा ने अपनी क्षमता का लोहा मनवाते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा जमा लिया। किसी दौर में क्रिकेट पिच पर अपनी 134 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज गेंदों से सनसनी फैलाने वाले इस खिलाड़ी ने अब एथलेटिक्स के विश्व मंच पर सर्वोच्च स्थान हासिल किया है। इस कड़े मुकाबले में उन्होंने दुनिया भर के दिग्गज थ्रोअर्स को पीछे छोड़ते हुए अपनी राष्ट्रीय खेल यात्रा में स्वर्णिम अध्याय जोड़ा है।\n\nकॉमनवेल्थ गेम्स में हवादार परिस्थितियों के बीच ऐतिहासिक प्रदर्शन\nप्रतियोगिता का फाइनल मुकाबला बेहद कठिन और हवादार परिस्थितियों में आयोजित हुआ, जहां कई अनुभवी खिलाड़ियों को संतुलन बनाने में संघर्ष करना पड़ा। इन प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण रमेश पथिरागे थरंगा अपने पूरे प्रयासों में से केवल एक ही लीगल थ्रो दर्ज करा सके। हालांकि, उनका वही एकमात्र थ्रो 89.75 मीटर की दूरी तय कर गया, जो प्रतियोगिता का सबसे बड़ा मॉन्स्टर थ्रो साबित हुआ और उन्हें स्वर्ण पदक दिलाने के लिए काफी था।\n\nइस स्पर्धा में विश्व स्तर के कई शीर्ष खिलाड़ी मैदान में मौजूद थे। भारत के दोहरे ओलंपिक पदक विजेता और पूर्व विश्व चैंपियन नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर का थ्रो करके रजत पदक अपने नाम किया। वहीं, भारत के ही उभरते हुए खिलाड़ी यशवीर सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 85.41 मीटर के अपने करियर के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ कांस्य पदक जीता। इस मुकाबले में मौजूदा ओलंपिक चैंपियन पाकिस्तान के अरशद नदीम, मौजूदा विश्व चैंपियन त्रिनिदाद और टोबैगो के केशॉर्न वालकॉट तथा पूर्व विश्व चैंपियन ग्रेनेडा के एंडरसन पीटर्स जैसी प्रमुख हस्तियां भी प्रतिस्पर्धा कर रही थीं।\n\nश्रीलंका के लिए 76 साल पुराना एथलेटिक्स का सूखा खत्म\nरमेश पथिरागे थरंगा की यह विजय श्रीलंका के संपूर्ण खेल इतिहास के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। श्रीलंका ने पूरे 20 साल के लंबे अंतराल के बाद राष्ट्रमंडल खेलों में कोई स्वर्ण पदक जीता है, क्योंकि इससे पहले देश को साल 2006 में आखिरी बार यह सफलता मिली थी। राष्ट्रमंडल खेलों के पूरे इतिहास में यह श्रीलंका का कुल 5वां स्वर्ण पदक है। इसके अलावा, एथलेटिक्स स्पर्धा की बात करें तो साल 1950 के बाद यानी 76 सालों में यह पहला मौका है जब श्रीलंका के किसी एथलीट ने कॉमनवेल्थ गेम्स के ट्रैक एंड फील्ड में स्वर्ण पदक हासिल किया है।\n\nक्रिकेट की 134 किमी/घंटा गेंदबाजी से जैवलिन चैंपियन बनने की कहानी\nरमेश के करियर का शुरुआती सफर एथलेटिक्स ट्रैक के बजाय क्रिकेट पिच से शुरू हुआ था। अपनी किशोरावस्था के दौरान वे एक होनहार तेज गेंदबाज थे, जो नियमित रूप से 130 किमी/घंटा की रफ्तार से गेंदबाजी करते थे। यू-18 श्रेणी की प्रतियोगिताओं में उन्होंने 134 किमी/घंटा की स्पीड दर्ज की थी। उस समय वे स्पीड चार्ट में केवल ईशान मलिंगा से पीछे थे, जो बाद में श्रीलंका की राष्ट्रीय टीम और आईपीएल में सनराइजर्स हैदराबाद के लिए खेलने लगे।\n\nउनकी खेल यात्रा में सबसे बड़ा बदलाव तब आया जब एथलेटिक्स कोच टोनी प्रसन्ना ने उनकी शारीरिक ताकत और क्षमता को पहचाना। कोच प्रसन्ना ही रमेश को भाला फेंक की विधा में लेकर आए। रमेश का कहना है कि उनके कोच ने उन्हें बुनियादी तकनीकों को सही तरीके से लागू करने की सीख दी। वे टोनी प्रसन्ना को केवल एक खेल कोच नहीं, बल्कि जीवन के अहम सबक सिखाने वाला मार्गदर्शक मानते हैं।\n\nगजब की निरंतरता और रिकॉर्ड तोड़ 90 मीटर का सफर\nश्रीलंका के खेल इतिहास में इससे पहले पूर्व थ्रोअर सुमेधा रणसिंघे ने 85 मीटर का आंकड़ा पार किया था, लेकिन बाद के समय में उनका प्रदर्शन निरंतर नहीं रह सका। इसके विपरीत, रमेश पथिरागे थरंगा ने अपने करियर में अद्भुत निरंतरता का प्रदर्शन किया है। 2025 के पूरे सीजन के दौरान उन्होंने 13 से अधिक अवसरों पर 82 मीटर से अधिक दूरी के थ्रो आसानी से दर्ज किए।\n\nसाल 2025 में अपने पहले विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा लेते हुए रमेश सातवें स्थान पर रहे थे। इसके बाद उन्होंने अपनी सीमाओं को और आगे बढ़ाया। हाल ही में आयोजित रोम डायमंड लीग में उन्होंने 92.62 मीटर का थ्रो फेंककर नया मीट रिकॉर्ड, नेशनल रिकॉर्ड और वर्ल्ड लीड अपने नाम किया था। इसके साथ ही वे 2026 सीजन में 90 मीटर की सीमा को पार करने वाले दुनिया के पहले जैवलिन थ्रोअर बने।\n\nनीरज चोपड़ा ने की प्रतिस्पर्धी की दिल खोलकर तारीफ\nरमेश की इस असाधारण प्रतिभा और हालिया सफलताओं की सराहना भारत के स्टार एथलीट नीरज चोपड़ा ने भी की है। क्वालिफिकेशन राउंड के समापन के बाद नीरज चोपड़ा ने रमेश के खेल की तारीफ करते हुए कहा, \"वह एक बहुत अच्छा इंसान और मेरा दोस्त है, जिसने इस पूरे साल असाधारण थ्रो दर्ज किए हैं।\" नीरज ने इस बात पर खुशी जताई कि रमेश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर श्रीलंका के लिए इतना बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: नीरज चोपड़ा का रजत और यशवीर सिंह का कांस्य पदक भारत की भाला फेंक में लगातार बढ़ती वैश्विक मजबूती को दर्शाता है।\n\nश्रीलंका में: एथलेटिक्स में 76 साल बाद मिला यह पहला स्वर्ण पदक देश के युवाओं को एथलेटिक्स और एमेच्योर खेलों को करियर के रूप में चुनने के लिए प्रेरित करेगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कॉमनवेल्थ गेम्स में भाला फेंक का स्वर्ण पदक किसने जीता?\nश्रीलंका के 23 वर्षीय एथलीट रमेश पथिरागे थरंगा ने 89.75 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता।\n\n2. कॉमनवेल्थ गेम्स की भाला फेंक स्पर्धा में नीरज चोपड़ा का प्रदर्शन कैसा रहा?\nभारत के नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर का थ्रो करके इस स्पर्धा का रजत पदक हासिल किया।\n\n3. कांस्य पदक विजेता यशवीर सिंह ने कितना दूरी का थ्रो फेंका?\nभारत के उभरते खिलाड़ी यशवीर सिंह ने 85.41 मीटर के अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ कांस्य पदक जीता।\n\n4. एथलेटिक्स में श्रीलंका का राष्ट्रमंडल खेलों का पिछला स्वर्ण पदक कब आया था?\nश्रीलंका ने इससे पहले 1950 में राष्ट्रमंडल खेलों की एथलेटिक्स स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था, जिसके बाद यह 76 साल बाद पहला एथलेटिक्स गोल्ड है।\n\n5. एथलेटिक्स में आने से पहले रमेश पथिरागे थरंगा किस खेल में सक्रिय थे?\nरमेश अपने शुरुआती दिनों में क्रिकेट में एक तेज गेंदबाज थे और यू-18 स्तर पर 134 किमी/घंटा की गति से गेंदबाजी करते थे।\n\n6. रमेश का अब तक का सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत थ्रो कितना है?\nरमेश का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 92.62 मीटर है, जो उन्होंने रोम डायमंड लीग में राष्ट्रीय रिकॉर्ड और मीट रिकॉर्ड के साथ दर्ज किया था।\n\nप्रेरणा और सबक\nसफलता की प्रेरणा और सबक:\n\n• प्रतिभा का सही दिशा में मोड़: क्रिकेट की तेज गेंदबाजी से जैवलिन थ्रो की तरफ कदम बढ़ाना यह सिखाता है कि अपनी मुख्य शारीरिक क्षमता का सही खेल में इस्तेमाल सफलता दिला सकता है।\n• गुरु और मेंटॉर पर विश्वास: कोच की सलाह मानकर बुनियादी तकनीकों (बेसिक नियम) पर ध्यान देना ही सबसे बड़े मुकाम तक पहुंचाता है।\n• निरंतरता ही असली ताकत: एक सीजन में 13 से अधिक बार 82 मीटर से अधिक थ्रो करना दर्शाता है कि एक दिन की सफलता के बजाय लगातार अच्छा प्रदर्शन करना जरूरी है।\n• मुश्किल परिस्थितियों में संयम: हवादार मौसम और केवल एक ही लीगल थ्रो मिलने के बावजूद अपना सर्वश्रेष्ठ देना मानसिक मजबूती का प्रमाण है।",
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  "category": "खेल",
  "publishedAt": "2026-08-01",
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