# बड़ी कंपनियों से टेक सौदे हासिल करने के लिए डेटाब्रिक्स के सह-संस्थापक ने बताए व्यावहारिक नियम

> डेटाब्रिक्स के सह-संस्थापक अर्सलान तवाकोली-शिराजी ने बताया कि केवल बेहतर तकनीक के दम पर बड़े उद्यमों से अनुबंध नहीं मिलते, बल्कि वितरण साझेदारी और सुरक्षा की तैयारी जरूरी होती है।

**Type:** article · **Category:** स्टार्टअप्स · **Published:** 2026-10-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/startups/databricks-co-founder-shares-enterprise-sales-tactics-for-tech-startups-52102 · **Language:** Hindi
**Tags:** डेटाब्रिक्स, स्टार्टअप, एंटरप्राइज सेल्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, माइक्रोसॉफ्ट

तेजी से आगे बढ़ने का दबाव आज हर उभरते तकनीकी उद्यम पर बना हुआ है, और इस रफ्तार को हासिल करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी जगत की विशालकाय कंपनियों को ग्राहक बनाना सबसे अहम माना जाता है। कॉरपोरेट क्षेत्र के बड़े संस्थानों के बजट काफी भारी होते हैं, मगर उनके साथ व्यावसायिक समझौते तय करना किसी भी शुरुआती टीम के लिए बेहद पेचीदा साबित होता है। डेटा भंडारण और विश्लेषण में मदद करने वाली कंपनी डेटाब्रिक्स के सह-संस्थापक और फील्ड इंजीनियरिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अर्सलान तवाकोली-शिराजी के अनुसार, अधिकतर युवा स्टार्टअप यह मानकर भारी भूल करते हैं कि उनका तकनीकी उत्पाद अपनी खूबियों के दम पर खुद-ब-खुद बिक जाएगा।

तकनीक का सटीक और असरदार होना जरूरी शर्त तो है, लेकिन उद्यमों का भरोसा जीतने के लिए यह अकेला पैमाना काफी नहीं होता। आज डेटाब्रिक्स 190 अरब डॉलर के मूल्यांकन के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बिग डेटा स्टोरेज क्षेत्र की अग्रणी कंपनी बन चुकी है, जिसके ग्राहकों में फॉर्च्यून 500 सूची की 70 प्रतिशत से अधिक कंपनियां शामिल हैं। हालांकि, अपने शुरुआती दौर में यह भी एक बेहद छोटा उद्यम थी, और तवाकोली-शिराजी पर उस समय पहले बड़े सौदे जुटाने की सीधी जिम्मेदारी थी।

## शुरुआती सौदों की रुकावटें और कड़वे अनुभव
अपने पुराने दिनों को याद करते हुए तवाकोली-शिराजी बताते हैं कि एक बार उन्होंने संभावित ग्राहक के साथ बड़ी मुश्किल से बैठक तय की, मगर वहां पहुंचकर पता चला कि वही अधिकारी हाल ही में उनके सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी के साथ एक बहुत बड़ा सौदा पक्का कर चुका था। उस अधिकारी ने डेटाब्रिक्स की बात सुनने में कोई रुचि नहीं दिखाई, क्योंकि उसने अपना पूरा करियर उस प्रतिद्वंद्वी तकनीकी समाधान पर दांव पर लगा दिया था। इसके अलावा शुरुआती दौर में कई महत्वपूर्ण समझौते इसलिए भी टूट गए क्योंकि उनकी टीम कानूनी औपचारिकताओं, अनुबंध से जुड़ी पेचीदगियों और सुरक्षा जांच से जुड़े सवालों के लिए तैयार नहीं थी। बड़े ग्राहकों को जोड़ने के लिए संस्थापक ने कई अहम सबक सामने रखे हैं।

## बड़े क्लाउड मंचों के साथ रणनीतिक साझेदारी
शुरुआती दिनों में डेटाब्रिक्स ने स्विट्जरलैंड के प्रमुख बैंक यूबीएस के साथ बैठक करने की पुरजोर कोशिश की, लेकिन उसे लगातार विफलता हाथ लगी। इसके बाद कंपनी ने माइक्रोसॉफ्ट के साथ रणनीतिक साझेदारी की और एज़्योर क्लाउड पार्टनर बन गई। इस कदम से डेटाब्रिक्स के बिक्री संबंधी अनुबंध सीधे माइक्रोसॉफ्ट के कानूनी नियमों और शर्तों के दायरे में आ गए।

इस गठबंधन का सबसे बड़ा लाभ यह हुआ कि माइक्रोसॉफ्ट की बिक्री टीम ने खुद ग्राहकों के साथ बैठकें तय करना शुरू कर दिया और छोटे स्टार्टअप की वकालत की। किसी ऐसे बड़े साझेदार का साथ मिलना जिसके पास पहले से व्यापक पहुंच और वितरण तंत्र मौजूद हो, डेटाब्रिक्स के लिए वरदान साबित हुआ। माइक्रोसॉफ्ट के सहयोग से कंपनी की मांग इतनी तेजी से बढ़ी कि वे हर जगह खींचे जाने लगे। इससे नई व्यावहारिक परेशानियां भी सामने आईं, जैसे कई संभावित ग्राहक उन देशों के लिए विशेष फीचर्स मांगने लगे जहां डेटाब्रिक्स का विस्तार तक नहीं हुआ था, मगर तेजी से आगे बढ़ रही कंपनी के लिए यह सुखद चुनौती थी।

वर्तमान में डेटाब्रिक्स स्वयं उस मुकाम पर पहुंच चुकी है जहां वह अन्य स्टार्टअप्स के साथ काम करती है और उनके उत्पादों को अपने कानूनी ढांचे व साइबर सुरक्षा व्यवस्था के तहत बेचती है। इनमें एआई आधारित मार्केटिंग और कस्टमर डेटा टूल्स देने वाली कंपनी Hightouch शामिल है, जिसमें डेटाब्रिक्स ने निवेश भी किया है। इसके अलावा निवेश पेशेवरों के लिए डेटा टूल बनाने वाली फर्म Addepar और मशीन लर्निंग क्षेत्र की स्टार्टअप टेक्टॉन भी इसके दायरे में रही हैं, जिसे बाद में डेटाब्रिक्स ने पूरी तरह अधिग्रहित कर लिया।

## उद्यमों की चार मुख्य चिंताएं: संदर्भ, चयन, लागत और नियंत्रण
तवाकोली-शिराजी ने बताया कि जब बड़े संस्थान किसी नए तकनीकी समाधान को परखते हैं, तो उनकी आपत्तियां और शंकाएं मुख्य रूप से चार पहलुओं के इर्द-गिर्द घूमती हैं, जिन्हें उन्होंने चार सी का नाम दिया है। पहला पहलू कॉन्टेक्स्ट यानी संदर्भ का है। इसका अर्थ यह है कि एआई सिस्टम को किसी नए कर्मचारी की तरह प्रशिक्षित किया जा सके, जो कंपनी की कार्यशैली, तकनीकी शब्दावली, प्रक्रियाओं और प्राथमिकताओं को भली-भांति समझ ले।

दूसरा बिंदु चॉइस यानी चयन की आजादी का है, जिसके तहत ग्राहक किसी एक मॉडल प्रदाता के साथ बंधने के बजाय जरूरत पड़ने पर मॉडल बदलने की स्वतंत्रता चाहते हैं। तीसरा पहलू कॉस्ट यानी लागत से जुड़ा है, ताकि एआई संचालन पर होने वाले खर्च पर पारदर्शी नियंत्रण रखा जा सके। चौथा बिंदु कंट्रोल यानी नियंत्रण का है, जिसमें एआई के व्यवहार को नियंत्रित करने वाले सुरक्षा नियम और संवेदनशील सूचनाओं की पुख्ता हिफाजत शामिल होती है।

## कॉरपोरेट जगत में एआई के वास्तविक उपयोग की जमीनी हकीकत
तवाकोली-शिराजी अक्सर कंपनियों के मुख्य सूचना अधिकारियों से हंसी-मजाक में पूछते हैं कि एआई अपनाने के मामले में वे एक से पांच के पैमाने पर खुद को कहां देखते हैं। इस पैमाने पर पहले स्तर का मतलब केवल कर्मचारियों तक चैटजीपीटी की पहुंच होना है, जबकि पांचवें स्तर का अर्थ है कि कंपनी ने ऐसी उन्नत एआई क्षमताएं अपना ली हैं जिन्होंने उसके पूरे कारोबारी संचालन को बदल दिया है।

अक्सर अधिकारी दावा करते हैं कि वे तीसरे पायदान पर हैं और चौथे की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन वास्तव में उनमें से 99 प्रतिशत अधिकारी पहले और दूसरे स्तर के दायरे में ही अटके हुए हैं। उद्यम अभी तक यह पूरी तरह तय नहीं कर पाए हैं कि इंजीनियरिंग टीमों से कोड लिखवाने के अलावा एआई एजेंट्स का ऐसा इस्तेमाल कैसे किया जाए जिससे वास्तविक कारोबारी मूल्य तैयार हो सके। कॉरपोरेट स्तर पर एआई को बेहद सार्थक तरीके से तैनात करने में अभी लंबा समय लगने वाला है।

## पुराने बैंकिंग सिस्टम के आधुनिकीकरण में छिपा भारी अवसर
स्टार्टअप्स के लिए सबसे बड़ा व्यावसायिक अवसर पुराने और खर्चीले कंप्यूटर सिस्टम्स को आधुनिक बनाने में मौजूद है। आज भी कई बड़े बैंकों में आईबीएम एएस/400 और मेनफ्रेम जैसी पुरानी प्रणालियां काम कर रही हैं। दशकों से कोई भी इन व्यवस्थाओं में बदलाव करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था, क्योंकि किसी को ठीक से पता ही नहीं था कि उन दशकों पुराने कोड का वास्तविक काम क्या है।

वर्तमान समय में आधुनिक एआई एजेंट्स उस जटिल कोड के हर हिस्से को गहराई से समझने और उसका विश्लेषण करने में सक्षम हैं। इससे नए तकनीकी उत्पादों के लिए बहुत बड़ा द्वार खुल गया है, जो इन प्राचीन व्यवस्थाओं पर आधुनिक इंटरफेस जोड़ सकते हैं या फिर उन्हें नए स्वरूप में पूरी तरह बदलकर बैंकों की कार्यकुशलता बढ़ा सकते हैं। शुरुआती दिनों में बड़े सौदे पक्का करने के लिए कभी-कभार अजीब तरीके भी आजमाने पड़ते थे, जैसे डेटाब्रिक्स के शुरुआती दौर में अनुबंध हासिल करने के लिए तवाकोली-शिराजी को खुद वकील होने का नाटक तक करना पड़ा था।

## इसका आप पर असर
यह जानकारी शुरुआती दौर के उद्यमियों और आईटी पेशेवरों को बड़े कॉरपोरेट क्लाइंट्स हासिल करने की व्यावहारिक समझ देती है।

- **स्टार्टअप संस्थापकों के लिए:** केवल तकनीकी फीचर्स पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय बड़े वितरण साझेदारों और कानूनी अनुपालन को प्राथमिकता देनी होगी। इससे बड़े बैंकों और फॉर्च्यून 500 कंपनियों तक पहुंच आसान हो जाती है।
- **आईटी और तकनीकी टीमों के लिए:** पुराने मेनफ्रेम कोड और बैंकिंग सॉफ्टवेयर को आधुनिक बनाने के लिए नए समाधान तैयार किए जा सकते हैं। इस क्षेत्र में तकनीकी कंपनियों के लिए अरबों डॉलर के बड़े सौदों के अवसर मौजूद हैं।
- **कॉरपोरेट प्रबंधकों के लिए:** जनरेटिव एआई लागू करते समय डेटा सुरक्षा, लागत नियंत्रण और मॉडल बदलने की स्वतंत्रता पर पहले ध्यान देना होगा। इससे तकनीक को केवल कोडिंग टूल तक सीमित रखने के बजाय कोर बिजनेस प्रोसेस में उतारा जा सकता है।
- **करियर और रोजगार पर प्रभाव:** लिगेसी सिस्टम्स को डिकोड करने वाले एआई इंजीनियर्स और एंटरप्राइज सेल्स प्रोफेशनल्स की मांग बढ़ेगी। जो पेशेवर तकनीकी कौशल के साथ अनुबंध और सुरक्षा की समझ रखते हैं, उन्हें प्राथमिकता मिलेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
यह रणनीतिक अनुभव इसलिए साझा किया गया क्योंकि अधिकतर युवा सॉफ्टवेयर कंपनियां शानदार उत्पाद बनाने के बावजूद बड़े कॉरपोरेट ग्राहकों से अनुबंध हासिल करने में विफल हो जाती हैं। कानूनी जटिलताओं, मजबूत वितरण तंत्र की कमी और उद्यमों की सुरक्षा प्राथमिकताओं को न समझना इन असफलताओं का प्रमुख कारण रहा है।

- **सीधे वितरण की विफलता:** नए तकनीकी उत्पाद सीधे बड़े बैंकों या वैश्विक कंपनियों की खरीद प्रक्रिया में खरे नहीं उतर पाते। जब डेटाब्रिक्स ने खुद प्रयास किया तो बैठकें नहीं मिलीं, लेकिन क्लाउड दिग्गजों के चैनल से जुड़ते ही बिक्री सुगम हो गई।
- **सुरक्षा और अनुबंध की अनदेखी:** युवा तकनीकी दल कानूनी समझौतों और सुरक्षा मानकों की तैयारी किए बिना बाजार में उतरते हैं। बड़े उद्यम किसी भी उत्पाद को अपनाने से पहले डेटा गोपनीयता और विनियामक शर्तों की सख्त जांच करते हैं।
- **लिगेसी प्रणालियों की तकनीकी जड़ता:** वित्तीय संस्थानों में दशकों पुराने मेनफ्रेम और एएस/400 सिस्टम इसलिए नहीं बदले जा सके क्योंकि उनके मूल कोड को समझना जोखिम भरा था। एआई एजेंटों के आगमन ने पहली बार इन प्रणालियों को सुरक्षित तरीके से आधुनिक बनाने का तकनीकी आधार तैयार किया है।

## सवाल-जवाब

### 1. डेटाब्रिक्स का वर्तमान बाजार मूल्यांकन कितना है?
डेटाब्रिक्स का मूल्यांकन वर्तमान में 190 अरब डॉलर है, और फॉर्च्यून 500 की 70 प्रतिशत से अधिक कंपनियां इसकी ग्राहक हैं।

### 2. डेटाब्रिक्स को शुरुआती दिनों में किस स्विस बैंक से बैठक नहीं मिल पा रही थी?
कंपनी को शुरुआत में स्विट्जरलैंड के प्रमुख बैंक यूबीएस के साथ बैठक हासिल करने में विफलता मिल रही थी।

### 3. माइक्रोसॉफ्ट के साथ साझेदारी से डेटाब्रिक्स को क्या फायदा हुआ?
माइक्रोसॉफ्ट का क्लाउड पार्टनर बनने से बिक्री समझौते माइक्रोसॉफ्ट के नियमों के तहत होने लगे और उसकी सेल्स टीम ने बैठकें तय कराईं।

### 4. संस्थापक ने उद्यमों की चिंताओं को किन चार श्रेणियों में बांटा है?
उन्होंने इसे चार सी कहा है: संदर्भ (Context), विकल्प (Choice), लागत (Cost) और नियंत्रण (Control)।

### 5. कॉरपोरेट जगत में एआई के वास्तविक उपयोग को लेकर क्या स्थिति है?
बातचीत में शामिल 99 प्रतिशत मुख्य सूचना अधिकारी एआई अपनाने के मामले में अभी केवल पहले और दूसरे पायदान पर ही मौजूद हैं।

### 6. सॉफ्टवेयर स्टार्टअप्स के लिए सबसे बड़ा तकनीकी अवसर कहां मौजूद है?
बैंकों में लगे पुराने आईबीएम एएस/400 और मेनफ्रेम सिस्टम्स के कोड को एआई एजेंट्स की मदद से आधुनिक बनाने में सबसे बड़ा अवसर है।

## प्रेरणा और सबक
डेटाब्रिक्स की शून्य से 190 अरब डॉलर के मुकाम तक पहुंचने की यात्रा तकनीकी उद्यमियों को व्यावहारिक व्यावसायिक रणनीति सिखाती है।

- **अहंकार छोड़कर वितरण को प्राथमिकता दें:** बेहतरीन उत्पाद होना पहला कदम है, लेकिन उसे बाजार तक पहुंचाने के लिए स्थापित खिलाड़ियों का सहयोग लेना सीखें। सही मंच के साथ साझेदारी करने से वर्षों का संघर्ष कुछ महीनों में दूर हो सकता है।
- **असफलता से तुरंत रणनीति बदलें:** जब सीधे प्रयासों से बड़े ग्राहकों ने दरवाजे बंद कर दिए, तो कंपनी ने अपनी बिक्री रणनीति का पुनर्गठन किया। अपने दृष्टिकोण में लचीलापन रखकर ही असंभव दिखने वाले लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।
- **संसाधनों की कमी में नवाचार दिखाएं:** शुरुआती दिनों में संसाधनों की कमी होने पर संस्थापक ने खुद आगे बढ़कर हर चुनौती का सामना किया। बड़ी बाधाओं को पार करने के लिए कभी-कभार पारंपरिक रास्तों से हटकर व्यक्तिगत दृढ़ संकल्प दिखाना पड़ता है।

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