# गैरी टैन का एआई जुनून, एजेंट्स और टोकन्स पर हर साल खर्च कर रहे 2 लाख डॉलर तक

> वाई कॉम्बिनेटर के सीईओ गैरी टैन अपने काम और निजी जिंदगी को ऑटोमेट करने के लिए हर साल टोकन्स पर करीब 1 लाख से 2 लाख डॉलर खर्च करते हैं। उन्होंने बताया कि किस तरह एआई एजेंट्स स्टार्टअप ऑपरेशंस और रोजमर्रा के फैसलों को पूरी तरह बदल रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** स्टार्टअप्स · **Published:** 2026-11-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/startups/garry-tan-ka-eai-jununa-ejentsa-aura-tokansa-para-hara-sala-kharcha-kara-rahe-2-lakha-dolara-taka-55348 · **Language:** Hindi
**Tags:** गैरी टैन, वाई कॉम्बिनेटर, एआई एजेंट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लॉड कोड, स्टार्टअप, सिलिकॉन वैली, तकनीक समाचार

स्टार्टअप्स की दुनिया में एआई टूल्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन वाई कॉम्बिनेटर के सीईओ गैरी टैन इसे एक अलग ही स्तर पर ले जा चुके हैं। वह अपने तकनीकी प्रयोगों और एआई एजेंट्स के साथ काम करने को लेकर इतने ज्यादा उत्साहित रहते हैं कि कभी-कभी रात भर सो भी नहीं पाते। इस अत्यधिक जुड़ाव को उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में 'साइबर साइकोसिस' का नाम दिया था। अब वाल्टर इसाकसन के पॉडकास्ट द बिल्डर्स के एक एपिसोड में उन्होंने खुलासा किया है कि इस डिजिटल जुनून के लिए वह कितना बड़ा वित्तीय बजट खर्च करते हैं।

गैरी टैन ने बातचीत के दौरान बताया कि वह एआई टोकन्स पर हर साल लगभग 100,000 डॉलर से लेकर 200,000 डॉलर तक खर्च कर देते हैं। भारतीय मुद्रा में देखा जाए तो यह रकम करोड़ों रुपये बैठती है। वह इन ऑटोनॉमस एजेंट्स का इस्तेमाल केवल साधारण सवालों के जवाब ढूंढने के लिए नहीं करते, बल्कि बड़े कोडिंग प्रोजेक्ट्स और रोजमर्रा के जटिल कामकाज को पूरा करने के लिए भी लगातार करते हैं। तकनीक के प्रति अपनी इसी समझ को दूसरों तक पहुंचाने के मकसद से उन्होंने क्लॉड कोड की 23 स्किल्स का एक पूरा सेट तैयार किया है, जिसे जीस्टैक नाम दिया गया है और इसे गिटहब पर सबके लिए मुफ्त में साझा किया गया है।

## निजी जिंदगी और 20 साल के रिकॉर्ड्स तक एजेंट की पहुंच
अक्सर लोग एआई का इस्तेमाल सामान्य रिसर्च या इंटरव्यू की तैयारी के लिए करते हैं। गैरी टैन भी पॉडकास्ट की तैयारी और संभावित सवालों का अनुमान लगाने के लिए इसका सहारा लेते हैं, लेकिन उनकी निर्भरता इससे कहीं आगे की है। उनका एजेंट उनकी पूरी निजी जिंदगी और कामकाज को संभालने में मदद करता है। इस सिस्टम को उनके पूरे डेटाबेस का एक्सेस दिया गया है।

गैरी टैन के मुताबिक, उनके इस एआई सिस्टम ने उनके सभी ईमेल, ड्रॉपबॉक्स की फाइलें, एप्पल नोट्स और यहां तक कि पिछले 20 सालों के थेरेपी नोट्स तक पढ़ रखे हैं। उनका मानना है कि एक पर्सनल एआई एजेंट को हर समय साथ रहने वाले एक समझदार साथी की तरह होना चाहिए। यह एजेंट यूजर की पसंद, नापसंद और काम करने के तरीके को गहराई से समझता है। यह न सिर्फ सामने आने वाले कामों में हाथ बंटाता है बल्कि पहले से सोचकर यह भी सुझाव देता है कि आगे क्या कदम उठाया जाना चाहिए।

## पारंपरिक सॉफ्टवेयर की तरह न देखें एजेंट्स को
शुरुआती ओपनक्लॉ अपनाने वाले और अब इसके पावर यूजर बन चुके गैरी टैन का मानना है कि लोगों को एआई एजेंट्स को पुराने सॉफ्टवेयर की नजर से देखना बंद करना चाहिए। उनके अनुसार कई डेवलपर्स और कंपनियां सुरक्षा और बार-बार एक जैसे नतीजे पाने की चिंता में इतना उलझ जाती हैं कि वे एआई की इंसानी समझ जैसी खूबियों का पूरा फायदा नहीं उठा पाती हैं।

इस विजन को वाई कॉम्बिनेटर के दैनिक कामकाज में भी लागू किया जा रहा है। वहां 'स्ट्रे लाइट' नाम का एक इंटरनल एआई एजेंट काम कर रहा है, जिसके पास अपना एक खास व्यक्तित्व और कंपनी का पूरा संस्थागत ज्ञान मौजूद है। इस सिस्टम में वाई कॉम्बिनेटर द्वारा आज तक फंड किए गए हर फाउंडर का संदर्भ, आने वाले सभी आवेदन और भेजे गए सभी ईमेल्स का पूरा डेटा दर्ज है, जिससे यह संस्थान के काम करने के तौर-तरीकों को नए सिरे से गढ़ रहा है।

## लागत कम होना जरूरी, बिग टेक पर निर्भरता का डर
सिलिकॉन वैली के सबसे प्रमुख स्टार्टअप एक्सेलरेटर का नेतृत्व करने वाले गैरी टैन को पूरा भरोसा है कि आने वाले समय में पर्सनल एआई एजेंट्स हर आम इंसान की जिंदगी का हिस्सा बनेंगे। हालांकि, इसके रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा भारी लागत का होना है। उन्होंने स्पष्ट स्वीकार किया कि टोकन्स पर सालाना लाखों डॉलर खर्च कर पाना एक ऐसा बड़ा विशेषाधिकार है जो हर किसी के पास नहीं हो सकता। जब तक कंप्यूट और टोकन के दाम काफी नीचे नहीं आते, तब तक यह तकनीक हर हाथ तक नहीं पहुंच सकती।

इसके साथ ही वह बिग टेक कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले मुफ्त एआई टूल्स को लेकर भी सतर्क करते हैं। सोशल मीडिया के दौर में मेटा जैसी दिग्गज कंपनियों के एल्गोरिदम ने लोगों के जीवन पर गहरा असर डाला है, जहां यूजर का उस एल्गोरिदम पर कोई नियंत्रण नहीं रहता। गैरी टैन का मानना है कि भविष्य ऐसा होना चाहिए जहां हर व्यक्ति का अपना एक निजी एआई हो, जिसे वह खुद अपनी शर्तों पर प्रोग्राम कर सके और पूरी तरह नियंत्रित कर सके, न कि कोई टेक कंपनी उसे अपनी मर्जी से चलाए।

## इसका आप पर असर
एआई टूल्स का उन्नत स्तर पर इस्तेमाल अब साधारण सर्च से आगे बढ़कर पूरे जीवन और कारोबार को संचालित करने की क्षमता रखता है, लेकिन इसकी भारी लागत आम यूजर्स के लिए अभी भी एक बड़ी चुनौती है।

- **लागत और पहुंच:** जब तक एआई मॉडल की टोकन लागत काफी कम नहीं होती, उच्च क्षमता वाले ऑटोनॉमस एजेंट्स केवल बड़े निवेशकों और संपन्न कंपनियों तक सीमित रहेंगे। आम उपयोगकर्ताओं को अपने बजट के अनुसार ही बेसिक या सीमित फीचर्स वाले टूल्स पर निर्भर रहना होगा।
- **गोपनीयता और डेटा सुरक्षा:** निजी नोट्स और ईमेल्स जैसे संवेदनशील डेटा को एआई को सौंपने से उत्पादकता जरूर बढ़ती है, लेकिन इसके साथ प्राइवेसी के बड़े जोखिम भी जुड़ जाते हैं। किसी भी एआई एजेंट को व्यक्तिगत रिकॉर्ड्स का एक्सेस देने से पहले यूजर्स को डेटा सुरक्षा नियमों की सावधानी से समीक्षा करनी चाहिए।
- **डेवलपर्स के लिए अवसर:** ओपन सोर्स कौशल और लाइब्रेरी का प्रसार होने से कोडिंग और कार्यप्रणाली में भारी तेजी आ रही है। तकनीकी प्रोफेशनल्स गिटहब पर मौजूद जीस्टैक जैसे टूल्स सीखकर अपने खुद के वर्कफ़्लो को ऑटोमेट कर सकते हैं।
- **बिग टेक पर निर्भरता का विकल्प:** बड़ी कंपनियों के मुफ्त टूल्स के बजाय अपने नियंत्रण वाले पर्सनल एआई मॉडल की मांग बढ़ रही है। इससे भविष्य में ऐसे ओपन सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस को बढ़ावा मिलेगा जो यूजर के डेटा पर उसी का मालिकाना हक सुनिश्चित करते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
गैरी टैन ने यह खुलासा वाल्टर इसाकसन के पॉडकास्ट पर अपनी व्यक्तिगत कार्यशैली और वाई कॉम्बिनेटर के आधुनिक ऑपरेशंस पर चर्चा के दौरान किया।

- **गहरी तकनीकी रुचि और कार्यक्षमता:** गैरी टैन तकनीकी नवाचारों के शुरुआती प्रयोक्ता रहे हैं और अपनी उत्पादकता को अत्यधिक बढ़ाने के लिए उन्होंने अपने पूरे डिजिटल जीवन को एजेंट से जोड़ दिया है। दिन-रात कई कोडिंग और मैनेजमेंट प्रोजेक्ट्स एक साथ चलाने की वजह से उनका टोकन उपभोग अत्यधिक बढ़ गया।
- **ओपन सोर्स के जरिए ज्ञान साझा करना:** उन्होंने क्लॉड कोड के 23 कौशलों का जीस्टैक सेट तैयार किया ताकि अन्य डेवलपर्स को एजेंट की वास्तविक क्षमताओं से रूबरू कराया जा सके। पॉडकास्ट में अपनी इस यात्रा और इसकी लागत पर चर्चा करते हुए उन्होंने यह आंकड़ा साझा किया।
- **संगठनात्मक बदलाव की पहल:** वाई कॉम्बिनेटर में स्ट्रे लाइट जैसे आंतरिक एजेंट का निर्माण किया गया है, जिसके लिए दशकों के डेटा और संचार को प्रोसेस करने की आवश्यकता पड़ी। इस संस्थागत प्रयोग ने भी उनके व्यापक एआई उपयोग को बल दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. गैरी टैन एआई टोकन्स पर हर साल कितना पैसा खर्च करते हैं?
गैरी टैन ने बताया कि वह एआई एजेंट्स चलाने के लिए टोकन्स पर सालाना करीब 100,000 से 200,000 डॉलर खर्च करते हैं।

### 2. गैरी टैन ने गिटहब पर कौन सा टूल शेयर किया है?
उन्होंने क्लॉड कोड के 23 स्किल्स का एक सेट गिटहब पर 'जीस्टैक' नाम से मुफ्त में साझा किया है ताकि लोग समझ सकें कि एजेंट्स क्या कर सकते हैं।

### 3. गैरी टैन के एआई एजेंट के पास उनके किस डेटा की पहुंच है?
उनके एजेंट ने उनके सभी ईमेल, ड्रॉपबॉक्स फाइलें, एप्पल नोट्स और पिछले 20 सालों के थेरेपी नोट्स तक पढ़ रखे हैं।

### 4. वाई कॉम्बिनेटर में इस्तेमाल होने वाले इंटरनल एआई एजेंट का क्या नाम है?
वाई कॉम्बिनेटर के इंटरनल एआई एजेंट का नाम 'स्ट्रे लाइट' है, जिसके पास संस्था के सभी फाउंडर्स और आवेदनों का पूरा संदर्भ मौजूद है।

### 5. गैरी टैन के अनुसार एआई एजेंट्स के आम होने में सबसे बड़ी बाधा क्या है?
गैरी टैन का मानना है कि वर्तमान में यह तकनीक बहुत महंगी है और जब तक इसकी लागत कम नहीं होगी, यह हर किसी के लिए सुलभ नहीं हो सकती।

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