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  "type": "article",
  "title": "डब्ल्यूडब्ल्यूई रिंग में खौफ का पर्याय रहे द अंडरटेकर को एक मामूली खीरे से क्यों लगता था डर",
  "summary": "रेसलिंग रिंग में बड़े-बड़े धुरंधरों को पस्त करने वाले 6 फीट 10 इंच लंबे द अंडरटेकर असल जिंदगी में खीरे से बुरी तरह घबराते थे, जिसकी वजह उनके बचपन की एक बीमारी और कुकुरबिटोफोबिया था।",
  "content": "पेशेवर कुश्ती के पूरे इतिहास में जब भी रिंग में दहशत, काले साये और खामोश खौफ का जिक्र छिड़ता है, तो रेसलिंग प्रेमियों की जुबान पर सबसे पहला नाम ‘द अंडरटेकर’ का आता है। किसी भी एरीना की बत्तियां अचानक गुल हो जाना और बैकग्राउंड में बजने वाली रहस्यमयी घंटी की गूंज रिंग में खड़े दुनिया के सबसे ताकतवर पहलवानों के भी हौसले पस्त कर देती थी। 6 फीट 10 इंच लंबे विशालकाय कद और करीब 150 किलोग्राम वजनी शरीर वाले इस ‘डेडमैन’ ने दशकों तक कुश्ती के मंच पर एकछत्र राज किया। उनके डरावने अंदाज और रिंग के अंदर बेखौफ तेवर को देखकर किसी को भी यही लगता था कि इस इंसान को मौत या दर्द का कोई अहसास ही नहीं है। लेकिन इस अजेय छवि के पीछे एक बेहद चौंकाने वाला और अजीबोगरीब पहलू छिपा हुआ था, जिसे जानकर कोई भी हैरान रह सकता है कि दुनिया को अपनी घूर से कंपा देने वाला यह शख्स असल में एक साधारण सी हरी सब्जी से खौफ खाता था।\n\nकुकुरबिटोफोबिया और नाश्ते की मेज पर सामने आया रहस्य\nद अंडरटेकर जैसे खूंखार पहलवान का खीरे जैसी आम सब्जी से बुरी तरह डरना किसी मजाक जैसा लग सकता है, लेकिन मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से इस अनूठे डर को कुकुरबिटोफोबिया कहा जाता है। यह रहस्य दुनिया के सामने तब उजागर हुआ जब उनके साथ साये की तरह रहने वाले और रिंग में उनका रहस्यमयी कलश थामने वाले दिवंगत मैनेजर पॉल बियरर ने एक विस्तृत बातचीत में इसका खुलासा किया। पॉल बियरर ने एक टूर के दौरान होटल में घटी अजीब घटना का ब्योरा साझा करते हुए बताया था कि जब वे दोनों सुबह नाश्ते की टेबल पर साथ बैठे थे, तब एक प्लेट में गलती से खीरा आ गया। उस खीरे को खाने या उसका स्वाद जीभ पर महसूस होते ही अंडरटेकर को अचानक उल्टियां होने लगीं और उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ गई। उनके शरीर की प्रतिक्रिया इतनी तीव्र थी कि उसी रात जब डिनर की टेबल पर केवल खीरा कटा हुआ रखा दिखाई दिया, तो उन्हें दोबारा तेज बेचैनी और उल्टी महसूस होने लगी। उस दिन के बाद से अंडरटेकर ने खीरे से हमेशा के लिए किनारा कर लिया और उसे देखते ही अपना रास्ता मोड़ लेते थे।\n\nआठ साल की उम्र में बिगड़ी तबीयत ने मन में बिठाया जीवनभर का खौफ\nइस महाबली पहलवान के मन में एक सब्जी को लेकर इतना गहरा डर रातोंरात पैदा नहीं हुआ था, बल्कि इसकी जड़ें उनके शुरुआती बचपन की एक दर्दनाक घटना से जुड़ी हुई हैं। जब अंडरटेकर महज आठ साल के एक बालक थे, तब उन्होंने एक बार में बहुत अधिक मात्रा में खीरे खा लिए थे। इतनी कम उम्र में जरूरत से ज्यादा खीरा पेट में जाने की वजह से उनका हाजमा बुरी तरह बिगड़ गया और पेट में असहनीय दर्द के साथ उनकी तबीयत अत्यंत गंभीर हो गई थी। उस वक्त के असहनीय शारीरिक कष्ट, लगातार उल्टी और लंबी बीमारी ने आठ साल के बच्चे के कोमल मन पर ऐसा आघात पहुंचाया कि उनका अवचेतन मन खीरे को गंभीर बीमारी का कारण मानने लगा। वह घटना उनके भीतर इस कदर घर कर गई कि उन्होंने बड़े होकर भी कभी खीरे को अपने पास फटकने नहीं दिया और यह अरुचि एक स्थायी फोबिया में तब्दील हो गई।\n\nलॉकर रूम में साथी पहलवानों के प्रैंक और ओवेन हार्ट की शरारतें\nपेशेवर कुश्ती के माहौल में जब भी लॉकर रूम के भीतर किसी सुपरस्टार की कोई अनूठी कमजोरी उजागर होती है, तो साथी खिलाड़ी उसे हल्का मजाक और प्रैंक बनाने से नहीं चूकते। दिवंगत रेसलर ओवेन हार्ट ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि जब बैकस्टेज अन्य पहलवानों को डेडमैन के इस गुप्त डर की भनक लगी, तो कई लोगों ने इसका फायदा उठाने की कोशिश की। कई मौकों पर रिंग के बाहर या बैकस्टेज मुकाबलों की तैयारी के दौरान साथी पहलवान अंडरटेकर के गुस्से से बचने या उन्हें चिढ़ाने के मकसद से खीरा छुपाकर रख लेते थे। ओवेन हार्ट खुद इस तरह के प्रैंक करने में माहिर माने जाते थे और उन्होंने कई बार अंडरटेकर के कपड़ों या उनके ट्रैवल बैग में खीरा छिपाने की शरारत की थी। जब भी अंडरटेकर की नजर अचानक अपने सामान में पड़े खीरे पर पड़ती थी, तो रिंग में सबको डराने वाला यह महाबली पहलवान सचमुच घबरा जाता था और साथ ही शरारत करने वालों पर आगबबूला हो उठता था।\n\nहल्क होगन पर जीत से रेसलमेनिया के ऐतिहासिक रिकॉर्ड तक का सफर\nखीरे का यह अजीबोगरीब डर भले ही उनकी निजी जिंदगी का एक रोचक किस्सा रहा हो, लेकिन इसने कभी भी रिंग के भीतर उनके ऐतिहासिक कद और उपलब्धियों को छोटा नहीं होने दिया। साल 1990 में जब उन्होंने डब्ल्यूडब्ल्यूई के मंच पर पहली बार कदम रखा, तो किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि यह नया चेहरा आगे चलकर स्पोर्ट्स एंटरटेनमेंट की सबसे बड़ी गाथा लिखेगा। अपने शुरुआती दौर में ही उन्होंने उस समय के अजेय माने जाने वाले और सबसे लोकप्रिय सुपरस्टार हल्क होगन को रिंग में पटखनी देकर खेल जगत को हतप्रभ कर दिया था। इसके बाद तो अंडरटेकर का ऐसा स्वर्णिम दौर शुरू हुआ कि दुनिया का कोई भी प्रतिद्वंद्वी उनके सामने टिकने का साहस नहीं जुटा पाता था।\n\nद अंडरटेकर के करियर की सबसे महान उपलब्धि रेसलमेनिया के महामंच पर उनका अविश्वसनीय रिकॉर्ड रहा है। उन्होंने रेसलमेनिया में कुल 25 मैच जीते और पूरे करियर में सिर्फ 2 मुकाबलों में उन्हें शिकस्त का सामना करना पड़ा। लगभग दो दशकों से भी अधिक समय तक रेसलमेनिया में उनकी जीत का यह अटूट सिलसिला 21-0 के अजेय रिकॉर्ड के साथ कायम रहा, जिसे कुश्ती इतिहास का सबसे कठिन कीर्तिमान माना जाता है। इसके अलावा उन्होंने अपने शानदार करियर में चार बार डब्ल्यूडब्ल्यूई चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया, छह बार डब्ल्यूडब्ल्यूई टैग टीम चैंपियनशिप जीती और साल 2007 में 30 धुरंधरों को पछाड़ते हुए रॉयल रंबल का ऐतिहासिक मुकाबला भी जीता।\n\nरेसलिंग के स्वर्णिम युग का समापन और रिटायरमेंट\nलगभग दो साल पहले द अंडरटेकर ने आधिकारिक रूप से कुश्ती के रिंग को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। उनके रिटायरमेंट के साथ ही डब्ल्यूडब्ल्यूई और पेशेवर रेसलिंग के सबसे रोमांचक और स्वर्णिम युग का औपचारिक समापन हो गया। आज भी जब खेल प्रेमी उनके पुराने मुकाबलों, टॉम्बस्टोन पाइलड्राइवर मूव्स और रिंग में आने की रहस्यमयी एंट्री के वीडियो देखते हैं, तो उनके रोंगटे खड़े हो जाते हैं। अंडरटेकर कुश्ती के इतिहास में हमेशा एक खूंखार योद्धा और अजेय डेडमैन के रूप में याद किए जाएंगे, लेकिन उनके सबसे करीबी दोस्त और रेसलिंग की इनसाइड दुनिया हमेशा यह याद रखेगी कि 6 फीट 10 इंच ऊंचे इस विशालकाय पहाड़ को हिलाने के लिए किसी ताकतवर पहलवान के दांव-पेंच की नहीं, बल्कि सिर्फ एक साधारण खीरे की जरूरत होती थी।\n\nइसका आप पर असर\nयह वाकया दिखाता है कि बचपन का अप्रिय अनुभव और फोबिया किसी भी मजबूत इंसान को प्रभावित कर सकता है।\n\n• मानसिक समझ: अप्रत्याशित फोबिया शारीरिक कद या ताकत देखकर नहीं बल्कि व्यक्तिगत अनुभवों से तय होता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि फोबिया किसी भी व्यक्ति की सहज कमजोरी हो सकता है।\n• मनोवैज्ञानिक तथ्य: बचपन में खान-पान से जुड़ी गंभीर बीमारी जीवनभर का डर बन सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी अत्यधिक मात्रा में अचानक कोई खाद्य पदार्थ खाने से परहेज की सलाह देते हैं।\n• खेल प्रेमियों के लिए: रिंग के अजेय सुपरस्टार्स की निजी कमजोरियां उन्हें मानवीय और रोचक बनाती हैं। इससे प्रशंसकों को अपने पसंदीदा एथलीट के निजी जीवन को करीब से समझने का मौका मिलता है।\n• रोजमर्रा की सीख: किसी भी डर या अरुचि को बिना समझे दूसरों पर थोपने से बचना चाहिए। कार्यस्थल या मित्र मंडली में प्रैंक करते समय दूसरों की शारीरिक सहजता का ध्यान रखना जरूरी है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nद अंडरटेकर के खीरे से खौफ खाने के पीछे बचपन की गंभीर बीमारी और उससे उपजा कुकुरबिटोफोबिया था। उनके शरीर की तीव्र प्रतिक्रिया और डर की मुख्य वजहें इस प्रकार हैं:\n\n• बचपन की बीमारी: आठ साल की उम्र में एक साथ बहुत ज्यादा खीरा खाने से उनका पाचन तंत्र बुरी तरह बिगड़ गया था। उस समय हुई गंभीर शारीरिक तकलीफ और उल्टी ने उनके बालमन पर हमेशा के लिए गहरा डर बिठा दिया।\n• कुकुरबिटोफोबिया: मनोविज्ञान में खीरे या लौकी कुल की सब्जियों से होने वाले इस डर को कुकुरबिटोफोबिया कहते हैं। उनका शरीर खीरे की गंध या स्वाद को देखते ही उल्टी और घबराहट जैसी रक्षात्मक प्रतिक्रिया देने लगा था।\n• लॉकर रूम प्रैंक: पॉल बियरर द्वारा इस घटना को देखे जाने के बाद यह बात बैकस्टेज फैल गई थी। ओवेन हार्ट जैसे साथी पहलवानों द्वारा बार-बार खीरे छुपाकर प्रैंक करने से उनका यह डर और भी उजागर हो गया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. द अंडरटेकर को किस चीज से सबसे ज्यादा डर लगता था?\nद अंडरटेकर को खीरे से बहुत डर लगता था, जिसे मनोवैज्ञानिक रूप से कुकुरबिटोफोबिया कहा जाता है।\n\n2. अंडरटेकर के इस अजीब डर की शुरुआत कब और कैसे हुई थी?\nजब वह आठ साल के थे, तब अत्यधिक खीरा खाने से उनकी तबीयत बहुत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उनके मन में यह खौफ बैठ गया।\n\n3. इस गुप्त राज का खुलासा दुनिया के सामने किसने किया था?\nउनके लंबे समय तक मैनेजर रहे दिवंगत पॉल बियरर ने एक होटल के नाश्ते की घटना का जिक्र करते हुए इसका खुलासा किया था।\n\n4. बैकस्टेज साथी रेसलर्स अंडरटेकर के साथ क्या प्रैंक करते थे?\nओवेन हार्ट समेत कई रेसलर्स अंडरटेकर को चिढ़ाने के लिए उनके कपड़ों या बैग में खीरा छुपाकर रख दिया करते थे।\n\n5. रेसलमेनिया में द अंडरटेकर का कुल रिकॉर्ड क्या रहा है?\nरेसलमेनिया में अंडरटेकर ने 25 मुकाबले जीते हैं और उन्हें केवल 2 मैचों में हार का सामना करना पड़ा है।",
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  "category": "खेल",
  "publishedAt": "2026-09-22",
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