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  "type": "article",
  "title": "अमेज़न ने पेश किया टॉर्चन्यूरॉन, एनवीडिया के एकाधिकार को चुनौती देने के लिए तैयार किया नया टूल",
  "summary": "अमेज़न वेब सर्विसेज ने टॉर्चन्यूरॉन नाम का नया टूल उतारा है, जिसकी मदद से डेवलपर्स सिर्फ एक लाइन की सेटिंग बदलकर अपने एआई मॉडल्स को एनवीडिया के बजाय ट्रेनियम चिप्स पर चला सकेंगे।",
  "content": "क्लाउड कंप्यूटिंग क्षेत्र की प्रमुख कंपनी अमेज़न वेब सर्विसेज ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सॉफ्टवेयर डेवलपर्स के लिए एक नया समाधान पेश किया है। सोमवार को लॉन्च किए गए इस नए टूल का नाम टॉर्चन्यूरॉन रखा गया है। इसका सीधा मकसद उभरते हुए एआई स्टार्टअप्स और डेवलपर्स को अपने एप्लिकेशन अमेज़न की खुद की बनाई इन-हाउस एआई चिप ट्रेनियम पर आसानी से स्थानांतरित करने की सुविधा देना है। इस तकनीकी पहल के जरिए अमेज़न सीधे तौर पर एनवीडिया के उस सॉफ्टवेयर दबदबे को निशाना बना रहा है, जिसने उसे लंबे समय से एआई हार्डवेयर बाजार में निर्विवाद विकल्प बनाए रखा है।\n\nपाईटॉर्च इकोसिस्टम और सिर्फ एक लाइन का बदलाव\nआर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में मॉडल्स को तैयार करने, सिखाने और रोजमर्रा के काम में लाने के लिए बड़े पैमाने पर पाईटॉर्च फ्रेमवर्क का इस्तेमाल होता है। यह एक पूरी तरह से मुफ़्त और ओपन सोर्स टूलकिट है, जिसे मूल रूप से फेसबुक ने विकसित किया था। साल 2022 के बाद से इसकी देखरेख और प्रबंधन लिनक्स फाउंडेशन के पास है। अमेज़न के आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया भर में करीब 85 प्रतिशत एआई एप्लिकेशन इसी पाईटॉर्च टूलकिट की मदद से लिखे जाते हैं।\n\nअब तक एनवीडिया ने अपने कूडा सॉफ्टवेयर ढांचे को पाईटॉर्च के साथ इतना बारीकी से जोड़ा हुआ था कि डेवलपर्स के लिए एनवीडिया के चिप्स पहली और स्वाभाविक पसंद बन गए थे। डेवलपर्स जब भी कोई मॉडल लिखते, वह डिफ़ॉल्ट रूप से एनवीडिया के हार्डवेयर पर चलने के लिए तैयार होता था। टॉर्चन्यूरॉन इसी प्रक्रिया को पूरी तरह बदलने का दावा करता है। अमेज़न के अनुसार, जो कोड डेवलपर्स ने पाईटॉर्च में लिखा है, उसे ट्रेनियम चिप पर चलाने के लिए पूरे कोड को दोबारा लिखने की जरूरत बिल्कुल नहीं है। डेवलपर्स को अपने प्रोजेक्ट में केवल एक लाइन का कॉन्फ़िगरेशन बदलना होगा और उनका एप्लिकेशन ट्रेनियम पर काम करने लगेगा।\n\nमल्टी-क्लाउड प्रदाताओं और निओक्लाउड्स के सामने बड़ा विकल्प\nचिप्स को पाईटॉर्च से जोड़ना अपने आप में एकदम नया विचार नहीं है। एएमडी और एप्पल जैसी कंपनियां भी पहले से ऐसी व्यवस्था दे रही हैं, जहां सामान्य बदलावों के साथ कोड को उनके हार्डवेयर पर पोर्ट किया जा सकता है। इसके बावजूद अमेज़न का मानना है कि ट्रेनियम पर आना डेवलपर्स के लिए कहीं अधिक फायदेमंद साबित होगा, क्योंकि यहां उन्हें अमेज़न के समूचे क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर का सीधा सहारा मिलता है।\n\nवर्तमान समय में कई ऐसे विशेष क्लाउड प्रदाता हैं जिन्हें निओक्लाउड्स कहा जाता है। कोरवीव, नेबियस और फर्मस जैसे ये मंच मुख्य रूप से एनवीडिया के जीपीयू किराए पर देने के इर्द-गिर्द केंद्रित हैं। अमेज़न का कहना है कि सिर्फ एक चिप सेवा देने वाले मंचों पर निर्भर रहने के बजाय एडब्ल्यूएस पर काम करना ज्यादा सुरक्षित और व्यावहारिक है।\n\nअमेज़न की कस्टम चिप्स बनाने वाली इकाई अन्नपूर्णा लैब्स में टेक्नोलॉजी सॉफ्टवेयर के उपाध्यक्ष कॉलिन ब्रेस ने इस रणनीति की अहमियत समझाई। उन्होंने बताया कि जब आप एडब्ल्यूएस पर निर्माण करते हैं, तो आप केवल एक काम के लिए बने कंप्यूट प्रोवाइडर पर दांव नहीं लगा रहे होते, जहां बाद में बाकी चीजों के लिए अलग से मशक्कत करनी पड़े। उनके अनुसार, एडब्ल्यूएस पर शुरुआती प्रोटोटाइप से लेकर पूरी तरह तैयार उत्पादन स्तर तक पहुंचने का सारा ढांचा पहले से मौजूद है, जिससे किसी भी कंपनी के संस्थापक तेजी से आगे बढ़ सकते हैं और जरूरत पड़ने पर बड़े स्तर पर विस्तार कर सकते हैं।\n\nट्रेनिंग और इन्फेरेंस के लिए एक ही हार्डवेयर से बचत\nएआई मॉडल्स पर काम करते वक्त कंपनियों को दो अलग-अलग चरणों से गुजरना पड़ता है। पहला चरण मॉडल को ट्रेनिंग देने यानी उसे भारी डेटा से सिखाने का होता है, जबकि दूसरा चरण इन्फेरेंस कहलाता है, जिसमें सिखाया गया मॉडल वास्तविक सवालों के जवाब देता है। अक्सर इन दोनों कामों के लिए अलग-अलग तरह के चिप्स और संसाधनों की जरूरत पड़ती है, जिससे कंपनियों का खर्च काफी बढ़ जाता है।\n\nएडब्ल्यूएस का कहना है कि ट्रेनियम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक ही हार्डवेयर ट्रेनिंग और इन्फेरेंस दोनों कामों को संभाल लेता है। कंपनी यह भी स्वीकार करती है कि भले ही उसका प्रति-टोकन मूल्य बाजार में सबसे सस्ता न दिखे, लेकिन जब पूरे वर्कलोड की गणना की जाती है तो यह कंपनियों के पैसे बचाता है। कॉलिन ब्रेस ने कहा, \"ट्रेनियम का असली मूल्य प्रदर्शन और कीमत के संतुलन में है, साथ ही यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि यह ट्रेनिंग और इन्फेरेंस दोनों के लिए एक साझा मंच है, जिससे पूरे वर्कलोड की लागत बेहतर हो जाती है।\"\n\nइस दावे के समर्थन में अमेज़न ने वॉइस एआई तकनीक पर काम करने वाली कंपनी डीपग्राम का उदाहरण दिया है, जो इलेवनलैब्स की प्रमुख प्रतिस्पर्धी है। डीपग्राम ने पाईटॉर्च सपोर्ट का लाभ उठाते हुए अपना काम ट्रेनियम पर स्थानांतरित किया। कंपनी का अनुभव रहा कि वह उत्पादन स्तर की सटीकता बनाए रखते हुए प्रति डॉलर 70 प्रतिशत अधिक ऑडियो प्रोसेस करने में सक्षम रही। डीपग्राम के इस तकनीकी बदलाव का पूरा विवरण आधिकारिक ब्लॉग में भी साझा किया गया है।\n\nओपन सोर्स कम्युनिटी के जरिए एनवीडिया का बंधन तोड़ने की योजना\nअमेज़न का यह कदम सिर्फ अपने क्लाउड ग्राहकों को सुविधा देने तक सीमित नहीं है। कंपनी सीधे मुख्य पाईटॉर्च ओपन सोर्स रिपोजिटरी में भी बदलाव का प्रस्ताव दे रही है। अमेज़न की योजना है कि पाईटॉर्च के मुख्य कोडबेस से ऐसे कोड और निर्भरताओं को हटाया जाए जो इस फ्रेमवर्क को केवल एनवीडिया या किसी खास हार्डवेयर से बांधकर रखते हैं।\n\nकंपनी का लक्ष्य पाईटॉर्च को पूरी तरह से हार्डवेयर-न्यूट्रल बनाना है ताकि कोई भी चिप निर्माता समान स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सके। यदि यह पहल सफल होती है, तो डेवलपर्स को किसी एक चिप निर्माता के सॉफ्टवेयर इकोसिस्टम में बंधकर नहीं रहना पड़ेगा। जैसा कि कॉलिन ब्रेस ने स्पष्ट किया, असली कहानी उस तकनीकी रुकावट को समाप्त करने की है जिसने लंबे समय से डेवलपर्स को दूसरा कोई विकल्प चुनने से रोक रखा था। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि डेवलपर्स इस आजादी को कितनी तेजी से अपनाते हैं और क्या इससे उनका हार्डवेयर खर्च सचमुच घटता है।\n\nइसका आप पर असर\nयह नया टूल सॉफ्टवेयर डेवलपर्स और क्लाउड पर काम करने वाली तकनीकी कंपनियों के लिए हार्डवेयर के विकल्प बढ़ाने और परिचालन लागत घटाने का मौका देता है।\n\n• डेवलपर्स के लिए: कोड में बदलाव किए बिना चिप बदलने की सुविधा मिलती है। सिर्फ एक लाइन की सेटिंग बदलकर मौजूदा पाईटॉर्च मॉडल को सीधे ट्रेनियम हार्डवेयर पर चलाया जा सकता है।\n• स्टार्टअप्स के लिए: एआई मॉडल्स को चलाने और ट्रेन करने का खर्च कम हो सकता है। ट्रेनिंग और इन्फेरेंस के लिए एक ही हार्डवेयर मिलने से इंफ्रास्ट्रक्चर की कुल लागत घटती है।\n• क्लाउड बाजार में: कंपनियों की एनवीडिया पर निर्भरता कम होने की संभावना बनेगी। चिप बाजार में विकल्पों की संख्या बढ़ने से क्लाउड कंप्यूटिंग सेवाओं की कीमतों में प्रतिस्पर्धा तेज होगी।\n• सॉफ्टवेयर इकोसिस्टम पर: ओपन सोर्स फ्रेमवर्क किसी एक कंपनी की तकनीक में नहीं बंधेगा। पाईटॉर्च का कोड अधिक हार्डवेयर-न्यूट्रल होने से भविष्य में नए चिप निर्माताओं को भी मदद मिलेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nएनवीडिया के सॉफ्टवेयर कूडा और पाईटॉर्च के गहरे तालमेल के कारण अधिकांश कंपनियां महंगे जीपीयू खरीदने को मजबूर थीं, जिससे निपटने के लिए अमेज़न ने यह कदम उठाया।\n\n• एनवीडिया का सॉफ्टवेयर प्रभुत्व: वर्षों से कूडा आर्किटेक्चर पाईटॉर्च से गहराई से जुड़ा हुआ था, जिसके चलते डेवलपर्स आसानी से दूसरा हार्डवेयर नहीं चुन पाते थे। इस सॉफ्टवेयर रुकावट को खत्म करने के लिए अमेज़न ने यह सुगम टूल तैयार किया।\n• हार्डवेयर लागत पर दबाव: एआई स्टार्टअप्स के लिए जीपीयू की भारी कमी और महंगे किराए से काम चलाना कठिन हो रहा था। अमेज़न अपने ट्रेनियम चिप्स को किफायती और एकीकृत विकल्प के रूप में स्थापित करना चाहता है।\n• क्लाउड ग्राहकों को बांधे रखना: केवल चिप्स किराए पर देने वाले नए निओक्लाउड मंच तेजी से लोकप्रिय हो रहे थे। अमेज़न अपने संपूर्ण क्लाउड परिवेश की ताकत दिखाकर ग्राहकों को अपने मंच पर बनाए रखना चाहता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. टॉर्चन्यूरॉन क्या है और यह क्या काम करता है?\nयह अमेज़न वेब सर्विसेज का एक नया टूल है, जो पाईटॉर्च में लिखे गए एआई एप्लिकेशन्स को बिना पूरा कोड बदले सीधे अमेज़न की ट्रेनियम चिप पर चलाने में मदद करता है।\n\n2. डेवलपर्स को अपना कोड बदलने के लिए क्या करना होगा?\nअमेज़न के अनुसार डेवलपर्स को पूरे कोड को दोबारा लिखने की जरूरत नहीं है, वे केवल एक लाइन का कॉन्फ़िगरेशन बदलकर ट्रेनियम पर स्विच कर सकते हैं।\n\n3. पाईटॉर्च पर कितने प्रतिशत एआई एप्लिकेशन बने हैं?\nअमेज़न के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में करीब 85 प्रतिशत एआई एप्लिकेशन पाईटॉर्च टूलकिट की मदद से लिखे गए हैं।\n\n4. डीपग्राम कंपनी को ट्रेनियम अपनाने से क्या फायदा हुआ?\nडीपग्राम ने नेटिव पाईटॉर्च सपोर्ट के साथ ट्रेनियम पर काम शुरू किया और समान सटीकता के साथ प्रति डॉलर 70 प्रतिशत अधिक ऑडियो प्रोसेस किया।\n\n5. अमेज़न मुख्य पाईटॉर्च प्रोजेक्ट में क्या बदलाव कर रहा है?\nअमेज़न पाईटॉर्च के मुख्य ओपन सोर्स कोड से ऐसी कोडिंग हटाने के लिए काम कर रहा है जो फ्रेमवर्क को केवल खास चिप्स या एनवीडिया से बांधकर रखती है।",
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  "category": "स्टार्टअप्स",
  "publishedAt": "2026-10-20",
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