दुर्लभ खनिजों पर निर्भरता खत्म करने के लिए मॉडल मोटर्स ने पेश किया नया इलेक्ट्रिक मोटर डिजाइन अमेरिकी स्टार्टअप मॉडल मोटर्स ने दुर्लभ खनिजों के इस्तेमाल को पूरी तरह हटाकर चीन पर वैश्विक निर्भरता खत्म करने वाला नया हाइब्रिड एनिग्मा ड्राइव पेश किया है। हार्ड टेक, रोबोटिक्स और ड्रोन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मैन्युफैक्चरिंग को अमेरिका वापस लाने की मुहिम के बीच नए तकनीकी प्रयोग जोर पकड़ रहे हैं। माइकल वैन स्टीनबर्ग का मानना है कि वे इस दिशा में बाकी प्रतिस्पर्धियों से कहीं आगे निकल चुके हैं। पिछले दस सालों से अमेरिका और उत्तरी अमेरिका में तमाम तरह के इलेक्ट्रिक मोटर्स बनाने का अनुभव रखने वाले वैन स्टीनबर्ग ने अब अपने नए स्टार्टअप मॉडल मोटर्स के साथ एक नई शुरुआत की है। इस नए उपक्रम के जरिए उनका सबसे बड़ा लक्ष्य दुर्लभ खनिजों यानी रेयर-अर्थ मैग्नेट्स के इस्तेमाल को पूरी तरह छोड़ना है, ताकि अमेरिकी तकनीकी उद्योग को चीनी सप्लाई चेन के दबाव से मुक्त कराया जा सके। सप्लाई चेन पर चीन के दबदबे को सीधी चुनौती वैश्विक तकनीक बाजार में चीन द्वारा दुर्लभ खनिज उत्पादों पर पाबंदी लगाने और अपनी ताकत दिखाने की रणनीति के बाद यह कदम काफी अहम माना जा रहा है। अमेरिका में इलेक्ट्रिक मोटर मैन्युफैक्चरिंग और घरेलू सप्लाई चेन स्थापित करने की कोशिश में कई अन्य कंपनियां भी जुटी हुई हैं, लेकिन वैन स्टीनबर्ग के मुताबिक उनका नजरिया बुनियादी तौर पर गलत है। ज्यादातर कंपनियां अब भी रेयर-अर्थ मैग्नेट्स पर निर्भर हैं, जबकि अमेरिका में इन आवश्यक सामग्रियों की घरेलू सप्लाई तैयार होने में अभी कई साल का समय बाकी है। वैन स्टीनबर्ग के अनुसार, जो अन्य लोग घरेलू उत्पादन की बात कर रहे हैं, वे केवल चीनी डिजाइनों की नकल करके उन्हें अमेरिकी धरती पर बना रहे हैं। वे इस उम्मीद में बैठे हैं कि अमेरिकी रेयर-अर्थ मैग्नेट सिस्टम जल्द रफ्तार पकड़ लेगा, जबकि सच्चाई यह है कि चीन का वास्तविक विकल्प तैयार करने में अभी काफी वक्त लगेगा। हाइब्रिड एनिग्मा ड्राइव की अनूठी तकनीक मॉडल मोटर्स ने इस समस्या का समाधान अपने बेहद अलग डिजाइन में खोजा है, जिसे कंपनी हाइब्रिड एनिग्मा ड्राइव कहती है। यह एक प्लानर यानी सपाट और बेहद पतली इलेक्ट्रिक मोटर है, जिसे उन जगहों पर आसानी से फिट किया जा सकता है जहां ऊंचाई या स्पेस बहुत सीमित होता है। इस फ्लैट मोटर डिजाइन के जरिए पारंपरिक भारी और दुर्लभ खनिजों से लैस मोटर्स की जरूरत खत्म हो जाती है। ऑटोमोटिव इंडस्ट्री में अपने दशकों के अनुभव का इस्तेमाल करते हुए वैन स्टीनबर्ग इन आधुनिक मोटर्स को ग्राहकों के लिए पूरी तरह तैयार कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि कभी 1990 के दशक के अंतिम वर्षों में उन्होंने एक हाइब्रिड गैस-इलेक्ट्रिक ड्राइवट्रेन पर काम किया था, जिसे चीन अपनी बहुचर्चित पीपुल्स कार परियोजना में शामिल करना चाहता था। पच्चीस सालों का अनुभव और सख्त सबक अतीत के उस दौर को याद करते हुए वैन स्टीनबर्ग इसे बेहद विडंबनापूर्ण मानते हैं कि दुनिया कितनी बदल चुकी है। हालांकि उनका मानना है कि चुनौतियों से टकराने और लीक से हटकर काम करने का उनका जज्बा आज भी पहले जैसा ही मजबूत बना हुआ है। उनका स्पष्ट कहना है कि यह उल्टी गिनती 25 साल पहले ही शुरू हो गई थी। बीते ढाई दशकों में चीन ने दुनिया भर की खदानों और खनिज अधिकारों पर अपना नियंत्रण कायम करके पूरे रेयर-अर्थ सप्लाई चेन पर धीमे-धीमे पूरी तरह एकाधिकार जमा लिया। मॉडल मोटर्स अब इसी दशकों पुरानी निर्भरता को खत्म करने की दिशा में ठोस इंजीनियरिंग विकल्प पेश कर रही है। इसका आप पर असर दुर्लभ खनिजों के बिना चलने वाली नई मोटर तकनीक भविष्य में रोबोटिक्स, ड्रोन और हार्डवेयर उत्पादों की लागत और उपलब्धता को स्थिर कर सकती है। • हार्डवेयर और ड्रोन निर्माताओं के लिए: यह तकनीक चीन से आयातित महंगे मैग्नेट्स पर निर्भरता घटाने का विकल्प देती है। इससे उपकरण निर्माताओं को व्यापारिक प्रतिबंधों या अंतरराष्ट्रीय सप्लाई बाधाओं के दौरान भी उत्पादन जारी रखने में मदद मिलेगी। • रोबोटिक्स डेवलपर्स के लिए: हाइब्रिड एनिग्मा ड्राइव का सपाट और पतला डिजाइन बहुत कम जगह घेरता है। इसके जरिए इंजीनियर नए जमाने के पतले और हल्के रोबोटिक उपकरण तैयार कर सकेंगे। • वैश्विक तकनीकी खरीदारों के लिए: जब मोटर उत्पादन में दुर्लभ खनिजों का इस्तेमाल बंद होगा, तो उत्पादों की कीमतें अंतरराष्ट्रीय खनिजों की सट्टेबाजी से सुरक्षित रहेंगी। इससे उपभोक्ताओं को लंबे समय में स्थिर दामों पर हार्डवेयर उत्पाद उपलब्ध हो सकेंगे। • घरेलू विनिर्माण उद्योग के लिए: सिर्फ असेंबलिंग के बजाय मौलिक मोटर आर्किटेक्चर विकसित करने की मिसाल कायम होगी। इससे कंपनियों को विदेशी सप्लाई चेन का इंतजार किए बिना आत्मनिर्भर बनने का रास्ता मिलेगा। ऐसा क्यों हुआ यह घटनाक्रम इसलिए सामने आया क्योंकि वैश्विक विनिर्माण क्षेत्र दशकों से दुर्लभ खनिजों और चीनी सप्लाई चेन के अत्यधिक दबाव और पाबंदियों से जूझ रहा है। • खनिज निर्यात पर चीनी नियंत्रण: चीन ने पिछले कुछ वर्षों में दुर्लभ खनिज उत्पादों की वैश्विक आपूर्ति को सीमित करके अपनी बाजार शक्ति का प्रदर्शन किया है। इस भू-राजनीतिक दबाव ने पश्चिमी हार्डवेयर कंपनियों को वैकल्पिक समाधान तलाशने पर मजबूर कर दिया है। • घरेलू खनिज तंत्र की विफलता: अमेरिका में केवल मोटर असेंबल करने वाली कंपनियां अब भी विदेशी मैग्नेट्स पर आश्रित हैं क्योंकि घरेलू रिफाइनिंग क्षमता बनने में लंबा वक्त है। इस अंतर को पाटने के लिए डिजाइन स्तर पर ही खनिजों को हटाने की जरूरत पैदा हुई। • पच्चीस साल का वैश्विक खनिज एकाधिकार: बीते 25 सालों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खदानों और खनिज अधिकारों को खरीदकर एकतरफा प्रभुत्व कायम किया गया। जब यह जोखिम स्पष्ट हो गया, तो इंजीनियरों ने बिना मैग्नेट वाली प्लानर मोटर विकसित करने का फैसला किया। सवाल-जवाब 1. मॉडल मोटर्स के संस्थापक कौन हैं? मॉडल मोटर्स की स्थापना माइकल वैन स्टीनबर्ग ने की है, जिनके पास ऑटोमोटिव और इलेक्ट्रिक मोटर क्षेत्र का दशकों का अनुभव है। 2. मॉडल मोटर्स का मुख्य लक्ष्य क्या है? कंपनी इलेक्ट्रिक मोटर्स से दुर्लभ खनिजों यानी रेयर-अर्थ मैग्नेट्स को पूरी तरह हटाकर स्वतंत्र घरेलू उत्पादन स्थापित करना चाहती है। 3. हाइब्रिड एनिग्मा ड्राइव क्या है? यह मॉडल मोटर्स द्वारा विकसित एक बेहद सपाट यानी प्लानर इलेक्ट्रिक मोटर है, जो कम ऊंचाई और सीमित जगह वाले उपकरणों में आसानी से फिट हो सकती है। 4. पारंपरिक रीशोरिंग कंपनियों की रणनीति में क्या कमी बताई गई है? अन्य कंपनियां केवल चीनी मोटर्स के डिजाइन की नकल करके अमेरिका में असेंबल कर रही हैं और अब भी दुर्लभ खनिजों के लिए पुरानी सप्लाई चेन पर निर्भर हैं। 5. माइकल वैन स्टीनबर्ग का चीन की पीपुल्स कार से क्या संबंध रहा है? 1990 के दशक के उत्तरार्ध में उन्होंने एक हाइब्रिड गैस-इलेक्ट्रिक ड्राइवट्रेन विकसित किया था, जिसे चीन अपनी पीपुल्स कार परियोजना में लगाना चाहता था। 6. दुर्लभ खनिजों पर चीन का एकाधिकार कैसे बना? बीते 25 वर्षों के दौरान दुनिया भर में खदानों और खनिज अधिकारों का अधिग्रहण करके दुर्लभ खनिजों की सप्लाई चेन पर नियंत्रण स्थापित किया गया। प्रेरणा और सबक माइकल वैन स्टीनबर्ग का सफर दिखाता है कि मौजूदा व्यवस्था की अंधी नकल करने के बजाय समस्या की जड़ पर काम करके ही नया रास्ता बनाया जा सकता है। • समस्या के मूल कारण को पहचानना: दूसरों की तरह केवल उत्पादन स्थल बदलने के बजाय उन्होंने उत्पाद के डिजाइन से ही समस्याग्रस्त कच्चे माल को बाहर कर दिया। असली आत्मनिर्भरता विदेशी डिजाइनों की नकल करने से नहीं बल्कि नए मौलिक आविष्कार से आती है। • दीर्घकालिक दूरदर्शिता पर भरोसा: पच्चीस साल पहले शुरू हुए बदलावों को लगातार देखते हुए उन्होंने सही समय पर सही तकनीकी दांव लगाया। अपने उद्योग के वैश्विक रुझानों को दशकों पहले भांपना एक सफल उद्यमी की पहचान है। • कठिन चुनौतियों को स्वीकार करना: मोटर इंडस्ट्री के तयशुदा नियमों को तोड़कर एक सपाट और बिना मैग्नेट वाली मोटर बनाना बेहद जटिल काम था। आसान रास्ते चुनने के बजाय सबसे मुश्किल तकनीकी चुनौती को हल करना ही स्थायी बढ़त दिलाता है। https://trendkia.com/startups/durlabha-khanijon-para-nirbharata-khatma-karane-ke-lie-modal-motors-ne-pesha-kiya-naya-ilektrika-motara-dijaina-37863 TrendKia — Har trend, sabse pehle.