# हवाई अड्डों पर सवारी कराने वाला स्मार्ट सूटकेस, अरिस्टा वॉल्ट का 100 करोड़ के कारोबार का लक्ष्य

> अरिस्टा वॉल्ट कंपनी ने अल्ट्रासोनिक तकनीक से चलने वाला ऐसा राइड करने योग्य स्मार्ट लगेज तैयार किया है जिस पर बैठकर यात्रा की जा सकती है। 70 लाख रुपये की लागत से विकसित इस उत्पाद के दम पर कंपनी अब 100 करोड़ रुपये के सालाना टर्नओवर की योजना पर काम कर रही है।

**Type:** article · **Category:** स्टार्टअप्स · **Published:** 2026-10-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/startups/havai-addon-para-savari-karane-vala-smarta-sutakesa-arista-vault-ka-100-karora-ke-karobara-ka-lakshya-50059 · **Language:** Hindi
**Tags:** अरिस्टा वॉल्ट, स्मार्ट लगेज, राइड करने योग्य सूटकेस, शार्क टैंक इंडिया, अनुपम मित्तल, स्टार्टअप समाचार, गैजेट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय

यात्रा के दौरान भारी सामान ढोना अक्सर थकावट भरा होता है, लेकिन आधुनिक तकनीक ने अब सूटकेस को ही आवागमन का साधन बना दिया है। स्मार्ट गैजेट्स की दुनिया में एक ऐसा अनूठा लगेज बैग पेश हुआ है जो जरूरत पड़ने पर इलेक्ट्रिक स्कूटर की तरह काम करता है। हवाई अड्डों और बड़े परिसरों में तेज आवाजाही के लिए तैयार किया गया यह सूटकेस मुसाफिरों को अपने ऊपर बैठाकर ले जाने में पूरी तरह सक्षम है।

## अरिस्टा वॉल्ट का तकनीकी नवाचार
इस अनूठे राइड करने योग्य लगेज का निर्माण भारतीय तकनीकी स्टार्टअप अरिस्टा वॉल्ट करती है। इस कंपनी की स्थापना साल 2017-18 में हुई थी। कंपनी की फाउंडर पूर्वी राय और को-फाउंडर अतुल गुप्ता हैं। यह उद्यम आधुनिक तकनीक पर आधारित स्मार्ट लाइफस्टाइल प्रोडक्ट्स विकसित करने के क्षेत्र में काम कर रहा है। कंपनी ने दैनिक जीवन की यात्राओं और गैजेट्स को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने पर अपना ध्यान केंद्रित किया है।

## सवारी कराने वाले सूटकेस की खूबियां और गति
यह स्मार्ट लगेज पूरी तरह से अल्ट्रासोनिक साउंड और मोटर आधारित तकनीक पर काम करता है। जब किसी यात्री को इस पर सवार होना होता है, तो वह सूटकेस के निचले हिस्से में मौजूद फोल्डेबल फुट स्टेप्स को बाहर निकाल सकता है। पैरों को इन पैडल पर टिकाने के बाद इसे हाथ में पकड़े जाने वाले रिमोट कंट्रोल की मदद से आगे या पीछे संचालित किया जा सकता है। यात्रा के दौरान दिशा बदलने और गति को थामने का काम पैरों के सहारे भी आसानी से किया जा सकता है।

गति और भार क्षमता के लिहाज से यह लगेज काफी मजबूत बनाया गया है। यह 7 से 10 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने की क्षमता रखता है। इस पर अधिकतम 120 किलोग्राम वजन का कोई भी व्यक्ति सुरक्षित बैठकर सफर कर सकता है। इसे मुख्य रूप से विशालकाय हवाई अड्डों के टर्मिनलों पर एक गेट से दूसरे गेट तक बिना थके तेजी से पहुंचने के लिए तैयार किया गया है।

## बैटरी बैकअप और स्वचालित फीचर्स
सूटकेस को ऊर्जा देने के लिए इसमें एक रिमूवेबल यानी अलग की जा सकने वाली बैटरी लगाई गई है। इस बैटरी को पूरी तरह से चार्ज होने में केवल 2 घंटे का समय लगता है। बैटरी को आसानी से बाहर निकालकर भी प्लगइन किया जा सकता है, जो हवाई सुरक्षा और यात्रा नियमों के लिहाज से सुविधाजनक रहता है।

इसके अलावा इसमें कई खास सुरक्षा और सुविधा फीचर्स जोड़े गए हैं। इनमें सबसे प्रमुख फॉलो मी फीचर है। इस मोड को चालू करते ही रिमोट के इशारे पर यह सूटकेस बिना किसी सहारे या रुकावट के अपने मालिक के ठीक पीछे अपने आप चलने लगता है। लगेज में संतुलन बनाए रखने के लिए सेल्फ बैलेंसिंग तकनीक और ढलानों पर चढ़ने के लिए हिल क्लाइंबिंग फीचर भी इनबिल्ट दिए गए हैं।

## बाजार में कीमत और उपलब्धता
वर्तमान समय में इस राइड करने योग्य स्मार्ट लगेज की कीमत 50 हजार से 60 हजार रुपये के बीच रखी गई है। हालांकि कंपनी की फाउंडर पूर्वी राय और को-फाउंडर अतुल गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में बड़े पैमाने पर उत्पादन होने के साथ इसकी कीमतों में उल्लेखनीय कटौती की जाएगी। जो ग्राहक इस उत्पाद को खरीदना चाहते हैं, वे इसे कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट aristavault.com से ऑर्डर कर सकते हैं। इसके अलावा यह अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी प्रमुख ई-कॉमर्स वेबसाइट्स पर भी बिक्री के लिए उपलब्ध है।

## 70 लाख के निवेश से 100 करोड़ के टर्नओवर की योजना
कंपनी के को-फाउंडर ने इस उत्पाद के कारोबारी सफर की जानकारी साझा करते हुए बताया कि पूरी स्मार्ट लगेज श्रृंखला को अनुसंधान और विकास के जरिए तैयार करने में शुरुआती लागत करीब 70 लाख रुपये आई थी। इस नवाचार के दम पर आज कंपनी सालाना 10 करोड़ रुपये का टर्नओवर हासिल कर रही है। आगामी 2 वर्षों के भीतर कंपनी ने अपने इस कारोबार को 100 करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है।

उद्यम को आगे बढ़ाने के लिए सरकारी स्तर पर भी मजबूत समर्थन मिला है। हाल ही में सरकार ने अरिस्टा वॉल्ट में प्रत्यक्ष निवेश किया है। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से कंपनी को शोध और परीक्षण के लिए अत्याधुनिक लैब के साथ कई अन्य बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं। यह कंपनी व्यावसायिक रियलिटी शो शार्क टैंक इंडिया के मंच पर भी अपनी प्रस्तुति दे चुकी है, जहां शादी डॉट कॉम के संस्थापक अनुपम मित्तल ने इस स्टार्टअप में अपना निवेश किया है।

## इसका आप पर असर
स्मार्ट लगेज तकनीक हवाई अड्डों पर यात्रियों की लंबी पैदल आवाजाही और भारी सामान खींचने की झंझट को काफी हद तक आसान बनाती है।

- **यात्रियों के लिए:** यह बैग हवाई अड्डों पर 7 से 10 किमी प्रति घंटे की गति से 120 किलो तक के व्यक्ति को ले जा सकता है। इससे बड़े टर्मिनलों पर चलने में लगने वाला समय और थकावट दोनों काफी कम हो जाते हैं।
- **कीमत और उपलब्धता:** अभी इस गैजेट की कीमत 50,000 से 60,000 रुपये के बीच है जिसे आधिकारिक वेबसाइट और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से खरीदा जा सकता है। निर्माताओं के अनुसार आने वाले दिनों में उत्पादन बढ़ने पर इसकी कीमतें कम होने की उम्मीद है।
- **चार्जिंग और उपयोग:** लगेज में अलग होने वाली रिमूवेबल बैटरी दी गई है जो 2 घंटे में चार्ज हो जाती है। यात्रा के दौरान रिमोट के सहारे इसका फॉलो मी फीचर बैग को खुद ब खुद आपके पीछे चलाने की सुविधा देता है।
- **हार्डवेयर स्टार्टअप्स के लिए:** 70 लाख के विकास खर्च से 10 करोड़ के टर्नओवर तक पहुंचना दिखाता है कि भारतीय हार्डवेयर नवाचार को सरकारी और निजी फंडिंग दोनों मिल रही है। यह घरेलू स्तर पर तकनीकी उत्पाद बनाने वाले नए उद्यमियों के लिए मजबूत बाजार संभावनाओं को रेखांकित करता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह नवाचार हवाई अड्डों पर भारी सामान ढोने की मानवीय समस्या को हल करने और भारतीय हार्डवेयर बाजार में स्मार्ट तकनीकी उत्पादों की बढ़ती मांग के चलते संभव हुआ है।

- **हवाई अड्डों पर थकावट की समस्या:** आधुनिक हवाई अड्डों के टर्मिनलों का दायरा कई किलोमीटर तक फैला होता है जहां भारी बैग खींचना यात्रियों के लिए कठिन होता है। इस असुविधा को दूर करने के लिए कंपनी ने सूटकेस में ही मोटर, फुट स्टेप्स और राइडिंग फीचर्स को शामिल किया।
- **अल्ट्रासोनिक और सेंसर तकनीक का विकास:** कम लागत वाले अल्ट्रासोनिक सेंसर्स और स्वचालित बैलेंसिंग तकनीक की उपलब्धता ने रिमोट से संचालित होने वाले स्वायत्त लगेज का निर्माण संभव बनाया। इसी तकनीकी प्रगति के कारण फॉलो मी और हिल क्लाइंबिंग जैसे जटिल फीचर्स बैग में जोड़े जा सके।
- **सरकारी और एंजल निवेश का सहयोग:** कंपनी को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से परीक्षण सुविधाएं मिलीं और हाल ही में सरकार ने सीधे निवेश भी किया। इसके साथ ही शार्क टैंक इंडिया के जरिए अनुपम मित्तल जैसे निवेशक का समर्थन मिलने से कंपनी को अनुसंधान से निकलकर 10 करोड़ रुपये के स्तर तक बढ़ने की गति मिली।

## सवाल-जवाब

### 1. इस स्मार्ट लगेज की गति और भार उठाने की क्षमता कितनी है?
यह स्मार्ट सूटकेस 7 से 10 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलता है और अधिकतम 120 किलोग्राम तक का भार वहन कर सकता है।

### 2. इस सूटकेस की बैटरी को पूरा चार्ज होने में कितना समय लगता है?
इसमें एक रिमूवेबल बैटरी लगी हुई है जो लगभग 2 घंटे में पूरी तरह से चार्ज हो जाती है।

### 3. अरिस्टा वॉल्ट के इस राइड करने योग्य बैग की बाजार में कीमत क्या है?
इस स्मार्ट लगेज की वर्तमान कीमत 50 हजार से 60 हजार रुपये के बीच है, जिसे आगे चलकर कम करने की योजना है।

### 4. इस बैग में क्या-क्या प्रमुख तकनीकी फीचर्स दिए गए हैं?
इसमें अल्ट्रासोनिक नियंत्रण, रिमोट द्वारा संचालन, फॉलो मी स्वचालित ट्रैकिंग, सेल्फ बैलेंसिंग और हिल क्लाइंबिंग जैसे फीचर्स मौजूद हैं।

### 5. अरिस्टा वॉल्ट कंपनी की स्थापना कब हुई थी और इसके संस्थापक कौन हैं?
कंपनी की शुरुआत 2017-18 में हुई थी। इसकी फाउंडर पूर्वी राय हैं और को-फाउंडर अतुल गुप्ता हैं।

### 6. इस कंपनी में किन प्रमुख निवेशकों और संस्थाओं ने निवेश किया है?
कंपनी में सरकार ने प्रत्यक्ष निवेश करने के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय से लैब सुविधाएं दी हैं, जबकि शार्क टैंक इंडिया के जरिए अनुपम मित्तल ने भी इसमें निवेश किया है।

### 7. कंपनी का मौजूदा टर्नओवर और आगामी 2 साल का वित्तीय लक्ष्य क्या है?
कंपनी वर्तमान में सालाना 10 करोड़ रुपये का टर्नओवर कर रही है और आगामी 2 साल में इसे 100 करोड़ रुपये से अधिक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

## प्रेरणा और सबक
अरिस्टा वॉल्ट की यात्रा दिखाती है कि कैसे केंद्रित हार्डवेयर नवाचार और निरंतर प्रयास से एक छोटे से विचार को 100 करोड़ के लक्ष्य तक पहुंचाया जा सकता है।

- **समस्या की सही पहचान:** यात्रा की सबसे आम थकावट को समझकर पूर्वी राय और अतुल गुप्ता ने रोजमर्रा के बैग को तकनीकी स्कूटर में तब्दील कर दिया। रोजमर्रा की समस्याओं का व्यावहारिक तकनीकी हल निकालना ही मजबूत उत्पाद की नींव बनता है।
- **शुरुआती पूंजी से बड़ा विस्तार:** 70 लाख रुपये की सीमित विकास लागत से शुरुआत करके 10 करोड़ रुपये का वार्षिक कारोबार खड़ा करना वित्तीय अनुशासन का सटीक उदाहरण है। सीमित संसाधनों में भी अगर उत्पाद मजबूत हो तो तेजी से स्केलिंग संभव होती है।
- **संस्थागत मंचों का सही लाभ:** सरकारी अनुसंधान प्रयोगशालाओं की सुविधाओं का उपयोग करने के साथ-साथ शार्क टैंक इंडिया जैसे मंचों पर पहुंचकर कंपनी ने सही रणनीतिक साझेदार और पूंजी जुटाई। विकास के लिए सही समय पर सही मंच चुनना उद्यम को आगे बढ़ाता है।

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