सीकर के पीयूष चौधरी ने रचा नया इतिहास, बास्केटबॉल में संभालेंगे भारतीय अंडर-18 टीम की कमान सीकर के पिपराली गांव के 17 वर्षीय बास्केटबॉल खिलाड़ी पीयूष चौधरी को अहमदाबाद में आयोजित अंडर-18 एशिया कप के लिए भारतीय टीम का कप्तान नियुक्त किया गया है। खेल के मैदान पर सीकर के युवाओं ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। मूल रूप से पिपराली गांव के रहने वाले 17 वर्षीय पीयूष चौधरी बास्केटबॉल की दुनिया में लगातार नए मील के पत्थर स्थापित कर रहे हैं। पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए पीयूष अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश और अपने गृह जिले का नाम रोशन कर रहे हैं। उनकी इसी मेहनत और नेतृत्व क्षमता का परिणाम है कि उन्हें अहमदाबाद में खेले जा रहे अंडर-18 एशिया कप बास्केटबॉल टूर्नामेंट के लिए भारतीय युवा टीम का कप्तान बनाया गया है। यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट 23 अगस्त तक संचालित होगा। पिता के दिखाए मार्ग पर चलकर तय किया सफर पीयूष की इस असाधारण सफलता के पीछे उनके परिवार की खेल पृष्ठभूमि का बहुत बड़ा योगदान है। उनके पिता रणजीत सिंह खुद एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के बास्केटबॉल खिलाड़ी रह चुके हैं, और उनके नक्शेकदम पर चलते हुए पीयूष का भाई भी राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुका है। खेल के प्रति पीयूष के शुरुआती रुझान को देखते हुए उनके पिता ने उन्हें अपने पुराने कोच के पास भेजा। उसी कोच के सख्त मार्गदर्शन में पीयूष ने बास्केटबॉल के गुर सीखे और कड़ा अभ्यास शुरू किया। खेल के प्रति यह लगन जल्द ही उनके लिए एक शौक से बढ़कर जुनूनी करियर में बदल गई। कोलंबो में जीत चुके हैं गोल्ड मेडल अपनी शैक्षणिक यात्रा के तहत पीयूष एसके स्कूल के खेल छात्रावास से सत्र 2025-26 के दौरान पास आउट हुए हैं। कम उम्र में ही निरंतर बेहतरीन प्रदर्शन करने के कारण उन्हें पहले भी कई महत्वपूर्ण नेतृत्व भूमिकाएं सौंपी जा चुकी हैं। कोलंबो में आयोजित साउथ एशियन बास्केटबॉल कप में शानदार प्रदर्शन करने वाली भारतीय टीम की कप्तानी पीयूष ने ही की थी, जहां टीम ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। अब एशिया कप में एक बार फिर से भारतीय टीम का नेतृत्व करना उनके खेल करियर में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जैसा है। सिंगापुर कैंप में भारत का किया प्रतिनिधित्व पीयूष की प्रतिभा का दायरा सिर्फ राष्ट्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं है। वर्ष 2025 में सिंगापुर में आयोजित बास्केटबॉल विदाउट बॉर्डर्स एशिया-2025 कैंप के लिए उनका चयन हुआ था। यह विशेष कैंप 19 से 22 जून तक आयोजित किया गया था, जिसमें एशिया-प्रशांत क्षेत्र के अंडर-17 वर्ग के 60 बेहतरीन युवा खिलाड़ियों ने शिरकत की थी। भारत की तरफ से इस प्रतिष्ठित कैंप में सीकर के पीयूष चौधरी के साथ कर्नाटक की तारुषि तरुण ने हिस्सा लिया था। इसके अलावा पीयूष यूथ इंडिया कैंप का भी हिस्सा रह चुके हैं और पिछले तीन वर्षों से लगातार राजस्थान का प्रतिनिधित्व करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर खेल रहे हैं। राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदकों की झड़ी अपने अब तक के खेल सफर में पीयूष ने राष्ट्रीय स्तर पर कुल पांच पदक जीते हैं, जिनमें तीन स्वर्ण पदक शामिल हैं। उन्होंने वर्ष 2024 के दौरान आयोजित 38वीं और 39वीं यूथ नेशनल चैंपियनशिप में दो शानदार गोल्ड मेडल हासिल किए। इसके साथ ही, उन्होंने 74वीं जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक, 68वीं स्कूल नेशनल चैंपियनशिप में कांस्य पदक और वर्ष 2025 के 7वें खेलो इंडिया गेम्स में रजत पदक अपने नाम किया। पीयूष का मुख्य उद्देश्य भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए बेहतरीन प्रदर्शन करना है। उनका मानना है कि विदेशी जमीन पर जब देश का राष्ट्रगान बजता है, तो वह क्षण उनके लिए सबसे गर्व और आनंद से भरा होता है। इसका आप पर असर • भारत में: यह नियुक्ति देश के युवा एथलीटों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। • सीकर में: स्थानीय खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा मिलेगा और युवाओं का बास्केटबॉल के प्रति रुझान बढ़ेगा। सवाल-जवाब 1. पीयूष चौधरी कौन हैं? पीयूष चौधरी सीकर के पिपराली गांव के 17 वर्षीय बास्केटबॉल खिलाड़ी हैं जिन्हें अंडर-18 एशिया कप के लिए भारतीय टीम का कप्तान बनाया गया है। 2. अंडर-18 एशिया कप का आयोजन कहां हो रहा है? यह टूर्नामेंट अहमदाबाद में आयोजित किया जा रहा है जो 23 अगस्त तक चलेगा। 3. पीयूष के पिता कौन हैं? पीयूष के पिता रणजीत सिंह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के बास्केटबॉल खिलाड़ी रह चुके हैं। 4. पीयूष ने कौन-कौन से मुख्य पदक जीते हैं? उन्होंने यूथ नेशनल चैंपियनशिप में दो गोल्ड, जूनियर नेशनल में गोल्ड, स्कूल नेशनल में कांस्य और खेलो इंडिया गेम्स में सिल्वर मेडल जीता है। प्रेरणा और सबक • परिवारीय मार्गदर्शन का लाभ उठाएं: अनुभव और विरासत का सही उपयोग करके अपने क्षेत्र में आगे बढ़ें। • कम उम्र से अनुशासन रखें: नियमित अभ्यास और कोच के मार्गदर्शन से किसी भी खेल में महारत हासिल की जा सकती है। • बड़े मंचों के लिए खुद को तैयार करें: राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कैंपों में हिस्सा लेकर अपनी क्षमताओं को परखें। • कठिन परिश्रम को जुनून बनाएं: शौक को अपने करियर में बदलने के लिए अटूट मेहनत जरूरी है। https://trendkia.com/sports/sikars-piyush-chaudhary-appointed-captain-of-indian-under-18-basketball-team-for-asia-cup-18076 TrendKia — Har trend, sabse pehle.